हिम किरीटनी, हिम तरंगनी, युग चरण के रचयिता हे साहित्य देवता है ऋणि हम,‌करते है अर्पित श्रद्धा-सुमन, साहित्यअकादमी से विभूषित,शोभित पद्यभूषण तेरा यश है फ़ैला, क्या भू-तल क्या गगन।। परतंत्रता के दर्द को दिखाती रची […]

आज वही दिन है जब‌ मेरी मुझसे पहचान हुई मुझमें भी है लेखन क्षमता इक नई खूबी की आभास हुई मेरे अल्फ़ाज़ मेरी ख़ामोशी की आवाज़ बने इक नई सुबहा हुई नयी उम्मीदों से मुलाक़ात […]

आसान बहुत है चाह अच्छा बनने की पाल लेना पर तय सफर पर बढ़ते रहना,बङा ही कठिन है आस किसी के मन में जगाकर, खुद के घर की रौनक घटाकर, पर हित में इच्छा को […]

श्रमिकों पर फ़िर टूटा कहर, चल दिए छोड़ कर शहर। काम नहीं है क्या खाऍंगे, यही सोच गाॅंव जाऍंगे। क्या करें बेचारे मजदूर, लाॅकडाउन में हुए मजबूर। लाॅकडाउन भी जरूरी है, इनकी भी मजबूरी है। […]

बोझ खींचे जा रहा था वह हाथ ठेले से, पेट भीतर तक खींच कर जोर लगा रहा था। आँतें एक दूसरे से चिपक कर सपाट होती जा रही थी। हड्डियां व पेशियाँ खिंचती चली जा […]

अपनी पृथ्वी बचालो – पृथ्वी दिवस पर मेरी नवीन रचना हे भूमिपुत्र आज अपनी, पृथ्वी को बचालो तुम, स्वार्थों से दूर रहकर हाथ अपने मिला लो तुम। पृथ्वी खतरे में है यारों, पर्यावरण बचा लो […]

पतियों की हालत पत्ति की तरह श्रम कर कर गिरे पत्ति की तरह कहने को ही घर का मालिक है दिन श्रमरत रहा रात चौकीदारी है बीबी की‌ शादी तो हुई शीशे से पति से […]

पृथ्वी ही ग्रह जहां जीवन नदी झरने पहाड़ वाले वन जल वायु मिट्टी जैसे संसाधन अत्यधिक इनका न हो दोहन पृथ्वी दिवस जैसे आयोजन सजग करते हैं हमें सज्जन आलस त्याग आओ हर जन धरती […]

मैं तुम्हारी धरोहर मैं पृथ्वी बोलूँ आज अपने दिल की, सुनू,देखूँ मैं भी तुमसा तुम ये जानो, बोला तुम्हरा हर शब्द हर पल मैं सुनती, सुनू वो जिसे सुन खिल उठती मैं भी, दिल न […]

कहने को हम भी कहते हैं धरा को धरती माता, है कितनी पीड़ा धरती मां को,यह कोई क्यों ना समझ पाता। करते हम अपने कृत्यों से,धरती मां को यूं गंदा पर्यावरण को दूषित करने में […]

संतापों क्रम यह कब बदलेगा, मानव जाति पर आया संकट कब निपटेगा। हा हा कार, चीत्कार विभत्स करुण क्रंदन कब रुकेगा, ओ प्रकृति !! तेरा यह आक्रोश कब थमेगा। लाखों जीवन लील चुका यह विनाश […]

बाँधे कमर नई आशा से फिर दिल्ली पंहुचा था वो रोजी रोटी खोज रहा था, बच्चों को भी भेज रहा था। कई दिनों के बाद जिन्दगी ढर्रे में आने वाली थी, मगर वही फिर कोविड़ […]

यह जीवन है अजर-अमर तो क्यों द्वेष-भाव तुम रखते हो वाचन से तो अच्छे हो पर मन में विष क्यों रखते हो, मन में विष क्यों रखते हो जीवन चार दिनों का जीवन ना देता […]

क्यों हो जाते ख्वाब हैं झूठे मिट जाते सब उजियारे चहुँ ओर फैल जाता है अंधियारा उजड़े-उजड़े गलियारे पुष्पों की सुगंध खो जाती निर्मल पावन क्यों गर्म हो जाती पानी की मीठी-मीठी धारे विपरीत दिशा […]

ख्वाबों में जो देखा उसको सच करने की बारी है धोखाधड़ी अब बहुत हुई सच्चाई की बारी है नेताओं के भाषण से अब ना हमको विचलित होना है सच्चा नेता कौन है हमको बस उसको […]

जीना हमने सीख लिया बरसों बाद… गिरे पड़े थे उठ कर बैठे सपने मेरे जग कर बैठे जगती आंखों देखे सपने उनको पूरा करना सीख लिया जीना हमने सीख लिया बरसों बाद…

सीखा तो हमने भी बहुत कुछ है तुम्हारी लेखनी से कैसे अविरल, निर्भीक चलती है शब्दों की सुंदर कारीगरी तो रहती ही है साथ में भावों की लहर बहती है हम तो समझते थे कि […]

अरि के आगे अडिग रहना है, नहीं अरि से झुकना है। हिम की ऊॅंची चोटी से, यह हमने भी सीख लिया है। फलों से लदी डाली ही अक्सर, झुकती देखी दरख़्तों की। सीधे खड़े अकड़े […]

बच्चों की आदत रही खाकर भूल जाने की फल उठा बस ले चले चाहत मरी ठिकाने की किसमें गलतियां ढूंढे हम किससे अब शिकायत करें दोष देगा जमाना दोनों को दरार है जिसके तहखाने में […]

अपनी चाहतों के लो आज वो फिर गुलाम हो गये कैसी होती थी सुबहें अब कैसे शाम हो गये छुपते अपने ही घर जो दोस्तों के आने जाने पर उन्ही दोस्तों की चाह में जहां […]

जब मै बूडा हो जाउगा,जब आँखो के दीये बूझ जाएंगे, कया तबी तुम मुझको चाहोगी,कया तबभी तुम मुझको प्यार करोगी, बोला ना. जब मेरी आँखे धुधली हो जाएंगी,जब चेहरे की झुर्रियां ज़िन्दगी की कशमकश से […]

जिंदगी का पल पल बीत जाता है, हम देखते रह जाते हैं, सुबह से शाम तक शाम से सुबह तक मिलन से विरह तक, बीते पलों की जिरह तक नहीं कर पाते हैं, कल से […]

गांव के खेत बंजर होते गये गांव के बुजुर्ग पेड़ रोते गये, पुराने घर आँगन टूटते रह गये। जो गया लौट कर आया नहीं। शहर का हो गया गांव फिर भाया नहीं। वह चबूतरा टूटता […]

नभ में एक तारा टूटा, और धरा पर तार। चाॅंदनी मद्धम हुई, चाॅंद हुआ लाचार। कभी दिखता कभी छिप रहा है, नभ के उस तारे को, चाॅंद ढ़ूंढ़ रहा है। वह सच्चाई थी या, था […]

मत चलो भीड़ में बंधु, भेड़ झुंड कहलाओगे। एक गिरा कुए में तो, सभी को उसमें पाओगे।। वो बिना मास्क के रहता, मानव बम सा लगता है। आतंकी श्रेणी में आता, दुश्मन मानवता का लगता […]

मुक्तक:- किसी दिल में उदासी है कहीं उदासी में ही दिल है तेरी आंखों का दरिया मेरे दिल के काबिल है यकीन करना बड़ा मुश्किल मगर सच है हकीकत है तेरी बेरुखी कहती है तुझे […]

जो कृत्य खुशी दे मन को वह कृत्य तुझे करना होगा नफरत विद्वेष भरी बातों से दूर तुझे रहना होगा। तन अलग कहे मन अलग कहे उलझन का मूल यहीं पर है, तन-मन दोनों की […]

मत कहना सूरज डूब रहा है नहीं डूबता है सूरज जलकर निरंतर रात औऱ दिन ज्योति उगलता है सूरज। धरती गतिशील घूमती है स्थिर नहीं रहती है इसलिए हर कोने में क्रम क्रम से उजाला […]

समाज में हो रहा गलत तेरे भीतर की आत्मा को झकझोरता नहीं क्या किसी निरीह की चीत्कार किसी भूखे की भूख प्यासे की प्यास जीवन में व्याप्त दर्द तेरे भीतर की आत्मा को झकझोरता नहीं […]

तुझसे है नाता विश्वास न आता इक पास आता दूजा दूर जाता दूर रहकर भी कहां चैन आता शादी लड्डु जैसे खाकर है पछताता अब ताकता राह नये पंछियों की जो देख सुनकर भी न […]

लगी है आग जंगल में न जाने कौन है ऐसा रगड़ माचिस की तीली को जला कर चल दिया घर को। इधर घर जल रहे लाखों विकल हैं भस्म हैं प्राणी उधर है मौज में […]

जिन्दगी की अंधेरी रातों में काम जुगनू से न चल पायेगा, कभी चमकता कभी बुझता सा ये नहीं राह दिखा पायेगा। दबा ले स्विच जगा ले बत्ती को ये बत्ती हो मन की ऊर्जा की, […]

मोमबत्तियों-सा है जीवन अब तो पिघलना है प्रकाश फैलाना है काव्य लिखने का मन है अब तो तेल डाल दे कोई मेरे जीवनरूपी दीपक में, अभी और तम मिटाना है अभी इमारतें बनानी हैं अभी […]

आज जब भूल बैठी थी सदियों बाद छत पर बैठी थी ठंडी-ठंडी हवाएं तन को छू रही थी तुम्हारी यादें मन को छू रही थीं सरसराहट पत्तियों की कानों तक जा रहीं थीं चाय की […]

चिठ्ठियों की वेदना कभी सुनी है तुमने? कितना सिसक-सिसककर रोती हैं एक पते को ढूढ़ने में जमाने लगते थे अब बात क्षण भर में पहुँचती है लिखने वाले और पढ़ने वाले में एक कल्पना का […]

अद्भुत है यह लेखनी भी स्वयं को ब्रह्मा बना देती है कभी करुण रस का पान करती है कभी प्रेम की सरिता बन जाती है जहाँ रवि नहीं पहुँचता है वहां प्रकाश ये फैलती है […]

यह देश ब्रह्मा-चरक- पतंजलि का है क्या?? तो बेटियों को पेट में ही क्यों मार देते हैं विज्ञान अभिशाप है या वरदान पेट में बेटा है या बेटी बता देते हैं कैसी मानसिकता है जो […]

कहाँ गई वो दानवीर कर्ण की संतानें ??? ***************************** ____________________________ मत बाँधो मेरी नाव को तैरने दो इसे पीर के विशाल सागर में भर गया है जो इन दिनों पीड़ितों की दयनीय दशा देखकर चौराहों […]

बेटियों का दर्द तो सब जानते हैं पर बेटों के दर्द को कहां किसी ने देखा है बेटियाँ चली जाती हैं घर छोड़ कर फिर उस घर की बेटा ही तो देख-रेख करता है प्यार […]

भले ही सो रहा हूँ मैं थका-माँदा यहाँ फुटपाथ में मगर चलती सड़क है रुकती है बमुश्किल एकाध घंटा रात में। उसी में नींद लेता हूँ उसी में स्वप्न आते हैं, कभी जब राहगीरों के […]

छोड़ दे छोड़ दे उदासी को कोई फायदा नहीं है चिंता से गम में मत रह बढ़ा न दर्द ए दिल कोई फायदा नहीं है चिंता से। दुःख तो होता है कुछ भी खोने से […]

कोरोना का कहर हुआ, गली-गली हर शहर हुआ। आ गई है दूजी लहर, कोरोना ने कितना बीमार किया। दर्द दिया लाचारी दी, बहुत बड़ी बीमारी दी परेशान बहुत किया इसने, कितनी बड़ी महामारी दी। फ़िर […]

चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम, चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी। चाॅंद की रौशनी में, तुम्हारे संग जश्न मनाऊंगी। दो-चार सितारे अलग से लूॅंगी, तुम्हारे कुर्ते में लगवाऊॅंगी। दोनों घूमेंगे चमचम करते, पायल की छम-छम […]

कई साल गुजर गए पर आज भी महसूस होता है जब भी तू इन गलियों से गुजरता है तेरा आना जाना लगा रहता है दिल की गलियों में आंखों की पुतलियों में तू घूमता रहता […]

एक दिन तो जाना है तुझको,आज तो साथ रहने दे, ये दर्द ज़फ़ा का तेरे संघ सहने दे. ऐसे न नज़रे चुरा मुझसे,हूँ मै आखिर तेरा दीवाना, है जब तक साँस बाकि,तब तक तो तेरे […]

मेघा आए रे आए रे, ऐसी पड़ी फुहार। भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया नीर गिरे भरमार। श्याम वर्ण के मेघा बरसे, खूब गिरी जल-धार। इतनी तो होली पर भी ना भीगी, जितनी भीगी बारिश में इस बार। […]

कर के आया था मजदूरी, था थकन से चूर। रूखा-सूखा खा कर सो गया, वह बूढ़ा मजदूर। ओढ़ी एक फटी थी चद्दर, उसके सूराख़ों से घुस गए मच्छर। हाथ पैर पटकता था, मच्छर भगाने को। […]