सुबह सवेरे जागकर , करो सूर्य प्रणाम
अंधकार दूर हो जाये ,जग चानन हो जाये ।।
रात्रि के पहर में , चांद को अरक दीजिए ।
चाँदनी हो प्रसन्न ,जीवन सफल बन जाए ।।
रीता जयहिंद
9717281210
Categories: हिन्दी-उर्दू कविता
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