बोलियां बतिया तेरी , काजल भरी गहरी काली अखियां तेरी। दिल को चकमक सा कर गई, भीनी मुस्कुराहटें भर गई, मनमोहिनी ,चितचोरनी जादू भरी तेरी हंसी, मुझमें से मुझको खींच ले गई मैं अवाक सा […]

बचपन का आंगन कहीं छूट गया । पुराना मकान था जो टूट गया ।। ऊँची इमारतें खड़ी वहाँ, सैकड़ों परिवारों का बसेरा है । चारदीवारी में ही रात, घर के भीतर ही सवेरा है। ऊँची […]

अंबे मां जगदंबे मां, तू है कितनी दयालु मां, तेरा रुप है कितना निराला मा, दुखियों के दुख हरने वाली, सब को सुख तो देने वाली, तेरी कृपा हम पर बनी रहे, मेरी यह आरजू […]

देना चाहती हूं सूखे होंठो पर हंसी, निराश डूबती सी आंखों में रोशनी, सूखे उलझे बालों में नमी, हारी सी जिंदगी को जीत की खुशी, छोटी- छोटी सी वस्तूए मिल जाने पर चेहरे पर छाई […]

गहरी काली आंखों में डूब जाना चाहता हूं। तुमको बस तुमको यूं ही देखना मैं चाहता हूं। तेरे बस तेरे ख्यालों में खो जाना चाहता हूं। तेरी बस तेरी हंसी की खनक सुनना चाहता हूं। […]

गणपति विसर्जन ——————— श्रद्धा व सम्मान दिया, गणपति को घर में विराजमान किया। रोज ..मोदक, मेवा खिलाते रहे, गणपति जी को… जी भर मनाते रहे। वस्त्र, आभूषण उन्हें हम चढ़ाते रहें , लाड सारे उन्हें […]

••• दामन-ए-वक़्त में हर ग़म को छुपाना होगा। वरना तमाम उम्र यूँ ही अश्क़ बहाना होगा।। जहान में कौन अज़ल तक रहा सलामत है। आख़िर सभी को दुनियाँ छोड़ के जाना होगा।। ख्वाहिश-ए-सुबू किस का […]

तुम बिन ये दिल कहीं लगता नहीं, तू ही बता हम क्या करें, तेरे सिवा कोई मुझे भाता नहीं, मेरे तसव्वुर में बस तुम ही तुम हो, दूसरा कोई और आता नहीं, तेरी निगाहे मुझे […]

कौन कह रहा है समन्दर में राज़ नहीं होते, ज़मी पर रहने वालों के सर ताज नहीं होते, पहन लेते हैं आज वो जो जैसा मिल जाये, ये सच है उनकी कमीज़ में काज़ नहीं […]

मैंने सोंचा न था के वो इस कदर बदल जायेगा, पानी पर लिखा हुआ उसका नाम जल जायेगा, मैं बनाता ही रह जाऊंगा तरह – तरह के ढाँचे, और वो मासूम यूँ वक्त के सांचे […]

हां बहुत से रिश्ते पाये है, मैंने अपने इस जीवन में कुछ में है प्यार, कुछ में है स्वार्थ, सामने वाले के मन में लेकिन एक बंधन ऐसा है, जिसमें सिर्फ सच्चा प्यार घुला सबसे […]

नन्ही मुन्नी गुड़िया सी मीठी-मीठी गुड़िया सी। बातें करती गपर – गपर वो हंसी तो खिलती धूप मगर । लड़ती ,भिडती, हंसती खिलती जैसे धूप छांव हंसती खि लती। लड़ने में झांसी रानी है हंसने […]

सोचा था क्या हम सब ने! ऐसा घ्रणित समाज, हर दूसरा चेहरा वहशी घिनौना आज। लगता कि जैसे हो गए सब मानसिक रोगी दहशत की बोलती है अब हर जगह ही तूती सब धर्मों के […]

यूं तो हंसीनों की कमी नहीं तेरे शहर में। एक तुझ पे ही दिल आया पहली नज़र में। और कोई नजर आता नहीं, एक तेरे सिवा, इंकार नहीं, प्यार घोलकर पिला दो ज़हर में। रहने […]

तन्हा बैठे ना जाने कुछ सोच कर आ जाती हंसी कुछ बातें कुछ यादें कुछ गुज़रे लम्हे अकेलेपन का फायदा उठाकर घेर लेते चुपचाप अचानक जैसे कोई आंखों पर हाथ रखकर सामने आकर मुस्कुराया हो […]

सच्चाई से डर के सारे ब्रिक्स चाहिए तो ईमान है तेरा सच्चाई ही धर्म है तेरा सच्चाई तो सेवा है ै सच्चाई ही पूजा है तेरा सच्चाई तो जीवन है तेरा सच्चाई ही जग में […]

ओ मनमीत मेरे, मैंने दिल से तुझे पुकारा, मैं नदिया की धारा, तुम हो मेरा किनारा, बिन तेरे जीना मेरा, होगा नहीं गवारा, चाहे किस्मत रूठे मुझसे, या रुठे यह जग सारा, तुम धूप तो […]

ये रंगे – बहारा, ये हँसीन नजारा। खुदा ने तुझको, फुर्सत से संवारा। ना मैंने सुना कुछ, ना तुने पुकारा, समझते हैं तेरी, नजरों का इशारा। तू बहती धारा, मैं शांत किनारा, दिल की गहराई […]

भूखे पेट जीना सीखा मैंने पेट भर खाने की जरुरत भी समझी नहीं | नंगे पैर दौड़ पड़े सफर में बस भागता रहा ना देखा, पाँव में चप्पल है के नहीं | बुझी मशालों को […]

ओ तितली तुम प्यारी प्यारी, सबको लगती न्यारी न्यारी, रंग बिरंगे पंख तुम्हारे, जैसे फूलों की हो बाडी, तुझे देख गूजी बच्चों की किलकारी, तुझे पकड़ने बच्चे दौडे, हर वगिया की बारी बारी, चंपा चमेली […]

मोर पखा सिर धरने वाले । उंगली पर गिरी रखकने वाले । है कान्ह हे नंद दुलारे हे यशुमति के प्यारे। कृष्णा, मोहन , श्याम सब हैं तेरे नाम द्वारिका, मथुरा , वृंदावन हैं तेरे […]

मैनें पूछा के फिर कब आओगे, उसने कहा मालूम नहीं एक डर हमेशा रहता है , जब वो कहता है मालूम नहीं चंद घडियॉ ही साथ जिए हम , उसके आगे मालूम नहीं वो इस […]

“शास्त्री जी” को अवतरण दिवस पर शत शत नमन शास्त्री जी का नारा था ‘जय जवान’ ना होली दिवाली, ना ईद रमजान। एक ही जश्न, हिफाजते-हिंदुस्तान। सुकून से मनाते हम खुशियाँ यहाँ, सरहद पर खड़ा, […]

नासूर पर तो मरहम भी बेअसर से निकले, करते है याद जिनको वह बेखबर से निकले। जब कभी मुझे पुराने दिनों की याद आती है, तब कभी तेरी याद में उस डगर से निकले। इश्क़ […]

तुम्हें आज मैं कथा – सार यहाँ सुनाने आया हूँ तुमको शुकदेव –परीक्षित का संवाद बताने आया हूँ इंद्रिय शक्ति अगर चाहो तो इन्द्र पूजन करो ब्रह्म – तेज की चाह अगर हो वृहस्पति- कृपा […]

हर राह मुश्किल होती है, हर मोड़ पे कठिनाइयां मिलती है, फिर भी पत्थरों से टकराती, हर बाधा को ध्वस्त करती, धारा बहती है, जितने की ज़िद हमें आगे बढ़ने की हिम्मत देती है, जीतना […]

कुछ थकी थकी सी, कुछ रुकी रुकी सी हो गई है ज़िंदगी, जी रहे हम सब यहां, पर जीवन से कहीं दूर हो गई है जिंदगी, क्यूं हम खुद के प्रतिद्वंदी हो गए है, क्यूं […]

तुमको सुलाने की खातर कितनी रात मेरी काली रही, मुझे ठीक से याद नहीं के देखकर तुम्हें बेखयाली रही, बातें करती रहीं तुम मुझसे यूँही सपनों की दुनियां में, सुबह जब तुमने मुझे देखा आँखें […]

मुझको यूँ कुचलने पर तुम्हें वो समन्दर नहीं मिलेगा, तुम्हारी आँखों को जो चाहोगे वो मंज़र नहीं मिलेगा, बड़ी बेरहमी से मुझे रास्तों पर छोड़कर जाने वालों, तुम्हें ढूंढने से भी इस जहां में कोई […]

गुनाह तो कोई ज़रूर बहुत ही बड़ा कर रहा हूँ मैं, सबकी नज़रों से होकर पल- पल गुज़र रहा हूँ मैं, रास्ते ठहरे हैं मगर जाने क्यों चलते नज़र आते हैं, जिस पल से ज़िन्दगी […]

जलाकर रख दिए ख़त मगर यादों को अग्नि दगा दे गई, मुट्ठी में दबाकर रखी थी मगर खुशबू को हवा उड़ा ले गई, बेबाक यूँही नशे में गुज़र रही थी लडखड़ाती हुई ज़िन्दगी, आई एक […]

जिनको देनी हैं वो हमको दुआयें देंगे, बेवफाई के बदले भी हमको वफायें देंगे, हम गुनाह कुबूल कर बैठेंगे उनके आगे, पर वो जब भी देंगे हमको सजायें देंगे, घुप्प अँधेरे में दूर तक नहीं […]

न चाह कर भी बहुत कुछ कह जाना पड़ता है, हो रूठना तो पहले किसी को मनाना पड़ता है, मुस्कुराते सबको नज़र आते हैं क्या कहें वो, जिन फूलों को काँटों संग रह जाना पड़ता […]

सावन की पहली बारिश जब तपती सूखी सी धरती को, पहली बूंदों से छू लेती , तब लगता जैसे हंसती हो कमसिन सी नार अकेले में । साड़ी में लिपटी सोई हुई , जैसे चटक- […]

आजाद हिंद के आज आजाद हैं हम, खुला आसमां है आज हमारे सर पर, नहीं किसी की हुकूमत है हम पर, उन्मुक्त गगन के आज आजाद पंछी हैं हम, श्रेय इसका है उन वीर सपूतों […]

मैं तो खुली किताब हूँ, यूँ भी कभी पढ़ा करो। अच्छा लगता है, बेवजह भी कभी लड़ा करो। मेरे कदम तेरी ओर उठते, तुझपे ही रूकते हैं, एक कदम मेरी ओर, तुम भी कभी बढ़ा […]

एक-एक मोती से एक, फिर माला बन जाएगी धीरे धीरे करो पहल तो क्रांति देश में आएगी। याद करोगे बलिदानों को , देशभक्ति जागेगी। आग हृदय में बुझ गई जो फिर अंगारे बना दो। देशवासियों […]

अनहोनी यह कैसी है ! काली छाया जैसी है। हंसते हुए फूल से चेहरे , मुरझा गए एक ही पल में । काल की कराल गति से, विमुख हुए प्रिय जनों से। अपशगुनी ये कैसी […]

आठों प्रहर के बाद ,सूर्य देव देखो उग रहे। प्रहरो के चक्र में फंसे हुए से दिख रहे। ऐसे ही मनुष्य को लगाने पड़ते फेरे हैं, जन्म- मृत्यु चक्र से निकाले प्रभु के डेरे हैं। […]

पाषाण से दरिया बनने दो , मुझे अपने हक में लड़ने दो। मैं छुईमुई सी गुड़िया नहीं , मुझे लक्ष्मीबाई बनने दो । आजाद परिंदा बनने दो, ना काटो पंख मुझे उड़ने दो। निमिषा सिंघल

रंग के बहाने पी को आज छुआ जाए सखी! चलो भंग के बहाने कुछ बहक – बहक जाएं सखी ! बहकने -महकने का आज लुफ्त उठाएं सखी ! रंग के बहाने थोड़ा आज जिया जाए […]