बुरा नहीं है जग में कोई

जय श्री राम ।।
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बुरा नहीं है कोई जहां में
हर लोग हरि-खिलौना है,
सबका अपना-अपना पाठ है,
सबको वही निभाना है ।।
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बुरा नहीं है कोई जहां में
हर लोग हरि-खिलौना है ।।1।।
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तीन गुण होता नरों में
मायापति की माया सबको नचाती है,
मन ही राम को मारती है,
मन ही राम को जीताती है ।।
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बुरा नहीं है कोई जहां में
हर लोग हरि-खिलौना है ।।2।।
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मन भटका, माया मारी
तब जाके मायापति की याद आई
राम नाम है, जग में हर दुःख की दवा
जो कोई लेता इसे, वही जीतता मन की व्यथा ।।
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बुरा नहीं है कोई जहां में
हर लोग हरि-खिलौना है ।।3।।
कवि विकास कुमार

Comments

3 responses to “बुरा नहीं है जग में कोई”

  1. Geeta kumari

    उत्तम अभिव्यक्ति

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