मेघ सुधा जल बरसते, धरती शीतल होय
मेढक गाते गीत औ, व्याकुलता दे खोय
2 काले काले मेघ तब, जल ले वसुधा पास
गरज चमक मानो कहे, बुझाओ अपनी प्यास
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जल स्रोतों को कर रहे, बादल जल का दान
सुखी हुए सब मीन सा, क्रषक उगाए धान
बरसात के दोहे
Comments
3 responses to “बरसात के दोहे”
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प्रकृति का सुंदर वर्णन
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अतिसुंदर भाव
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प्रकृति का मनोरम वर्णन
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