हसरत ए दीदार
बहुत झगड़े हम रात भर
दिल से अपने ,
मगर बदनामी करे,
मनमानी करे,
दिल मेरा ,
तुम्हारी ही गुलामी करें ,
आखिर आना ही पड़ा लौटकर ,
तेरे शहर में,
तेरी गलियों में,
हसरत ए दीदार को तेरे ,
दिल मेरा बदनामी करे,
दिल मेरा मनमानी करें।
बहुत झगड़े हम रात भर
दिल से अपने ,
मगर बदनामी करे,
मनमानी करे,
दिल मेरा ,
तुम्हारी ही गुलामी करें ,
आखिर आना ही पड़ा लौटकर ,
तेरे शहर में,
तेरी गलियों में,
हसरत ए दीदार को तेरे ,
दिल मेरा बदनामी करे,
दिल मेरा मनमानी करें।
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सुंदर
सादर धन्यवाद 🙏
Very true
बहुत बहुत आभार 🙏
,सुंदर
धन्यवाद सर
सुन्दर
धन्यवाद जी
गंभीर प्रस्तुति
धन्यवाद जी
बहुत बहुत आभार
धन्यवाद जी