ईर्ष्या

क्या कभी विजय नहीं देखी,
जो इतना घबराते हो

जिसमे कवि का गुण नहीं,
और कवि कहलाते हो

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे!

स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे! माँग की गई वस्तु ही तो कहलाते है दहेज रे! स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं…

Responses

New Report

Close