हे प्रभु, कभी जन्म लो इस धरा पर , बन कर एक इंसान। फ़िर महसूस करो उस दर्द को, जब बिछुड़ जाए निज संतान। अब इसके आगे क्या कहूँ, खुलती नहीं जुबान। खिसक गई पैरों […]
हे प्रभु, कभी जन्म लो इस धरा पर , बन कर एक इंसान। फ़िर महसूस करो उस दर्द को, जब बिछुड़ जाए निज संतान। अब इसके आगे क्या कहूँ, खुलती नहीं जुबान। खिसक गई पैरों […]
वृक्ष हैं कुदरत का वरदान, इन्हें क्यों काट रहा इन्सान। वृक्ष होंगे तो होगी हरियाली, वसुंधरा पर होगी खुशहाली। नियत समय पर वर्षा आएगी, सूखी धरती भी अन्न उपजाएगी। वृक्ष देते औषधि, फल और फूल, […]
आसमाॅं भी रो दिया, सुन कर मेरी दास्ताँ । हमने कहा चाॅंद तारों से, कोई दूर न हो अपने प्यारों से। ये दर्द बहुत ही गहरा है, लगता है वक्त ही ठहरा है। जो गया,वह […]
वृक्ष हैं कुदरत का वरदान, इन्हें क्यों काट रहा इन्सान। वृक्ष होंगे तो होगी हरियाली, वसुंधरा पर होगी खुशहाली। नियत समय पर वर्षा आएगी, सूखी धरती भी अन्न उपजाएगी। वृक्ष देते औषधि,फल और फूल, धारण […]
भेजकर आश्रम में माता-पिता को, वह बहू-बेटा बहुत खुश हो रहे थे। चुपचाप चल दिए वे बुजुर्ग दंपत्ति, घर को छोड़ते वक्त बहुत रो रहे थे। सोच कर मुसीबत गई घर से, वो बहू-बेटा राहत […]
सावन में, पड़ी जब बरखा की फुहार, मौसम भी बदल गया और ठंडी चली बयार । चिरैया फुदक रही वृक्षों पर, मेघों ने गाया राग मल्हार। रिमझिम बूंदें बरस रही हैं, भीगा ऑंगन सारा । […]
मिलते हैं कुछ फ़रिश्ते ज़िन्दगी में, बना देते हैं रिश्ते ज़िन्दगी में, साथ निभाऍं हॅंसते-हॅंसते, ज़िन्दगी में। टूट जाए जब दिल, जिगर हो कर निराश, हम जाऍं बिखर, तब करते हैं वो बहुत फ़िकर। कीमती […]
कुछ लोग रोटियाँ सेकने आ गए जब जलने लगा मेरा मकाॅं। किसी के नुकसान की , यही है कड़वी दास्ताॅं। बुझाने आग , एक हाथ भी नहीं आया । देने को मेरा साथ, कोई साथ […]
मोहब्बत की अद्भुत है दास्तान, कब शुरू हुई और कब चढ़ी परवान। चाॅंद तारों की ख्वाहिश नहीं है, बस मिले मधुर मुस्कान । या फ़िर हो सुगन्धित फूल, कुछ कम हों हृदय के शूल। जब […]
आप कुछ कहें न कहें, सब कुछ कह जाती हैं हमसे, आपकी ख़ामोशियाँ। ख़ुशियों का इज़हार भी करती और बता देती हैं आपकी परेशानियाँ, आप कितना भी छुपा लो, ग़म और ख़ुशी कितना भी दबा […]
आप कुछ कहें न कहें, सब कुछ कह जाती हैं, आपकी ख़ामोशियाँ। ख़ुशियों का इज़हार भी करती और बता देती हैं आपकी परेशानियाँ । आप कितना भी छुपा लो, ग़म और ख़ुशी कितना भी दबा […]
रिमझिम बूंदे बहुत हैं बरसीं, अखियाँ तुझे देखन को तरसीं। बिजली चमक रही है चम-चम, बरस रहा है पानी छम-छम। नभ में काली बदली छाई, शीतल पवन याद ले आई। सूर्य नहीं आज अम्बर में, […]
दिल से नहीं निकली, तेरे चले जाने की बात। सुकून से नींद नहीं आई किसी रात। बुरा वक्त बीत जाता है , यही सुनते आए थे.. हमारा नहीं बीत रहा है, कैसे हुए हालात। ऑंखों […]
आहिस्ता-आहिस्ता मौसम बदल रहा है। एक शीतल पवन का झोंका मुझसे बोल रहा है.. ‘मुझे तेरा ताप है कम करना’, फिर ना ऑंखें नम करना। हिय में छुपाकर ग़म अपने, तुम धीरे-धीरे कम करना । […]
बीती बातों को याद कर, मत कुरेदना अपने घावों को। ह्रदय में ही रहने देना, अपने हृदय के भावों को । मरहम नहीं लगाती दुनियाँ, मरहम की मत करना आस। केवल ज़ख्म देखना चाहती है, […]
हे कवि, तुम लिखना मत छोड़ना कोई कुछ भी कहे कभी कलम मत तोड़ना l तुम से ही सीख ले रहा, यह सारा संसार है अपने गीतों से जग दिखलाना, तुम्हारे कांधे पर भार है […]
चढ़ा आषाढ़ श्याम घन घिर आए, आ कर खूब नीर बरसाए। किसी अपने के बिछोह में, नैन नीर मेरे भी आए। ऑंचल भीगा, नयन भी भीगे, यादें आईं अपार। इधर मेरे नैना बरसे, उधर गिरी […]
कैसे बांध बनाऊँ नयनों में, अन्दर से सैलाब है आया कैसे भूलूँ तेरी यादों को एक माँ का मन यह जान न पाया जुल्म हुआ है…. एक माँ के जीवन में, कैसा दर्दनाक दिन दिखलाया॥ […]
यूँ तो ख़ामोशियों की कोई ज़ुबान नहीं होती लेकिन… प्रेम में ख़ामोशियों को समझना बहुत मायने रखता है l अगर एक दूजे की ख़ामोशियों को भी नहीं समझ पाए तो…. लफ्ज़ तो लफ्ज़ हैं, कितना […]
जब अपनी ख़ामोशियों में, सुनती हूँ आपकी ख़ामोशियाँ सुकून के कुछ पल, महसूस करती हूँ यहाँ l सोचती रहती हूँ मैं यदा-कदा, मेरी ज़िन्दगी में आप न आते तो क्या होता…. बेचैन सी इस ज़िन्दगी […]
ये कौन चित्रकार है जिसने रंग बिखेरे नभ में इन रंगों से प्रेरित होकर गीत आ गए मेरे लब पे हरे भरे वृक्ष बनाकर यह सुन्दर संसार रचाया हृदय में इतना प्रेम भरा क्यूँ, कोई […]
नभ में बादल घुमड़ रहे हैं, पंछी भी इधर-उधर उड़ रहे हैं l वृक्षों की ड़ाली पर बैठी, कोयल कुहू-कुहू करती l लगता है बरखा आएगी, धरा की प्यास बुझा जाएगी l पेड़-पौधे सब झूम […]
गरम हवा बन कर लू, तन-मन को जला रही है l कैसे बाहर निकलूँ मैं घर से, यह धरा को भी तपा रही है l एक बारिश को तरसता, आज क्यूँ है मेरा मन l […]
आज चिकित्सक दिवस पर, चिकित्सकों को है नमन l शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण, लगा रहे सबको वैक्सीन l कठिन समय में देते साथ, रोगी का थामें हैं हाथ l तन-मन को देते सुकून, दिल्ली […]
तप रही है धरा, तप रहा गगन है l तपा-तपा सा, मेरा भी मन है l बीतता ही नहीं है, आया यह कैसा मौसम है l प्रभात का कंचन भानु भी, दे रहा है तपन […]
उदास शामों में, सुकून के रंग भर दे l बिन कुछ कहे सुने ही, मन की कर दे l ग़म के तिमिर में, चुपके से आकर रौशन कर दे जो, चिराग सुकूँ का l जल […]
गर्म रेत पर मैं चल रही थी, भानु की तपिश भी मुझे खल रही थी l तभी अम्बर में एक बादल का टुकड़ा, छाता सा बन मुझ पर छा गया l तपते तन-मन को आराम […]
हलाहल मिला था तो, अमृत भी मिलेगा समुंद्र मंथन में, सब कुछ मिलेगा l घबराना नहीं है, हिम्मत है रखनी हमें ज़िन्दगी की जंग जीतनी है l जब बढ़ जाएं बुरी शक्तियाँ ज्यादा, हमें मिल-जुल […]
आसुरी शक्तियों का जोर है अभी, इनको मिटाना है शोर करें सभी करना है समुंद्र मंथन, हाँ, निकलेगा पहले हलाहल मगर बहेगी अम्रृत धारा भी यही समय की माँग है, सत्मार्ग पर चलें सभी जीतेंगे […]
ज़िन्दगी को जहर की तरह पी रही हूँ l रोज तिल-तिल मर रही हूँ, मगर जी रही हूँ l ज़िन्दगी की आधी ख़ुशियाँ छिन गई हैं, आधी को देख कर ही जी रही हूँ l […]
नई रौशनी कर रही है तेरा इंतजार यॅंहा । तू है वहाॅं, उसे भी तेरा इंतजार है। आजा लौट कर, बहुत सुनहरी दुनियाँ है, तेरे लिए सजाया है प्रभु ने सुखद संसार यहाँ॥ ____✍गीता
मैं अर्धविक्षिप्त अवस्था में थी, निकाल कर ला रही हूँ धीरे-धीरे स्वयं को । मेरे पाॅंव में डाली हुई आपकी नेह की डोर, लेकर आ रही है मुझे जिंदगी की ओर। आपके नेह का ऑंचल […]
इन्सान की रफ्तार थम गई, और मोबाइल चलने लगा। मोबाइल के सहारे ही, कुछ वक्त कटने लगा। बात करनी हो किसी से, तो मोबाइल काम आया। आजकल इसके बिना, ना किसी ने चैन पाया। जा […]
राहुल बोला.. यह कोरोना कहाँ की बीमारी आई है, इसने कैसी आफत मचाई है। इन्सान, इन्सान से डरने लगा, अदृश्य जीवों से मरने लगा। बस घर में ही पड़े रहो, चलाते रहो मोबाइल। ना कहीं […]
आपकी मुस्कान से, नयनों के दीप रौशन हुए। महक उठा ऑंखों का काजल, मुस्कुरा उठे लब मेरे। मुझसे जुदा होने की बातें, न करना कभी हमदम। जुदा होकर आपसे , जी कर क्या करेंगे हम। […]
देश में मचा हाहाकार है, बीमारों की भरमार है। ऑक्सीजन और दवा की कमी हुई, चिकित्सक भी लाचार हैं। रैड लिस्ट में आया हिंदुस्तान, बचा लो बीमारों की जान। कोरोना से पीड़ित है देश, कोरोना […]
यह जीवन जीना जग में साथी, नहीं है सहज सरल। ज़ालिम यह दुनियाँ है, पीना पड़ता है गरल। कोई-कोई ही इस दुनियाँ में, हॅंसकर साथ निभाता है। आगे को जाते देख अक्सर, यह जमाना जल […]
कविता ऐसी कहो कलम, प्रफुल्लित हो उठे मन। दुखी ह्रदय में खुशियों के फूल खिलें, बिछुड़ों के हृदय मिलें। कभी प्रकृति का हो वर्णन, कविता ऐसी कहो कलम। देखें उषा की लाली को, सुबह की […]
ऑक्सीजन की कमी हुई है देश में, मार रही है बीमारी, कोरोना के भेष में। प्रदूषित होती जा रही है धरा, वृक्ष लगाकर आओ बनाऍं इसको हरा। ऑक्सीजन के सिलेंडर लेते हो, तुम कुछ दाम […]
जब बदलियाॅं भरी जल से, वह बारिश बन बरसने लगी। जब पुष्प में आया सुवास, पवन में सुगन्धि बिखरने लगी। जब दीपक को जलने का बल मिला, वह प्रकाशित हो उजाला देने लगा। बिन कोई […]
मुस्कुरा उठे लब मेरे, देख कर नभ में तारे। मुस्कुरा उठे लब मेरे, देख उषा की लालिमा। भोर की ठॅंडी बहती पवन, प्रफुल्लित कर गई है मन। ये परिन्दों का चहचहाना, कह रहा कविता कोई। […]
राम जी के जन्म दिवस की,, आज सबको है बधाई। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को, अयोध्या में खुशी थी आई। प्रथम बार पिता बने राजा दशरथ, प्रथम बार माता बनीं कौशल्या माई। […]
पूरब हो या हो पश्चिम, उत्तर हो या हो दक्षिण। घर हमारा हमें देता हर्ष है, घर के बाहर तो संघर्ष ही संघर्ष है। हम जीवन के सुख-दुख, घर में ही बाॅंटते हैं। बाहर मिलते […]
अन्न एवम् जल प्रदान करने वाली, वसुन्धरा को नमन्। पृथ्वी के संरक्षण हेतु, आओ उठाऍं कुछ कदम। पृथ्वी पर पवन हो रही अशुद्ध, आओ वृक्ष लगाऍं हम। इस धरा को और भी, हरा बनाऍं हम। […]
श्रमिकों पर फ़िर टूटा कहर, चल दिए छोड़ कर शहर। काम नहीं है क्या खाऍंगे, यही सोच गाॅंव जाऍंगे। क्या करें बेचारे मजदूर, लाॅकडाउन में हुए मजबूर। लाॅकडाउन भी जरूरी है, इनकी भी मजबूरी है। […]
अरि के आगे अडिग रहना है, नहीं अरि से झुकना है। हिम की ऊॅंची चोटी से, यह हमने भी सीख लिया है। फलों से लदी डाली ही अक्सर, झुकती देखी दरख़्तों की। सीधे खड़े अकड़े […]
नभ में एक तारा टूटा, और धरा पर तार। चाॅंदनी मद्धम हुई, चाॅंद हुआ लाचार। कभी दिखता कभी छिप रहा है, नभ के उस तारे को, चाॅंद ढ़ूंढ़ रहा है। वह सच्चाई थी या, था […]
कोरोना का कहर हुआ, गली-गली हर शहर हुआ। आ गई है दूजी लहर, कोरोना ने कितना बीमार किया। दर्द दिया लाचारी दी, बहुत बड़ी बीमारी दी परेशान बहुत किया इसने, कितनी बड़ी महामारी दी। फ़िर […]
चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम, चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी। चाॅंद की रौशनी में, तुम्हारे संग जश्न मनाऊंगी। दो-चार सितारे अलग से लूॅंगी, तुम्हारे कुर्ते में लगवाऊॅंगी। दोनों घूमेंगे चमचम करते, पायल की छम-छम […]
मेघा आए रे आए रे, ऐसी पड़ी फुहार। भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया नीर गिरे भरमार। श्याम वर्ण के मेघा बरसे, खूब गिरी जल-धार। इतनी तो होली पर भी ना भीगी, जितनी भीगी बारिश में इस बार। […]
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