तुम्हारे भोलेपन
May 27, 2020 in शेर-ओ-शायरी
तुम्हारे भोलेपन से हीं मुझको बहुत प्यार है।
वरना इस दुनिया में दिल लगाने को बथेरे यार हैं।
May 27, 2020 in शेर-ओ-शायरी
तुम्हारे भोलेपन से हीं मुझको बहुत प्यार है।
वरना इस दुनिया में दिल लगाने को बथेरे यार हैं।
May 27, 2020 in मैथिली कविता
ई जेठक मास आ आमक गाछी।
गेया केॅ संग संग चरावति बाछी।।
सब किछु मोन परति अछि
कोना बताएव हम सब का छी।।
May 26, 2020 in शेर-ओ-शायरी
पर्वत से निकली खिल-खिल गंगा
सागर में जाकर शांत हो गई।
जान गई जंजाल में तो
उड़ती चिड़ियाँ भी शांत हो गई।।
May 26, 2020 in शेर-ओ-शायरी
ना छेड़ कुदरत को
कुदरत परेशान हो जाएगी।
इसकी परेशानी के
संग संग तेरी जान जाएगी।।
May 26, 2020 in शेर-ओ-शायरी
कुदरत के संग बदफेली के खुद हीं हम शिकार हो गए।
आबोहवा संग धरती भी तो दूषित हो गई और हम बीमार हो गए।
May 25, 2020 in शेर-ओ-शायरी
नजरों से बातें होती है
और जुबान खामोश है।
अजीब सी दुनिया है ये
मधुर प्रेम का आगोश है ।।
May 24, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
झर-झर आँसू बहते उनके
झरना बनकर आँखों से।
मरणासन्न कर छोड़ा उनको
दुष्ट काटकर पाँखों से।।
परवाह नहीं थी निज दुख की
वश राम नाम का जाप सदा।
करते विनती रुको काल तुम
राम लखन केआवन कर अदा।।
सीता हरण का दे संदेश
सहर्ष साथ चलूंगा मैं आपके ।
सादर रामप्रभु ने पक्षीराज का
दाह किए जैसे अपने बाप के।।
May 24, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
पत्थर का पर्वत होकर भी
आखिर पानी सबको देता है।
बिना नाक और मूँह के बृक्ष
सबको सुरभित वायु देता है।।
बिन ईंधन के जलकर सूरज
नित्यहि ताप जगत को देता है।
‘विनयचंद ‘परोपकारी बनकर
आखिर क्यों न कुछ तुम देता है।।
May 23, 2020 in मुक्तक
देवव्रत का भीष्मप्रतिज्ञा
या धृतराष्ट्र का अंधापन।
गंधारी के आँखों की पट्टी
या कुन्ती का अबलापन।।
किसको दोषी कहूँ मैं आखिर
सब हैं कारण महाभारत के।
सबके जिद ने नाश किया
अगणित जन गण भारत के।।
May 22, 2020 in मुक्तक
जिम्मेदार किसे ठहराया जाय
आखिर महाभारत के युद्ध का।
उत्तर मांग रहा तत्काल हमार
ये कैसा धर्मयुद्ध प्रबुद्ध का।।
May 20, 2020 in Other
शरण में आया जभी विभिषण
कह लंकेश राम अपनाए।
सागर जल से कर अभिषेक
नीरनिधि का मान बढ़ाए।।
ऐसे राम भगत हितकारी।
भज ले राम नाम सुखकारी।।
May 19, 2020 in शेर-ओ-शायरी
तुम लाखपति हो गए कोरोना
आखिर मेरे भारत में।
हम मध्ययबर्गी मिल गए देखो
आज कितने गारत में।।
May 18, 2020 in मुक्तक
जिस नारी को समझ पातकी
पति ने पत्थर बना दिया था।
दे निज चरणन की धूल रामजी
पंचकन्याओं में सजा दिया था।।
प्रातकाल उठि सुमिरन करते
इनका जो भी नर -नारी।
उनके सारे पाप कटे और
बने मोक्ष के अधिकारी।।
May 18, 2020 in मुक्तक
पति ने पत्थर बना दिया था
एक जीती जागती नारी को।
परमेश्वर ने फिर नारी कर डाला
निज चरणन अधिकारी को।।
May 18, 2020 in Other
राजनीति और पार्टीबाजी से
बाहर भी है सेवा की दुनिया।
मदर टरेसा सम दुखियों की
सेवा कर कर सुखदाई दुनिया।।
May 18, 2020 in मुक्तक
दादाओं के भी दादा थे
वो ना जाने
कितने युगों से
खड़े थे एक पाँव पर
अपने घर के पास।
खेल कबड्डी
गिल्ली डंडे
भाग भाग के
आँख मिचौनी
खेला करते
सदा हीं
उनके आस-पास।।
भूख लगी
होगी बच्चों कै
जान कुछ फल
फैला देते थे नीचे।
हम भी उन
विद्रुम सम फल
को चुन-चुन
बड़े चाव से
खा जाते
अँखियों को मीचे।।
एक दिन रोना
आया हम सबको
आँसू के धार
बहे पुरजोड़।
कारण कि
उनके ऊपर
क्रुर कपूत ने
आकर कुल्हाड़ी से
प्रहार बड़ी जोर।।
काट -काट के
कर के टुकड़े
सब ले गया
अपनी नजरों से दूर।
इस गलती
का हर्जाना
कौन भड़ेगा
अब सब
हो गए मजबूर।।
कीट कीटाणु
और विषाणु
फैल गया बिमारी बनकर।
‘विनयचंद ‘
नादान बनो मत
बृक्ष पितर की रक्षा
कर नित हितकारी बनकर।।
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May 17, 2020 in शेर-ओ-शायरी
माँ की ममता कभी भी झूठी नहीं होती।
रूठी होकर भी कभी माँ रूठी नहीं होती।।
May 17, 2020 in शेर-ओ-शायरी
आज के इस दौर में
उल्फत के हर रस्म झूठे लगते हैं।
अपने घर में भी सभी
एक दूजे से रूठे-रूठे लगते हैं। ।
May 16, 2020 in शेर-ओ-शायरी
चिलचिलाती धूप और भयंकर गर्मियां
व्यापित है इस जेठ में ।
दशा बताये क्या प्राणियों की छाया भी
जाए छाया की हेठ में।।
May 16, 2020 in हाइकु
लाॅकडाउन भी देखो बेअसर हो रहा।
सारे भारत में कोरोना का बढ़ता कहर हो रहा।
रात में नींद आती न दिन में है चैन
अब चिन्ताओं का घर में लहर हो रहा।।
May 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
देश धर्म के ख़ातिर
है अपनी जान हथेली पे।
वीर सिपाही हैं हिन्दी
हम कुर्बां जन्महवेली पे।।
May 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
तीर किसी को घायल करके
बोलो कब पछताता है?
कड़वा बोल कहो दुनिया में
कब भला काम कर पाता है??
May 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
देख अनीति को चुप रहना
सचमुच एक अनाचार हुआ।
पाठ अहिंसा का पढ़ाकर
खुद हिंसा का शिकार हुआ ।।
May 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
पेड़ रहे नित धूप में
बाँटे सबको छांव।
ऐसे हीं परोपकार में
लगे हाथ और पांव।।
May 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
कौन कहता है कि दिल में सुराग
नहीं होते।
गर ना होते तो बेवफा कभी फरार
नहीं होते।।
May 15, 2020 in लघुकथा
एक था अंधा
एक था लंगड़ा ।
दोनों का याराना
हो गया तगड़ा।।
आग लगी
जब गाँव में ।
सब भागने लगे
शीतल छाँव में।।
कोई बता न पाया
अंधा को।
कोई भगा न पाया
लंगड़ा कै।।
अंधे का सहारा लंगड़ा
और लंगडे का सहारा अंधा।
राह बतावे लंगड़ा
चढ़ ऊपर अंधे का कंधा।।
बचाव हुआ दोनों का
और बन गए एक मिसाल।
‘विनयचंद ‘जो नेक भाव हो
सब रहे सदा खुशहल।।
May 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
इम्तिहान -ए-इश्क़ में सारे शरीक होते हैं।
जो पास हो गए वही तो खुशनसीब होते हैं।।
May 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
तुम्हारे नजर- ए-रहम से
तेरे,सब मीत बन जाते हैं।
मेरे अल्फाज तेरे लबों से
छूकर गीत बन जाते हैं।।
May 14, 2020 in हाइकु
जमाने में सबसे निराला है ।
इसलिए नहीं कि मेरा यार है वो ,
मन का बड़ा हीं सच्चा और भोला भाला है।।
May 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
मुहब्बत के कई रंग देखे हैं।
जो भी मिला उसे तंग देखे हैं।
यूँ तो बड़ी सुहानी है ये दुनिया
पर कहीं खुशी तो कहीं गम देखे हैं।।
May 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
तुम अपने मुहब्बत में
कर लो परीक्षा सनम।
पास निश्चित करुँगा पर
आगे की तेरी इच्छा सनम।।
May 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
कुछ छंद अनोखे लाए हैं
कुछ गीत सुहाने लाए हैं।
हम तो तुम्हारे आशिक़ हैं
कुछ भाव तराने लाए हैं।।
May 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
दुनिया दरकिनार होना चाहती थी हमसे
पर दरकिनार हो न पाई ।
मुहब्बत ने ईंटे तो काफी लगाए
पर इश्के मीनार हो न पाई।।
Comments Off on इश्के 🗼
May 14, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
कहते हैं किसको हँसना
गमगीन ज़िन्दगी है।
मिट्टी करे समर्पित
अश्कों से बन्दगी है।
हरदम रहे वो गीला
उसका सदा हीं जून है।
क्या नाम दूँ मैं उसको
वो एक गोरकुन है।।
May 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
ये कोरोना की छुट्टी भी
अब बेकार हो गई ।
मोबाइलों में होम वर्क
और पव जी बेकार हो गई।।
May 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
गर्मी की छुट्टी हो गई
गर्मी के आने से पहले।
शायद स्कूल लग जाऐंगे
नानी 🏡 जाने से पहले।।
May 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
ऐ वक्त जरा रुक जा
कुछ देर के लिए।
दुनिया में लाॅकडाउन है
नये सबेर के लिए।।
May 13, 2020 in मुक्तक
मन्दिर बन्द है
फैक्टरी बन्द है
बन्द है कारोबार।
घर में सोना
बाहर कोरोना
जीना है दुश्वार।।
May 13, 2020 in मुक्तक
जनताओं को कैद कर दो’कोरोना के नाम पे।
बिजली पानी भी मुफ्त करो कोरोना के नाम पे।।
May 13, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
लाॅकडाउन बढ़ाते रहो
अध्यादेश लगाते रहो
आखिर जो आप मंत्री ठहरे।
मजदूरों को भगाते रहो
शराबियों को अजमाते रहो
आखिर जो आप मंत्री ठहरे।।
Tags: मजदूर दिवस पर हिंदी कविता, मजदूर पर हिंदी कविता 5 Comments »
May 13, 2020 in Other
भक्त भले थे विदुर कृष्ण के
पर फल विदुरानी के हिस्से आया।
फल झोली में देकर कृष्णा
मांग-मांग खुद छिलका खाया।।
May 13, 2020 in Other
दर्शन की चाह में सुदामा
दर्शन मान सब पा जाता है।
प्रेरक सुशीला के खातिर
पल में रंंगमहल आ जाता है।।
May 13, 2020 in शेर-ओ-शायरी
चौथापन है लाॅकडाउन का
फिर भी कोरोना अभी जवान है।
करते रहो अध्यादेश जारी
तुम्हें क्या जनता कितनी परेशान है।।
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