गोविन्द

गोविन्द गोपाल चरावत गैया,
बंसी के धुन से समझावत मैया।
वृंदावन के गलीयन में मुरारी,
लागत नटखट नंद दुलारे कन्हैया।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Related Articles

साँवला सलोना

साँवला सलोना चला, माखन चुराने को। मैया ने देख लिया, रंगे हाथ गिरधारी को। कान पकड़ के मैया, कहती हैं नंद से। क्यों चुराए है…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close