Saavan pratiyogita me सहभाग लेना चाहती हुं ! मेरी कविता स्वीकार करें. *शहीद* शहीद हुवा हैं मेरा सैनिक युद्धभूमी गलवान हम सबको अभिमान शौर्य का भारत हैं बलवान !! शस्त्र उठाओ अस्त्र उठाओ पवित्र भूमी […]

जागो हे भरतवंशी अलसाने की बेर नहीं । सहा सबकी साज़िशों को,करना है अब देर नहीं ।। शालीनता की जिनको कदर नहीं,विष के दाँत छिपाये है मौकापरस्त फितरत है जिनके,क्यू उनसे हम घबराये है फ़ौलाद […]

ये रणबांकुरे भारत के,सीमा पर देखो खड़े हैं हम चैन से सोएं रातों को, दुश्मन से वो लड़े हैं गर्मी का मौसम हो,या पड़े कड़कती सर्दी भारत मां की रक्षा करते ,पहन के फौजी वर्दी […]

भोजपुरी कविता (श्रिंगार रस )- चित चितवत | चंचल रूप चित चितवत निखरत निरखत नैन हारे | बिजुरी सम चमकत दमकत हिय प्रिय चैन हमारे || लपकत डोलत झुकत कटी कोमल डोलत कमल डार | […]

गजल- उजाला हो जाये | कभी हमारे भी घर आइये अंधेरों मे उजाला हो जाये | आपके रूप की चाँदनी मे अंधेरों का मुंह काला हो जाये | फैला है हर तरफ कोरोना हम आए […]

तुम रहे हमेशा आगे ऐसे तूफान भी न छू पाए तुम्हारे देश के एक- एक कण को……. कोई अपना बनाकर न ले जाए….. जान हथेली पर लेकर तुम चीर लाते हो दुश्मन की आंख….. तुम […]

एक समय की बात है। गुरू द्रोण अपने दो शिष्य युधिष्ठिर एवं दुर्योधन को पास बुलाया।द्रोण -“तुम दोनो संसार को देख आओ, कौन अच्छा है कौन बुरा है “।दोनो आदेश के पालन करने के लिए […]

जाग हे पार्थ जाग तू, दे काल को अब मात तू, काल के कपाल पर अमिट रेखाएं खींच, अब तू काल समर जीत। स्वयं के सम्मान हेतु , विश्व के कल्याण हेतु , अपने अंदर […]

सरहद की ये आड़ी-तिरछी लकीरें, किसने खिंची क्या पता! गर जो वो तुमको मिले, मुझे भी उसका पता देना!! बस पुछुंगी इतना ही, एकता ना तुमको भायी! सीमांत बना कर क्या मिला, इंसानो से ऐसी […]

मेरा आन वतन, मेरा बान वतन, मेरा शान वतन। गैरो में दम कहाँ जो करे, हमारे वतन को पतन।। अनेक आए अनेक गए, बाल न बांका कर सका। मेरा भारत भारत ही रहा, कोई न […]

हे कर्मवीर हे धर्मवीर हे परमवीर तुम शौर्य महान, हेभारत मा के वीर सपूत इस देश के लिए कुर्बान है जान बलिदान तेरा न व्यर्थ जाएगा तेरा लहू इस देश के काम आएगा न झुकने […]

सडकें ठहर गई सी लगती हैं हर तरफ सन्नाटा ही सन्नाटा है बचकर निकलना अब चमन में फूलों के संग मिल गया कांटा है। कोरोना का कहर कहें या कहें प्रकृति से खिलवाड़ की सजा […]

नभमंडल को देख हमने तो बस ये सीखे हैं। एक चांद के बिना लाखों सितारे फीके हैं।। प्रेम नगर में आकर भी प्रीत की रीति न सीखे हैं। दु:ख दरिया को पार करे वो जीवन […]

कवियों की तो बात ही कुछ और है | सोच की उनका नहीं कोई ठौर है, मन की गति उनकी , प्रकाश से भी तेज़ है| दुनिया में उनसे आगे , नहीं कोई विशेष है […]

( दुनियां ) एक सोच में डूबी हूँ क्या करूँ और किस काम को छोड़ दूं…. महाकाल , भयावह काल , कोरोना काल का यह समय किस तरफ़ मोड़ दूँ….. समय माँगे जा रहा है […]

“आजादी के मतवाले हँसकर फंदे पर झूल गये, बोलो उन वीर सपूतो को हम सब कैसे भूल गये। मंगल पांडेय ने देखो आजादी का बिगुल बजाया था, टोली संग अपनी अंग्रेजो को खूब मजा चखाया […]

देखो चली नौजवानो की टोली। खेलेंगे लाल फिर लहू की होली।। चारो दिशाओं में गूंज रहा है। इंक़िलाब जिंदाबाद की बोली।। अग्निपथ पे चल पड़े है सपूत। ललकारे छोड़ के आसमां में गोली।।

एक बार मां बीमार पड़ी हफ्तों उपवास जब जिद करके मैंने एक निवाला उठाया मेरे हाथ बीच में ही थाम के उसने पूछा दबी आवाज में पापा ने खाना खाया? पापा को आदत है अक्सर […]

आज फिर ए वीर, इम्तहान की घडी आई है। जागो ए सपूत, माँ फिर बेटा कह के बुलाई है।। उठा के बंदूक हाथ में शरहद के तरफ चलना है। माँ के कर्ज चुकाने का यही […]

भोजपुरी सावन शिव भजन 9 – गाँजा के चिलमिया | बाबा बदनाम ही पिये मे गाँजा के चिलमिया | गंजवे ने रूसाइ दीया गौरा जी भवनिया | बाबा को भगतो का नसा | भगतों का […]

न पायल पर, न काजल पर न पुष्प वेणी पर मरते हैं हम वो पागल प्रेमी हैं जो मातृभूमि पर मरते हैं । सियाचिन की ठंड में हम मुस्तैद है बन इमारत माँ सरहद की […]

“लज्जा नही आती जब देश के खिलाफ़ बोलते हो, जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करते हो। इसी देश मे जन्मे यही पले और बड़े हुये, बोले दुश्मन के जैसे क्यों शब्द तुम्हारे […]

सोचता हूँ, क्यों ये बंदूकें है तनी? उन जीवों पर जो दिखते हूबहू हम जैसे, नेताओं के कठपुतले बन, मात्र खून के कतरे है बहे। सोचता हूँ जब माता-पिता के विषय में, आँखों से मन […]

तूझसे मिलकर लगा कि कुछ यूं जिंदगी बिताएगे कुछ तुम बोलोगे कुछ हम कहते जाएंगे यूं ही समय,दिन और ऋतु बदल गई न जाने किसकी नज़र हमारे रिश्ते को लग गई कि अब न तुझे […]

छोटी-सी ज़िंदगी में, हर कोई अपने सपनें सजाता हैं। विवाह तो सभी करते हैं… वह फौजी हैं साहब, जो आठवें वचन के साथ गृहस्थ जीवन अपनाता हैं। मात-पिता की सेवा को जो, भार्या घर छोड़े […]

आप लिखते खूब हो पर कभी गाते नही हो, मंच पर समर्पण भाव मे नजर आते नही हो। आपकी रचनाओं मे जीवन की सारी सच्चाई दिखती है, हर पाठक को उसमे अपनी ही परछायी दिखती […]

शरहद पर से पापा मेरे फोन किए थे शाम को। कुछ दिन धीरज रखना बेटा आऊँगा मैं गाम को ।। पढ़ना लिखना खेल कूद में सदा रहो तुम आगे। दादा दादी और अम्मा का रखना […]

तेरे कांधे पे सर रख, रोना चाहता हूं मां। तेरी गोद में सर रख, सोना चाहता हूं मां। तू लोरी गाकर, थपकी देकर सुला दे मुझे, मैं सुखद सपनों में, खोना चाहता हूं मां। तेरी […]

सिर पे कफ़न बांध चले हम, ईट के जवाब पत्थर से देने। देखे किस में कितना है दम, चले बस हम यही आजमाने।।

मां तुझ से है मेरी यही इल्तज़ा। तेरी खिदमत में निकले मेरी जां। तेरे कदमों में दुश्मनों का सर होगा, गुस्ताख़ी की उनको देंगे ऐसी सजा। गर उठा कर देखेगा नजर इधर, रूह तक कांपेगी […]

🍀🌷🌹🙏नमन् है मेरे देश के वीर सिपाही को 🍀🌹🙏 ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, कोटी कोटी प्रणाम है मेरे देश के वीर सिपाहियों को जो अपनी जान की परवाह किए बिना मेरे देश की जान बचाने के लिए कोई […]

‘एक सवाल’:- अजीब विडंबना है देश की एक ही समय पर एक ही बात के लिए स्त्री पुरुष के लिए अलग-अलग नियम क्यों? यह बात मेरी समझ से परे है। और आए दिन यह सवाल […]

तै कहूँ जा मोर आँखि के आघू म रैबे भले तोला लागहि कोनो नई देखत हे पर तय का जानिबे मोर नजरे नजर म झूलत रथस कभू मोर पीठ म छुरा झन घोपबे प्रेम म […]

जब जब ज़ुल्म कीआंधी हमारे देश में आयी। तब तब हम प्रहरी अपने देश की लाज बचायी।। निशाना हमारा चूक जाए ऐसा कभी हुआ नहीं। गर निकल गयी गोली तो समझ ले तेरी खैर नही।। […]

बदन पर लिपट कर उस घड़ी तिरंगा भी रोया होगा जब उसने अपने हिन्दुस्तानी फौजी को खोया होगा। माँ की छाती में भी दूध उतर आया होगा जब उसने अपने शहीद बेटे को गोद में […]

लिपट कर तुझसे तिरंगा भी रोया था उस पर मरने वाला आज उसमें ही घुसकर सोया था भारत माँ के सपूत ने चैन शान्ति बाँटी थी भारत माँ के लिए एक माँ ने अपना लाल […]

हिन्दी सावन शिव भजन 1- बाबा बैजनाथ के धाम मे | चलो सब कावर लेके बाबा बैजनाथ के धाम मे | सुल्तानगंज से जल लेकर चढ़ाये बम बम भगवान मे | अबकी कावर मे सब […]

चीन होइ या पाकिस्तान होइ इनके तीर(पास) खाली दहशतगर्दइ हँइ कोई अउर कामु तऊ आवति नाइ खाली दिमाग शैतान केर घर होति हई। तबहें तऊ चारिउ ओर खाली आतंकवाद फैलावति हँइ

जंग का ऐलान हम नहीं करते, पर जंग छिड़ जाने पर पीछे नहीं हटते। यही तो है हम हिन्दुस्तानियों का हुनर, सिर कटा सकते हैं पर झुका नहीं सकते। आखरी साँस तक लड़ते हैं हम […]