सबक
अकेले रहकर पशु पंक्षी बनकर नहीं जीना, इंसान बनकर इंसानियत से है राह दिखाना। मान गये तो गले लगाकर समाज का करेंगे उध्दार, नहीं तो…
अकेले रहकर पशु पंक्षी बनकर नहीं जीना, इंसान बनकर इंसानियत से है राह दिखाना। मान गये तो गले लगाकर समाज का करेंगे उध्दार, नहीं तो…
इंसानी चाह मर रहा लोगों में दुरियां हो रहा, बेपरवाही के रवानी में चाहत खत्म हो रहा। जिनको कुछ नहीं चाहिए वे भी तांक लगाये…
इंसानी चाह मर रहा लोगों में दुरियां हो रहा, बेपरवाही के रवानी में चाहत खत्म हो रहा। जिनको कुछ नहीं चाहिए वे भी तांक लगाये…
राज की बात बताऊं मैं एक, शेर के खाल में बैठा भेडीयां। दो शक्ल लिए घुम रहा है, बनकर देखो कोई बहुरूपिया।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नर नारी के वेष में आया कोई छलिया, तन मन को करके वश में ठगा मुझे ठगिया। अन्तर्मन के लिलाओ से बनाया भेष अद्भुत, मग्न…
आंखों के सामने घुम रहे हैं भेड़िया, सोच समझ के परख लो ऐंसे छलिया। बकरें के संग बकरा बनकर कब तक खेलोगे खेल, उठा कर…
आस्तीन के फन को रौद कर रख दो, गुलाब के पंखुड़ियों को मसल कर रख दो। हर नकाब को अब तुम बेनकाब कर दो, कातिल…
ख्वाहिशों को थोडा सा हवा दो, जिंदगी को लाड प्यार दुलार दो। कुर्सियों के चक्कर में ना पड़ो, सत्ता को हथिया थोड़ा सा हवा दो।।…
फकिर बन अलाप ना गाओ, जीवन को अपने खुशहाल बनाओ। चिंता फिक्र की गठरी बनाकर, भटके हुए राह को फिर से अपनाओ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
फकिर बन अलाप ना गाओ, जीवन को अपने खुशहाल बनाओ। चिंता फिक्र की गठरी बनाकर, भटके हुए राह को फिर से अपनाओ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कपटी छलिया को बेनकाब करने आया हूं, आशा का एक नया दीप जलाने आया हूं। तीर और फरसा को म्यान में ही रखकर, बातों बातों…
कलयुगी संसार में फकिर बना लुटेरा, ज्ञान की बातें करके झोले को अपने संभाला। धन दौलत की चाह में दोस्त के गले को काटा, बनाकर…
ख्वाहिशों में ना जाने कितने मर गये, ज़मीर को अपने बेंच नरक चले गये। सत्ता को हथियाकर भी बेचैन रहें, खुशीयों को पाने के लिए…
छल कपट को मिटाना सबके बस की बात नहीं, स्नेह का ज्योति जलाना सबके बस की बात नहीं। नर नारी के शब्दों का राह भाव…
भाव तुम्हारे सुंदर है, जग को प्यार सिखाओ। सत्य अहिंसा का पालन कर, जग में एक नया राह बनाओ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दीप जलाने की बात हो करते, कुछ करके पहले तुम दिखलाओ। स्नेह प्रेम लुटाकर दिल को जीतों, फिर बड़ी बड़ी बात सिखाओ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अंधेरे से डरकर ना भागो, उठो मोह को त्याग कर जागो। धरा को रोशन करके प्यारे, कटुता के झोंके से राह ना त्यागो।। ✍महेश गुप्ता…
मुखिया घर का समझदार हो, भले पास में कम पैसा हो । पालन पोषण करके परिवार का, धीरज बंधाने वाला मुखिया हो।। ✍ महेश गुप्ता…
मन की बात मन में ना रखों, कह दो मेरे मित्र तुम आज। एक चिट्ठी लिखकर भेज दो, लाज शर्म की गठरी बांध आज।। ✍महेश…
दिल की बात कागज पर ना लिख सकें, दिल और मन की बात करत मोहे लागे लाज। अपनी वेवसी किसको सुनाएं बता दो मेरे नाथ,…
नैन हमारे व्याकुल है देखन खातिर सखी, ना तुम मिली ना नयन को सुख मिले। मन बाबरा होकर ढुंढ रहा तुमको सखी, आस हमारे टूट…
कृष्ण कन्हैया छलिया तेरे, कितने हैं अद्भूत रुप। किया बांवरा नर नारी को, बता दो कितने हैं स्वरुप।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मोर मुकुट मुरली वाले, महिमा तेरी बड़ी निराली। बंशी के धुन पर प्यारे, छा जाता चारों तरफ हरियाली।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मेरे मोहन प्यारे नंदकिशोर की छवि निराली, मेरे तन मन में बसती नंदकिशोर की प्रतिबिंब। चित चोर मुरली धारी करें मेरे दिल पर सवारी, अद्भुत…
मेरे गिरधर गोपाल मेरे हैं भगवान, दुजा कोई नहीं है मेरा अभिमान । मेरे नंन्दकिशोर के माथे सोहे मोर मुकुट, यशोदा दुलारे कृष्ण कन्हैया हैं…
कहीं धूप कहीं छाया यही तो है प्रभु की माया जिसे कोई समझ ना पाया वो है संसार की मोह माया
अनावश्यक गाड़ी मत चलाओ एसी का बटन ना दबाओ ओजोन परत में और छेद ना करो ओजोन परत के छिद्र को और ना बढ़ाओ
जल को ना बर्बाद करो याद तुम राजस्थान करो पीने का जल है पर्याप्त ही ना व्यर्थ इसे बर्बाद करो
जो सच बोलता है उसे परेशानियों का सामना हमेशा करना पड़ता है परंतु जब सच्चाई आती है सबके सामने तो सबको उसे नमन करना पड़ता…
एक तरफ मजदूर परेशान दूजी ओर किसान फिर सब कहते हैं देखो मेरा देश महान
मजदूरों की समस्याओं को सिर्फ एक ही व्यक्ति ने समझा है सोनू सूद ने बन फरिश्ता उनको घर पहुंचाया है।
धरती का श्रृंगार है हरियाली पेड़-पौधे लगाकर चारों तरफ फैलाओ खुशहाली
पेड़ पौधे लगाओ चारों तरफ फैलाओ हरियाली इस तरह करो पर्यावरण की रखवाली
इंसा के भावनाओं में तर्क बहुत है, प्रेम और बैर में फ़र्क बहुत है, सेवा धर्म प्यार से उपजे प्रेम का संगीत, कांटे चाटे स्वान…
खाने पीने ऐंसो आराम को समझे सभी सुखी संसार, गहरी निद्रा मोह माया को समझे है उपहार। दुःख की गठरी बांध कबीरा चिंतन करके सोवे,…
सदैव बचकर रहना दो विचारों वाले प्राणी से, मोह माया के संसार में छल ही जाते हैं ये। अपने झूठे वादों में सबको रखना चाहते,…
स्वार्थ के चक्कर में पड़कर, बल बुद्धि विद्या खो देता इंसान। अपने द्धारा बनाये कटिलें जाल में फंसकर कैद हो जाता इंसान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मेहनत करते जाओ परिणाम अपने आप ही मिल जाएगा जो बोया है वही तो मिलेगा बिन मेहनत कोई क्या पायेगा?
बहरूपियों से क्या डरना जब सर पर हाथ है मां का उसके पैरों तले है आसमां जिसके सिर पर हाथ है मां का
गिरगिट के रंग को समझ, अपने आप को अलग रखना। संसार के चतुर प्राणी का, याद रखो साथ बहुत है खलता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बहरूपियों को पहचानने की आदत डालो, अपने आप पास के शोहदों को कम मत आंकिए। चेहरे से दिखते मियां मिट्ठू मन के काले रहते, समय…
घात लगाये बैठे हैं स्वार्थ के सारे पुजारी, बचकर रहना मेरे अनमोल मित्र तुम। ये दुनिया में बहरूपिए के शक्ल में बहुत है, जालसाज कुत्ते…
लोभ मोह माया में खोता है इंसान, मदिरा के लत में जलाता है इंसान। खुद के महानता में अंधा होता है इंसान, संसार के कलह…
साथ निभाने वाले सच्चें दोस्त को परखों, ज्वहरी की तरह सोने की शुद्धता समझो। मन के काले जो रहते चोर की तरह छिपते, उनके खूबी…
श्वान हमारे आस पास के ही, लगाकर बैठते घात यहां। मौका पाते काम कर जाते, समझते नहीं दुःख दर्द यहां।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
ये तो महानता है आपका, जो खुद के अवगुणों को पा रहें। यहां लोग बैठे हैं घात लगाये, एक दुसरे की गलती गिना रहें।। ✍महेश…
बातों में अमृत का रसपान, घात लगाये देखो बैठे यहां। मनुज है बढ़कर एक से एक, मन को रखते कुलक्षित यहां।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
वृक्ष लगाकर खुशीयां बांटो धरा को हरा भरा करो, भूमण्डल को स्वच्छ बनाकर धरा के सारे पाप हरो। एक एक कदम बढ़ाकर हाथों हाथ वृक्ष…
जब मैं उदास होता हूँ तेरे कितने पास होता हूँ रात भर रोती हैं आंखें इश्क में आदमी तब खास होता हूँ ।
वृक्ष लगाकर खुशीयां बांटो धरा को हरा भरा करो, भूमण्डल को स्वच्छ बनाकर धरा के सारे पाप हरो। एक एक कदम बढ़ाकर हाथों हाथ वृक्ष…
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.