पिंजरबद्ध
पिंजरबद्ध ना लिख सकूंगी
अंकुश होगा सिर पर तो फिर,
भावों को कैसे व्यक्त कर करूंगी
मेरे कवि मन को यदि, उन्मुक्त माहौल मिलेंगे
तभी इस कवि मन में, गीतों के पुष्प खिलेंगे
कहीं भली है बस सुंदर सराहना,
इस अंधी दौड़ की टैंशन से..।
सुन्दर अभिव्यक्ति
बहुत बहुत धन्यवाद सुमन जी
कहीं भली है बस सुंदर सराहना,
इस अंधी दौड़ की टैंशन से..।
बहुत ही सुंदर और बेहतरीन पंक्तियाँ, उच्च विचारों से सुसज्जित आपकी लेखनी को सैल्यूट।
Thanks for your precious and valuable compliment satish ji .it is very inspiring review.
बहुत खूब
Thank you Piyush ji
अतीव सुन्दर
बहुत आभार कमला जी 🙏Thank you
Very nice poem 👏
Thanks for your nice complement