पहली बार जगे थे , जो अरमान ! तुम्हें देखकर! वो ,निहारने का अंदाज अभी भी रमा है, मेरे जहन में । आंखों का आंखों से वार्तालाप! करने का हुनर अभी भी बसा है, मेरे […]

कुछ इस तरह तेरा तूझे याद किया करते हैं, सब हैं करीब, पर तेरी ही कमी महसूस किया करते हैं। ज़िक्र चलता हैं किसी ओर का, बातों ही बातों में हम तेरा किस्सा छेड़ दिया […]

ओज कविता – बिरो की धरती भारत | बिरो की धरती भारत बिरो से कभी खाली न होगी | राष्ट्र पर प्राण करेंगे न्योछावर जननी सवाली न होगी | भ्रमजाल मायाजाल लोभ लालच मे कभी […]

‘सोचता हूँ तो हर वजह ही बेवजह सी लगे, मेरी साँसों से मेरे दिल का वास्ता न होता तो क्या होता…? मुझ पर से गुज़र कर न जाने कितने चले गए, मैं औरो के मक़ाम […]

कहीं तो छुपा है, किसी ना किसी कोने में, दुबका हुआ सा, मौके की तलाश में, कम या फिर ज्यादा, मगर छिपा जरूर है, हर मस्तिष्क में! और बचा तो ‘मानुष’ तू भी नहीं , […]

‘ये चाहता मैं भी हूँ के ठोकरें लगती रहें तेरी, तुझे मैं याद रख सकूँ, ये आग जलती रहे मेरी.. मेरे सब्र को मेरी बेबसी की इन्तेहाँ मत समझना, ये तूफाँ का इशारा है जो […]

तू बहुत ही खूबसूरत है कहूँ तब भी परेशानी तुझे, नहीं है खूबसूरत तू कहूँ तब भी परेशानी तुझे, कुछ न बोलूं चुप रहूं तब भी परेशानी तुझे, अब अधिक नादान मत बन चैन लेने […]

‘ये मेरी मोहब्बत की, शिद्दत का सिलसिला था, दरिया था कभी मुझमे, अब उससे जा मिला था.. ज़िद थी गज़ब की मुझमे, तुझको जीताने की, हर बार हारकर भी, जीता जो हौसला था.. मुझमे रवाँ […]

ओस के मोतियों जड़ा एक हर बनाऊ मैं फलक के सितारों से तेरी मांग सजाऊंगा मैं । काली घटाओं से मांग लूं तेरी आंखों का काजल झिलमिलाती लहरों से बनाऊं तेरी पायल । श्वेत चांदनी […]

तुम्हारी बात पर इतना कहेंगे आज हम, काबिल हो तुम काबिल काबिल रहो इससे नहीं नाराज हम। लेकिन न समझो दूसरे को भूल कर भी खुद से कम, क्या पता कमजोर भी सहसा दिखा दे […]

जिंदगी है बुलबुला पानी मे उठता बुलबुला फूट जाता है अचानक सत्य को मन मत भुला। सोचता है आदमी मैं सौ बरस जीवित रहूँगा, और कैसे भी रहें, पर मैं सदा ऐसा रहूँगा। इस तरह […]

कुछ अलग ही दिख रहा हूँ पानी मे उठता बुलबुला फूट जाता है अचानक सत्य को मन मत भुला। सोचता है आदमी मैं सौ बरस जीवित रहूँगा, और कैसे भी रहें, पर मैं सदा ऐसा […]

‘इतना कुछ लिखा गया फितरत किताबी आ गई, ज़िंदगी के मंच पर जुर्रत खिताबी आ गई.. उंगलियाँ उठी तो अल्फाजों को ताकत मिल गई, सवाल इतने उठ गए हाज़िरजवाबी आ गई..’ – प्रयाग मायने : […]

कविता कहाँ मैं आजकल बस उलझनें ही लिख रहा हूँ, सामने हूँ आईने के कुछ अलग ही दिख रहा हूँ। भूल कर पहचान खुद की मुग्ध हूँ अपने ही मन में, उड़ रहा आकाश में […]

वो घड़ी है कौन सी जिस घड़ी खुश रहते हो तुम, अब घड़ी की जगह मोबाइल ने ले ली हर घड़ी उसी में गुम रहते हो तुम।

सच है कि सच हमेशा कड़वा बताया जाता है सच्ची में सच्चा आदमी अक्सर सताया जाता है। लेकिन जो सच है सच है सच ही हमेशा सच है, हर झूठ को हमेशा सच से हराया […]

मेरे भारत की युवाशक्ति मत हो शिकार नशे की तू यह नशा तुझे निगल जायेगा मत हो शिकार नशे की तू । आगे बढ़ने की सोच निरन्तर मत घबरा संघर्ष से तू, अपना लक्ष्य ऊंचा […]

‘लड़ा था खुद से ज़मीं पर तेरी खुशी के लिए, फलक में रहके खुदा से भी जंग वही होगी..’ – प्रयाग मायने : फलक – आसमान

कुछ खार जमाने में हर चमन में होते हैं, चुभते हैं जिस्म को लहूलुहान कर देते हैं, तो कुछ खार लफ्जों से घायल कर देते हैं, उन खारों से कोई जाकर पूंछे, क्या उन्हीं का […]

उठो फिर से मेरे यारो, यहाँ कुछ काम करना है| शहर है जाम यदि यारो, कही से राह देना है लड़ो सरकार से भाई, हमें इतराज ना तुमसे| पर परवाह करो मेरी भी,एक जुड़ी जान […]

हे दीनबंधु,परमपिता परमात्मा, करते हम तुमसे बस यही प्रार्थना, सच्ची आजादी दिला दो तुम , एक ऐसा देश बन दो तुम। बेटियां जहां कोख में ही ना मारी जाती हो, हर घर में हर नारी […]

‘तेरी खुशी है किसमे, तय कर ये रज़ा अपनी परेशान हो गया हूँ, दुआ बदल-बदल के.. शायद के कोशिशों से, घुट जाए दम भी मेरा, जलती है आग भी अब, धुँआ बदल-बदल के.. होगी तेरी […]

“गौर से देख तू इस दिल के उजड़े मंज़र को, है जो खंडहर कभी आबाद हुआ करता था.. वो जिसे ‘अदना सा शागिर्द’ लोग कहते हैं, वो कभी इश्क में उस्ताद हुआ करता था..” – […]

कविता -विद्या ——————– प्रेम करो तुम विद्या से, जीवन कांटों में खिल जाएगा| जो विद्या को ना चाहे ओ पाछे पछताय| चढ़त जवानी गदहा बने, ढोय ढोय मर जाय| बालू कंकड़ मोरम ढोए, लादे सर […]

अपने पन की बगिया है ,खुशहाली का द्वार जीवन भर की पूंजी है ,एक सुखी परिवार खुशहाली वह दीप है यारों ,हर कोई जलाना चाहता है खुशहाली वह रंग है यार्रों ,हर कोई रमना चाहता […]

जिन्दा रहे मेरा हिंदुस्तान अद्भुत है जिसका गुणगान सशक्त युवा का प्रबल ईमान खुली हवा में भिखरा सम्मान हिमालय जैसा पर्वत तुझको शीश झुका करता प्रणाम.. सबसे प्यारा सबसे न्यारा समुद्र का ये अद्भुत किनारा […]

दो बूँद गिरा गया बादल महका है धरती का आँचल बन सर्द पवन लहराई मिट्टी की महक-महकाई सब काम काज रुक गए हैं बादल के आगे झुक गए हैं ममता ने ली है अंगड़ाई लो […]

कोई मुझे समझाओं, मैं समझना चाह रहा हूं, ये ग़म की आंधी है, वो उड़ जाएंगी, ज़रा सा दिल्लासा दो, मैं तड़पे जा रहा हूं। अरे! कोई थोड़ा सा तो प्यार जताओ मुझे मैं तरसे […]

‘दिखा दिया ये तज़ुर्बा भी ज़िन्दगी ने हमें, हैं कितने शख्स ज़हर, और दवा है कितने.. न रोशनी को इल्म, न ही चिरागों को पता, है कितने बुझने और मंज़ूर-ए-हवा हैं कितने..’ – प्रयाग मायने […]

कविता- ज्योति पासवान ——————————– आज लूटी है उस की ज्योति ,कल तेरी ज्योति लूट जाएगी| आंख की ज्योति , घर की ज्योति! ज्योति चाहे जिसकी हो| भारत मां को कहने वाले, भारत माँ अब पुकार […]

जल तु इतना कोमल फिर कठोर क्यों तुम जीवन-रक्षक फिर प्राण-हरता क्यों तुम बहते सरल फिर तीव्र रूप क्यों तुम मीठी-प्यास फिर नमकीन क्यों यह गुस्से में नीला आसमान क्यों जलमग्न धरती थर-थर कांपे क्यों […]

‘उथल-पुथल सी मुसलसल है ज़ेहन में मेरे, सुकून-ए-इश्क मगर बेशुमार है मुझमे..’ – प्रयाग मायने : मुसलसल – सिलसिलेवार/लगातार ज़ेहन – दिमाग सुकून ए इश्क – इश्क का सुकून

‘वो शख्स, खुद ही जो खाली हो अपने अंदर से, वो दूसरों को खालीपन के सिवा क्या देगा.. झूठ की परतों को परतों पे चढ़ाने वाले, तेरे किए का सिला अब वो आसमाँ देगा..: – […]

सहनशीलता की तू देवी , हर किरदारों में ढल लेती, ‘मानुष’ तेरी महिमा का , करता गुणगान है , हे! सबला, तू महान है। अर्धांगिनी बनकर, तुने हर धर्म निभाया , बंद मकान को , […]

‘वो एक पल भी किसी तौर ना हुआ मेरा, जो मैंने बाँधा था मन्नत का धागा, लौटा दे.. के तुझसे एक कदम साथ भी चला न गया, मैं तुझे पाने को हूँ कितना भागा, लौटा […]

आज किसी ने सोये हुये ख्वाबों को जगा दिया भूली हुई थी राहें भटके हुये मुसाफिर को मिला दिया जिंदगी का फलसफा जो कहीं रह गया था अधूरा मुरझाई हुई तकदीर को जीने के काबिल […]

‘किनारे रखके ज़माने की नेमतें ए खुदा, मैं तुझसे माँगता फिरता था बस उसे लेकिन.. मेरी मासूम हसरतों को अधूरा करके, दर्द के काम आ गए वो हादसे लेकिन..’ – प्रयाग मायने : नेमतें – […]