Author: Geeta kumari

  • मजदूर

    कर के आया था मजदूरी,
    था थकन से चूर।
    रूखा-सूखा खा कर सो गया,
    वह बूढ़ा मजदूर।
    ओढ़ी एक फटी थी चद्दर,
    उसके सूराख़ों से घुस गए मच्छर।
    हाथ पैर पटकता था,
    मच्छर भगाने को।
    एक पॅंखा भी नहीं था,
    उसके पास चलाने को।
    चद्दर भी साबुत थी तब तक,
    चल जाता था काम।
    अब तो रात को भी उसको,
    नहीं मिले आराम।
    नहीं मिले आराम बहुत झुॅंझलाया,
    बोला हे प्रभु तुमने मुझको
    इतना निर्धन क्यों बनाया॥
    ____✍गीता

  • जब-जब भी याद बचपन को करती हूँ

    जन्म लेकर जब आए,
    इस दुनियाँ में हम पहली बार।
    जो भी दृश्य देखा,
    चकित हृदय हमारा था।
    बारिश की पहली बूॅंदों ने भी,
    चकित इतना कर डाला
    पानी ,पानी कहकर हमने,
    वो दृश्य सबको दिखा डाला।
    पहली बार जब देखे,
    उड़ते हुए पंछी नभ में।
    फैलाकर हाथ यूँ ही अपने,
    उड़ने के देखे थे सपने।
    पहली बार जब देखे,
    गगन में चाॅंद और तारे
    माँ से माँग लिए हमने,
    अपनी मुट्ठी में वो सारे।
    आज जब-जब भी याद बचपन को करती हूँ,
    माँ-पापा की सूरत ही सामने आती रहती है॥
    _______✍गीता

  • पापा की वह परी है

    छोटी सी प्यारी गुड़िया रानी,
    पापा की राजकुमारी है ।
    पापा की गोदी में खेले,
    पापा को सबसे प्यारी है।
    अपनी बातों से मन मोह ले,
    पापा भी हॅंसकर यूँ बोलें
    फूलों जैसी है कोमल सी,
    वाणी है मीठी कोयल सी।
    उसके आने से घर में,
    आई है एक रौनक सी।
    दिनभर माँ की गोदी में खेले,
    पापा के आते ही यूॅं बोले
    पापा आओ गोदी ले लो,
    पापा फ़िर सारी थकन हैं भूले।
    सोने जैसी खरी है,
    पापा की वह परी है।
    मम्मी के नयनों का तारा,
    वह नहीं किसी से डरी है।
    _____✍गीता

  • आई कोरोना की दूजी लहर

    आज आरती का लेकर थाल,
    दुर्गा माॅं की करूँ वन्दना।
    बीमार पड़ी है घर के अन्दर,
    मेरी जननी मेरी माँ।
    कोरोना ने कैसा सितम किया है,
    देखो कैसा जुल्म किया है।
    आज उसे देखन को तरसूॅं,
    जिस माता ने जन्म दिया है।
    दूरभाष से बात करूँ,
    दूर ही से मुलाकात करूँ
    सचित्र वार्तालाप करूँ।
    मात-पिता से मिलने को तरसी,
    दूर हूँ उनसे अखियाँ बरसी।
    आई कोरोना की दूजी लहर,
    कोरोना ने ढाया है कहर।
    सभी कोरोना से बच कर रहना,
    यह फैल रहा है हर गांव हर शहर॥
    _____✍गीता

  • *हिन्दू नूतन वर्ष*

    यह हिन्दू नूतन वर्ष सभी को,
    हृदय में प्यार दे,
    खु़शियाँ अपरम्पार दे
    नए गेहूँ, चावल धान दे
    शिक्षा का वरदान दे
    दुखियों के दुख दूर कर सकूँ,
    सब को सदा सम्मान दूॅं
    ऐसा मुझे वरदान दे।
    परस्पर हित की हो भावना,
    कुटुम्ब और मित्रों में हो
    प्रीत की सद्भावना।
    निर्मल, स्वच्छ मोती सा मन हो,
    नव-वर्ष में निरोगी तन हो।
    खुशियाँ और उत्साह रहे,
    ऐसा सुन्दर जीवन हो॥
    ____✍गीता

  • हिन्दू नववर्ष की नई भोर

    हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि की,
    आप सबको शुभकामनाएँ।
    यही है नववर्ष हमारा,
    यही जीवन में खुशियाँ लाए।
    एक जनवरी को क्या हुआ,
    क्या ऋतु बदली कोई?
    या बदला कोई मौसम।
    क्या फ़सल बदली?
    या बदला कोई नक्षत्र।
    पेड़ पौधों की रंगत वही थी,
    चाॅंद सितारों की दिशा वही।
    फ़िर भी एक जनवरी को,
    हम दें नववर्ष की बधाई।
    नव वर्ष के नए दिन की,
    कुछ तो अलग अनुभूति हो।
    चैत्र मास में नए फूल खिले हैं,
    वृक्षों पर नए पल्लव मिले हैं।
    हरियाली छाई चहुँ ओर,
    मानो प्रकृति मना रही है,
    नववर्ष की नई भोर।
    वही वस्त्र दिसंबर में वही वस्त्र जनवरी में,
    चैत्र मास में सर्दी जाती गर्मी आती।
    मौसम बदला चैत्र मास में,
    विद्यालयों में नया सत्र है चैत्र मास में,
    बैंक के खातों की क्लोजिंग चैत्र मास में।
    जनवरी में नया कैलेंडर आता है,
    लेकिन चैत्र मास में आए नया पंचांग।
    उसी के अनुसार ही,
    भारतीय पर्व और विवाह आदि के मुहूर्त का,
    होता है व्यवधान।
    हम शुभ मुहूर्त देखकर ही करते हैं जो कार्य,
    मिलती है उसमें सफ़लता बेशुमार।
    चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा ही, है हमारा नया साल।
    यही है हमारे लिए शुभ और बेमिसाल।
    हम अपना नववर्ष मनाते देवी माँ के पूजन से।
    कितनी सुन्दर है संस्कृति हमारी,
    हृदय प्रसन्न है माँ के आगमन से॥
    _____✍गीता

  • बैसाखी

    नई फसल के आगमन का प्रतीक बैसाखी,
    खुशियों के आने का संकेत बैसाखी।
    नई फसल कटती है खेतों से,
    आती है घर।
    रौशन करती कृषक का जीवन,
    खुशहाली लाती घर-आंगन।
    नई फ़सल के आने से,
    हर देशवासी को मिलता है अन्न
    हर घर में रौनक आती है,
    ह्रदय होता है प्रसन्न॥
    ____✍गीता

  • युद्ध से एक सैनिक जब घर आया

    युद्ध से एक सैनिक घर आया,
    बिटिया को द्वारे पर पाया।
    एक हाथ में थैला था उसके,
    दूजा पीठ पीछे छिपाया।
    पांच साल की छोटी बिटिया के,
    चेहरे पर आई मुस्कान।
    उसने सोचा पापा के हाथ में,
    खाने-पीने का है कुछ सामान।
    चाॅकलेट, टाॅफी, बिस्किट सब कुछ,
    उसके ख्वाबों में आया।
    पीठ पीछे भाग कर आई,
    तो पापा का एक हाथ नहीं पाया।
    जंग में उसके पापा ने ,
    अपना एक हाथ गॅंवाया था।
    रोई पापा के गले मिल,
    उसको चैन न आया था।
    आंखें भर आई सैनिक की,
    गले लगाकर बिटिया से बोला वो,
    जंग जीत कर आया हूॅं बिटिया
    हाथ देखकर तू ना रो।
    सही सलामत देख पति को,
    उसकी पत्नी आंखों में आंसू ले मुस्काई थी
    जंग जीत कर आया साजन,
    यही सोच हर्षायी थी॥
    _____✍गीता

  • प्रेम की दास्तान

    प्रेम….
    किसी को समझाया नहीं जा सकता।
    यह तो केवल एक अनुभूति है,
    जो स्वयं ही होती है।
    प्रेम स्वार्थहीन है,
    सागर सी गहराई लिए हुए ,
    एक खूबसूरत एहसास!!
    इन्तजार में और भी वृद्धि करता है
    और मिलन में होता है ख़ास।
    प्रेम पूर्णत: है एक एहसास,
    प्रेम को आवश्यकता नहीं है समझाने की
    उसको आंखें कर देती हैं बयान।
    और प्रेम करने वाले,
    स्वयं ही कर लेते हैं आभास।
    यही है प्रेम की दास्तान॥
    _____✍गीता

  • प्रा:त काल में सुन्दर नज़राना

    हरी दूब पर सुबह सवेरे,
    किस के बिखर गए हैं मोती।
    किस जौहरी का लुट गया है,
    देखो सुबह-सुबह खजाना।
    पुष्प और पल्लव सब मुस्काए,
    ये किसने हीरे बिखराए।
    देखो प्रकृति लुटा रही है,
    प्रा:त काल में सुन्दर नज़राना।
    स्वर्ण बरसा रही हैं देखो,
    सुबह-सुबह सूरज की किरणें।
    अभी तलक क्यों सो रहे हो,
    उठो सवेरा हो गया है॥
    ______✍गीता

  • मीराबाई

    ना राधा ना रुक्मणी,
    वो कान्हा की मीरा बनी।
    हरि नाम ही जपती थी,
    ऐसी उसकी भक्ति थी।
    विष का प्याला पी गई,
    जाने कैसे वो जी गई।
    भरी जवानी जोग लिया,
    मीरा ने सब कुछ छोड़ दिया।
    बस हरि भजन ही गाती थी,
    कब सोती कब खाती थी।
    रत्न सिंह की आत्मजा,
    सीधी सरल रही मीरा।
    राजपाट सब छोड़े थे,
    कान्हा की दीवानी थी।
    असीम प्रेम और भक्ति गाई,
    ऐसी ही थी मीराबाई॥
    _____✍गीता

  • उषा काल की मॅंजुल बेला

    उगते सूर्य की रश्मियाँ,
    जब-जब पड़ी हरित किसलय पर
    सुनहरी पत्तियाँ हो गईं,
    देख सुनहरी आभा उनकी,
    आली, मैं कहीं खो गई।
    वृक्षों के बीच-बीच से,
    रश्मियाँ छन-छन कर आती थीं
    उषा काल की सुन्दर बेला में,
    मेरे मन को भाती थीं।
    उषा काल की सूर्य रश्मियाँ,
    सबके भाग जगाती हैं।
    कोयल भी कुहू-कुहू कर,
    मीठे राग सुनाती है।
    उषा काल की मॅंजुल बेला,
    मन को बहुत लुभाती है।
    ठॅंडी-ठॅंडी पवन बहे जब,
    याद किसी की आती है॥
    ____✍गीता

  • सखी चली ससुराल

    मेरी एक सखी चली ससुराल,
    आशीष लेकर बुजुर्गों का।
    गले मिलकर सखियों के,
    भावी जीवन के सपने
    लेकर अपनी अंखियों में
    सखी चली ससुराल।
    सखियों की भी दुआएँ,
    लेती जाना तुम।
    साजन सॅंग मिलकर,
    नव-सॅंसार बसाना तुम।
    पर भूल ना जाना हमको आली,
    बतियाॅं वही पुरानी वाली।
    याद हमें तुम आओगी ज्यादा,
    भूल न जाना अपना वादा।
    प्रेम-प्रीत हमारी तुम्हारी,
    साजन संग मिल भूल न जाना।
    अरे !अरे! रोना नहीं है,
    अच्छा अब हॅंस दो ना थोड़ा
    ये बन्धन ईश्वर ने जोड़ा।
    याद हमें भी रखना बस तुम,
    भूल ना जाना सखी प्यारी
    साजन के द्वारे अब जा री॥
    ____✍गीता

  • *कर्म पथ*

    टूटे सपनों की सिसकियाँ,
    नहीं सुनता है ये ज़माना।
    इसलिए कर्म पथ पर,
    मुझको है कदम बढ़ाना।
    यदि मैं कभी भटक जाऊँ,
    चलने से, सच्ची राह पर
    तब तुम मेरा हाथ पकड़ कर,
    ले आना साथी सत् मार्ग पर।
    राहों में यदि आएं,
    कॅंटक या अवरोध कोई
    तब पीछे नहीं हटूॅं मैं,
    उसका विरोध करने को कभी।
    है प्रार्थना यही प्रभु से,
    ऐसी शक्ति देना सदा
    कर्म पथ पर चलती रहूॅं,
    सत्कर्म करती रहूॅं सदा
    ______✍गीता

  • भारत के जवाॅं सैनिक

    दिखा लो तुम भी दम,
    कम नहीं हैं हम।
    अपने देश के लिए,
    हम भी जाॅं लुटा देंगे।
    चीन, पाक जैसे बैरी को,
    पल में ही मिटा देंगे।
    चीन ने कोरोना फैलाया,
    पाक ने आतंक बढ़ाया।
    भारत के जवाॅं सैनिक,
    कम नहीं हैं किसी से भी।
    जब-जब अरि ने आंख उठाई है,
    तब-तब उसने मुॅंह की खाई है।
    मुॅंहतोड़ देंगे जवाब,
    पाकिस्तान तेरी हरकतों का।
    यह वादा है भारत के,
    वीर जवान सैनिकों का
    _____✍गीता

  • *खिल गए गुलाब*

    ज़रा सी बारिश के छींटों से,
    क्यारी में खिल गए गुलाब।
    सुहाना सा हुआ मौसम,
    बहने लगी शीतल पवन।
    मयूर नृत्य कर उठे बाग में,
    कोयल गाती मीठे राग।
    इन्द्रधनुष भी दिखे गगन में,
    मीठे गीत बजे हैं मन में।
    “गीता”का हृदय हुआ है हर्षित,
    प्रज्ज्वलित हो उठे चिराग॥
    ______✍गीता

  • *स्वागत है चिकित्सकों का*

    चिकित्सक डटे हुए हर बार,
    बीमारों का करें उद्धार।
    लगाकर दवा ज़ख़्म पर,
    कर रहे हैं उपचार।
    शत्-शत् नमन् है चिकित्सकों को,
    उनके सेवा भाव को प्रणाम।
    गंभीर व्याधि के मौसम में भी,
    एक सैनिक की तरह डटे हुए हैं।
    मुकाबला कर रहे रोग से,
    बीमारों का रख रहे ध्यान।
    स्वागत है चिकित्सकों का,
    ये ही बचा रहे हैं जान।
    संजीवनी है हाथों में इनके,
    इनको कोटि-कोटि प्रणाम
    _____✍गीता

  • सच्चा साथी

    सच्चा साथी वही है,
    जो दुःख में भी साथ दे।
    हृदय में हो जब संताप,
    हाथ बढ़ाकर हाथ दे।
    अमावस सी काली रातों को,
    जो बना दे चाॅंद रात।
    ह्रदय में जब शूल चुभें,
    वो फूल खिला दे मन..
    “मैं हूँ ना” कहकर,
    मिटा दे सारे ग़म।
    ____✍गीता

  • “नाम”

    नाम….
    यही तो है हमारी पहचान,
    हमारे व्यक्तित्व की शान।
    नाम केवल एक नाम ही नहीं है,
    एक विशेष शख्सियत है…
    जिसे जानते हैं हम उस “नाम” से,
    उसके आचरण से
    और उसके व्यवहार से।
    तो दोस्तों…
    कभी अपना “नाम” खराब न करना।
    क्योंकि एक बार
    यदि ख़राब हो जाए नाम,
    तो बरसों बीत जाएंगे उसे ठीक करने में।
    ज़िन्दगी की दोपहर से,
    हो सकती है ज़िन्दगी की शाम भी।
    तो आओ प्रण करते हैं कि,
    नहीं करेंगे कभी ऐसा काम
    जिससे ख़राब हो जाए “नाम”
    क्योंकि बरसों बीत जाते हैं “नाम” कमाने में॥
    _____✍गीता

  • देश में कोरोना का फ़िर विस्फोट

    कोरोना की फिर तेज़ हुई रफ्तार है,
    इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
    देश में कोरोना का विस्फोट,
    फ़िर से हो चुका है
    अब हम कितने तैयार हैं।
    वैकसीन भी आई है,
    कितनों ने लगवाई है??
    मास्क लगाकर घूमना है,
    वरना शामत आई है।
    जिसने दो गज़ दूरी नहीं बनाई,
    उसके घर ये बीमारी आई I
    तो क्या सोच रहे हो भाई,
    कोरोना को मिटाना है।
    सारे नियम पालन करने हैं,
    अपना नम्बर आने पर वैक्सीन लगवाना है॥
    ______✍गीता

  • सुधा बरसे

    सुधा बरसे सदा वाणी से,
    ह्रदय में भी ना कोई गरल हो।
    कभी किसी का,
    दिल ना दुखाऊँ मैं
    मेरी वाणी मीठी और सरल हो।
    मदद कर सकूॅं पीड़ितों की,
    ऐसा भाव रहे सदा मन में
    हृदय की भावनाएं सदा तरल हों।
    क्षमा-दान भी दे पाऊं,
    कोई क्षमा माॅंगे तो मैं
    किसी का जीवन कठिन न करूँ,
    मेरा भी जीवन सरल हो॥
    _____✍गीता

  • ये दिल…

    ये दिल…
    वही क्यूॅं माॅंगता है!!
    जो अक्सर मिल ना पाए,
    लब वही क्यूॅं कहना चाहें!!
    जो अक्सर हम कह ना पाएं।
    काश!!
    दिल ही न होता,
    तो ये दर्द भी ना होता।
    हम दर्द न मिले कोई दर्द में,
    जान भी माॅंगेंगे वो..
    तो जान भी दे देंगे हम,
    जानते हैं हम उनको..
    पिछले जन्म से॥
    ______✍गीता

  • अश्क चमकीले ओस बने

    मेरे अश्क जो गिरे धरा पर,
    वो चमकीले ओस बने।
    मुस्कुरा दिए वो दूर से देखकर,
    मैं मोम सी पिघलती रही..
    वो पाहन सम ठोस बने।
    मेरी सिसकियों में उनको,
    ठॅंडी पवन का एहसास हुआ
    मेरे गर्म आंसू..
    मेरी देह पिघलाते रहे॥
    _______✍गीता

  • मायूसियाॅं देने लगी हैं दर्द ज्यादा

    मायूसियों ने मेरा,
    पता ढूॅंढ लिया है
    लगता है अब हम को,
    बदलना पड़े ठिकाना ।
    मायूसियाॅं देने लगी हैं दर्द ज्यादा,
    अब यहाॅं रहने का नहीं है कोई फ़ायदा।
    सामान अपना उठाकर,
    हम रुख़सत हो रहे हैं।
    कोई तो उन से कह दो अब हम नहीं मिलेंगे॥
    ______✍गीता

  • साहित्य है सबके लिए

    साहित्य है सबके लिए,
    यही समाज का है दर्शन।
    रुचिकर भी हो पढ़ने में,
    हो उस काल का दर्पण।
    जीवन की समस्याओं पर भी करे विचार,
    ऐसा हो साहित्यकार।
    कठिनाइयों पर विजय पाने की,
    नैराश्य में आशा लाने की
    जो कवि ज्योति जगाता है,
    वही सच्चा कवि और साहित्यकार कहलाता है।
    सूरज का उगना,डूबना
    उषा और संध्या की लाली,
    सुन्दर सुगन्धित चलती पवन
    और कभी फलों की झुकी डाली।
    प्रकृति के सौंदर्य का वर्णन,
    जब कोई कवि निज कलम से करता है,
    प्रतिदिन आने वाली चिड़िया की भी,
    वह मीठी बोली सुनता है।
    कल-कल करती नदी बहती
    झर-झर झरने बहते हैं
    नाचता हुआ मयूर है दिखता,
    इसे ही सौंदर्य कहते हैं।
    समाज की समस्याओं की ओर,
    जब साहित्यकार ध्यान दिलाता है
    अवसाद निराशा में डूबा मानव भी
    आशा की किरण को पाता है।
    यही है साहित्य का काम,
    इसलिए कवि कलम को ना दो आराम
    काली घटाएं ठंडी हवाएं,
    साहित्य की यही जान हैं
    मौसम और माहौल से परिचित करवाना,
    यही साहित्य की पहचान है॥
    _______गीता कुमारी

  • साहित्य हो समाज के लिए

    साहित्य है केवल वह रचना,
    जिससे प्रकट हो समाज की सच्चाइयाॅं।
    भाषा और शिल्प भी उत्तम हो,
    दिलो-दिमाग पर असर डालने का हो गुण
    समाज का भला हो, हो यही भावना ।
    प्रस्तुत करे जीवन की सच्चाई,
    प्रभावित कर सके जन-जन के मन को
    यही उद्देश्य हो , हो यही सद्भावना।
    आनंद भी आए उसमें,
    वफ़ाओं की दास्तान हो
    कुछ सच्चाइयाॅं हों और कुछ कल्पना भी विद्यमान हो।
    प्रेम में मिलन का या विरह का हो वर्णन,
    या फिर बरसात के सौंदर्य में इंद्रधनुष का हो दर्शन
    निराशा और आशा पर लिखकर,
    जीत सके काव्य किसी का भी मन।
    ऐसा हो साहित्य कि उसमें,
    दिखे समाज का दर्पण॥
    _____गीता कुमारी

  • ईस्टर संडे

    21 मार्च के बाद,
    प्रथम पूर्णिमा के पश्चात
    आने वाले पहले रविवार
    ईस्टर संडे मनाया जाता है।
    गुड फ्राइडे के बाद,
    आने वाला प्रथम रविवार
    ईस्टर संडे कहलाता है।
    उषा काल में महिलाओं द्वारा,
    की जाती है आराधना
    क्योंकि इसी समय हुआ था,
    प्रभु यीशु का पुनरुत्थान।
    पौराणिक कथा के अनुसार,
    गुड फ्राइडे के तीसरे दिन रविवार को,
    ईसा मसीह पुनः जी उठे,
    करने उत्थान संसार का।
    इसीलिए यह है एक पावन पर्व।
    “ईस्टर संडे” के नाम का।
    गिरजाघर में एकत्रित होकर,
    जलाकर मोमबत्तियां
    याद किया जाता है यीशु को,
    दी जाती है बधाइयां।
    प्रभु भोज में फिर शामिल होकर,
    सब होते हैं प्रसन्न।
    अपने-अपने घरों को भी,
    मोमबत्ती और प्रकाश से करते हैं रौशन।
    याद करते हैं यीशु के प्रेम के संदेश को,
    शीश झुकाते हैं उनके प्रेम और सत्य के वेष को॥
    _______✍गीता

  • *दिल की धड़कन*

    ख़ास लोग जिन्दगी के,
    दिल की धड़कन जैसे हैं।
    दिखते नहीं हों चाहे वो,
    जिन्दगी के ख़ामोश सहारे से हैं।
    दिल की धड़कन के बिन जैसे,
    वजूद नहीं है जीवन का
    वैसे ही उनके बिना,
    यह जीवन बेकार सा है॥
    _______✍गीता

  • रास्ते की दूरियाँ

    रास्ते की दूरियों से,
    फ़र्क नहीं पड़ता है कोई।
    बस, दिलों में दूरियाँ
    न होनी चाहिएं।
    एक सुखद सन्देश से ही,
    मन हो जाता है प्रसन्न
    बस, वह सन्देश हमें
    मिलते रहना चाहिए।
    दोस्त बनाते हैं हम सभी,
    केवल अपनी मर्जी से ही
    दोस्त बनाने में कोई,
    मजबूरियाँ न होनी चाहिए।
    रास्ते की दूरियों से,
    फ़र्क नहीं पड़ता है कोई।
    बस, दिलों में
    दूरियाँ न होनी चाहिएं॥
    ______✍गीता

  • *ऐसा आशीष मुझको देना प्रभु*

    निष्ठा ना कमजोर कभी करना प्रभु,
    नेक रस्ते पर ही हो चलना प्रभु।
    भूलकर भी किसी का दिल ना दुखाऊॅं,
    ऐसा आशीष मुझको देना प्रभु।
    दिल दुखाना चाहे यदि कोई और मेरा,
    उस राह पर ही ना जाऊॅं कभी
    सबसे प्रेम से ही बोलूॅं सदा,
    मीठी वाणी मेरी रखना प्रभु।
    सत्कर्म हों हमेशा हाथों से मेरे,
    हाथों में इतनी बरकत करना प्रभु।
    _________✍गीता

  • ये जो जिन्दगी है ना..

    ये जो जिन्दगी है ना,
    बहुत ख्वाब दिखाती है।
    कुछ ख्वाब होते हैं पूरे,
    तो कुछ अरमान मिटाती है।
    तोड़ कर दिल कभी किसी का,
    उसको आंसू पिलाती है।
    कभी किसी को,
    बिन प्रयास ही खूब प्रतिष्ठा दिलाती है।
    पता ही नहीं चलता है,
    ये जिन्दगी क्या-क्या दिखलाती है॥
    ______✍गीता

  • गुड फ्राइडे

    शुक्रवार का ही दिवस था,
    यीशु के बलिदान का दिन,
    सूली पर चढ़ गए,
    उस महान इन्सान की याद का दिन।
    शत्-शत् नमन है ईसा मसीह को
    मसीहा था जो इन्सानियत का
    एक पवित्र आत्मा इस धरा पर आई
    देने को प्रेम का संदेश।
    25 दिसंबर को जन्म हुआ था,
    येरूशलम के बेतलहम गांव में।
    माता का नाम मदर मरियम,
    पिता का नाम जोसफ था।
    यहाँ कुछ लोग उन्हें,
    प्रभु का पुत्र या अवतार मानते हैं।
    ईस्टर के पहले शुक्रवार को,
    कुछ लोगों के कहने पर पितालुस ने,
    क्रॉस वाली सूली पर लटकाया था।
    गुड फ्राइडे मनाते हैं, यीशु की याद में
    प्रार्थना करते हैं और मोमबत्तियां जलाते हैं
    ईसा मसीह की याद में।
    तकदीर सुधारने आए थे,
    वो सब की इस संसार में।
    बिना किसी गलती के ही,
    चढ़ा दिया था सूली पर
    संसार के कुछ शैतानों ने।
    आज उन्हीं यीशु की याद में,
    हम गुड फ्राइडे दिवस मनाते हैं
    हाथ जोड़ कोटिशः नमन है,
    आओ हम सब शीश झुकाते हैं॥
    _____✍गीता

  • सम्मान और स्थान

    सम्मान और स्थान,
    बनाना किसी के दिल में
    आसाॅं नहीं है लेकिन,
    इतना भी कठिन नहीं है।
    थोड़ा सा त्याग करो गर,
    निज स्वार्थ से हो कर परे।
    कभी किसी के लिए भी सोचो,
    ऐसी धूप खिलेगी जीवन में,
    सुगन्धिं सी बिखरेगी पवन में।
    सुख समेट ना पाओगे फिर तुम,
    इतना सुकून मिलेगा मन में॥
    ______✍गीता

  • क्यूं ना थोड़ा सा अलग बनें

    क्यूं ना थोड़ा सा,
    अलग बनें।
    खुश रहने की सलाह,
    बहुत दी..
    अब खुश रहने की वजह बनें।
    मिटा कर किसी के,
    ह्रदय का संताप
    फिर अपने ह्रदय की खुशी को माप।
    खिलाकर किसी गरीब को खाना,
    कितना सुख मिलता है इससे,
    यह तो खिला कर ही जाना।
    पढ़ा कर किसी निर्धन बच्चे को,
    जान जाओगे तुम, सुख सच्चे को।
    ह्रदय में बहने लगेगी,
    एक पवित्र सी गंगा
    वस्त्र दान कर दो,
    गर मिले कोई भूखा नंगा।
    किसी गरीब बेरोजगार को,
    देकर अपने घर-आंगन में थोड़ा सा काम
    सुख भर दो उसके जीवन में,
    महसूस करा दो उसको भी,
    स्वावलंबन का सुकून-ओ-आराम
    _______✍गीता

  • निशा की है शान निराली

    नभ में तारे चमक रहे हैं,
    चन्द्रमा भी दमक रहे हैं।
    निशा की है शान निराली,
    सुबह के गए घर लौट रहे हैं।
    पंछी भी वापस नीड में आए,
    निशा की गोद में चैन पाएं।
    दिन भर की थकन से चूर जनों को,
    निशा अपने आलिंगन में सुलाए।
    निशा में नभ की छटा निराली,
    निहार मुग्ध हो रही मैं तो आली।
    अनगिन तारे देख आभास हो रहा,
    मानो नभ मना रहा दीवाली॥
    _____✍गीता

  • सूर्य किरण

    सूर्य किरण सुधा समान,
    पौधों को कराती रसपान
    विटामिन डी इनमें विद्यमान,
    सूर्य इसीलिए पूजित हैं
    जीवनोदक इनकी रश्मियाँ,
    प्रदान करें आलोक,
    इस लोक को..
    सुनहरी किरणों से l
    सूर्य के दर्शन हों हर रोज़
    यही प्रार्थना है ईश से
    ______✍गीता

  • नव प्रभात है

    नव प्रभात है बीती निशा
    उठ कर करो पूर्ण अपनी आशा,
    स्वप्न करने को पूरे,
    आया है दिवस सुनहरा l
    रात भर जो देखे स्वप्न,
    आओ पूरे करते हैं l
    उठा तूलिका परिश्रम की,
    उल्लास के रंग से,
    अपना जीवन रंगते हैं॥
    _______✍ गीता

  • *****हैप्पी होली

    *****हैप्पी होली,
    आप सभी को हैप्पी होली
    स्नेह बरसता रहे यूॅं ही,
    रहे सदा ही मीठी बोली
    आप सभी को हैप्पी होली
    प्रार्थना है प्रभु से यह मेरी,
    रहे सभी दुखों से दूर
    तन स्वस्थ और मन सुखी हो,
    खुशियाँ हों जीवन में भरपूर
    बिछुडों को उनका प्यार मिले,
    बेरोजगारों को रोजगार मिले
    घर-घर में खुशियाॅं बिखरी हों,
    बने प्रेम की रंगोली l
    लगे प्रीत का गुलाल सभी को,
    घर-घर में उल्लास की रोली,
    आप सभी को हैप्पी होली॥
    _____✍ गीता

  • *फागुन की यह ख़ास पूर्णिमा*

    दही बड़े खट्टी-मीठी चटनी संग,
    मैंने बहुत बनाए l
    लाल, गुलाबी केसरिया पीले,
    रंग भी बहुत लगाए l
    मीठी गुजिया, चटपटे दही बड़े,
    सब ने मिलजुल कर खाए l
    आप की होली कैसी रही,
    हमको भी बतलाओ..
    फागुन की यह ख़ास पूर्णिमा,
    कैसे मनी बताओ॥
    _______✍गीता

  • दो गज़ दूरी मास्क जरूरी

    अब के बरस भी होली पर,
    दो गज़ दूरी मास्क जरूरी
    होलिका दहन है लेकिन,
    जत्था नहीं लगाना है,
    झुंड नहीं बनाना है,
    कोरोना से दूर ही रहना,
    वरना पड़ जाएगा सहना
    इसीलिए मानो यह कहना l
    दो गज़ दूरी मास्क जरूरी॥
    _____✍गीता

  • *होली पर*

    आज होली पर,
    देख आली चाॅंद पूरा हो गया l
    छिड़क रहा है रजत धरा पर,
    उसका ख्वाब पूरा हो गया l
    सितारे भी मुस्कुराते से प्रतीत हो रहे
    अंधियारी राहों में,
    देख उजाला हो गया l
    चाॅंदनी रात आई है,
    हर्ष की सौगात लाई है l
    होली के पावन पर्व पर,
    लोक आलोकित हो गया॥
    ____✍गीता

  • रंगमंच

    दुनियाॅं के रंगमंच पर,
    हम सभी आते हैं
    अपना-अपना किरदार निभाने,
    किरदार निभाते-निभाते
    भूल ही जाते हैं..
    कि एक दिन इस रंगमंच से,
    जाना है एक दूसरी दुनियाँ में,
    यहां रहकर जो मिला है किरदार,
    वह निभाना है
    अपना एक स्थान बनाना है,
    और फिर इस रंगमंच से
    चले जाना है,
    यही है जीवन..
    और जीवन का रंगमंच…
    ____✍गीता

    विश्व रंगमंच की हार्दिक शुभकामनाएं

  • होली पर ना पीना हाला

    होली पर ना पीना हाला,
    हानि देता है बदन को
    इसका एक छोटा सा प्याला
    गुजिया खाओ लड्डू खाओ,
    रंग लगाकर मौज उड़ाओ
    अभी जवाॅं हो अभी युवा हो,
    अभी तो देगी यह अभिराम
    धीरे-धीरे तन को पीती,
    जला देती है ऐसी ज्वाला
    व्याधि दे जाती है कोई
    जिसका कोई तोड़ नहीं है,
    कर दे मुस्तकबिल को काला l
    मित्रों का ना करो बहाना
    टालो जितना जाए टाला l
    हाला से तुम दूर ही रहना,
    पड़ ना जाए इससे पाला॥
    _____✍गीता

  • सात रंग के कलश

    सात रंग के कलश भरे हैं,
    अबीर उड़ रहे हैं पवन में l
    राहें भी रंगीन हुई है,
    जब से आप बसे हो मन में l
    सुर्ख पलाश का केसरिया पानी
    बरसाऊंगी प्रीतम तुम पर,
    बचने के लिए बना लो,
    तुम चाहे कोई कहानी l
    पीत, हरित गुलाबी नीला,
    केसरिया और लाल
    सात रंग के,
    अबीर का लेकर आई थाल l
    आज राह नहीं बचने की,
    रंगे तो जाओगे हर हाल
    रंग है सभी पक्के,मेरे पास
    हर रंग के गुलाल हैं l
    जी भर कर खेलेंगे होली,
    कोई न रोके,..किसकी मजाल है l
    पानी में केसर घुली,चंदन महके अंग
    ना जाने कब रंग गया फागुन सारे रंग
    अकस्मात् मत तोड़ना संयम के प्रतिबंध,
    आज धवल वसन भी भीगेंगे सतरंग
    हृदय पलाश सा हो गया है,
    तन यह हुआ है रोली
    बज उठी खु़शियों की तरंग,
    आओ मिलकर खेलें होली॥
    _____✍गीता

  • रंग दो मुझको साॅंवरिया

    होली में मिलें कई रंग,
    रंग दो मुझको साॅंवरिया
    लाल, गुलाबी प्रेम रंग है,
    हो गई मैं तो बावरिया,
    रंग दो मुझको साॅंवरिया l
    हरा रंग खुशहाली का रंग,
    हरे रंग से खेल मेरे संग
    रंग दो आकर मोहे हरे रंग में सांवरिया l
    पीत, नारंगी रौशनी बरसाए,
    रौशनी की बनूं किरण
    रंग दो मोहे पीले रंग l
    सात रंग के इंद्रधनुष सा,
    रंग बिखेरो साॅंवरिया
    प्रीत में तेरी हो गई मैं तो बावरिया l
    आई है होली खूब खेलेंगे हम-तुम,
    पिचकारी ना मारना, मोहे भीगने से डर लागे l
    टूटें ना कभी भी प्रेम के ये धागे l
    सात रंग में, होली पर
    रंग दो मोहे साॅंवरिया॥
    _____✍गीता

  • रंग रंगीली होली आई

    रंग रंगीली होली आई,
    सबके मन उमंग भर लाई l
    इंद्रधनुष धरा पर उतरा,
    रंगा, रंग से कतरा कतरा l
    रंगे रंग से सबके गाल,
    लेकर घूमें सभी गुलाल l
    गुजिया, लड्डू खूब खाए,
    रंग सभी पर हैं बरसाएl
    झोली भर कर खुशियाँ लाई,
    रंग रंगीली होली आई॥
    ________✍गीता

  • रंगभरी एकादशी की बधाई

    फूलों और गुलाल के रंग,
    लेकर आए बधाई संग l
    लगा लो रोली,
    बाॅंध के मौली
    आने को है रंग बिरंगी होली l
    रंगभरी एकादशी की,
    आज सबको है बधाई l
    अबीर और पिचकारी लेकर,
    रंग रंगीली होली आई
    मौसम भी हुआ मस्ताना,
    लिखूॅं कविता गाऊॅं गाना l
    होली पर तुम भी आ जाना
    ना करना अब कोई बहाना
    बहाने अब कोई नहीं चलेंगे l
    होली में होली खेलेंगे॥
    _____✍गीता

  • महफ़िल का माहौल

    महफ़िल का माहौल
    इस कदर न बिगाडिए
    किसी पर यूॅं कीच न उछालिए
    खुद के गिरेबां में
    ग़र झाॅंक सको तो ठीक
    वरना किसी और पर यूॅं,
    तोहमत तो ना लगाइए l
    ताप हमारे अंदर भी हैं
    आपके भीतर भी होगा l
    सरे आम हमें,
    यूॅं ना आजमाइए l
    जाइए पहले देख कर आइए आईना,
    फिर किसी और पर तोहमत लगाइए॥
    ______✍ गीता

  • रंग बरस रहे हैं इस बार

    होली का त्यौहार है,
    रंगों की बौछार है,
    कहिए आपका क्या हाल है
    हर ओर गुलाल ही गुलाल हैl
    रंग बरस रहे हैं इस बार,
    बीते बरस ना आई यह बहार l
    कोरोना के कारण ना निकले थे बाहर,
    वैक्सीन आई है, खुशियाॅं लाई है
    लगाकर रॅंग साथियों सॅंग,
    बोलकर मीठी सी बोली,
    अब के बरस खेल लो होली॥
    _______✍ गीता ,

  • फ़ागुन में एक गीत सुनाऊँ

    फ़ागुन में एक गीत सुनाऊँ,
    आओ तुम्हे मन-मीत सुनाऊँ।
    दिल में है जो प्रीत सुनाऊँ
    साँझ हो चली दीप जलाऊँ।
    चादर ओढ़े लालिमा की,
    साँझ सुहानी जाने लगी है।
    दीपक की रौशन लौ से,
    एक महक सी आने लगी है।
    चली है चंचल सी हवाएँ,
    कोयल मीठा राग सुनाए।
    सुबह साँझ चले पुरवाई,
    प्रीतम तेरी याद है आई।
    फ़ागुन में एक गीत सुनाऊँ,
    आओ तुम्हे मन-मीत सुनाऊँ।
    ____✍️गीता

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