पगडंडियां

पगडंडियां जिंदगी के सफर में
बहुत कुछ सिखा जाती हैं।
कभी नफरत के साए में जीना
कभी प्यार का पाठ पढ़ा जाती हैं।
जिंदगी की पगडंडियों पर चलते हुए
उम्र के कई पड़ाव पार कर गए हैं ।
कभी खुशी कभी ग़म का दौर आया
कभी रोए कभी मदद हाथ हजार कर गए हैं।
पगडंडियों ने कभी राह बदलने का
हुनर सीखने की ख्वाहिश नहीं की।
ये तो हम हैं जो वक्त – वक्त पर
बदल जाने की बात किया करते हैं।
पगडंडियों पर कभी पत्थर तोड़ते लोग मिले
कभी मदिरापान में डूबी शोख हसीना।
रास्ता वही है मंजिल भी है अपने दर पे
मुसाफिर ही बेवक्त बदल जाया करते हैं।
उड़ते हैं जो वक्त को नजर अंदाज कर
धरती पर वही अकेला पन पाया करते हैं।
वीरेंद्र सेन प्रयागराज

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close