पिंजरबद्ध

पिंजरबद्ध ना लिख सकूंगी
अंकुश होगा सिर पर तो फिर,
भावों को कैसे व्यक्त कर करूंगी
मेरे कवि मन को यदि, उन्मुक्त माहौल मिलेंगे
तभी इस कवि मन में, गीतों के पुष्प खिलेंगे
कहीं भली है बस सुंदर सराहना,
इस अंधी दौड़ की टैंशन से..।

Comments

10 responses to “पिंजरबद्ध”

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद सुमन जी

  2. Satish Pandey

    कहीं भली है बस सुंदर सराहना,
    इस अंधी दौड़ की टैंशन से..।
    बहुत ही सुंदर और बेहतरीन पंक्तियाँ, उच्च विचारों से सुसज्जित आपकी लेखनी को सैल्यूट।

    1. Geeta kumari

      Thanks for your precious and valuable compliment satish ji .it is very inspiring review.

    1. Geeta kumari

      Thank you Piyush ji

  3. अतीव सुन्दर

  4. Geeta kumari

    बहुत आभार कमला जी 🙏Thank you

  5. Seema Chaudhary

    Very nice poem 👏

    1. Geeta kumari

      Thanks for your nice complement

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