यूँ ना कर सितम मुझ पे, मुद्दतों से लौटा हूं , आईना बन के उसी नजर से देख नजर आउगा तुझे अगर कि साजिश, तो अब बिखर जाउगा में | :-अभिषेक शर्मा http://abhisharma260.blogspot.in/2016/06/blog-post_75.html  

जैसे गोरे गालों पर माँ काला टीका करती थी तुमने काली रातों में इक उजला चांद सजाया है तुम भी तो इक माँ हो आखिर.. – सोनित www.sonitbopche.blogspot.com

खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर, केवल जिल्द बदलती पोथी। जैसे रात उतार चाँदनी, पहने सुबह धूप की धोती, वस्त्र बदलकर आने वालों! चाल बदलकर जाने वालों! चंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा […]

उसने बन्दूक उठाई , मैंने कलम उसने गोली चुनी , मैंने शब्द उसने खून बहाया , मैंने आंसूं उसने घर जलाये , मैंने दिल उसने दीपक बुझाया , मैंने उसे जलाया उसने लोगों को सुलाया […]

मलय पवन बन, आ जाओ मन उपवन में, सजल नयन है,झील कमल है, लोक-परलोक का कौतूहल, है निज चितवन में । प्रखर  सूर्य  बन , आ जाओ मन दर्पण में, धूमिल छवि है, स्तब्ध पड़ी […]

यादों की गलियाँ सजी हैं, कुछ झालरें,पुराने दिनों की लगीं हैं, कुछ रंगी से दिन हैं बिछे, कुछ रेशमी रातों के पीछे। मेरी खिङकी के नीचे तेरा खङे रहना , चुपके से आकर,मेरी आँखें,अपनी हथेली […]

बुरा क्या था अगर इस दर्द के मै साथ में दिलबर… तुम्हारी याद भी चलकर मिटा लेता अगर थोड़ी… दवाखाने में क्यूँ छोड़ा जरा चलते तो मैखाने… दवा के साथ में दारू चडा लेता बशर […]

प्रेम पीपासा तृ्प्ती की आस, भटक रहा जीव अनायास, प्रेम व्याप्त है अपने अन्दर, ढूँढ रहा घट-घट के अन्दर, प्रेम ऐसा अनमोल खज़ाना, देने से हीं मिल पाता, माँग रहे सब प्रेम यहाँ देने को […]

खामोश हूँ मगर हर बात समझ लेता हूँ! तेरी नजरों की जज्बात समझ लेता हूँ! हरवक्त देख लेता हूँ ख्यालों में तुमको, तेरी साँसों की मुलाकात समझ लेता हूँ! Composed By #महादेव

ღღ__तेरे लब पे सिवा मेरे, कोई नाम आये तो बुरा लगता है; इक वही मौसम, जब हर शाम, आये तो बुरा लगता है! . जागते रहने की तो हमको, आदत हो गयी मोहब्बत में; नींद […]

नींद भी आती नहीं.. रात भी जाती नही.. कोशिशें इन करवटों की.. रंग कुछ लाती नहीं..   चादरों की सिलवटों सी हो गई है जिंदगी.. लोग आते.. लोग जाते.. सिलवटें जाती नहीं..   जुगनुओं के […]

 मेरे पापा (हर पिता को समर्पित) आज फिर ऊँगली पकड़ मुझे एक राह चलना सीखा दो पापा , कुछ यादें फिर साथ अपने रहे, कुछ बातें ऐसी बना दो पापा , देख युही आँखो में मेरे ,पकड़ मुझे हस् […]

ज़िंदगी में खुशियाँ मिली तो गम भी मिला मिली चोटें अक़्सर फिर मरहम भी मिला इसका अफ़शोस नहीं ‘मन’रोया हर राह पर अफ़शोस के जो चाहा हमेशा कम मिला

बहुत अमीर है जिन्दगी, लफ़्जो को सलीके से, बिठाने में वक्त बिताया करती, गर्मी में सर्दी, सर्दी में गर्मी, यूँ  विपरीत परिस्थतियों को, मात देते हुए खेल आगे बढ़ाया करती, बहुत अमीर  है  जिन्दगी, न […]

कागज पे हालाते-दिल लिखते हुये इक दिन मौत आ जानी है मुझे मरते , तड़पते , बिलखते हुये इक दिन मौत आ जानी है !! लापता है कई रास्ते मुझ में ,कल रात घर खोने […]

**ज़िन्दगी ठहरी रही और उम्र आगे चल पड़ी::गज़ल** (मध्यम बहर पर) उस ख्वाब की ताबीर जब शम्म-ए-फुगन में जल पड़ी, तब ज़िन्दगी ठहरी रही और उम्र आगे चल पड़ी l फ़िर कैफियत का ज़िक्र भी […]