मेरे कातिल गर वापस आए तो आंखों में शिकायतें पढ़ लेना होठों का फड़कना देख लेना धड़कनों की आवाजाही सुन लेना मेरी रूह की तड़पन महसूस तो करना यदि तुम्हें इश्क है मुझसे निमिषा सिंघल
मेरे कातिल गर वापस आए तो आंखों में शिकायतें पढ़ लेना होठों का फड़कना देख लेना धड़कनों की आवाजाही सुन लेना मेरी रूह की तड़पन महसूस तो करना यदि तुम्हें इश्क है मुझसे निमिषा सिंघल
रावण का पुतला जला जला अम्बर को काला कर डला। अहंकार का पुतला जला न पाया खुद को रावण कर डाला।। सत्य धर्म के ख़ातिर वन-वन भटके नारायण। जिनकी दिनचर्या कथा रुप में लिखा गया […]
एक चाहत भरी नजर दिल में रोशनी सी भर गई तुम्हें याद करना इंतहा इबादत बन गई हर अक्स में तुम्हे खोजना जुनून बन गया चेहरा तुम्हारा मेरे लिए आईना बन गया तुम्हें दूर जाते […]
रहस्यवाद का जामा पहने स्त्री! एक अनसुलझा रहस्य! उलझे हुए धागों की एक गुत्थी। शायद! पुरुष के लिए एक मकड़जाल। पर हर स्त्री अपने आप में हैं बेमिसाल। कभी वह खुली किताब बन जाती , […]
काश ! मुझे सहारा तेरा मिल गया होता, तूफा नहीं आता तो किनारा मिल गया होता, मेरे दिल की धड़कन तुझे दस्तक देती है, यह तन्हाई काटे नहीं कटती है, बिखर के रह गया है […]
काश!मुझे सहारा तेरा मिल गया होता, तूफा नहीं आता तो किनारा मिल गया होता, मेरे दिल की धड़कन तुझे दस्तक देती है, यह तन्हाई काटे नहीं कटती है, बिखर के रह गया है तेरे बिन […]
क्यों है ये जात-पात की ऊंची दीवार। धर्म के नाम पर हर कोई लड़ने को तैयार। सब एक ही तो है, ये हवा जिसमें हम सांस लेते हैं। ये पानी जो हम सभी पीते हैं। […]
निज आंगन में बैठा- बैठा देख रहा था चन्द्र वदन को। धवल सुशीतल चन्द्रकिरण ने नहलाया बसुधा के तन को।। सुधा सुधाकर बरसाए पर निज मस्तक न धो पाए। दाग चढ़ा कैसा माथे पर अंखिया […]
गुलशन तेरी बात हीं कुछ और है। तेरी महक से महके सब क्या सज्जन क्या चोर है।।
हर शख्स से हर अक्स से विनती मेरी हर सांस से हर जात से हर पात से हर शहर ग्राम और प्रांत से। धरती हमारी मां है यह भारत हमारा है वतन। सोचो मगर क्यों […]
नदियां हैं जीवनदायिनी, उज्जवल है मोक्ष प्रदायिनी। कचरा ना इन में डालो तुम, बर्बादियों ना पालो तुम। शीशे सी साफ हो जब झांको तुम । सुंदर धरा यह हरी भरी लगती है तुमको भी भली। […]
एक दिन मैंने पुत्र से कहा, बेटा, तू मेरा हमसूरत है, तू ही मेरी ज़रूरत है। छोड़ अकेले मुझे जाना नहीं, खून के आंसू मुझे रुलाना नहीं। तुम से ही ज़िंदगी ख़ूबसूरत है। तू ही […]
आसुओं के पानी से जितना धुलता जाता हूँ मैं, लोग जितना रुलाते हैं उतना खुलता जाता हूँ मैं, देखने में सबको बेशक बड़ा नज़र आता हूँ मैं, सच ये के हर पल बचपन में मुड़ता […]
रोज सुबह बच्चों को उठाती, कभी-कभी पानी छिड़काती। एक-एक करके काम निबटाती, बीच-बीच में लेती जाती , हम सब के झगड़ों में रस। बीच में कहती हो गया बस, पढ़ो लिखो ना लडों भिडो। पड़ […]
वो जिंदगी बेमानी, जिसमें कोई रवानी ना हो। किस काम की जवानी, जिसकी कहानी ना हो। मैंने भी मोहब्बत किया है, हाँ बेहद किया है, किसी से दिल्लगी नहीं की, जो निभानी ना हो। हमारा […]
लोग बन कर फिरते है बेहरुपीये ताकि तुमको छल सकें कुछ रास्ते बिन काँटों के भी छोड़ दो जिनपर अनजान राही चल सकें
घर एक सपना, होता है, हर एक का सपना, तिनका तिनका जोड़ कर, बनाया तू आशियाना, बुढ़ापे का सहारा होता है घर अपना, आती है सच्ची खुशियां जब घर हो कोई अपना, जो भी हो, […]
मतभेदों की महफ़िल में मनभेदों का खुलासा हो गया, अच्छाखासा मुस्कुराता हुआ मेरा दिल रुहासा हो गया।। राही अंजाना
चाहा सिर्फ तुझको मैंने साथ मेरे अब तेरी परछाई भी नहीं जी लिया प्यार का हर लम्हा चले जाने से तेरे अब कोई रुसवाई नहीं वो जा चुकी है जिंदगी से भूलूंगा ये सचाई नहीं […]
दौर चल रहा है धकेल कर जितने का कुचलने वाली इस भीड़ मे शामिल मत होना आगे बढ़ने के लिए दौड़ जरूर लगाना पर किसिकी होड़ मे शामिल मत होना …… राम …….
बोलियां बतिया तेरी , काजल भरी गहरी काली अखियां तेरी। दिल को चकमक सा कर गई, भीनी मुस्कुराहटें भर गई, मनमोहिनी ,चितचोरनी जादू भरी तेरी हंसी, मुझमें से मुझको खींच ले गई मैं अवाक सा […]
ठोकर खाकर जमानो मे बुलंद हुए आसमानों मे जो फिरते आग लिए अपने सीनो मे वो रोशनी ढूंढ़ते नहीं बुझे हुए चिरागो मे
बचपन का आंगन कहीं छूट गया । पुराना मकान था जो टूट गया ।। ऊँची इमारतें खड़ी वहाँ, सैकड़ों परिवारों का बसेरा है । चारदीवारी में ही रात, घर के भीतर ही सवेरा है। ऊँची […]
अंबे मां जगदंबे मां, तू है कितनी दयालु मां, तेरा रुप है कितना निराला मा, दुखियों के दुख हरने वाली, सब को सुख तो देने वाली, तेरी कृपा हम पर बनी रहे, मेरी यह आरजू […]
देना चाहती हूं सूखे होंठो पर हंसी, निराश डूबती सी आंखों में रोशनी, सूखे उलझे बालों में नमी, हारी सी जिंदगी को जीत की खुशी, छोटी- छोटी सी वस्तूए मिल जाने पर चेहरे पर छाई […]
गहरी काली आंखों में डूब जाना चाहता हूं। तुमको बस तुमको यूं ही देखना मैं चाहता हूं। तेरे बस तेरे ख्यालों में खो जाना चाहता हूं। तेरी बस तेरी हंसी की खनक सुनना चाहता हूं। […]
गणपति विसर्जन ——————— श्रद्धा व सम्मान दिया, गणपति को घर में विराजमान किया। रोज ..मोदक, मेवा खिलाते रहे, गणपति जी को… जी भर मनाते रहे। वस्त्र, आभूषण उन्हें हम चढ़ाते रहें , लाड सारे उन्हें […]
बैठे-बैठे मुस्कुरा रहे हो हमसे तुम कुछ छुपा रहे हैं आंखें हैं आईना धड़कनों का उनमें हाल-ए-दिल पढ़ा रहे हो। निमिषा सिंघल
हिन्दी कविता -मोहब्बत की कली | हमने क्या जुर्म किया तू किसी और होके चली | खिल के मुरझा गई मेरी मोहब्बत की कली | तुम बदल जाओगे कभी हमने सोचा ही नहीं | तोड़ […]
••• दामन-ए-वक़्त में हर ग़म को छुपाना होगा। वरना तमाम उम्र यूँ ही अश्क़ बहाना होगा।। जहान में कौन अज़ल तक रहा सलामत है। आख़िर सभी को दुनियाँ छोड़ के जाना होगा।। ख्वाहिश-ए-सुबू किस का […]
तुम बिन ये दिल कहीं लगता नहीं, तू ही बता हम क्या करें, तेरे सिवा कोई मुझे भाता नहीं, मेरे तसव्वुर में बस तुम ही तुम हो, दूसरा कोई और आता नहीं, तेरी निगाहे मुझे […]
जिसको रहना हो वो मेरे आस – पास रहे, जिंदगी में कोई तो हो जो सबसे ख़ास रहे, ऐसा न हो के सब हँसते रह जाएँ तुमपर, और एक कोने में बैठा वो दिल उदास […]
कौन कह रहा है समन्दर में राज़ नहीं होते, ज़मी पर रहने वालों के सर ताज नहीं होते, पहन लेते हैं आज वो जो जैसा मिल जाये, ये सच है उनकी कमीज़ में काज़ नहीं […]
मैंने सोंचा न था के वो इस कदर बदल जायेगा, पानी पर लिखा हुआ उसका नाम जल जायेगा, मैं बनाता ही रह जाऊंगा तरह – तरह के ढाँचे, और वो मासूम यूँ वक्त के सांचे […]
कुछ ऐसा न करो के कोई तुम्हारी गवाही न दे, आँखों की सलाखों में रखे पर तुम्हें रिहाई न दे, जो भी कहना है उसे आईने सा साफ़ रखो तुम, ऐसा न हो के चेहरा […]
हां बहुत से रिश्ते पाये है, मैंने अपने इस जीवन में कुछ में है प्यार, कुछ में है स्वार्थ, सामने वाले के मन में लेकिन एक बंधन ऐसा है, जिसमें सिर्फ सच्चा प्यार घुला सबसे […]
नन्ही मुन्नी गुड़िया सी मीठी-मीठी गुड़िया सी। बातें करती गपर – गपर वो हंसी तो खिलती धूप मगर । लड़ती ,भिडती, हंसती खिलती जैसे धूप छांव हंसती खि लती। लड़ने में झांसी रानी है हंसने […]
सोचा था क्या हम सब ने! ऐसा घ्रणित समाज, हर दूसरा चेहरा वहशी घिनौना आज। लगता कि जैसे हो गए सब मानसिक रोगी दहशत की बोलती है अब हर जगह ही तूती सब धर्मों के […]
यूं तो हंसीनों की कमी नहीं तेरे शहर में। एक तुझ पे ही दिल आया पहली नज़र में। और कोई नजर आता नहीं, एक तेरे सिवा, इंकार नहीं, प्यार घोलकर पिला दो ज़हर में। रहने […]
नारी है अबला नारी है शक्ति । नारी है ममता नारी है पूजा । नारी का एक रूप है बेटी जो तपती दोपहर में ठंडी हवा है रेगिस्तान में आशा का पानी । नारी सदा […]
तन्हा बैठे ना जाने कुछ सोच कर आ जाती हंसी कुछ बातें कुछ यादें कुछ गुज़रे लम्हे अकेलेपन का फायदा उठाकर घेर लेते चुपचाप अचानक जैसे कोई आंखों पर हाथ रखकर सामने आकर मुस्कुराया हो […]
हिन्दी देवी गीत- चरणों मे जगह तेरे चरणों की धुली मै ,चरणों मे जगह दे दो | बन के मेरी माँ तुम मुझे जीने की वजह दे दो | जग की माता हो पूजे तुमको […]
सच्चाई से डर के सारे ब्रिक्स चाहिए तो ईमान है तेरा सच्चाई ही धर्म है तेरा सच्चाई तो सेवा है ै सच्चाई ही पूजा है तेरा सच्चाई तो जीवन है तेरा सच्चाई ही जग में […]
ओ मनमीत मेरे, मैंने दिल से तुझे पुकारा, मैं नदिया की धारा, तुम हो मेरा किनारा, बिन तेरे जीना मेरा, होगा नहीं गवारा, चाहे किस्मत रूठे मुझसे, या रुठे यह जग सारा, तुम धूप तो […]
ये रंगे – बहारा, ये हँसीन नजारा। खुदा ने तुझको, फुर्सत से संवारा। ना मैंने सुना कुछ, ना तुने पुकारा, समझते हैं तेरी, नजरों का इशारा। तू बहती धारा, मैं शांत किनारा, दिल की गहराई […]
भूखे पेट जीना सीखा मैंने पेट भर खाने की जरुरत भी समझी नहीं | नंगे पैर दौड़ पड़े सफर में बस भागता रहा ना देखा, पाँव में चप्पल है के नहीं | बुझी मशालों को […]
ओ तितली तुम प्यारी प्यारी, सबको लगती न्यारी न्यारी, रंग बिरंगे पंख तुम्हारे, जैसे फूलों की हो बाडी, तुझे देख गूजी बच्चों की किलकारी, तुझे पकड़ने बच्चे दौडे, हर वगिया की बारी बारी, चंपा चमेली […]
मोर पखा सिर धरने वाले । उंगली पर गिरी रखकने वाले । है कान्ह हे नंद दुलारे हे यशुमति के प्यारे। कृष्णा, मोहन , श्याम सब हैं तेरे नाम द्वारिका, मथुरा , वृंदावन हैं तेरे […]
मैनें पूछा के फिर कब आओगे, उसने कहा मालूम नहीं एक डर हमेशा रहता है , जब वो कहता है मालूम नहीं चंद घडियॉ ही साथ जिए हम , उसके आगे मालूम नहीं वो इस […]
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