गुरु वंदन

July 26, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

हे गुरुवर गुणशील आगारा।
चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।।
तेरी कृपा ने चलना सिखाया।
जीवन के अंधकार मिटाया।।
अग जग में किया उजियारा।
चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।। १।।
शिव विरंचि नारायण तुझ में।
शब्द ब्रह्म श्रुति गायन तुझ में।।
करू दर्शन पूजन मेरे प्राणाधारा।
चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।। २।।
कर उपदेश इहलोक सँवारा।
दे धर्मराह परलोक सुधारा ।।
जनम जनम ये ‘विनयचंद ‘
माँगे साथ तुम्हारा।
चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।। ३।।

गरमी

June 9, 2021 in Other

ये गरमी कैसी जेठ की ,
चिल चिल करती धूप।
ठंढी मीठी छांव में,
क्या परजा क्या भूप।।

पिता बटवृक्ष महान

June 9, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

लता-बेल -सी माता होती,
होते पिता बटवृक्ष महान।
ठंढी मीठी सघन छांव में
पलते जिनके सब संतान।।

देकर जन्म ब्रह्मा कहलाए
पालन कर बिष्णु बन जाए।
हरण करे अज्ञान तिमिर
संहारक रुद्र रूप बड़ भाए।।

शोणित – श्वेद बहा – बहाकर
निज बच्चों को पोषा -पाला।
लाड़ लड़ाया दिल में रखकर
पाया प्यार कोई किस्मत वाला।।

चढ़कर कांधे जिनके ऊपर
दुनिया सब कोई देखा है।
‘विनयचंद ‘ वो ईश रूप में
संतानों की जीवन रेखा है।।

ऊचाईयों के दौर में

June 3, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

ऊँचाईयों के दौर में
हर कोई ऊँचा उठना चाहे।
विनयचंद इस दौर में
आखिर पीछे रहते हो काहे।।
कर्म करो ऊँचाई पाओ
औरों को नाहीं गिराना तुम।
जो गिरे हुए को उठाओगे
कीर्ति यश वैभव पाना तुम।।
सबको साथ लेकर चलना
प्रस्थ करेगी कामयाबी की राहे।
ऊँचाईयों के दौर में
हर कोई ऊँचा उठना चाहे।।

भजन

May 25, 2021 in गीत

राम नाम रट मनवा मेरे
जीवन सफल बना ले।
नर देही न व्यर्थ गमाओ
कुछ तो पुण्य कमा ले।।
दुख दरिया है जीवन तेरा
नित राम नाम तू गाले ।
अन्तकाल पछताओगे
जब पड़ेंगे यम के पाले।।

तुम्हारे नाम की मेंहदी

May 24, 2021 in शेर-ओ-शायरी

तुम्हारे नाम की मेंहदी लगाई उसने हाथों में।
मेरे जज़्बात बन के रह गए इतिहास की बातों में।।

बंद खिड़कियों का शहर

May 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

यारों ! ये कैसा कहर हो गया।
बंद खिड़कियों का शहर हो गया।।
बाहर बीमारी, भीतर लाचारी
देख आबोहवा भी जहर हो गया।।
मुँह पे पट्टी चढ़ी, पेट में खलबली
दवा संग दुआ भी बेअसर हो गया।।
काम धंधा गया, सब मंदा हुआ
दिन गिन गिन आठों पहर हो गया।
सुन विनती प्रभु, विनयचंद की तू
हर संकट सभी जग जबर हो गया।।

प्रार्थना

May 12, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

प्रभु तुम्हारे चरणों में
प्रातः वन्दन करता हूँ।
जग का संकट दूर करो
पीड़ित क्रन्दन करता हूँ।।
व्याकुलता में सब जन तेरे
कोरोना के मारे हैं।
रक्षा करो करुणामय स्वामी
पूत कपूत तुम्हारे हैं।।

सुबह का चाय

May 12, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

सुबह का चाय
बड़ा हीं मीठा ।
मीठी सोच
विचार भी मीठा।।
गमी खुशी से दूर कहीं
कवियों का संसार भी मीठा।
सुप्रभात विनयचंद आखे
सावन का परिवार भी मीठा।।

अकेलापन

May 11, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

गलियों को छोड़ हम
इन्कलेभ में आ गए।
छोटे छोटे घर आज
महलों में छा गए।।
दूर हो गए चाचे – ताए
पड़ोसियों में छाया मतभेद।
पाकर अकेलापन में बन्धु
विनयचंद के मन में खेद।।

कलियों में

May 9, 2021 in Other

एक तूफान सा छाया है
चारों ओर तुम्हारी गलियों में ।
ऐ भ्रमर मत उलझ काँटों से
खुशबू अभी कैद है कलियों में।।

जीवन तेरा बेशकीमती

May 2, 2021 in Other

मत कर होड़ा होड़ी
बीच सड़क तू चलने में।
तेरा जीवन बेशकीमती
फिर ना आना पलने में।।

गाय बेचारी

May 2, 2021 in Other

होड़ा होड़ी आज सड़क पर ,
कुत्तों को दूध पिलाने की।
कचड़े खाती गाय बेचारी
हाय, कैसी सोच जमाने की ।।
राहु केतू के चक्कर में
क्यों लक्ष्मी को ठुकराते हो ।
दूध दही घी सुधा सरस
छोड़ सुरा क्यों अपनाते हो।।

पेट के ख़ातिर

May 1, 2021 in Other

मैं मजदूरी करता हूँ
समझो पेट के ख़ातिर।
पर खून पसीने का मेरे
मोल कहाँ सेठ के खातिर।।

राम तेरा सहारा

April 27, 2021 in Other

हर गली में खड़ा है
कोरोना कहर।
मौत की आग में
जल रहा है शहर।।
राम तेरा सहारा
जो मुझको मिले।
हर घर में खुशी के
फूल खिलते रहे।।

राम तेरा सहारा

April 27, 2021 in Other

हर गली में खड़ा है
कोरोना कसर।
मौत की आग में
जल रहा है शहर।।
राम तेरा सहारा
जो मुझको मिले।
हर घर में खुशी के
फूल खिलते रहे।।

अनमोल हवा

April 27, 2021 in Other

रब की बनाई हवा
है कितनी अनमोल।
बिन आक्सीजन प्राण गया
और पता चला है मोल।।

खारा सोना

April 27, 2021 in Other

एक आँधी सी छाई चहुदिश
बन दुश्मन द्वार कोरोना है।
लाशें रो रही आज सड़क पर
पीड़ित धरती का हर कोना है ।।
विनयचंद एकांत में ले चल
बीच भीड़ में क्योंकर रोना है।
राम नाम नित रट री रसना
है औषधि सच्चा खारा सोना है ।।

कोरोना को हराना है

April 27, 2021 in Other

निर्विरोध मास्क लगाना है।
नहीं कोरोना से घबराना है।।
अनावश्यक बाहर नहीं जाना है।
घर में रहकर कोरोना को हराना है।।
कोरोना भागेगा एक दिन
ऐसा मन में रख विश्वास।
बृक्षों लगा रे विनयचंद
पाओगे परिशुद्ध तु साँस।।

दोहा : नवसंवत

April 13, 2021 in Other

🕉️
नव संवत है विक्रमी, अतिपावन मधुमास।
राक्षस नाम धराया, पर आनन्द की आस।। १।।
नव किसलय तरुवर सजा, चहुदिश नव उल्लास।
जनम मास है राम की, नौराता भी खास।। २।।
घर घर रामायण पाठ,अरु चंडी का जाप।
मंगल ध्वनि गुञ्जित सदा, मिटे जगत संताप।। ३।।
कनक कलश हो कनक भरा,पूरण घर भंडार।
विनयचंद तू मगन हो, पूजो निज त्योहार।। ४।।
अपना पराया ना करो,राखो हृदय उदार।
आदर कर सब धर्म का, भूल न निज व्यवहार ।।५।।

पं विनय शास्त्री ‘ विनयचंद ‘
बस्सी पठाना (पंजाब)
मो. 8437335178

असामान्य समय

April 9, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

घड़ी तो घड़ी है
साधारण हो या फिर असामान्य।
पर समय बड़ा हीं
होता जग में सदा से असामान्य।।
टिक – टिक करती सूई वाली।
अपने हीं चाल में चलने वाली।।
डिजिटल घड़ी में अंकों का मेल।
जिसे चलाए व दर्शाए विद्युत सेल।।
चाभी वाली हो या विद्युतवाली
जग में दोनों है अतिमान्य। । घड़ी तो घड़ी है………
भरके सिक्ता काँचपात्र में
पूर्वकाल में घड़ी बनाया।
उलट – पुलट कर यंत्र हमारा
सतत समय सबको बतलाया ।।
साधारण से असामान्य बनी
पर समय सदा असामान्य रहा।
‘विनयचंद’ नहीं केवल भैया
जग के सब गणमान्य कहा।।

हाथ में जीवन

April 8, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

हाथ में रेखा
रेखा में जीवन
जीवनt रेखा हाथ में।
पर है जीवन
और मरन
एक ईश्वर के हाथ में।।
हाथ मिलाने से पहले
सोच लो एक बार।
वायरस और बैक्टीरिया
है बीमारी के आधार।।
गर मिलाया
फिर सेनिटाइज करो।
हाथ मूंह छूने से पहले
पहले यही रिभाइज करो।।
महामारी है कोरोना
अपना खुद बचाव करो।
हाथ में है जीवन तेरे
अच्छा नित बरताव करो।।

समन्दर की गहराई

April 7, 2021 in Other

समन्दर की गहराइयों में
उतर के देखो तो एक बार।
बहुत से राज खुल जाएंगे
जो छुपे हुए थे हरेक बार।।
मोती भी हैं सीप भी प्यारे
रत्नों का है बड़ा खजाना।
उतरोगे तो पाओगे तुम
गहराई से नहीं डर जाना।।
गहराई है पर दिल से गहरा
दुनिया में क्या होगा।
विनयचंद बहे प्रेम की नदियाँ
सतत समुद्र समाहित होगा।।

इश्क़ के सफर में

April 3, 2021 in शेर-ओ-शायरी

ज़िन्दगी के सफर में
कई हमराह मिलते हैं।
कहीं पे वाह मिलते हैं
कहीं पे आह मिलते हैं।।
सफर में इश्क़ के
कुछ विरले होते हैं
जिन्हें आखिर में भी आकर
मंजिल – ए- चाह मिलते हैं।।

इश्क़ के सफर में

April 3, 2021 in शेर-ओ-शायरी

ज़िन्दगी के सफर में
कई हमराह मिलते हैं।
कहीं पे वाह मिलते हैं
कहीं पे आह मिलते हैं।।
सफर में इश्क़ के
कुछ विरले होते हैं
जिन्हें आखिर में भी आकर
मंजिल – ए- चाह मिलते हैं।।

होली आई है खुशियाँ लेकर

March 28, 2021 in Other

जला दो नफ़रत की होलिका
होली आई है खुशियाँ लेकर।
मिटे अहंकार की सब बोलियाँ
होली आई है खुशियाँ लेकर।।
काले गोरे का भेद मिटाकर
सबको एक रंग में रंग दे।
नशा चढ़े एक प्रेम का सबको
घोंट घोंट घोंटा भंग दे।।
जलनेवाले को जलने दे
बना विनयचंद प्रेम की टोलियाँ
होली आई खुशियाँ लेकर।।

उदास खिलौना : बाल कबिता

February 27, 2021 in Other

मेरी गुड़िया रानी आखिर
क्यों बैठी है गुमसुम होकर।
हो उदास ये पूछ रहे हैं
तेरे खिलौने कुछ कुछ रोकर।।
कुछ खाओ और मुझे खिलाओ
‘चंदा मामा….’ गा-गाकर।
तुम गाओ मैं नाचूँ संग- संग
डम -डम ड्रम बजाकर ।।
वश मुन्नी तू इतना कर दे।
चल मुझ में चाभी भर दे।।
देख उदासी तेरा ‘विनयचंद ‘
रहा उदास खिलौना होकर।
मेरी गुड़िया रानी आखिर
क्यों बैठी है गुमसुम होकर।।

वर स्वरुप में बमबम : अनुदित रचना

February 19, 2021 in Other

वर स्वरुप में बमबम
मालतीमालया युक्तं सद्रत्नमुकुटोज्ज्वलम्।
सत्कण्ठाभरणं चारुवलयाङ्गदभूषितम्।।
वह्निशौचेनातुलेन त्वतिसूक्ष्मेण चारुणा।
अमूल्यवस्त्रयुग्मेन विचित्रेणातिराजितम्।।
चन्दनागरुकस्तूरीचारुकुङ्कुमभूषितम्।
रत्नदर्पणहस्तं च कज्जलोज्ज्वललोचनम्।।
. भाषा भाव
मालती बड़ माल शोभित,रत्न मुकुट बड़ चमचम। कंगन बाजूवन्द मनोहर,हार गला में दमदम।।
अगर लेप तन चंदन केशर,रेख त्रिपुण्ड ललाट में साजल। वसन अनूप रुप मनमोहक,नलिन नयन नव काजल।।
कस्तूरी कुमकुम कें टीका,हाथ आरसी चमचम।।
देख विनयचंद महादेव को,वर स्वरुप में बमबम।।

दुलहिन गिरिजा माता : अनुदित रचना

February 19, 2021 in Other

दुलहिन गिरिजा माता

सुचारुकबरीभारां चारुपत्रकशोभिताम्।
कस्तूरीबिन्दुभिस्सार्धं सिन्दूरबिन्दुशोभिताम्।।
रत्नेन्द्रसारहारेण वक्षसा सुविराजिताम्।
रत्नकेयूरवलयां रत्नकङ्कणमण्डिताम्।।
सद्रत्नकुण्डलाभ्यां च चारुगण्डस्थलोज्ज्वलाम्।
मणिरत्नप्रभामुष्टिदन्तराविराजिताम्।।
मधुबिम्बाधरोष्ठां च रत्नयावकसंयुताम्।
रत्नदर्पणहस्तां च क्रीडापद्मविभूषिताम्।।

भाषा भाव
केशपाश कुसुमित सालि पत्र रचित बड़ सुन्दर।
कस्तूरी सिन्दूर के टीका,भाल बीच नव दिनकर।।
कंठहार उरोज विराजित,रत्न महामणि मंडित।
कंगन बाजूबंद सुशोभित,कुंडल कलश अखंडित।।
रत्न जड़ित कुंडल की कांति,गाल युगल पर छाई।
सुघर बतीसी दमदम दमके,अधर सुफल बिम्बा की नांई।।
रचित महावर युगल हस्त में,क्रीड़ा कमल मनोहर दर्पण।
दुलहिन गिरिजा माता पर,सुन्दरता सब अर्पण।।

पीले खेत

February 5, 2021 in Other

आया है मधुमास
मास माघी का पावन।
नव किसलय तरु शोभित
क्या उपवन क्या कानन।।
फूलों की क्यारी
सज गई सारी
रंग-बिरंगे फूलों से।
कोयल काली
तरु की डाली
झूले नित झूलों से।।
पीली सरसों पीले खेत
जिमि सजनी संग साजन।

आ गया वसन्त (सोरठा छंद)

February 5, 2021 in Other

आ गया वसन्त आज, फिर पतंग हम उड़ाऐंगे।
कोकिलों की आवाज, मिल संग संग दोहराऐंगे।।

हरि हरि

February 4, 2021 in Other

हवा चले जब ठंढी ठंढी।
मनवा बोले तब हरि हरि।।

मानुष जनम

February 4, 2021 in मैथिली कविता

सिया राम जी केॅ चरण
हमरा मन में रमल।
जे हम हेती करिया भौरा
पुष्प पराग मुख भरल ।।
चरण छुवि हम नित नित
जनम कृतारथ करल।
विनयचंद मानुष जनम
नाम रटन हित धरल।।

शायरी

February 3, 2021 in शेर-ओ-शायरी

न नखरा करेंगे
न इजहार करेंगे।
हम तो सिर्फ वसन्त
के आने का इंतजार करेंगे।।

संकट चौथ

February 2, 2021 in Other

आया माघ का महीना ।
लेकर खुशियाँ नवीणा। ।
संकटचौथ पहला त्यौहार।
व्रत करे सब निर्जल धार।।
गणपति जी की करे आराधन।
माँ संकटा करे संकटनाशन। ।
दर्शन चन्द्र सदा सुखदाई ।
अर्घ सहित पूजन फल पाई।।

पावन मास मास

February 2, 2021 in Other

पूस गया ठण्ढी गई
छाया नव उल्लास।
कर सेवन त्रिवेणी तू
आया पावन मास।।
आया पावन मास
माघ अतिसुखकारी।
स्नान ध्यान पूजन
कथा करे अपहारी।।
कथा करे अघहारी
विनयचंद नाम जपा कर।
पा मानव तन निर्मल
तिल गुड़ कुछ दान कर।।
कम्बल स्वेटर और रजाई
दीनन को दान करो रे भाई।
सेवा करो सदा दुखियों की
सदा सहाय रहे रघुराई।।

गठबंधन

January 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

तीन छात्र थे केवल कक्षा में।
आ बैठ गए तीनों परीक्षा में।।
प्रथम श्रेणी में पास किया एक
दूजा द्वितीय दर्जे को पाया।
तीजा तेतीस फीसदी लाकर
तीजे दर्जे तीजे स्थान पे आया।।
अफसोस कि तीनों आखिर
छात्रवृत्ति से कुछ दूर रह गए।
बासठ पर पहला अटका है
छप्पन पर मगरुर रह गए।।
सोच में देख दोनों को तीजा
लगा ठहाका जोर से बोला।
मिले वजीफा पच्चासी पर
फिर क्या मुश्किल है भोला।।
बारी -बारी तुम दोनों से
गठबंधन आ मैं करता हूँ।
छःछः मास तुम दोनों संग
निज लब्धांक शेयर करता हूँ।।
पौ बारह में रहेंगे तीनों
आखिर इसी आधार पर।
लोकतंत्र सरकार यहाँ
जब बनती इसी आधार पर।।
हमें तो चाहिए कुछ पैसे
आखिर पढ़ने के खातिर।
इनको तो सबकुछ मिलता है
वेतन पेंशन सुविधा आखिर।।

बम्बई मिठाई वाला

January 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

टन- टन टन- टन करते वो
फेरीवाला आता था।
गदा के जैसे डब्बा अपने
काँधे पर ले आता था।।
सिर पे टोपी गले में गमछा
नाक पे ऐनक बड भाता था।
बम्बई मिठाय,,लड़का सब खाय
बूढ़ा ललाय गाते गाते आता था।।
खड़ा हो गया घर के आगे
हम बच्चों की टोली आई।
आजा बाबू पास हमारे
लेकर आया बम्बई मिठाई।।
दस पैसे में माला ले लो
घड़ी मिलेगी चार आने में।
मात्र अठन्नी काफी है एक
मोटरसाइकिल बन जाने में।।
पूरा रुपया लेकर आओ
तुम्हें दिखाएँ हवाई जहाज।
खाया खेला मौज मनाया
क्या था बचपन क्या है आज।।

थल सेना दिवस पर देशक सिपाही केर सम्मान में मिथिला केर भाव

January 15, 2021 in मैथिली कविता

हमर देशक सिपाही हमर शान छै।
देशक रक्षा में जिनकर प्राण छै।।
नञ भोजन केॅ कोनो फिकीर छै।
नञ छाजन केॅ कोनो फिकीर छै।।
जाड़ गरमी तऽ एकहि समान छै।
हमर देशक सिपाही हमर शान छै।। देशक रक्षा में….
छोड़ि जीवन केॅ आस
मोन में भरल हुलास
छोड़ि चिल्ला केॅ मोह
नञ तिरिया बिछोह
देशक रक्षा में तन मन प्राण छै।
हमर देशक सिपाही हमर शान छै।। देशक रक्षा में….
कहियो असमिया पहाड़ी
कहियो चंबल केॅ झाड़ी
कहियो समुद्रक किछार
कहियो नौका सवार
सब थानहि में ड्यूटी समान छै।
देशक रक्षा में तन मन प्राण छै।। देशक रक्षा में…
हिनकर बलिदानक नञ कोनो मोल छै।
देशभक्ति केर भाव अनमोल छै।।
ई भावे ‘विनयचंद ‘ करथि सम्मान छै।
देशक रक्षा में तन मन प्राण छै।। देशक रक्षा में….

लोहड़ी की बहार है

January 13, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

खुशियाँ अपार है
प्यार का त्योहार है।
वेहरे बीच आग जली
लोहड़ी की बहार है।।
गैया का गोबर पाथ-पाथ
पाथी लिया बनाय।
सुक्खा लक्कड़ काट-काट
लोहड़ी लिया सजाय ।।
घच्चक मूंगफली रेवड़ी
संग खिल्लां का भण्डार है।
आजा वीरां नच्चां गावां
लोहड़ी दा त्योहार है।। खुशियाँ अपार है……….
दादा जी दे गोद बैठ जा
काका काकी आन के।
लोहड़ी दा इतिहास सुनावां
खुशी परव महान के।।
दुल्ला भट्टी के शौर्यकथा की
कहानी का आधार है।।खुशियाँ अपार है……
संदल बार का राजपूत घराना
राय फरीदखान भट्टी का पुतर।
यूँ तो लुटेरा कहते थे कुछ
पर था वह रक्षक शेर सुपुतर।।
दयावान था दिल उसका
सब कहते सच्चा सरदार है।। खुशियाँ अपार है…..
सोलवीं सदी के उत्तरार्ध में
मुगलकाल की सुनो कहानी।
अमीर घरानों के खातिर
होती फरोख्त कुड़ी मुलतानी।।
देख दशा अबलाओं की तब
उसका दिल कहे अनाचार है।। खुशियाँ अपार है…
मुक्त करा नित कुड़ियों का
हिन्दू संग व्याह करबाबा था।
सुन्दरिए मुन्दरिए दो बहना थी
जिसका भी व्याह करबाया था।।
यही कहानी अच्छाई की
आज गाता सब संसार है।। खुशियाँ अपार है….
जाड़े में अमृत है अग्नि
ये कहते वेद-पुराण है।
‘विनयचंद ‘त्योहार नहीं
ये अग्नि का सम्मान है।।
खुशी -खुशी नित खुशियाँ बाँटो
खुशियों का त्यौहार है।। खुशियाँ अपार है…..

ठंढी में चाय

January 12, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

ठंढी का मौसम आया है।
संग मेरा मान बढ़ाया है ।।
पुलकित होकर कहता चाय।
बार – बार सब मांगते चाय।।
कभी खुशी कम हो जाती है।
जब बीच पकौड़ी आ जाती है।।
झुंझला के रह जाता ये चाय।
च्यवनप्राश क्यों आया भाय।।

मानव जनम न बेकार करो

January 11, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

अमृत बेला है अतिपावन।
उठो रे तू छोड़ विभावन।।
हरि का सुमिरन कर लो रे।
सैर करो तू सुबह -सबेरे।।
शीतल मंद हवा सुखदाई।
योग प्रणायाम करो रे भाई।।
तन -मन को निर्मल कर लो।
मीठी वाणी मुख से बोलो।।
कर्मशील बन रोजगार करो।
दीनन हित परोपकार करो।।
मानव जनम न बेकार करो।
‘विनयचंद’ भव पार करो।।

रिक्शा

January 11, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

एक निर्जीव -सी मोटर गाड़ी ।
शानो शौकत की बनी सवारी।।
ये भी मांगे तेल और पानी।
घिस गए पुर्जे हुई पुरानी।।
अपने जैसा वंदा अखीर।
खीचे रिक्शा लगा शरीर ।।
एक अकेला खींच रहा हो।
हम बैठे हो आखिर दो दो।।
खून पसीना बहा रहा है।
रामू से रिक्शा कहा रहा है।।
शर्म नहीं आती क्यों हमको।
न उचित मजूरी देते उसको।।
‘विनयचंद ‘ वो भी मानव है
उसका नित सत्कार करो।
उसका भी एक परिवार है
,सेवक बन आधार बनो।।

हिन्दी का समुचित विकास कैसे हो?

January 10, 2021 in Other

आखिर हिन्दी का विकास कैसे हो, एक विचारणीय विषय है। हिन्दी दिवस पर अपने मित्रों एवं सहकर्मियों को बधाई देकर एक औपचारिकता पूर्ण करने मात्र से क्या हिन्दी का विकास हो जाएगा। पूरे सप्ताह भर या फिर पन्द्रह दिन का हिन्दी पखवारा महोत्सव मना लेने मात्र से क्या हिन्दी का विकास हो जाएगा। यह एक यक्ष प्रश्न है।
वास्तव में ,अपने देश में वर्तमान कालीन परिवेश में भाषा तीन स्वरूप में है।
१. मातृभाषा, जो परिवार से समाज तक फैलकर आखिर में पूरे प्रांत भर में व्यापित होकर प्रांतीय भाषा में परिवर्तित हो जाती हैं।
२. राष्टभाषा, जो हमारे देश वासियों को आपस में जोड़ने में एक सेतु का काम करती है।
३. शैक्षिक, जो हमारे बीच जानकारियाँ, ज्ञान और विज्ञान से जोड़कर हम में पूर्णता लाकर हमें इस योग्य बनावें कि हम देश और विदेश दोनों परिवेश में सफल इंसान बनकर प्रस्तुत हों।
इन तीनों विन्दुओं पर विचार करने पर यही निष्कर्ष निकलता है कि हम अपने घर और समाज में बेशक मातृभाषा का प्रयोग करें, परन्तु दफ्तरों में और राष्ट्र स्तर पर हम हमेशा हिन्दी का अनुसरण करें।
पढाई -लिखाई और काम -काज की भाषा आखिर जो हो, पर आपसी बोल-चाल या अभिव्यक्तियों का आदान-प्रदान हिन्दी में हो तभी हिन्दी का सही मायने में विकास संभव है, अस्तु।
हिन्दी में काम करना आसान है, कृपया हिन्दी में काम करें।
–महात्मा गांधी

शायरी

January 10, 2021 in शेर-ओ-शायरी

साहित्य के वो योद्धा
तलवार नहीं उठाते ।
लड़ते जरूर हैं पर
लड़ाकू नहीं कहाते।।

जाड़ा का मौसम

January 10, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

जाड़ा का मौसम बड़ा सुहाना।
भाँति -भाँति के बनते खाना।।
गाजर का हलुआ सबको प्यारा।
खाओ मूंगफली भगाओ जाड़ा।।
गाजर शलग़म मूली का अचार।
बड़े स्वाद लेकर खाए सब यार।।
आंवले को खा पानी पीना।
मूंह का मीठा -मीठा होना।।
च्यवनप्राश भी खाने को मिलते।
गेंदा गुलाब के फूल भी खिलते।।
ताजे -ताजे गुड़ भी घर में।
घच्चक रेवड़ी सजा शहर में।।
ऐसा सुंदर शरद है काल ।
हम बच्चे हो गए निहाल।।
*************बाकलम********
बालकवि पुनीतकुमार ‘ ऋषि ‘
बस्सी पठाना (पंजाब)

कविता लिखने की कला

January 7, 2021 in Other

आओ बच्चों तुम्हें सिखाए
कविता लिखने की कला।
कुछ शब्दों को ध्यान में रखो
मिल जायेगी काव्य कला।।
कल खल गल घल -घल घल ।
चल छल जल झल -झल झल।।
डल ढल डल टल -टल टल ।
तल दल नल थल -थल थल।।
पल फल बल मलमल मल।
रल शल हल कलकल कल।।
यही सार्थक शब्द हैं प्यारे।
रल मिल बना कवित्व रे प्यारे।

टिम टिम करते लाखों तारे

January 6, 2021 in Other

टिम टिम करते लाखों तारे
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टिम टिम करते लाखों तारे।
देखो लगते कितने प्यारे।।
सुन्दर आकास सजा है ऐसे।
हीरे-मोती से थाल भरा है जैसे।।

बैठ के अंगना सदा निहारूँ।
एक भी मोती कभी न पाऊँ।।
एक तो आओ मेरे आंगन।
साथ में खेलूँ होय मगन।।

एक तारा जब टूटा था।
शुभ सगुन ये छूटा था।।
एक मनौती पूरण कर दो।
खाली झोली मेरी भर दो।।

चंदा को अपने पास रखो।
चंदा सम वीरा खास करो।।
सबकी मनौती पूरी होती।
तभी तो नाहीं गिनती घटती।।
*********बाकलम*********
बालकवि पुनीतकुमार ‘ऋषि ‘
बस्सी पठाना (पंजाब)

मुख खोलो

January 6, 2021 in Other

मुख खोलो कुछ बचन कहो
इसमें क्या कोई घाटा है।
रौनक क्योंकर खोई -सी है
आज पटल पर सन्नाटा है।।

हाय मैं सड़क बेचारी

January 4, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैं सड़क बेचारी
ज्यों अबला नारी।
पग पग दलित
परम दुखियारी।। हाय मैं सड़क बेचारी
काट दिया कोई कहीं पर
और बहा दिया पानी घर का।
भोजन के दोनें और छिलके
सब फेंक रहे मेरे ऊपर आ।।
चले बटोही नाक बन्द कर
थूके और देकर कुछ गारी।। हाय मैं सड़क बेचारी……
गंदे लोग गंदी प्रशासन
कमर टूट गई जिसके कारण।।
आखिर कहाँ गुहार लगाऊँ
मैं नहीं जाती दफ्तर सरकारी।। हाय मैं सड़क बेचारी…
जीर्णोद्धार होगा पुनर्निर्माण होगा
हो जाएगी अब मेरी काया पलट।
योजनाएं बनी कागज पर
और हो गई मेरी कुछ काटम- कट।।
निर्माणाधीन हीं बीत गए
कुछ मास वर्ष दो – चारी।। हाय मैं सड़क बेचारी….
ठेकेदार अभियन्ता आफिसर
दे लेके एक राग अलापे।
हमने तो कर निर्माण दिया था
टूट गए सब बाढ़ के ढाहे।।
‘विनयचंद ‘ अब मान भी जाओ
है फरमान सरकारी।। हाय मैं सड़क बेचारी…..

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