आतंकी गुंडे मवालियों का जात धर्म नहीं होता, सपनों में भी हत्यारो से अच्छा कर्म नहीं होता। गुंडे बदमाश के लिए आलाप कढ़ाने वाले आस्तीन, जाहिलो के लिए दिल में कोई मर्म नहीं होता।।

संवेदनाएं मर चुकी हैं आज सब किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो सब दिखावा है मेरे व्यवहार में किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो. डॉ. सतीश पांडेय, चम्पावत उत्तराखंड

मानों कल हि की बात हो…… एक नन्ही सी गुड़िया, मेरे गुड्डे से ब्याही थी। दुल्हन के लिबास में, आंगन में खिलखिलाई थी। मुस्कुराहट पर उसकी, दुनिया सारी वार दू्ं। दुआओं-आशिर्वाद संग, उम्र भर का […]

मां के आंगन को, पकवानों की खुशबू से महकाती है। कभी बहन बनकर, कभी दोस्त बनकर, रास्ता दिखाती हैं। ख़ामोश मुस्कुराहट से ही, सब-कुछ कहजाति है। पर कभी – कभी तो, बड़ी-बड़ी आंखों से हमें […]

बेशक जहरीले होते हैं फिर भी इनकी होती अर्चन। कालव्याल से कालक्षेप हित करते हम सब वन्दन।। ऐसा धर्म सनातन अपना जिसका न कोई शानी है। ‘विनयचंद ‘ संग सारी दुनिया दिल से ये सब […]

फिर शान से लहराया तिरंगा, देखो आज अपने देश में। बड़ा सुहावन लगे जन गण मन गीत, आज अपने देश मे।। कहीं इंक़िलाब जिंदाबाद तो कहीं जय जवान जय किसान। यही नारे से प्रेरित हो […]

अम्मा, एक बात कहूं ये जो तुम बकरी भैस गोबर घास में लगी रहती हो न अच्छा है, तुम अकेली तो नही बाबू की अलग सुनने की आदत, तुम्हारी थकान, तुम जो आकर शाम को […]

हज़ारों सवालों से भरी ये ज़िन्दगी कभी खुद के वजूद पर सवाल उठाती कभीचलती भी,कभी दौड़ती भी है ये थक कर कभी चूर चूर हो जाती हर दिन नए हौसलों को संग लेकर शाम ढलते […]

कैसे समझाएं तुम्हें कि हम कोई झुंड नहीं है मवेशियों के कैसे यकीन दिलाएं तुम्हें कि हमारे भी कई ख्वाब हैं छोटी-छोटी ख्वाहिशें हैं जिन्हें हम भूल नहीं सकते तुम हमारे जीवन में आते हो […]

धरती जल रही अम्बर जल रहा जल रहा सकल जहान । हाल कहे क्या पशु-पक्षियों के हैं व्याकुल सब इन्सान ।। सघन छाँव करके मैं तरूवर सबको पास बुलाया । खुद जलकर सूरज किरणों से […]

सुनाती नहीं मैं अपना गम किसी को तो खुशियों का इजहार करूँ कैसे, मुश्किले है मेरी राह में बहुत मैं अपनी मंजिल पर आगे बढूँ तो बढूँ कैसे?

वतन फ़रामोश तेरा अंतिम घड़ी एक दिन आएगा। तेरी चौड़ी छाती पे देखना, हमारा तिरंगा फहराएगा।। बहुत सह लिए तेरा जुर्म एक दिन फैसला हो जाएगा। सुभाष भगत आज़ाद की दास्तान मेरा पंजा बताएगा।। फौलादी […]

भोजपुरी निर्गुण भजन 1-धियान करे दा | सोनवा के बदनवा रामा जनी करा जियनवा रामा | मनवा भजे दा भजनवा भीतरे तनवा | रमे रमाए दा ये मोरे रामा | ब्रमहवा मे मनवा लगाये दा […]

भीड़ है बहुत दिखता तन्हा हर इंसान हैं एक दूजे से मुँह फुलाये खड़े मकान हैं सूरज को भी जगह नहीं झांक पाने की फुर्सत किसे, दूजे की देली लांघ जाने की फिर भी पड़ोसी […]

सच कभी हमारा दामन नहीं छोड़ता  कोई भटकाव हमारा प्रण नहीं तोड़ता  जब भी विरोधाभास का आभास हुआ  हम कोई प्रतिक्रिया देते वक़्त नहीं भूले  अपने शब्दों को बोलने से पहले तोलना  फिर भी जाने […]

जटिल है किसी को पूर्णतः समझना  अस्थिरता रहती है सबके जीवन में क्यों मानक तय करना किसी के लिए गुज़रता है हर कोई अलग संघर्षों से हर शख्स में दो किरदार जीवित हैं  अपनी सच्चाई […]

आने से पहले ही गैर जीवन का पुरौधा बन गया जन्म से पहले ही जननी की कोख का सौदा हो गया अंश किसी का,गर्भ किसी का ,किसी और गर्भ में प्रत्यारोपित लोग कौन ,देश कौन […]

पैर जैसे ही पड़े आंगन में बरसों बाद एक एक पाथर मचल उठा, सुबक पड़ा उसके आने के अहसास से ये तो वही पैर थे जो बरसों पहले बच्पन में दिनभर धमाचौकड़ी करते थे आंगन […]

चारो तरफ कयामत ही कयामत है। जिधर देखो करोना के ही क़हर है।। महामारी में जी रहे है हम और आप। फिर भी उम्मीद के किरण जलाए बैठे है।। आज नहीं तो कल होंगे कामयाब […]

जिस महफ़िल में कोई जानता ना हो, उस महफ़िल में जाना क्यूं है जिस महफ़िल में,अनसुना कर दें तुझे उस महफ़िल में, कुछ सुनाना क्यूं है मुखौटे लगा कर बैठे हैं लोग जहां, वहां तुझे […]

रंग-बिरंगे नज़ारे हैं बेहिसाब.. खो न जाना इन नज़ारो में.. ज़रा सम्भलना, यह दुनिया हैं जनाब। साथ बैठ के खाते जिस संग, वहीं दगा कर जाते हैं और बड़ी-बड़ी बातें करते बेहिसाब, ज़रा सम्भल कर […]

ज्यों पले इक मां की गोद में, नन्ही सी जान। त्यों पले तू भारत की गोद में, पाकिस्तान। समुद्र है हिंदुस्तान मेरा, लहरें हैं विशाल। एक लहर भी क्रोधित हो तो, तू हो जाए बेहाल। […]

धरा दुल्हन सी सज गयी है रिम झिम रिम झिम बूँदे जैसे गा रहीं हैं पेड़ पौधे और हरियाली झूम झूम के नाच रहे हैं अम्बर गर्जा बिजली तडकी ढोल नगाड़े से पीट रहे हैं […]

जिसे पल-पल दिल से चाहा, उसका एक कतरा भी हमारा न हुआ। कसमें- वादे हमसें थे, पर खुशी का हम संग बटँवारा न हुआ। झूमते थे, ज़माने के जश्नो में जो, हम संग एक पल […]

लेके काँधे पे बन्दूक दिल में देशप्रेम अटूट चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर। न हीं जीवन की मोह न हीं परिजन बिछोह देश के खातिर दिया सब कुछ है छोड़। चल पड़े […]

करारा जवाब मिलेगा, अभिनंदन अपने पास होगा जब पाकिस्तान का बात होगा, 56″ इंच का साथ होगा, युद्ध जब चीन से होगा, जवानों का बलिदान होगा, फिर भी उसका अभिमान होगा, राजा रानी में तकरार […]

करारा जवाब मिलेगा, अभिनंदन हमारे पास होगा, जब पाकिस्तान का बात होगा, 56″ इंच का साथ होगा, युद्ध जब चीन से होगा, जवानों का बलिदान होगा, फिर भी उसका अभिमान होगा, राजा रानी में तकरार […]

पहली बारिश….। आज सुबह से बारिश रुकने का नाम नही ले रही जानती हो, पहली बारिश याद आ गयी, उस रोज देर तक बस स्टॉप पर ठहरे रहे, अजनबी से,तुम मुझसे अनजान थी और मैं […]

प्रिय सैनिक, जो तुम हो तैनात सीमाओं पर, तो हम हैं निश्चिंत घरों घर। है तुम्हारी रडार सी पैनी नजर , तो हमारे नैनो में बसता है सुकुं प्रति पहर। तुम निभाते हो ड्यूटी अति […]

उठा के बंदूक हाथ में, ए वीर तुम अब बढ़े चलो। जान हथेली पे रख के, अपना कर्तव्य निभाते चलो।। इस देश को तुम्हारे जैसे ही, सपूतों की जरुरत है। जंग की घड़ी आई है, […]

गुरुवर तव चरणन में, है तीन लोक राजित। जिसने लिया सहारा, वो खुशियों में विराजित।। लाखों कमल है जग, तव चरण कमल आगे। दिल में बसा ‘विनयचंद ‘ बन जाओगे बड़भागे।।

कविता – घोड़ा दबा दे सिपाही तीखी नजर से सिपाही आज ऐसा निशाना लगा दे, मार दे देश के दुश्मनों को उनका नामोनिशां तू मिटा दे। तूने सीमा में डटकर हमेशा दुश्मनों के छुड़ाये हैं […]