मुक्तक

मेरे गलती पर साहब भौं भौं करके दौड़ लगाते,
कानुनी नियम का पाठ पढ़ाकर पैसा जनता से खुब ऐंठते,
ये कैसा कानून व्यवस्था है हमको भी बतलाओ यारों,
नेता गिरी है या दादागिरी कोई तो जनता को बतलाओ,

महेश गुप्ता जौनपुरी

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जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

अपहरण

” अपहरण “हाथों में तख्ती, गाड़ी पर लाउडस्पीकर, हट्टे -कट्टे, मोटे -पतले, नर- नारी, नौजवानों- बूढ़े लोगों  की भीड़, कुछ पैदल और कुछ दो पहिया वाहन…

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