विरान सहरा, चढ़ता सूरज, और ये तन्हाई। दूर तक पानी का कोई निशान, देता नहीं दिखाई। शायद ये आखरी सफर है, बस हर पल तेरी याद आई। देवेश साखरे ‘देव’

भोजपुरी पूर्वी लोक गीत- कररवा ये रजऊ कई के कररवा ये रजऊ| करेजा काहे काढ़ी हो गईला | पलटी के ना देखला ये करेजउ | धोखा मे हमके डाली हो गईला | बोला बोला ये […]

जब लेते हैं दहेज़,और लेते हैं कलेजा किसी का जो उसका अभिमान है। त्यागते है वो सबकुछ जो उनका सम्मान है, तो क्यों लेते है दहेज़,दहेज़ ही क्या एक शान है क्योकि दहेज़ एक अभिशाप […]

भोजपुरी गीत- दिल्ली शहरिया देखा दा मोर बलमुआ हो हमके दिल्ली शहरिया दिखा दा | दिल्ली मे जाई कुतुबमिनरिया घूमा दा | मोर बलमुआ हो हमके दिल्ली शहरिया दिखा दा | सुनीला के दिल्ली दिलवालन […]

भोजपुरी गीत- ये देवर जी अपने भईया से बोली भेजवा दा रज़ाई ये देवर जी | आवेना हमके जड़वा मे ओंघाई ये देवर जी | आई गईले पुस जड़वा के दिनवा | थरथर कंपावे बैरी […]

हम सरकारी नौकरी के पीछे पागल हैं,दीवाने हैं हम भविष्य की चिंता में देखो दीवाने हैं,मस्ताने हैं । लोग समझते यही रहे हमें आखिर कौन-सा रोग लगा? हम बेरोजगारी रोग से पीड़ित है हमें गवर्नमेंट […]

सारा घर दे देना पापा कोना एक बचाए रखना। हाथों को हाथ सौंपने देना उंगली एक छिपाए रखना यादों की बगिया में घर की एक छोटा फूल नाम का मेरे पानी देना- ना देना थोड़ी […]

तीरे-नज़र से दिल जार-जार हुआ। ऐसा एक बार नहीं, बार-बार हुआ। देख उनकी तीरे-निगाहें, ऐसा लगा, कि उन्हें भी हमसे, प्यार-प्यार हुआ। करीब आते, हकीक़त से वास्ता पड़ा, मोहब्बत नहीं, दिल पे वार-वार हुआ। जिंदगी […]

बीती रात जब मैं यादों के आगोश में जाने लगी कल्पना के स्वर्ग में तुमको जरा पाने लगी तभी मेरा ह्रदय वेदना की आग में तपने लगा और यों कहने लगा ‘तुम भी क्या अनोखी […]

भोजपुरी गीत- अपने देशवा के तनी बने दा कपतान गोरी हमके देशवा के | बदला चुकाइब तहिया हमहु अपने देशवा के | तनी बने दा कपतान गोरी हमके देशवा के | जाइब जहिया सिमवा दुशमनवा […]

पुस की रात जरा सा ठहर जा। तेरे तेज चलने से, मैं भूल जाता हूँ अपनो को, उनके दिये जख्मों को, उन पर छिड़के नमको को। पुस की रात जरा ……………. तेरी ठंड की कसक […]

फिर आई वो पूस की काली रात। मन है व्याकुल, उठा है झंझावात।। पत्तों से ओस की बूँदें टपकना याद है मुझे। आँखों से आँसूओं का बहना याद है मुझे। सन्नाटे को चीरती, तेज धड़कनों […]

ख्वाब मेरे बादल जैसे ख्वाहिशें मेरी अंबर सी लम्हा लम्हा यादें गरजे अखियां बही बारिश सी मुसलसल तेरी आस जगाए सावन का यह महीना तुम साथ नहीं हो क्यों मेरे मोहब्बत वही मेरी हवा सी।

आखिर क्या कहूँ इस पूस की रात को ? झकझोर रहा है मेरे दिल की जज़्बात को । आखिर क्या कहूँ इस पूस की रात को? घनघोर अंधेरा छाया है देख मेरा मन घबराया है […]

पूस की रात। थरथरा रहा बदन जमा हुआ लगे सदन, नींद भी उचट गयी रात बैठ कट गयी। ठंड का आघात पूस की रात। हवा भी सर्द है बही लगे कि बर्फ की मही, धुंध […]

पुराना साल जा रहा है और नया साल आ रहा है नए साल की तरह तुम भी आओगी ना जिस तरह मैंने तुम्हें चाहा तुम भी मुझे चाहोगी ना भूल जाऊंगा सारी शिकायते तुम्हारे आने […]

पूस की रात मे दुनिया देख रही थी सपने आलस फैला था चहु ओर रात भी लगी थी ऊँघने. मैंने छत्त से देखा बतखों के झुण्ड को तलाब मे तीर सी ठण्डी हवा चलने लगी […]

तेरी हँसी- वादियों का मारा हूँ मैं, तुझे जिस्मों-जान तक उतारा हूँ मैं। प्यार करके कहती हो, शादी-शुदा हूँ मैं। तो कान खोलकर सुन लो, दो बच्चों का बाप होते हुए, अभी तक कुँवारा हूँ […]

सूरज के उग्र रूप की तपिश में मैं जल गई नदी में उतरी तो भंवर में बह गई भवर ने फेंका रेत के ढेर में खड़े होकर देखा रेत ही रेत थी चारों ओर दिखाई […]

तालीम और इलाज, तिजारत बन गई है। कठपुतली अमीरों की, सियासत बन गई है। मज़हबी और तहज़ीबी था, कभी मुल्क मेरा, वह गुज़रा ज़माना, अब इबारत बन गई है। लोग इंसानियत की मिसाल हुआ करते […]

बहुत याद आएगा मुझे मेरा गाँव। पनघट पे हलचल पीपल की छाँव।। भोली -सी सूरत, मंदिर की मूरत, टनकती वो घंटियाँ निर्मल मुहूरत, खेतों में खरहा मुंडेरों पे कांव। बहुत याद आएगा मुझे मेरा गाँव।।

प्यार फूलों से कितना किये जा रहा, दूर रहके भी तेरा हुआ जा रहा। तुम अपने उपवन में हर दम महकते रहो, भौरा बनकर मैं तेरा हुआ जा रहा। प्यार के राग को तुम छुपाती […]

तेरी खुशी के लिए मंदीर-मस्जिद भटका हूँ। तेरी तन्हाई में पल-पल तड़पा हूँ। तु मिल तो सही एक बार इस पागल दिवाने से। तेरे एक मुलाकात को जन्मों-जन्मों का तरशा हूँ।

शायरों का हुआ गर्म हर लफ़्ज़ इस सर्द पूस की रात के महीने में दिल भी बहका बहका सा लागे इस सर्द पूस की रात के महीने में गुड़ सा मीठा अदरक सा तीखा पूस […]

फकीर बन तेरे दर पर आया हूं एक मुट्ठी इश्क बक्शीश में दे देना आशिक समझ दर से खाली ना भेजना अमीर हो तुम चंद सांसे उधार दे देना किस्मत की लकीरें हैं जुड़ी तुझ […]

कर गुज़रता कुछ तो, ज़िन्दगी रंगीन हो जाता। जो किया ही नहीं, वो भी ज़ुर्म संगीन हो जाता। मैं क्या हूँ, ये मैं जानता हूँ, मेरा ख़ुदा जानता है, आग पर चल जाता तो, क्या […]

कभी ना भूलेगी वो पूस की रात……. ठंडी सर्द हवाओं और बारिश की बूंदों के साथ…… मैं और मेरी तन्हाई बस दो ही थे। उस दिन वो बारिश की नर्मी और चादर की सिलवट वैसी […]

🌹🌹कभी ना भूलेगी वो 🌹🌹 पूस की रात……. ठंडी सर्द हवाओं और बारिश की बूंदों के साथ…… ⚘⚘⚘ मैं और मेरी तन्हाई बस दो ही थे। ⚘⚘⚘ उस दिन वो बारिश की नर्मी और चादर […]

ये रास्तें है कैसे हमसफ़र नही मिलते, छूट गए जो पीछे उम्र भर नही मिलते! सूख चूके है उनके दीदार के इंतजार में, हरे-भरे अब ऐसे शजर नही मिलते! तार-तार होते रिश्तों पर खड़ी दीवार […]

कहीं खामोश लम्हा है,कहीं ये शोर कैसा है, कहीं पर शाम मातम की,ये सुख का भोर कैसा है! कहीं मासूम जलते है ,पिघलते मोम के जैसे, सियासत का कहीं झगड़ा,बढ़ा हर ओर कैसा है! कहीं […]

ममता का आँचल सर पर हरदम रख लेती है! मुझको ज्यादा देकर वो खुद कम रख लेती है! माँ से बढ़कर कोई नई है इस दुनियां में दूजा- सारी खुशियाँ देकर वो खुद गम रख […]

फिर वो याद आई हैं फिर वो याद…….. जिसके रेश्मदार बाल जिसकी हिरणी जैसी चाल, यौवन है कमाल, पग-पग में वेवफाई हैं। फिर वो याद आई हैं फिर वो ………. जिसके कजरारे नयन, रुप है […]

तेरी अदाएँ, तेरी नज़ाकत मार गई मुझे। तेरी शोख़ियाँ, तेरी शरारत मार गई मुझे। बेशक मोहब्बत है, पर डरता हूँ इज़हार से, मेरी खामोशी, मेरी शराफ़त मार गई मुझे। मैं करना चाहता था, अकेले दिल […]

तोड़ कर हद , ज़माने की , हम कहीं दूर , सितारों में मिलें , बहा लाए , वहीं , वक़्त फिर से , बिछड़ी कश्ती से हम, किनारों पे मिलें , हों , रस्म-ए-दुनिया […]

🧕 मेरी बिटिया🧕 By Naveen Dwivedi दिल रो रहा है टूट कर, कैसी होगी मेरी बेटी ? इस पातक भरे समाज मे, खा जाते हैं बोटी-बोटी। कैसी होगी मेरी बेटी ? जब छोटी-सी थी वो, […]

जब तक वो जिदा थी खाने की लाचारी थी। मरते ही श्राद्ध की भोज बहुत भाड़ी थी। जीवन में रूखी-सुखी भी नसीब न थी श्राद्ध में लाव-लस्कर की तकलीफ न थी। उसे जो एक ग्लास […]

है लाख सितम ढाहे, ऐ जिंदगी, शिकवा करूं मैं किससे किससे, मिलता नहीं सभी को जन्नत, सुख दुख दो पहलू हैं जिंदगी के, है आरजू पाने की जन्नत तो पार कर लेते हैं आग का […]

मिल जाती परछाई भी अगर तुम पीछे मुड़ कर देख लेते। दूर हो जाती गलतफहमी की ठंडक । अगर तुम यादों की धूप में दो पल खुद को सेंक लेते।