तुम से दूर रह कर भी, हमने अब जीना सिख लिया है। कौन है अपना कौन है पराया, हमने यह देख लिया है।।
तुम से दूर रह कर भी, हमने अब जीना सिख लिया है। कौन है अपना कौन है पराया, हमने यह देख लिया है।।
प्रेम की नदिया बहा दो द्वेष नफरत छोड़ दो देश के जन जन में एका की जगा दो भावना। दूर फेंको भेदभावों को सभी को प्यार दो, नफ़रतों के पोषकों को त्याग दो, दुत्कार दो। […]
निस्तेज-सी स्तब्ध-सी असहाय-सी अधूरी-सी निर्वेद-सी बैठी थी.. दुनिया की सबसे दुःखी आत्मा मैं ही थी… आपा खोकर भी मौन थी तुमसे दो टूक करने के बाद सारे ऱिश्ते खत्म करने के बाद क्रोध में आकर […]
वो जवानी ही क्या जिस जवानी में कोई कहानी ही न हो। वो मुहब्बत मुहब्बत ही नहीं जिसमें कोई अश्क ही न हो।।
आज फिर फलक से सितारे जमीं पर आने लगे है। शायद उनका ईशारा होगा जो मेरा एक अंदाज़ है।।
हर संतान है विशेष यहां अवसर भी भरमार है मालिक की नई रचना पुराने से हमेशा खाश है फिर भी हर पिता को पुत्र में कमी नजर आता है मंदिरों में सर झुका पाता जिसको […]
समय के साथ समझ बदल जाती है चाहने वालों की चाहत बदल जाती है प्यार करने वाले गलतियां सहित अपनाते हैं भरोसा है जिसपर कभी तोहमत न लगाते हैं ऐतवार हो तो प्यार हो ही […]
प्रभु ने कुछ और भी बाते समझाई थीं 20-25 साल हुए थे,नन्हे फ़रिश्ते ने कुछ भुलाई थीं किसी -किसी के याद रही, पर कोई फरिश्ता भूल गया प्रभु ने कुछ यूं समझाया था ……… फ़िर […]
मेरी जिंदगी की एक शाम थी मैं घर जा रही थी कोई नहीं था साथ में अकेली ही आ रही थी.. कुछ मनचले पीछा कर रहे थे रोज की तरह मैंने भी नजरंदाज कर दिया […]
राहें खत्म होती ही नहीं, इस जिंदगी की, हर मोड़ पर नया हुजूम मेरा इंतजार करता है, मुड़ जाऊं इस राह से, खामोशी को तोड़कर , आगे बढ़ने को जी चाहता है मगर यह ऐसा […]
कितनी कशिश थी, उनकी मासूमियत में। भूल जाते थे सारा जहां। जो बदल गए अब, एक तूफान के बाद। अब न झलक मिलती है, ना निशान दिखते हैं।..
कितने कोरे कागज रंग डाले, तुम्हारे लिए। फिर भी ना कह पाए, जो कहना था….
प्रभु ने कहा , नन्हे फ़रिश्ते से, तुम्हे धरा पर जाना होगा मानव रूप मिलेगा तुमको इस धरा को स्वर्ग सा सुंदर बनाना होगा नन्हा फरिश्ता पूछे प्रभु से, उस दुनियां में कैसे रह पाऊंगा, […]
*एक अनदेखे जंतू ने किया सबको ढेर* क्या नही तुमने किया क्या नही हमने कीया कंबरे मे रेहके बंद सबने नजाने काटे कितने पेहेर एक अनदेखे जंतू ने किया सबको ढेर सेवको के लिये ताली […]
किसी पर आख बंद कर एतवार मत करना किसी से टूट- टूट कर प्यार मत करना।। प्यार तो वो है जहाँ खोने का डर नहीं यह वो इवादत है जहाँ पाने की चाहत नहीं प्यार […]
मालिक मेरे ततू मुझे शरण दे बहुत थक चुका हू मै अब ना ढोया जाए ये बैरी दुनिया लब पर आए ना कोई नाम बस तू ही तू है हर शाम लोग मीठे बस स्वार्थ […]
कथाओं में जिन राक्षसों का जिक्र होता है, वे कोई राक्षस जाति नहीं थी बल्कि ये वे दरिन्दे ही थे जो आज भी अक्सर सरे राह बदतमीजी करते हैं छेड़ाखानी करते हैं, नारियों पर कुदृष्टि […]
मुक्तके – दौलत आखिरी | पाँच गज कफन दो गज जमीन दौलत आखिरी | लाखो करोड़ो की चाह हंगामा बदौलत आखिरी | आना जाना खाली हाथ लड़ाई किस बात की है | सब कुछ रह […]
प्रेम हमारे लिए इबादत है ईश्वर की दी हुई सबसे खूबसूरत इनायत है प्रेम विश्वास का दूजा नाम है विश्वास नहीं तो बस यह हिमाकत है
जीवन के पहले प्रभात में ली मैंने अंगड़ाई बाल्यकाल था बीता किशोरावस्था की बेला आई.. रोंक-टोंक थी ज्यादा मुझ पर समझ नहीं मैं पाती थी बचपन से मैं ट्यूशन पढ़ने चाचा जी के घर जाती […]
वो गोरी भी ना थी, ज्यादा सुंदर भी ना थी, ना देती थी प्रेम कभी, फ़िर भी वो योग्य बहुत थी कदम से कदम मिलाती थी वो साथ मेरे आती जाती थी मैं चाहता तो […]
सुबह सवेरे , आखोंदेखी घटना का है यह मंजर अरूणोदय से पहले पहुँची,बच्चों की टोली चलकर दौङ लगाते लगते थे, जैसे हो मंजिल पाने को तत्पर स्वाबलम्बी बनने को आतुर, पर मर्यादा का नाम नहीं […]
नारी तू जो चाह ले रच दे नव संसार तू होने वाले अपमान का करती क्यूँ न प्रतिकार तू ।। कभी दाव पे लगा दिया खुद तेरे ही परमेश्वर ने मौन हुए सब देख रहे, […]
परम सौंदर्य है सादगी, क्षमा उत्कृष्ट बल । अपनापन अत्युत्तम रिश्ता, परिश्रम तकलीफों का हल ।
Instead of to give and to get Do, just double for happiness Forgive and forget…..
अभी-अभी कुछ बूंदों से रूबरू हुए, चमकते हैं मोती से, बरसते हैं बुंदों की तरह। पर आयानास ही नहीं बरसते। जब बनते हैं गम के बादल, सिमट जाते हैं पलकों पर। फिर गिरते हैं धीरे-धीरे […]
क्या नया है इस जीवन में, वही रोज की शाम सुबह है। जब हम थक जाते हैं, फिर उम्मीद के झरोखों से, झाकते हैं। बदल जाता है वह सब कुछ, हर सुबह नई-सी लगती है, […]
बिन बुलाए आते हैं गमों के सागर, मुसीबतों के तूफान, और कभी चाहकर भी नहीं होती, खुशियों की बारिश , मुस्कुराहटों की बौछार।
आईने तू इस तरह से मत दिखा तो शक्ल मेरी इन दिनों यौवन में हूँ चिंताएं मेरी लाजमी हैं। सोचता था मैं, कड़ी मेहनत से तारे तोड़ लाऊं। लेकिन यहां तो सारे पथ हैं बन्द […]
फिर वही, कहीं से आयी घूंघरू की आवाज़। दिल को लुभा रही है, फिर वही पुरानी साज।।
मुझे मिले नहीं भगवान हाय, मन्दिर के भीतर। मैं बना रहा नादान हाय, मन्दिर के भीतर।। मातु-पिता सच्चे ईश्वर हैं क्यों न तू पहचान करे। जन्म दिया और पाला-पोषा पल-पल हीं कल्याण करे।। सेवा बिना […]
वो हर कदम साथ देती थी मेरा, चाहे जितनी मुसीबतों ने हो घेरा.. हर मन्दिर में मेरी सलामती की दुआ मांगती थी, मैं बन जाऊं बड़ा यही मुराद मांगती थी.. पैरों में जूते भी ना […]
खत्म होगा इन्तजार, स्वागत को कब होंगे तैयार वह सुहाना पल जब कोरोना मुक्त होगा यह संसार इस टूटन-घुटन पङी जिन्दगी से है सभी बेजार बस फिर से हो रब की नियामत सुखमय हो संसार
तुम बिल्डर हो उम्र में इल्डर हो हो सके तो मेरे मन के किसी कोने में अपना घर बना लो। वीरान -सा छाया है हर तरफ यहाँ पर अपने प्यार का सुंदर -सा शहर बना […]
तस्लीम नहीं उनकी हिमाकत हरहाल में करेंगे अपनी हिफाज़त मुमानियत लगाए अपनी आकांक्षाओं पर नहीं तो भूल बैठेगे हम भी अपनी सराफत मकबूल नहीं तेरी अनैतिक मनाहट मान दोगे तो करेंगे हम तेरी इबादत
क्यूँ करें उनकी हिमायत उद्धत रवैया जो अपनाए हुए हैं खुद पे लगा पाते नहीं मुमानियत बदस्तूर आतंक बन छाए हुए हैं
तुम और हम एक ना हो पाए इसका कोई मलाल नहीं चलो एक तजुर्बा तोह हुआ जिंदगी साथ नहीं ना सही यादों का पिटारा तोह हुआ ना तुम गलत थे ना मै सही वक़्त गलत […]
जो मिला नहीं वह कभी तेरे लिए बना नहीं उसी की चाहत मे क्यों जिए जाता है जो तेरे पास है उसी मे खुश रहना सीख इसी का नाम मिडिल क्लास है
सोचा रहा था मैं, इश्क़ है बेदाम की। बाद में पता चला, इश्क़ है बड़े काम की।।
रफ्ता-रफ्ता चलते-चलते पहुँच गए हम किस मंजिल पे बोध नहीं है, सुध-बुध खोके मक़बूल नहीं,सब अर्पित करके (मकबूल-सर्वप्रिय)
कहीं हीर की टोली तो कहीं रांझे की टोली। अंजुमन में गूंज उठा शेर व ग़ज़ल की बोली।।
ढूढ़ते हैं रब को हम मंदिरों, गिरिजाघरों में भूल जाते हैं कि ईश्वर हैं स्वयं अपने घरों में। देख लो माँ-बाप को ईश्वर दिखेगा आपको बस जरा सच्ची नजर हो रब दिखेगा आपको। जो घरों […]
जब वो अपनी स्याह भरी गेसूओं को अपनी अंदाज से संवारने लगी। खुदा की कसम तब वादियों के नियत भी धीरे धीरे बदलने लगी।।
कभी वो नचाती थी उसे, अब सत्ता उसे नचाती हैं, गांव को गोद लेना, तो बात पुरानी ठहरी , अब मीडिया को भी, गोद लिया जाता है।
खूबसूरती को तुम्हारी, क्या नया उपमान दूँ, उपमान तो कितने ही बेहतर दूं ,भले न दे सकूँ लेकिन इतना तो कर सकूं कि घर के बाहर व भीतर तुम्हें उचित सम्मान दूं।
आज हमारा जीवन रक्षक, अन्न- दाता कर्म भूमि छोड़ कर दर – बदर सड़कों पर, संघर्ष करता, गरीब हर साल और गरीब होता जाता, सदियों से हक के लिए लड़ता , हर बार ठगा जाता […]
क्या करूंगा “अमित “जा के उनके शहर में। वफा के बदले मिला बेवफ़ाई उनके शहर में।।
मैंने तुम्हें जिताया , उम्मीद का बटन दबाकर, सोचा था कि बढ़ाओगे रोजगार को मेरे, मगर तुमने बढ़ाया, सिर्फ अपना पेट।
मुझको अगर जीतना है , तो ज़िद कभी ना करना, बस हृदय को; थोड़ा-सा छू जाना।
ये जो उदासी है तेरे अंदर, वो खुशी में बदल जाएगी। तू उठ तो सही,संघर्ष के लिए , वक्त तो इंतजार में है तेरे, किस्मत भी बदल जाएगी।
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