शिकायत किससे करें !
जब अपने ही दामन को
दागदार कर देते हैं
उम्मीद किससे करें जब
अपने ही साथ छोंड़ देते हैं
जो कभी हमारे हो नहीं सकते !
आखिर ये नैन उन्हीं को
पाने का ख्वाब क्यों देखते हैं !!
अपने ही साथ छोंड़ देते हैं
Comments
6 responses to “अपने ही साथ छोंड़ देते हैं”
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लाजवाब अभिव्यक्ति
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धन्यवाद
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अतिसुंदर भाव
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धन्यवाद
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शिकायत करना हो तो खुद से कीजिये। यहाँ न कोई है।
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बिल्कुल सही कहा आपने आपकी समीक्षा बहुत सुंदर है
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