नौ की लकड़ी नब्बे खर्च हुआ इस लाकडाउन में, कोरोना के प्रहार से फिसल गये महामारी में। पेट के लिए भाग दौड़ लगाते जान पर बाजी लगा, टेट को भरकर रखने वाले कंगाल हुए महामारी […]
नौ की लकड़ी नब्बे खर्च हुआ इस लाकडाउन में, कोरोना के प्रहार से फिसल गये महामारी में। पेट के लिए भाग दौड़ लगाते जान पर बाजी लगा, टेट को भरकर रखने वाले कंगाल हुए महामारी […]
दो गज के फंदे से खुदको क्यों मार गए इस बेरहम दुनिया ने अब क्या किया जो खुद से ही हार गए चंद शब्द कहता हूँ RIP सुशांत सिंह राजपूत के लिए 🙏🙏
एक औरत अपने आठ महीने के बेटे के संग बीच चौराहे पे आयी। वह हमेशा की तरह एक मैली थैली में से एक कटोरा निकाल कर बैठ गयी। आने जाने वालों से कहती -“पापी पेट […]
लोभी दुनियां में जी गई मैं, विष का प्याला पी गई मैं ना मीरा हूं ना नीलकंठ, फिर भी सब झेल गई मानों प्राणों पर खेल गई, हुई भावहीन,हुई उदासीन कंचन सी निखर गई, टूटे […]
सिक्के इकट्ठा करके कोई धनवान नहीं होता। एक हीरा हीं काफी है जहाने अमीरी के लिए।।
कुछआम ऐसे होते हैं जो खाए नहीं जाते। जब खास के साथ हो तो सताए नहीं जाते।।
गिरेबां अपनी जब भी झांकता मैं। हर बार पाता, कहाँ तू और कहाँ मैं। आईना मैं भी देखता हूँ, वाकिफ़ हूँ, और भी बेहतर हैं ‘देव’ तुझसे जहाँ में। देवेश साखरे ‘देव’
मौके और मिलेंगे घुमने के फिर बेहद। गर आज ना लाँघे अपने घरों की हद। शिकायत थी, परिवार के लिए वक्त नहीं, समय बिताने का अवसर मिला सुखद। देवेश साखरे ‘देव’
हर कविता को ‘नाइस’, ‘गुड’ कहकर झूठी तारीफ़ कहने की वजाए हम सही मूल्यांकन करे तो बेहतर होगा. तभी हम सब अपनी कविता में कुछ बेहतर कर सकेंगे. आप लोगों के क्या कहना है?
वो इंसान अपने हर काम में फंसता है जो दुसरो के दुःख पे हँसता है !
मुहब्बत के नश्तर मिटाने वाले, तुझे क्या पता है चाहत ए आलम। तू ने कभी मुहब्बत 💘की ही नहीं, तू क्या समझे मेरे दर्द ए आलम।।
फ़रेबी से पूछो फ़रेब के सुत्र। बहुत दिव्य है ए मूल मंत्र।।
कहते है इश्क़-ए-लत, बहुत बुरी बला है। फिर भी लोग,अपने को कहाँ सँभाला है।।
भूतकाल के डर को वर्तमान में ख़तम कर भविष्य आगे भड़ाना है तुझे कुछ कर दिखाना है तुझे कुछ कर दिखाना है दुनिया के जाल से निकलकर तुझे अपना मान बढ़ाना है तुझे कुछ कर […]
भोजपुरी लोकगीत कजरी – रोपनिया ना | जबले मिलिहे ना झुलनिया | हम ना करबे रोपनिया ना | जबले बाजीना छम छम पयजनिया| हम ना करबे रोपनिया ना | हमसे हरदम सइया करेला बहाना | […]
भोजपुरी देवी गीत -हमार काली मईया | चली अइली चरन तोहार काली मईया | पूरा कर दा मनसा हमार काली मईया | जापिला हरदम माई तोहार सुनर नामवा | सुफल करा हमरो माई मानुष जनमवा […]
कविता – बरखा तुम आओ मिटे जलन तपन गर्मी बरस तुम जाओ | मनाए हम उत्सव तेरा बरखा तुम आओ | तप रहे खेत ताल नदी पोखर तुम कहा | फटी जमीन प्यासे सब पशु […]
अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रमिकों के नाम प्रस्तुत मेरी एक बाल गीत बाल गीत – मजदूरी ना कराना | लगा लॉक डाउन बाल मजदूरी ना कराना | भूखे बच्चो भोजन […]
झांक हमारे अंदर लहू है, पानी नहीं। आज़मा कर देख, हम किसी से कम नहीं क्यों इतराता है, तू अपनी ताक़त पे। गर आज हम नहीं, तो कल तू भी नहीं।। अपना हक़, सिन्हा चीर […]
बाहुबल से सबल रहे, फिर क्यों विफल रहे। केश पकड़ घसीटा गया, भरी सभा मुझे लुटा गया। दुःशासन का दुस्साहस तुम देखते रहे, दुर्योधन का अट्टहास कर्ण भेदते रहे। वरिष्ठ सभासद मूक दर्शक बने रहे, […]
ऐ ज़िन्दगी मैंने तुझको दिया क्या है तेरे लिए किया क्या है तूने मेरे गम पे खुशियों के वस्त्र ढक दिए तेरे लिए मैंने सिया किया है ना रखा तुझे खुश ना रखा ऐशो आराम […]
किसी पत्थर की मूरत में, लगी सूरत खुदा की सी उसे पूजा उसे माना, उसे अपना खुदा जाना बड़ी भूल हुई अरे हमसे, आंखों से आंसू निकल पड़े, व्यर्थ गई सब साधना निरा पत्थर का […]
तुम्हारी जुल्फों की कैद मिले तो हर गुनाह कर जाऊं । कत्ल करूं कातिल बनूं फिर तेरे पहलू में आऊं। वीरेंद्र
कोई किसी के सुख में सुखी ना होये ना होये किसी के दुःख में दुखी बदल रहे नकाब बस कुछ मतलबी
धधक रहा है मुल्क, और कुछ आग मेरे सीने में। वफ़ादारी खून में नहीं तो फिर क्या रखा जीने में। वतन परस्ति से बढ़कर, और कोई इबादत नहीं, वतन परस्ति का सुकून, न काशी में […]
कविता- इंसान मे जानवर हाथी एक जानवर मगर इंसान की इंसानियत ढोता रहा | थके मांदे एक शेर के बच्चे को अपनी सुंढ मे ढोता रहा | इंसान कहने को आदमी मगर जानवर से बदतर […]
Ye tasveer suna rahi h, darde manjar ki kahani is tarah Na jane ab vaapas aana ho kab Is shahar, is gali, aur is jagah Tune o corona kya kar dala Kaam chhina, sukh- sukun […]
भारतवासी बना प्रवासी, कैसा किस्मत का खेल है मजदूरों की भीड़ से भरी, यह भारतीय रेल है घर जाने की जल्दी में, मची ये रेलमपेल है भाग रहे गृह राज्यों में ये, जैसे यहां कोई […]
क्षणभर में क्षीण हो छलकी आंख भारत मां की जब मजदूरों के छाले सीने में लेकर बैठ गई निज संतान का दर्द दिखा तो ऐसी दर्द की आह,,,,, भरे जैसे लोह पथ गामिनी सीने के […]
सपनो की दुनिया आँखों में लिए चले थे दूर, पता नहीं था हो जायेंगे वो इतने मजबूर | षडयंत्रो की चालो में जो बुरे फंसे मजदूर, कहाँ पता था हो जायेगा वक़्त भी इतना क्रूर […]
हां मजदूर है; सो मजबूर हैं, उनकी क्या खता; जो घर से दूर हैं पैदल चल- चल; थक कर चूर हैं, सड़कें सारी; तपती तंदूर है, ट्रेनों में भी; भीड़ भरपूर है, सरकारों को आखिर; […]
वक्त ने कैसा करवट बदला बेज़ार होकर। तेरे शहर से निकले हैं बेहद लाचार होकर। पराया शहर, मदद के आसार न आते नज़र, भूखमरी करीब से देखी है बेरोजगार होकर। तय है भूख और गरीबी […]
अबला थी जो नारी अब तक सबला बनके दिखलाएगी पुरुष के हाथों की कठपुतली अब दुनिया को चलाएगी । घुट घुट के यह मरती रही मुंह से कभी भी आह न की पुरुष ने अपनी […]
मीठे मीठे सपने संजोने दो होता है जो उसे होने दो कल का पता नहीं क्या होगा बाहों में और थोड़ा सोने दो ।……….. जागी है अखियां हम सो गए हैं यादों में उनके हम […]
जब मैं हुई उदास, तो तेरा मुस्कुराना याद आया जब हुई तुझसे दूर, तो तेरा पास आना याद आया तू नहीं आया, पर तेरी याद चली आई तेरी याद से मिलकर, मुझे मुस्कुराना याद आया […]
हमारा कसूर क्या था आखिर क्यों मजदुर हुए हम दर दर भटकने पर मजबूर हुए हम इस महामारी से तकरार है रोजी रोटी की दरकार है अपनों से मिलने के लिए बेक़रार हुए हम मरने […]
अब छोड़ चले हम परदेश । जब से लगी किस्मत में ठेस ।। घर परिवार में मिल जायेंगे । वहीं पे रूखी सुखी खायेंगे।। एक तरफ करोना के शैलाब । दूसरे तरफ मौत के शैलाब […]
गजल- प्यास पानी हो गई | तुझसे बीछड़ दर्द इश्क अब कहानी हो गई | आँख से उमड़ा समंदर प्यास पानी हो गई | छलकता सागर आंखो से सैलाब की तरह | तेरी यादे मेरी […]
गजल- अवकात नही | चाहे जितना ज़ोर लगा ले दुशमन डर हमे कोई खास नहीं | डरा दे भारत कोई अफसोस मगर इतनी भी अवकात नही | लौकी का बतिया नहीं भारत जो अंगुली देख […]
कविता- इंसान मे जानवर हाथी एक जानवर मगर इंसान की इंसानियत ढोता रहा | थके मांदे एक शेर के बच्चे को अपनी सुंढ मे ढोता रहा | इंसान कहने को आदमी मगर जानवर से बदतर […]
भोजपुरी देवी गीत- दे दा दरसनवा | हाथ जोड़ी माई के मनाई दिन रात हो | दे दा दरसनवा सिरवा रखा तनी हाथ हो | केहु नईखे आगे पीछे तोहरो बा सहारा | डुबत नईया […]
भोजपुरी देवी गीत- माई के दीवाना | मन मगन हो गइल माई के दीवाना | गावे भजन पूजे माई के जमाना | बिना माई केहु कल्याण ना होला | बीना किरीपा केहु महान ना होला […]
भोजपुरी देवी गीत- घंटा घनघोर | बजे लागल घंटा घनघोर | भरी गइल अँखिया के कगरी | घेर लेलस माई भाव बड़ी ज़ोर | तरसे मोर बरसत नयनवा | माई काहे दिहली हमरा के छोड़ […]
गजल- खुबसुरत ख्वाब हो | मेरे इश्क ए सफर का तुम जवाब हो | मेरे महबूब तुम एक खुबसुरत ख्वाब हो | सिवा तेरे किसी की चाहत न रहीं अब | बागो बहारों का तुम […]
भोजपूरी देवी गीत (आल्हा धुन) – मइया न देर लगाय | मुंह से महिमा केतना सुनाये,कालिका बरनी ना जाय | जेतना गाई ओतना पाई ,गावत गावत पार ना पाय | जय जय हे काली भवानी […]
याद आती हैं वो बचपन की बातें जब पापा के हाथों से चोटी करवाती थी। माँ लोरी गाकर सुलाती थी। कहाँ गई वो बचपन गुड़िया ? जिसकी शादी मैं रोज़ कराती थी। बाबा की भजन […]
चल रहे छोड़कर हम तो तेरा शहर दोस्तों। लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद- ए-कहर दोस्तों।। साथ तेरा मिला हमें कदम -दर-कदम। चीन से आके वाइरस ये बड़ा बेरहम।। है ये कैसा मचाया जुल्म -ओ-कहर दोस्तों। चल […]
विलासता से कोसों दूर हूँ। हाँ, मैं मजदूर हूँ। उँची अट्टालिकाएँ आलिशान। भवन या फिर सड़क निर्माण। संसार की समस्त भव्य कृतियाँ, असम्भव बिन मेरे श्रम योगदान। फिर भी टपकते छप्पर के तले, रहने को […]
महफ़िलों से डर लगने लगा, तन्हाई हमें रास आने लगी दोस्तों में हमें ऐ ख़ुदा, दुश्मनी की बांस आने लगी समझा था जिसे अपना हमसफ़र, उसी ने बदल दी है अपनी डग़र दो राहे पे […]
एक दिन रस्ते पर मिले दो नौजवान मैंने पूछा दोनो से क्या है आपका शुभ नाम पहला बोला मेरा नाम है सच सब सोचते मैं हूँ ढीठा दूसरा बोलै मेरा नाम है झूठ दुसरो से […]
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