प्रेम…. किसी को समझाया नहीं जा सकता। यह तो केवल एक अनुभूति है, जो स्वयं ही होती है। प्रेम स्वार्थहीन है, सागर सी गहराई लिए हुए , एक खूबसूरत एहसास!! इन्तजार में और भी वृद्धि […]
प्रेम…. किसी को समझाया नहीं जा सकता। यह तो केवल एक अनुभूति है, जो स्वयं ही होती है। प्रेम स्वार्थहीन है, सागर सी गहराई लिए हुए , एक खूबसूरत एहसास!! इन्तजार में और भी वृद्धि […]
ओ नवोदित पीढ़ी मेरे भारत की, उठ जा तू धूम मचा दे हर क्षेत्र में हर विधा में भारत को मान दिला दे, तू है वह पौध जिसमें कल के फल लगने हैं, तूने ही […]
नफरत केवल खून सुखाता प्यार उजाला देता है। मेहनत का परिणाम अंततः हमें निवाला देता है। दूजे से ईर्ष्या रखने से नहीं किसी का भला हुआ, अपने ही संघर्ष से साथी सबका अपना भला हुआ। […]
चमक रही है नयी सुबह सूरज की किरणें फैली हैं, बन्द रात भर थी जो आंखें, उनमें नई उमंग खिली है। गमलों के पौधों में देखो, नई ताजगी निखर रही है, फूलों में कलियों में […]
हरी दूब पर सुबह सवेरे, किस के बिखर गए हैं मोती। किस जौहरी का लुट गया है, देखो सुबह-सुबह खजाना। पुष्प और पल्लव सब मुस्काए, ये किसने हीरे बिखराए। देखो प्रकृति लुटा रही है, प्रा:त […]
क्यों कोई मोहब्बत के काबिल नहीं होता ? क्यों हर किसी के सीने में दिल नहीं होता ? क्यों होता है उसी बेदर्द से इश्क ! जो इस दिल के काबिल नहीं होता…!!
अब फिर से उस तरफ से खत आ रहें हैं वो अपने नुमाइन्दों से मेरी खैरियत पुंछवा रहे हैं…. हमारी फिक्र है या हमारी आरजू हम कैसे हैं ? बस वो यह जानना चाह रहे […]
हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ || कि अब ना बजती बंशी की धुन कहीं गइयों को ठौर नहीं माखन चुराने आ जाओ… हे कृष्ण ! पुन: […]
*कोरोना को दूर भगा लो* ********************* मन का भय सब दूर करो वैक्सीन लगा लो आप सभी कोरोना को दूर भगा लो वैक्सीन लगा लो आप सभी। डरो नहीं कुछ दर्द नहीं है, नहीं कोई […]
स्टैंड पोस्ट का नल बेचारा खड़ा रहा बस खड़ा रहा, एक बूंद भी टपक न पाई, ऐसा सूखा पड़ा रहा। प्यासों के खाली बर्तन जब देखे उसने रोना चाहा, मगर कहाँ से आते आँसू, ऐसा […]
सुबह होगी हाँ, सुबह होगी लेकर स्वर्ण रश्मियों को अपने झोले में कुछ खंगालेगी गेहूं की अधपकी बालियों को लहलायेगी उलझी हुई वृक्षों की लटों को सुलझाकर नदियों को काला टीका लगाकर कुछ गुनगुनाएगी समुंदर […]
नही हाथ में उंगलियां पर पेट में हैं दात जितना कमाती है किस्मत उतना खाती आंत उतना खाती आंत करूं क्या मुझे बताओ मेरी हालत पर तुम ना हमदर्दी दिखाओ काम कराओ फिर मुझको दो […]
ना राधा ना रुक्मणी, वो कान्हा की मीरा बनी। हरि नाम ही जपती थी, ऐसी उसकी भक्ति थी। विष का प्याला पी गई, जाने कैसे वो जी गई। भरी जवानी जोग लिया, मीरा ने सब […]
आँख का जल एक है, मानव की पहचान, अगर न हो संवेदना, फिर कैसा इंसान। फिर कैसा इंसान, जानवर भी रोते हैं, मानव में तो दया भाव के गुण होते हैं। कहे कलम विचरते, हैं […]
भोर होती है हर रोज बहुल के लिए आशा की एक किरण लेकर नऐ विचार नई ख्वाहिशें नई चाह नई भूख जो होती है पद-प्रतिष्ठा धन- दौलत वस्तुओं संबंधों को समेटने की… बहुल के होती […]
खो जाये सब कुछ मगर, मत खोना विश्वास, गया भरोसा बात का, होता है परिहास। होता है परिहास, सभी हल्का कहते हैं, बिना पूर्ण विश्वास सभी दूरी रखते हैं। कहे लेखनी बीज, भरोसे का तू […]
पानी बरसा ही नहीं, सूख चुके हैं मूल, अब कैसे जीवन चले, हिय में उठते शूल। हिय में उठते शूल, जंग पानी को लेकर, जनता में छिड़ रही, पड़े बर्तन को लेकर। कहे सतीश अब […]
घड़ी तो घड़ी है साधारण हो या फिर असामान्य। पर समय बड़ा हीं होता जग में सदा से असामान्य।। टिक – टिक करती सूई वाली। अपने हीं चाल में चलने वाली।। डिजिटल घड़ी में अंकों […]
उगते सूर्य की रश्मियाँ, जब-जब पड़ी हरित किसलय पर सुनहरी पत्तियाँ हो गईं, देख सुनहरी आभा उनकी, आली, मैं कहीं खो गई। वृक्षों के बीच-बीच से, रश्मियाँ छन-छन कर आती थीं उषा काल की सुन्दर […]
मेरी बेटी, मेरी है, सिर्फ मेरी है मेरी है, मेरी है, सिर्फ मेरी है, तुम सिर्फ मेरी है, मेरे बिना कोई दूसरा तुम से ज्यादा प्यार नहीं कर सकता मेरी जान, तेरे सिवा किसी ओर […]
दो पत्ती के रूप में, उगता है नन्हा बीज, धीरे-धीरे एक दिन, विशाल वृक्ष बनता है। जो सैकड़ों प्राणियों का बसेरा बनता है। छांव देता है, प्राणवायु देता है। फल देता है, फूल देता है, […]
हम सब परेशान है ये वक्त ही मुश्किलों से भरा है सब रास्ते है खुले और सड़के भी साफ है एक किनारे पर है चलना दुसरे पर मौत है ज़िंदगी की इस सफर में सब […]
हाथी की तरह दो दांत मत देना मुझे प्रभो कि बाहर अलग, भीतर अलग। दो रूप न दिख पाऊँ। दो राह न चल पाऊँ। जैसा भी दिखूँ एक दिखूँ, नेक रहूँ। न किसी से ठेस […]
मेरी एक सखी चली ससुराल, आशीष लेकर बुजुर्गों का। गले मिलकर सखियों के, भावी जीवन के सपने लेकर अपनी अंखियों में सखी चली ससुराल। सखियों की भी दुआएँ, लेती जाना तुम। साजन सॅंग मिलकर, नव-सॅंसार […]
चले चल मस्त राही मन नहीं काम है घबराना। जहाँ मिलती चुनौती हो उसी पथ में चले जाना। जहाँ हो प्रेम का डेरा वहाँ थोड़ा सा सुस्ताना जहाँ हरि भक्ति पाये तू जरा उस ओर […]
जितना खुद से हो सके सेवा करनी चाहिए, कष्ट झेलते मानव की सेवा करनी चाहिए। इसी बात के लिए हमें मानव बोला जाता है, मानव हैं, मानवता का परिचय देना चाहिए। स्याह पड़े असहाय की […]
स्नेह कोई दे अगर तो स्नेह बढ़कर दीजिये जंग को ललकार दे तो जंग पथ पर कूदिये। सीधा सरल रहना है तब तक जब तलक समझे कोई अन्यथा चालाकियों में मन कड़ा सा कीजिये। गर […]
टूटे सपनों की सिसकियाँ, नहीं सुनता है ये ज़माना। इसलिए कर्म पथ पर, मुझको है कदम बढ़ाना। यदि मैं कभी भटक जाऊँ, चलने से, सच्ची राह पर तब तुम मेरा हाथ पकड़ कर, ले आना […]
हाथ में रेखा रेखा में जीवन जीवनt रेखा हाथ में। पर है जीवन और मरन एक ईश्वर के हाथ में।। हाथ मिलाने से पहले सोच लो एक बार। वायरस और बैक्टीरिया है बीमारी के आधार।। […]
आरती को ये बात पता नहीं थी कि जो सपने उसने देखे है, वो सब चकना- चूर हो जायेगे। पिछले कुछ सालों से ना ही एक अच्छा सा स्मार्ट फोन था, ना ही पहन के […]
दिखा लो तुम भी दम, कम नहीं हैं हम। अपने देश के लिए, हम भी जाॅं लुटा देंगे। चीन, पाक जैसे बैरी को, पल में ही मिटा देंगे। चीन ने कोरोना फैलाया, पाक ने आतंक […]
कोरोना बढ़ने लगा, रह सचेत इंसान, मास्क लगाकर रखना है कहना मेरा मान। कहना मेरा मान, बचा खुद के जीवन को, जागरूकता से ही, रक्षित कर जीवन को। आज वक्त की यही जरूरत सजग रहो, […]
गुस्सा तो कमजोर का, गुण होता है मान, गुस्से से इंसान का, कम होता सम्मान। कम होता सम्मान, कभी गुस्सा मत करना, बढ़ते जाना और, स्वयं मन स्थिर रखना। कहे लेखनी कहा, बुजुर्गों ने यह […]
कर्म के लिए कहां कोई करार बैठे हैं बेकार आलस की कतार बेजार की पगार सरकार की बुखार तंत्र में अरसे से सुधार की दरकार सुरक्षा की दीवार में है दरार अधिकारी दे रहे भ्रष्टों […]
जापानी विधा:- हाईकु कविता ————————————— ************************** —————————————- ओ लेखनी ! सुन बात मेरी लिख अब दीन हीनों का दर्द तू बढ़ चल कर्म पथ पर… रह अडिग और बन सबल भेद सारे खोल दे मन […]
सबसे गहरी यह बात है मन तूने स्थिर रहना होगा, कभी कहीं, कभी कहीं, ऐसे न तुझे बहना होगा। एक लीक एक धारा, एक मार्ग हो साधन एक एक नजर रख मंजिल पर ऐसे तुझको […]
नख नुकीले काट लूँगा मैं प्रेम को बाँट लूँगा मैं दूर कर के बुराई सब भलाई छाँट लूँगा मैं। मगर जो सत्य पथ है वह जकड़ रखना पड़ेगा ना, हाथ में लठ साफ सा रखना […]
ओ रोशनी! चली आ बीता तम हुआ सवेरा जगमग कर दे यह जग ओ प्रकाशपुंज ! भर प्रकाश जीवन में पुष्पों की लालिमा से महक उठे यौवन ओ रोशनी ! चली आ बीता तम हुआ […]
उठो जागो उठो जागो करो इस मुल्क को रोशन जगा लो देश का यौवन, लगा दो आज निज तन मन। सदा मस्तक रहे ऊंचा, नहीं हो देखना नीचा, हमारा देश यह भारत, रहे ऊंचा सदा […]
मेरे वाचन में हो सच्चाई व्यक्तित्व में हो अच्छाई हे देव ! मुझे ऐसा वर दो मुझको मानवता दे दिखलाई ना कभी किसी का दिल तोड़ूं किसी पर आई आंच को सिर ले लूं जब […]
कविता- खबर ले ले ————————- कोई तो हो खबर ले ले, कहां थे अब तक- यह सवाल पूछ ले, वक्त का हिसाब मांगे, साथ रहने का साथ मांगे, हो फोन जब व्यस्त मेरा, फोन पर […]
तान छेंड़ मुरली की गीत नया गा गया मेरी झुर्रियों भरे यौवन में कसाव आ गया पपीहे पीह-पीह बजने लगी जब कान बीच मृदंग बजे जीवन में यों उछाल आ गया मटकी धर सीस चली […]
कल अचानक ही तुम्हारी तस्वीर पर आकर ठहर गईं मेरी निगाहें… और मैं उलझकर रह गयी तुम्हारी आँखों के तिलिस्म में ..!! गहरी ख़ामोशी समेटे हुए सागर सी ये तुम्हारी आँखे, साक्षी हैं ज़िन्दगी के […]
समन्दर की गहराइयों में उतर के देखो तो एक बार। बहुत से राज खुल जाएंगे जो छुपे हुए थे हरेक बार।। मोती भी हैं सीप भी प्यारे रत्नों का है बड़ा खजाना। उतरोगे तो पाओगे […]
बिल्ली की पूंछ ——————- रुकी कलम अगर भूत भविष्य बिखर जाएगा रखो न हाथ गिरवी, जमाना भूखे बच्चों को- व्रती बता जाएगा, जिन्हें शुद्ध पानी नसीब नहीं, उन्हें बोतल का- पानी पीने की सलाह दे […]
ज़रा सी बारिश के छींटों से, क्यारी में खिल गए गुलाब। सुहाना सा हुआ मौसम, बहने लगी शीतल पवन। मयूर नृत्य कर उठे बाग में, कोयल गाती मीठे राग। इन्द्रधनुष भी दिखे गगन में, मीठे […]
चिकित्सक डटे हुए हर बार, बीमारों का करें उद्धार। लगाकर दवा ज़ख़्म पर, कर रहे हैं उपचार। शत्-शत् नमन् है चिकित्सकों को, उनके सेवा भाव को प्रणाम। गंभीर व्याधि के मौसम में भी, एक सैनिक […]
हमें तो रोशनी की बात ही उठानी है, जहाँ हो दर्द वहां पर दवा लगानी है। छोड़ भीतर की गुनगुनाहट को, बात अब जोश से सुनानी है। छोड़ मन की समस्त टूटन को आस नवरूप […]
भूखे तक अन्न पहुंचाना होगा गरीब, असहाय, अनाथों को खोज खोज कर अपनाना होगा, भेदभाव की बातों को दफनाना होगा, मनुष्य हैं हम मनुष्यता को अपनाना होगा। यदि अंधेरे का भीषण जंगल हो, न कोई […]
जुबान से मेरी किसी का दिल न दुखे न कभी लेखनी यह, ठेस के भाव लिखे। न निशाना हो मेरा कहीं पर व्यक्तिगत सा न कोई बात बोलूं दिखूँ जो व्यक्तिगत सा। चाह इतनी रखूं […]
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