लम्बे लम्बे हो गए दिन

लम्बे- लम्बे हो गए दिन ,
रात समुन्दर जैसी हैं ,

तेरे बिन; इश्क के मंजर में,
हालत बंजर जैसी हैं ।

किया है तूमने जादू हम पर,
तेरी आंखों में मदहोशी है,
कैसे ना बहक जाए हम,
सुरत जो अप्सरा जैसी हैं ।

लम्बे लम्बे हो गए दिन,
रात समुन्दर जैसी हैं……

—-मोहन सिंह मानुष

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Responses

  1. उपमा अलंकार का सुंदर प्रयोग कवि की कल्पना उच्चतम है भाव पक्ष तथा कला पक्ष दोनों बहुत ही सुंदर है

  2. आपकी यह कविता मैं 5 बार पढ़ चुका हूं पता नहीं क्यों?
    बहुत दिल छू रही हैं।

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