कौन कहता है कि अपने उज्जल भविष्य हेतु सपने देखना या कल्पना करना गलत है? सपने देखो और जरूर देखो, अपपे उज्जवल भविष्य की कल्पना करो और ऐसी कल्पना करो जो दूसरों को तो क्या […]

विदाई का ग़म किसी से छुपाया नहीं जाता, दिल की आह को दिखाया नहीं जाता | लाख करे कोशिश कोई ग़म छुपाने की, चेहरे को नहीं जरुरत इसे दिखाने की | विदाई एक अलगाव होती […]

सुंदरता के आकर्षण में बंध कोई इतना कैसे भा जाता है ईश्वर से मांग को हो धन्यवाद प्रार्थना से जीवन में लाता है पाकर इच्छित साथी खूब इतराता है अपनों को ठुकरा उसे अपना बनाता […]

राजा दशरथ ने माना कहना, अपनी पत्नी कैकेई का एक वचन की खातिर देखो, बहु-बेटे वन में जाते हैं, प्राण त्यागने पड़े भले ही, आज दशरथ जी पूजे जाते हैं। श्री राम ने माना, कहना […]

बाहर से आवाज आई जब मैंने दरवाजा खोला तो तुम थे… तुम्हें सामने देखकर थोड़ी शर्म आई मैं रुकना चाहती थी कुछ बोलना चाहती थी तुम्हें छूकर महसूस करना चाहती थी पर शर्माकर वहाँ से […]

जहां बेटियों को पूजा जाता है वह हिंदुस्तान ही है, और जहां पर इज्जत को सरेआम, नीलाम किया जाता है , वह भी हिंदुस्तान ही है। जहां बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ! की मुहिम फैलाई जाती […]

जब हम चले जाएंगे, ये दुनियां छोड़कर करोगे याद हमको, कभी ना कभी तो ऐसा क्या हुआ था, जो हम चल दिए सोच कर फरियाद करोगे, कभी ना कभी तो बस, इतनी सी इच्छा है […]

बिहार की विडंबना गरीबी की वज़ह से जहाँ की जनता सङको पर निकल पङी वहाँ के 153 करोङ, नुमाइंदे धनाढ्य अथाह धन 53 करोङ की मिल्कियत के मालिक हैं । ये धनाढ्य क्या समझेंगे दर्द […]

ज़िन्दगी से कुछ लम्हे, बचाती रही एक बटुवे में उन्हें, सजाती रही सोचा था कि फुरसत से करूंगी खर्च, ज़िन्दगी में इसीलिए बचाती रही, कुछ लम्हे कुछ अपने लिए, कुछ अपने अपनों के लिए फ़िर […]

***ये तो कमाल ही है*** सहेली, नहीं है किस्मत फ़िर भी रूठ जाती है पहेली,नहीं है बुद्धि, फ़िर भी उलझ जाती है आत्म-सम्मान, नहीं है बदन फ़िर भी चोट खाता है और इंसान, नहीं है […]

माया को रचा हमने प्यार का दीप जलाया जिनका था सहारा हमें उन्हें ही किया बेसहारा गौ माता को पूजते तब तक जब तक अमृत धार बहाती यही स्वार्थ की अंधी भक्ति अपनों से हमें […]

दुनिया में हर तरीके के लोगों से मिलने के बाद दर-दर की ठोकरें खाने के बाद सभी के प्यार को आजमाकर गैरों से दिल पर चोट खाकर समझ आ गया मुझको, निरमोही है पर सच्चा […]

औरत मजह कोई दिल बहलाने वाला खिलौना नहीं जीती-जागती इंसान है कोई क्यों नहीं समझता कि उसमें भी जान है पुरुष स्त्री को सिर्फ विलासिता की वस्तु समझ लेता है उसकी भावनाओं के संग खेलकर […]

भोजपुरी देवी गीत-चला माई के दुअरिया | मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया | लाल अड़हुलवा सेनूर चढ़ईहा ललकी चुनरिया | मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया | नव दिन नव […]

हम तो विद्वतजनों के कायल हैं, उनकी सच्चाइयां हैं मित्र अपनी, उनकी अच्छाइयाँ हैं मित्र अपनी, उनकी वाणी से लाभ पायें सभी, उनको कोई भी दुख न होवे कभी।

प्रेम जिसका इंजन, गाड़ी जिसकी यारी | इजहार चालक है, खुशियाँ हैं सवारी | वह एक फरिश्ता है, खूबसूरत गुलदस्ता है | लगता बहुत नाजुक, पर सच्चे दिल से रिश्ता है | वह आस से […]

जीवन तरु की नई कोंपल है बचपन, कोंपल से बनी शाखा युवापन | शाखाओं से झुका वृक्ष बूढ़ापन, यही चक्र है बचपन, युवा और बूढ़ापन | खेल खिलौनों में गुजरा प्यारा बचपन, यादें जीवन की […]

वो जब भी सामने रहती है सब गम भूल जाता हूँ, नहीं कुछ याद रखता हूँ स्वयं को भूल जाता हूँ। खुशी का गीत है वह प्रेम का संगीत है वह ही उसी के सामने […]

सबसे तेज होती है, वक्त की रफ्तार | वक्त में घुली है, सबकी जीत या हार | वक्त के दो पहलू, नफरत और प्यार | वक्त से ही जुड़े हैं, जीवन और मरण के तार […]

मुझे किन बातों की सजाएं दे रहे हो तुम, टेढ़ी नजरों से तक देख नहीं देते हो। कहीं किसी और की धमक तो नहीं है जो कि, शांत चेहरे उलझन पाले रहते हो। कहीं कोई […]

प्रज्वलित ज्वाला हुई है रण शंख का अब नाद हो शत्रु जो पुलकित हुआ है उसका करो अब नाश तुम। न रोको अभी तुम भावना को रक्त का उबाल थमने से पहले दुश्मन को पंहुचा […]

जीवन की रेखा बहुत लम्बी देखकर मेरी आँखों में आँसू आ गये आखिर अभी और कितनी तकलीफें झेलनी हैं मुझे ! कब तलक दर-दर की ठोकरें खानी हैं कब तलक आँसू यूं ही बहाने हैं […]

गृह-वाटिका सी होती हैं बेटियाँ, घर आँगन को सजा देती हैं बेटियाँ | जैसे बिना चाँद के आसमान सूना सा लगता है, वैसे बिना बिटिया के घर कोना सा लगता है | कौन कहता है […]

गुमनामी में गुजर गयी जिंदगी फिर भी न शिकायत कभी की जिनके लिए जी तोड़ मेहनत की उनकी बेरुखी ही हरदम सही फिर भी उदासी न चेहरे पे दिखी हंस मुस्करा कर सबसे कुछ कहना […]

जान जोखिम में डालकर मेरी जान बचाई उसने अधजले बदन को भी प्यार से सराहा उसने मेरे आत्मविश्वास को अपने सहयोग से बढ़ाया उसने विवाह करके मुझसे अपना वादा निभाया उसने दिया जीवन भर अपना […]

कविता – मेरे पिया परदेशी (छंदबद्ध कविता) ********************** चारों ओर शरद की धूम मची देख सखी, पिया मेरे आयेंगे न जाने कब तक अब। बीती बरसात आँख सूख गई अब मेरी, नींद नहीं चैन नहीं […]

हम तो गिर कर भी संभल नहीं पाए क्या करें चाहत की डोर ही कुछ ऐसी थी। वो कहते रहे चिंगारी से कभी न खेलना हम जान कर भी अनजान बने रहे क्या करे हमारी […]

करके भ्रूण-हत्या दो बेटियों की, उसने दो बेटे फ़िर पाए खुश हो कर मस्त घूमता, कहता सौभाग्य जगाए बड़े हुए जब बेटे उसके, दो बहुएं घर में आईं सास-ससुर की अवहेलना करने में, कोई कसर […]

कविता – हौसला रख आगे बढ़ (रोला छंद का रूप- मात्रा 11-13) *********************** मंजिल पानी है तो, हौसला रख आगे बढ़, विचलित मत हो किंचित, जीत का स्वाद तू चख। अपने को कमजोर, समझ कर […]

कल रात स्वप्न में वो मेरे आई, धीरे से रजाई उसने मेरी सरकाई | रखा तब सर उसने सीने में मेरे, बैठी जब आकर पास सिरहाने मेरे | मैं अब कुछ गुनगुनाने लगा था, उसकी […]

सच में बहुत बुरी हूँ मैं कमियां ही कमियां हैं मुझमें एक भी अच्छाई नहीं है पर कमियों के साथ ही जो स्वीकार करती है मुझे वो है मेरी माँ… हर गलती पर मुझे डाटती […]

जब तुम सामने आए हम कुछ ना बोल पाए होंठ सिल गये और हाथ थरथराये क्या हुआ मुझको अचानक यह समझ ना मैं सकी कहना जो था मुझको तुमसे हाय! क्यों ना कह सकी कुछ […]

बहुत आहत हूँ मैं यूं समझ लो टूट गई हूँ मैं मेरी सहेली की दी हुई आखरी निशानी भी टूट गई सालों पहले जो घड़ी दी थी उसने आज टूट गई रोई हूँ बहुत परेशान […]

कई महीनों बाद आज अलमारी खोली तमाम तोहफे मिले कुछ किताबें और कुछ पुरानी तस्वीरें भी मिलीं उन तोहफों को घण्टों देखकर पुरानी यादें ताजा करती रही देखती रही मैं अपनी एक-एक तस्वीर को कितनी […]

आज बाजार में तुम्हें अचानक देखा ! मानो कोई सपना देखा पता नहीं किन खयालों में खोई थी कल रात जरा देर से सोई थी मन ही मन सोंच रही थी काश! तुम्हारे साथ बाजार […]

हिन्दी देवी गीत – भक्ति दान दे दो | हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो | काली कपालिनी दैत्य दलिनी शक्ति दान दे दो | जगत जननी माँ अम्बे जगदम्बे तुम हो | […]

तमाम ख्वाहिशें नहीं हैं मेरी बस ‘दो मुट्ठी आसमां’ की ख्वाहिश है पंख हों उड़ने का हौसला हो और हों बेहिसाब मंजिलें उड़ चलूं जिसमें मैं अकेली ना हो कोई मुश्किलें.. चाहें जिस राह पर […]

कागज!! बड़े काम के हो आप युगों युगों से आप पर कलम अंकित करते आई है, तमाम तरह का साहित्य। आप में अब तक का दुख-सुख, उत्थान-पतन, आशा-निराशा, उत्साह-अवसाद, इतिहास, सब कुछ अंकित है। मानव […]

कतल कर दो मेरा तुम, ज़रा सी फुरसत निकाल के यूं इंतजार में तुम्हारे, हमसे तड़फा नहीं जाता… *****✍️गीता

दोस्तों में उल्लास रहे जब हमारे, मुस्कुरा उठते हैं, तब लब हमारे व्यथित हो जाए कोई दोस्त गर, व्याकुल हो जाएं हम भी इधर कोई दुखी होता है गर उधर कहीं, कैसे खुश रहेंगे हम […]