इस महफ़िल में

कुछ दीवाने थे , कुछ परवाने थे-

इस महफ़िल में,

शमां को जलाने के लिए सब थे बेताब-

इस महफ़िल में .

दर्द रक्काशा का कौन समझे यहाँ,

उसके हुस्न को ही चाहने वाले  थे सब –

इस महफ़िल में .

पैसों कि ही खनक सुनाई देती है यहाँ,

दर्द जज्बात भावनाए -ये सब बेगाने है-

इस महफ़िल में .

 

 

 

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