जाग जा नई रोशनी का आभास कर, प्रातः हो गई है, पौधों में चमकती ओस की बूंदें, बता रही हैं, किस तरह नींद में रोया होगा रात भर तू। जमाना तेरे आंसू पोछे न पोछे […]

एक ही प्रतिस्पर्धा में अलग अलग स्वाद मिलते हैं इसी से पर मुश्किल से मंजिलों के ख्वाब पलते हैं लक्ष्य है निर्माण कि स्वतंत्रता सब अनुभव कर सके बीमारी गरीबी और अज्ञानता भूत की बात […]

जब समझ न आता ऊंच नींच , अहंकारी हो जाता तन मन अग्रज हो की अनुज या पूज्य , व्यवहार सभी से होता सम निर्जीव सजीव सभी को दुखी , करता रहता ये मानव जीवन […]

हॉस्पिटलों का शहर है दिल्ली फिर इतने बीमार क्यों जनसँख्या बिखरी हमारी इमारतों का वहीँ भंडार क्यों यात्रायें चलती रहती आवागमन कभी थमता नहीं आमदनी का श्रोत बनी जनता ही हर जगह तो नहीं साजिशों […]

निकला था मैं ढुंढने , कोई ऐसा इंसान , जो बिल्कुल खुश , बिल्कुल सुखी, बिल्कुल स्वस्थ, चिन्तामुक्त, तेज़युक्त, मुझे मिला ! पर वो इंसान नहीं अपना दुःख , दूसरों के मुकाबले सुक्ष्म -सा।

‘कुछ इस तरह ज़िन्दगी का फसाना बदल गया, वो क्या बदला कि सारा ज़माना बदल गया.. रिश्तों पर बेरूखी का असर कुछ यूँ हुआ, उसका रूठना बदला तो मेरा मनाना बदल गया..’ – प्रयाग

पतन हाँ पतन पतन की शुरुआत कब होती है , जब घमंड की पराकाष्ठा होती है, जब अपने से काबिल कोई नहीं दिखता है आँख में पट्टी बंधी होती है। जब व्यक्ति दूसरे की गुणवत्ता […]

‘न दुआ लगती है, न मुझको दवा मिलती है ज़ख्म दुखता है अगर उसको हवा मिलती है.. किसी तरह से उसे दिल से निकाला था मगर, वो अगले पल ही मुझे मुझमे रवाँ मिलती है.’ […]

‘गाँव में हाथ, कई हाथ थामे रखते हैं, शहर में खींचने को सिर्फ पांँव होता है.. तरक्की कहने को कितनी ही की हो शहरों ने, यूँ कुछ भी कह लो मगर गाँव, गाँव होता है..’ […]

जब जब गरजा धोनी का बल्ला विश्व पताका लहराई 1983 के बाद ,2011 में ट्रॉफी आई स्टम्पिंग और बैटिंग देखकर जिसकी दुनिया स्तब्ध हो जाती थी शान्त रहकर कैसे देते हैं मात धोनी ने ही […]

‘तुझे तो रोक न पाया, किसी तरह लेकिन शायद मैं तेरी याद को नाकाम कर सकूँ.. तू खुद नही मौजूद तो तेरा खयाल है, इतना तो दे दे वक्त के कुछ काम कर सकूँ..’ – […]

‘तेरे खयाल से बस ये सवाल पूछा है, किसी तरह से यूँ खुद को संभाल, पूछा है नही मिला है जब, कोई हमें अयादत को, तेरी ही बेरुखी से अपना हाल पूछा है..’ – प्रयाग […]

‘कुछ दुआ का असर है, कुछ दवा का असर है या फिर ये तेरे शहर की हवा का असर है.. दस्तकें देने लगी मोहब्बत ज़िन्दगी में अब, ये तेरे और मेरे दरमियां का असर है..’ […]

rajendrameshram619@gmail.com ************************ जलने दो हृदय की वेदना, विचलित मन से कैसे डरना | हो जीवन संताप दुखों का, फिर क्या जीना फिर क्या मरना || ~~~~~00000~~~~~ युद्ध अनघ है मन के भीतर, परितापों से प्राण […]

समस्त देशवासियों को #स्वतंत्रता दिवस की 74 वी वर्षगांठ पर हार्दिक मंगलकामनाएँ राजेन्द्र मेश्राम-नील ******************* अपने लहू से तर, धरा का शृंगार कर, सोई हुई चेतना को, इतना तो भान दे | भावी वर्तमान भूत […]

गांव की ज़िन्दगी ,अब पहले जैसी नहीं जहाँ रिश्ते तो हैं ,वह मिठास नहीं जहाँ मिट्टी तो है ,पर खुशबू नहीं जहाँ तालाब तो है ,पर पानी नहीं जहाँ आम बौराते तो हैं ,पर सुगन्ध […]

चलो होड़ लगाते हैं, ओ री! बारिश तेरी, मेरे नयन झरने से। ओह! मगर तुम हार जाओगी, ये झरना तो पूरी रात बहता है, और तुम बरसती हो कुछ क्षण के लिए।

न उसे छोड़कर गया, न कभी जाऊँँगा इसी उम्मीद पर शायद वो ऐतबार करे.. मैं किये जा रहा हूँ अब भी मोहब्बत उससे, होके मजबूर वो कभी तो मुझसे प्यार करे.. – प्रयाग

कोई वजूद नहीं था तुम्हारा मेरे बिना.. यूंँ ही गुमसुम बैठे रहते थे.. मैंने ही आकर तुम्हारी जिंदगी में रंग भरे होठों को मुस्कुराना सिखाया, हँसना सिखाया, रोना सिखाया। मेरी ही मोहब्बत ने तुम्हें इंसान […]

‘गुज़री कुछ यूँ कि अब तन्हाई से डर लगता है, हमें तो अपनी ही परछाई से डर लगता है.. गहराई अब तो समंदर की बेअसर हैं यहाँ, हमें तो इश्क की गहराई से डर लगता […]

‘आज कहता है दिल कि एक फैसला कर दूँ तुझे दुनियाँँ के सारे सुख कहीं से लाकर दूँ.. तूने उस उम्र में सीने से लगाया हर पल, तुझे इस उम्र में कैसे मैं अकेला कर […]

अभी ना मेरा दीदार कर, थोड़ा ख़ुद को मैं संवार लूं। तेरा हर लफ्ज़ हो शहद सा, तुझे दिल में मैं उतार लूं। जब मिले तेरी नज़र से, नज़र मेरी, तेरी छवि जिगर में उतार […]

एक पपीहा बैठा खेत में , देख आसमान को चिल्लाएं! बहुत हुआ सब्र , अब तो बरस जाओ प्रभु! मेरी इच्छाओं पर , मेरी अभिलाषाओं पर, थोड़ा तो बरस जाओ प्रभु! मेरी मेहनत पर , […]

उठा अपनी आँधियों को, बढ़ा हवाओं का असर, साथ मेरे चल पड़ा है कितनी दुआओं का असर.. अब कभी गिरते नही टूटकर पत्ते शाखों से, मेरे गुलशन पे छाया हुआ है उसकी फ़िज़ाओं का असर.. […]

मैं हंसी तो हंस दिया, संग मेरे ये जहां। वरना ,किसी को, किसी के, अश्क देखने की फुर्सत कहां। इसलिए .गम अपने छिपाकर, मैं भी, हंस लेती हूं यहां। कलम चलाकर कर लेती हूं, दिल […]

बड़ी मुश्किल से बना हूँ टूट जाने के बाद, मैं आज भी रो देता हूँ मुस्कुराने के बाद.. तुझसे मोहब्बत थी मुझे बेइंतहां लेकिन, अक्सर ये महसूस हुआ, तेरे जाने के बाद.. ढूंढ रहा हूँ […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- याद कर लो सभी आज उनको जिनके यत्नों से आजादी पाई, यह जन्मभूमि भारत हमारी उस गुलामी से मुक्ति ले पाई। हर तरफ था अंधेरा घना कोई आशा न थी […]

हालत कुछ आज ऐसी बनी चलती जिंदगी से मौत उलझ गई, अकड़ कर वो कुछ यूं खड़ी मानो जिंदगी से बड़ी हो गई।। ऐ मौत, यूं ना तू मुझपे अकड़ बाकी है मेरी अभी सांसो […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- हर देश – वासी की ज़ुबान पर, आज जय – हिन्द का नारा है। ना .डाले कोई बुरी नज़र, ये वीरों ने ललकारा है । कारगिल का युद्ध हो, या […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- रवि के उजाले में हम तिरंगा लहरायेगें वीर जवानों की गाथा फिर से हम दोहरायेंगे दो मिनट का मौन रखकर हम सब एक साथ इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगायेंगे वतन […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- बहुत सारी वनस्पतियों में, बस एक ही है वो जादुई पेड़! हरा -भरा ,घना -निराला, अलग-अलग सी कलियां उसकी, खुबसूरत तने का ताना-बाना, रंग बिरंगी पत्तियां! देखो, अनोखा दृश्य बिम्ब […]

मेरी वफाओं का खुलकर सिला दिया उसने, न रखा एक भी, हर खत जला दिया उसने.. ‘दूर होने का फैसला क्या खुद तुम्हारा है ?’ मैंने पूछा तो कैसे सर हिला दिया उसने.. हमें भी […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- खुशी खूबसूरती और खैर- ख़ैरियत के साथ चलो मनाते हैं देश की स्वतंत्रता की वर्षगांठ । आजादी सौगात नहीं,अमर शहीदों की विरासत है रक्त बून्द से सिंचित,करना हमें जिसकी हिफाज़त […]