कविता
ओ मातृभाषा ओ मातृभाषा
सत् सत् है नमन तुम्हे
पहला अक्षर निकला था जब
वो था अर्पण मातृ तुझे
तुम है जननी तु है वानी मेरी
तुझसे ही है जीवन की कहानी
सदा चले तुझसे ही जिंदगानी
ऋणी रहूंगा मैं तेरा हे महरानी
ओ मातृभाषा ओ मातृभाषा
सत् सत् है नमन तुम्हे
महेश गुप्ता जौनपुरी
Nice
Nyc
Good
गुड