दर्पण

आज भी नहाते हैं लोग
सुबह उठकर
फिर दर्पण के सम्मुख जाते हैं
दर्पण मे देखकर चेहरा अपना
मुह बनाते हैं, रोते हैं, चिल्लाते हैं
फिर उस दर्पण को छोड़ कर या तोड़कर
बड़े आकार का दर्पण खरीद लाते हैं
परंतु इसके सम्मुख भी जाकर
वही प्रक्रिया दुहराते हैं
मांग बढ़ती देख बाजार में
दर्पण के प्रकार और आकार बढ़ा दिए जाते हैं
क्या हम सचमुच वैसे ही है
जैसा ये दर्पण दिखाते हैं
हां मे जवाब सुनकर
मुह बनाते हैं, रोते हैं, चिल्लाते हैं
मगर दर्पण के सिवाय
अपने आसपास किसी और को नहीं पाते हैं

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

New Report

Close