ईश्वर का पता कहाँ है मन ढूंढता रहा है, कोई कहे यहाँ है कोई कहे वहाँ है। मगर जब गौर से देखा मुझे ईश्वर दिखा उसमें कि था जब भूख से व्याकुल खिलाई रोटियाँ जिसने। […]
ईश्वर का पता कहाँ है मन ढूंढता रहा है, कोई कहे यहाँ है कोई कहे वहाँ है। मगर जब गौर से देखा मुझे ईश्वर दिखा उसमें कि था जब भूख से व्याकुल खिलाई रोटियाँ जिसने। […]
रोशनी कर दो ना जला दो बल्ब सारे, देखने हैं मुझे दिवस में चाँद तारे। अंधेरे से बहुत उकता गया हूँ, मन भरी पीड़ को लिखता गया हूँ। अब मुझे जूझना है, नया स्वर फूँकना […]
हर अवसर भुनाना होगा मौका मिलेगा तुझे भी एक दिन मुश्किल से उसे बस कस कर लपकना होगा। हो अगर कंटक युक्त झाड़ी तो बीच में फूल बनकर महक के साथ महकना होगा। उदासी फेंक […]
संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को है शत शत नमन जिन्होंने बढ़ाई देश की शान हम करते हैं उनका वंदन संविधान निर्माण किया और पालन करना सीख लाया भीमराव अंबेडकर ने संविधान का निर्माण कराया।।
तब आप कितने सुन्दर थे पापा देख पुरानी फोटो, देखता रह गया मैं। फौजी वर्दी चमकता चेहरा, फौलादी बाजू, सीधे लंबे से, जाने कब की है यह फ़ोटो, मुझे याद है आपकी कर्मठता की ठंडी […]
धन है धन्य धन का राज है सबके दिलों में। बिना धन जिन्दगी का पथ कठिन। न हो धन पास जिसके दूरियां रखते हैं उससे, ठुंसा हो जेब में जिसके खूब धन, भले वह एक […]
कविता- तरस आता है —————————————— हे गरीबी तुझ पर – तरस आता है, क्या बिगाड़ तू पाई इंसान का| चाहे तू और बर्बाद कर दे, चाहे तू और भिखारी कर दे, जो इच्छा हो तेरी […]
जन्म लेकर जब आए, इस दुनियाँ में हम पहली बार। जो भी दृश्य देखा, चकित हृदय हमारा था। बारिश की पहली बूॅंदों ने भी, चकित इतना कर डाला पानी ,पानी कहकर हमने, वो दृश्य सबको […]
उपवन में फूल खिले, महक आई सुबह सुबह की मारुत, उड़ा लाई। याद आया वह मुझे, नलिनी फूल, या नासिका से जुड़ी, यह है भूल। देख अनदेखा किया, जाते रहे ख्वाब में वो ख्वाब क्यों, […]
छोटी सी प्यारी गुड़िया रानी, पापा की राजकुमारी है । पापा की गोदी में खेले, पापा को सबसे प्यारी है। अपनी बातों से मन मोह ले, पापा भी हॅंसकर यूँ बोलें फूलों जैसी है कोमल […]
गोरी-चिट्टी, काली चमड़ी को रगड़ रगड़ क्यों धोता है। यह सब कुछ है नश्वर है जग में कर्मों का लेखा-जोखा होता है। कौन है गोरा कौन है काला यह ना रखता कोई याद, अच्छे व्यवहार […]
आँख में देखना कुछ नया भाव होगा, धड़कते दिल में कोई घाव होगा। वो पुराना हो या नया हो मगर रख हौसले से भरना होगा, मुकाबला समस्याओं से डटकर करना होगा। कुछ नए परिवर्तन को […]
आया है नव वर्ष सभी को खूब बधाई हो गए हम तो कृतार्थ घर नवदुर्गा आई घर नवदुर्गा आईं , लेकर छोटा रूप धूप, दीप, नैवेद्य और लेकर थोड़ी धूप मैया का वंदन किया मिला […]
हिंदू पंचांग के अनुसार आया नव वर्ष हमारा दुख बीते और सुख आये है यही संदेश हमारा है यही विनती हमारी मिट जाए सबके क्लेश प्रेम ही प्रेम दिखे चित ओर ना हो कोई द्वेष […]
नया वर्ष आया है मित्रों मनाओ इसको तन मन धन से मां दुर्गा का वंदन करके नतमस्तक कर दो सिर को चैत्र मास आरंभ हुआ आया है नवल प्रभात धन्य भारतीय संस्कृति धन्य है इसकी […]
आज आरती का लेकर थाल, दुर्गा माॅं की करूँ वन्दना। बीमार पड़ी है घर के अन्दर, मेरी जननी मेरी माँ। कोरोना ने कैसा सितम किया है, देखो कैसा जुल्म किया है। आज उसे देखन को […]
रम तू जा माँ के चरणन में घर में माता भूखी सोये, फिरे क्यों मन्दिरन में। छोड़ दिखावा मूरख प्राणी, गर्व न कर निज तन में। बूढ़ा होगा जब तेरा तन, तब रोयेगा मन में। […]
कविता -राम —————- राम तुम्हें फिर आना होगा आओ बाण उठाना होगा आतंकवाद से मुक्त बना भारत को आर्यावर्त बनाना होगा चाहे पाक के पाले आतंकी हों चाहे जम्मू के पत्थरबाज ही हों रोती है […]
तुम ही दुर्गा नव दुर्गा तुम नारी तुम ही नवदुर्गा हो। जननी हो तुम जन्म की दाता। सब कुछ तुम ही हो माता। तुम से ही संसार बना है, दया, प्रेम, चाहत, स्नेह, करुणा और […]
कविता- मोह छोड़ कर थप्पड़ मारो ——————————————— मां मुझको चलना सिखा दे, डगमग करते पैर मेरे अंगुली पकड़ के राह दिखा दे, बहुत बड़ी गलती किया हूं, सभ्यता संस्कारों को भूल गया हूं, आदर्शों से […]
सुना दे मन मीत एक कविता जिससे हो झंकार हृदय में, और बहे सुख सरिता। दूरी रख ले उलझन मुझसे, ऐसी कह दे कविता। भर दे थोड़ा सा आकर्षण, मुझे बना दे ललिता। बन जायें […]
🕉️ नव संवत है विक्रमी, अतिपावन मधुमास। राक्षस नाम धराया, पर आनन्द की आस।। १।। नव किसलय तरुवर सजा, चहुदिश नव उल्लास। जनम मास है राम की, नौराता भी खास।। २।। घर घर रामायण पाठ,अरु […]
यह हिन्दू नूतन वर्ष सभी को, हृदय में प्यार दे, खु़शियाँ अपरम्पार दे नए गेहूँ, चावल धान दे शिक्षा का वरदान दे दुखियों के दुख दूर कर सकूँ, सब को सदा सम्मान दूॅं ऐसा मुझे […]
हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि की, आप सबको शुभकामनाएँ। यही है नववर्ष हमारा, यही जीवन में खुशियाँ लाए। एक जनवरी को क्या हुआ, क्या ऋतु बदली कोई? या बदला कोई मौसम। क्या फ़सल बदली? […]
नई फसल के आगमन का प्रतीक बैसाखी, खुशियों के आने का संकेत बैसाखी। नई फसल कटती है खेतों से, आती है घर। रौशन करती कृषक का जीवन, खुशहाली लाती घर-आंगन। नई फ़सल के आने से, […]
सुबह सुबह में इतना चहचहाती हो, क्या बात करती हो बताओ ना, कहीं इंसान की बातों की कोई बात करती हो, या मिलने-बिछुड़ने का कोई जज्बात रखती हो। बताओ ना। भूख की प्यास की आवास […]
एक गुलाब एक सी पत्ती, काँटे, डंठल एक समान फिर कौन रंग भरता है इनमें, कहाँ है रंगों की खान। लाल-सफेद, पीले, गुलाबी कितने सारे हैं गुलाब, इतने सारे रंग व खुशबू मन विस्मित सा […]
नवजात बच्चे दूध पी रहे थे, भूख उसे भी लगी थी, दूध पिलाने में भूख भी बहुत लगती है दूध पिलाने में। उर जल रहा था आमाशय के तेजाब से, बच्चों को छोटी सी झाड़ीनुमा […]
The weather is very beautiful Scattered light, New coplen came in pain… Every tree is laden with flowers The moon is peeping out the window, The sun falls asleep on the roof…
सुबह सुबह सूरज की किरणें लगती हैं कितनी मनभावन, नई लालिमा युक्त चमक है, लगती हैं निखरी सी पावन। खुश होकर चिड़िया बोली है उठो सखी सुबह हो ली है, एक झाँकती है बाहर को […]
इतना छोटा था उसे सेवा करके बड़ा किया था सोंचा और फले-फूले, चारों दिशाओं में फैले इसी नीयत से, उसे बड़े गमले में लगाया खूब खाद डाली खूब जल पिलाया बच्चों की तरह जिसे रोज […]
किसी ने कहा लिखा करो किसी ने कहा पढ़ा करो यूं वक्त ना जाया करो कविता तो बाद में भी लिखी जा सकतीं हैं वक्त रहते पढ़ा करो.. मेरा हृदय बोला दुनिया की कब तक […]
कविता-होगा कोई लोभी ——————————- होगा कोई लोभी, होगा कोई ना समझ, जो तुम्हें खरीदे रुपयों में वरना तुम्हारी कीमत चवन्नी से भी कम है, अरे…. होगा कोई आंख का अंधा, जो तुम्हारी सूरत को ,उगता […]
कुछ है बात निराली सी मेरे भारत की बात अद्भुत है। खूबसूरत है हिमालय पर्वत, जहाँ से मीठी हवा आती है, ऐसी लगती है जैसे हो शर्बत। गंगा जमुना व नर्मदा जैसी बह रही हैं […]
साहित्य लिखो क्यों तुम आपस में लड़ते रहते हो कभी तुम जीतो कभी वो हारे क्यों जीत-हार में रोते हो पैसे कमाने के साधन तो दुनिया में हैं बहुत पड़े साहित्य लिखो क्यों पुरस्कार की […]
बड़ी बात करते हैं लोग पर बड़ा ह्रदय ना रखते हैं कुछ अभिलाषा मन में जागे तो फिर कुबड़ाई करते हैं लेखनी को दूषित करते हैं अपनी कुत्सित सोंच से दूसरे की ना सुनते बस […]
ममता किसने भर दी मन में गाय को बछड़े से ममता है माँ को बेटे से। ये ममता किसने भर दी मन में। ममता जिसने पैदा की वह ईश्वर सबसे ऊपर है, ममता का गुण […]
हंसी आ गई मुझको कि अब आया तुमको होश, जब यहां अवसान पड़ा था तब ना आया यह जोश अपना यह जोश संभालो करो परिश्रम यदि पड़ जाओ अकेले तो देंगे साथ हम देंगे आपका […]
नाच रहा मन मोर क्यों, आज बिना बरसात, है यह आहट प्रेम की, या है कोई बात। या है कोई बात, उमड़ क्यों नेह रहा है, साजन पर है गीत तभी यह गेय रहा है। […]
बेटा बीमार है ना होश है ना करार है कल से एक निवाला तक गले ना उतरा बेटे को बहुत बुखार है क्या करूं ? कैसे जियूं ! यही तो मेरे जीवन का आधार है
मेरा भारत मेरा देश उन्नति को बढ़े, हर तरफ हरियाली और खुशहाली रहे। दूध की नदियां बहें खेत सोना उगल दें, मेघ जल वर्षा करें, वृद्धजन हर्षा करें, युवा मंजिल को पायें हर घड़ी मुस्कुराएं, […]
किसी की जीत या किसी की हार का बाजार शोक नहीं मनाता। एक व्यापारी का पतन दूसरे व्यापारी के उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, प्रेम इत्यादि की बातें व्यापार में खोटे सिक्के […]
पवन मनोहर झौंका लाई साथ में उसके खुशबू आई, सद्कर्मों का अच्छा ही तो फल मिलता है मेरे भाई। अच्छी सोच रखो मन में तो अच्छा ही होने लगता है, बिना स्वार्थ के रब की […]
खो गए खेल आज बचपन के, रम गया बालपन मोबाइल में, आँख का सूख रहा पानी है टकटकी आज है मोबाइल में। वक्त है ही नहीं बचा जिससे संस्कारों को सीख लें बच्चे, कुछ रहा […]
कविता – मां और कवि —————————- मां और कवि में , अंतर इतना, सीता और बाल्मिकी में, अंतर जितना, मां सुधा अगर है, कवि पारस पत्थर है, मां सरिता गर है, कवि सागर की गहराई […]
कविता- आलसी तू आलसी है ————————————– आलसी तू आलसी है तू बेरोजगार नही है आलस छोड़ काम कर वरना तेरी खैर नही है, डिग्री हैं डिप्लोमा हैं है पास तेरे कोई हुनर, कुछ नहीं है […]
ऐसी बातें क्यों करें, जो देती हों पीड़, सबसे अच्छा बोल दें, अपनों की हो भीड़। अपनों की हो भीड़, सभी अपने हो जायें, बेगानापन छोड़, सभी अपने हो जायें। कहे लेखनी छोड़, चलो सब […]
सब ओर खुशी छा जाये दुख की छाया पड़े न किसी में। मन मानव का होता है कोमल आशा होती है मन में, आशा टूटे कभी न किसी की, दिल टूटे न कभी भी, इच्छा […]
समझाना चाहते थे हम उनको क्या और वे समझे हैं देख लो जी क्या ये देख के लगता है यूं कश्मकश में चुप रहना ही बेहतर है इस जगत में शब्द का उत्तर शब्द ही […]
युद्ध से एक सैनिक घर आया, बिटिया को द्वारे पर पाया। एक हाथ में थैला था उसके, दूजा पीठ पीछे छिपाया। पांच साल की छोटी बिटिया के, चेहरे पर आई मुस्कान। उसने सोचा पापा के […]
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