( पैसा बोलता हैं.. ) जेब ढीली बाजार में ऑख टके सामान को जी मचले बीच बाजार में बेवस लाचार सम्भाले पैसे हाथ पाव किये भागे पैसा मुहँ बन्द कर दे बाजार में पैसा बोलता […]
( पैसा बोलता हैं.. ) जेब ढीली बाजार में ऑख टके सामान को जी मचले बीच बाजार में बेवस लाचार सम्भाले पैसे हाथ पाव किये भागे पैसा मुहँ बन्द कर दे बाजार में पैसा बोलता […]
घनघोर अन्धेरा छा रहा हैं इंसान का ईमान डगमगा रहा हैं किसका अब कौन सुन रहा हैं भगवान भी जाग कर सो रहा हैं सच्चाई पर कोहरा छा रहा हैं झुठ पर बादल मड़रा रहा […]
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 ( कंजुस ) भगवान की कृपा हैं सब कुछ हैं धन हैं दौलत हैं घर हैं परिवार एक रुपया जेब से नहीं निकलती कंजुसी से हैं बहुत बेचारे लाचार खाने को हैं बहुत कुछ […]
जातिवाद लड़ते रहो तुम जातिवाद में कलम सर हो जायेगा ऑख उठाकर देख ना पाओगे काम कोई और कर जायेगा जातिवाद हैं दुश्मन हिन्दू का जातिवाद ही हिन्दू को निगल जायेगा जाति धर्म का लड़ायी […]
( तिरंगा ) मैं हूँ भारत माँ का लाल तिरंगा अंबर में फहराऊँगा सिने में भर कर देश भक्ति राष्ट्रगीत मैं गाऊँगा लाल किले के शीर्ष पर झण्डा मैं लगाऊँगा भारत माँ की जयकारा लगाकर […]
बेटी खौल उठा खुन मेरा देख कर इस मंजर को थैले में कही कचरे में कही मरी पड़ी हैं नन्ही बेटी वो खुदगर्ज को मैं कैसे समझाऊ जो ढुढ़ते हैं यौवन में बेटी लगता हैं […]
आईना सच को देखो झुठ परेशान बहुत हैं ऑखो को देखो ऑसू में दर्द बहुत हैं प्यार में देखो लोग छल कपटी बहुत हैं चेहरा जितना मासुम रंग उसके बहुत हैं जिन्दगी भले ही छोटी […]
( माँ ) सुबह उठते ही जब सूरज की किरणें दिखाई देती हैं चिड़िया चहचहा कर गीत सुनाने लगती हैं माँ का मेरे प्रेम समर्पण होता हैं ऊठ जा लल्ला सुबह हुयी माथे को जब […]
( पिता ) हे पितृ बन्धु सखा हमारे जीवन काया के आधार हमारे सर पर छाया के दाता हमारे बारम्बार नमन करता हूँ प्यार अनोखा देकर हमको लाड़ प्यार दिया जीवन में हमको सखा हमारे […]
जल जल की महिमा बड़ी निराली खेतो में करती हरियाली जीवो को जीवन दान देती जग को जल से संवार देती आने वाला हैं भयंकर आकाल जल का मिट रहा हैं संसार जल के सारे […]
हमारे नेता…. हम भी बहुत मजबूर हैं साहब लात मार घुसा सह रहे हैं साहब गाली सुबह शाम खा रहे हैं साहब क्योंकि हमारे नेता चोर हैं साहब शौक नहीं हैं गॉव को छोड़ना रोजगार […]
अब कि बार दिवाली में…. देश का पैसा देश में रखना खर्चा मत करना चाइना की लाईट पर तन मन को प्रशन्नचित रखना कदम से कदम मिलाकर चलना मिट्टी के दीपक जलाना अब कि बार […]
…..माँ…. रिश्ता बड़ा अनोखा हैं माँ का त्याग हैं बलिदान हैं खुशियों की छलक हैं माँ प्रेम हैं तपस्या हैं बच्चे की भाग्य विधाता माँ जगत में महान हैं माँ नाम बड़ा अनमोल हैं आंचल […]
( मेरे प्यारे दोस्तो ) दोस्तो मेरे दिल को आबाद मत करना जीने को मिली सॉसे बर्बाद मत करना ना खेलना तुम मेरे भावनाओ से मित्रो हर मोड पर साथ देना हंस हस कर मित्रों […]
( महंगाई का प्रकोप ) दाल का दाना सोना होगा , चावल हिरा जैसा महंगा । आटा होगा कोकिन हिरोइन , मसाला रोब दिखायेगा । फल को चखेंगे सपनो में लोग , जब वृक्ष सुखा […]
( पगली लडकी ) नयनो को अपने चुरा रही थी जब वह मेरे सामने आयी भोली प्यारी चेहरे पर घबडाहट कि थी परछाई हा हेलो जब बोला मैंने नयनो से नयन मिला ना पायी हाल […]
( पगली लड़की / 2 ) नटखट चंचल नजरो से बाते वह मुझसे करती हैं बात बात में वह मुझसे मेरे सपनो को चुराती हैं ऑखे बन्द करता हूँ तो पगली लड़की सामने आ जाती […]
( पगली लड़की /03 ) ना जाने क्यों इतनी अधुरी सी लगती हैं जीवन गुनगुनाता मचलते मस्ती में चले जा रहा था आगे से मेरे आ रही थी एक पगली सयानी लड़की नयनो से मेरे […]
( पगली लड़की /04 ) मेरी जान तुम यू ही रूठा ना करो मुझसे बादल बनकर मुझ पर यू बरसा ना करो तुम्हारी लबो की हँसी मे बसी जिन्दगी तुम यू ही मुझे तडपाया ना […]
( पगली लड़की / 05 ) समझ ना पाया मैं उसके जज्बातो कि हवाओ को तकरार भी मैंने खूब किया उस पगली को रुलाने के लिए दर्द भर कर सिने में अपने जहाँ को लुटाता […]
( पगली लड़की /06 ) कण कण में मुस्कान बिखेरती जीवन को न्योछावर करती जिद पर अपने करे सवारी घर में सबका मन बहलाती बातो से अपने रस को घोलती घर आँगन को महकाती हैं […]
( पगली लड़की / 07 ) मृदुल चंचल उमंग लिए मन को सुशोभित करती हैं त्याग तपस्या आत्मबल से मुस्कान की किरण बिखेरती हैं थोडी सी पगली बनकर दिल को मेरे खुश रखती हैं समझ […]
( पगली लड़की / 08 ) ना जाने आज क्यो मेरी याद नही आ रही उसको शायद पगली लड़की किसी की यादो की माला गुथ रही हैं बैठ के दिल मेरा भी ना जाने क्यो […]
( पगली लड़की / 09 ) गीत गुनगुनाकर मेरे सपनो में मुझसे मिलने आती हो हँसकर प्यारी नयनो से वार मुझ पर करती हो मेरे दिल के दर्द को कैसे तुम पढ लेती हो मेरे […]
( पगली लड़की / 10 ) दिल में मेरे ना जाने क्यो कुछ सवाल गोते लगाते हैं पगली लड़की को जब देखु दिल मेरा धडकने लगता हैं उसकी मासुमियत निगाहो को मैं पढने की कोशिश […]
तुम पढ़ी लिखी इंग्लिश मिडियम मैं पढ़ा लिखा शुध्द हिन्दी में मैं खाता हूँ गेहूँ चावल प्रिये तुम खाती पिज्जा बर्गर हो मेरा तुम्हारा मेल हैं क्या छुप छुप कर मिलना खेल हैं क्या तुम […]
कुल्हड़ कि चुस्की कुछ याद दिलाती हैं, दोस्तों कि दोस्ती साथ निभाती हैं, महक मिट्टी कि वतन पर प्यार लुटाती हैं, चाय कि चुस्की बचपन जवानी कि कहानी सुनाती हैं,
महेश गुप्ता जौनपुरी: बूंद बूंद का प्यार बरसों जुदाई के बाद ये घड़ी आयी हैं पिया मिलन की रूत आयी हैं मोहब्बत कि फिजा संग बरखा लायी हैं चल भीग जाते हैं इस सुहाने मौसम […]
जाति धर्म के बंटवारे में , इंसानियत का गला घुटता हैं , मन्दिर मस्जिद के चक्कर में , लहू लाल रंग का बहाता हैं , महेश गुप्ता जौनपुरी
मां ये देखो कैसा चांद निकल आया ग्रह के गर्भ में लिपटा हैं बादलों में छुप छुप कर बैठा हैं डरा सहमा सा यह दिखता हैं मां ये देखो कैसा चांद निकल आया हैं मां […]
तिरंगा भारत देश की शान हैं तिरंगा देश प्रेमियों की जान हैं तिरंगा मातृ भूमि का अभिमान हैं तिरंगा आजादी के तराने का नाम हैं तिरंगा नव विहंगम संसार हैं तिरंगा भारत देश का पहचान […]
सावन बारिश कि फुहार ने रंग दिया सारा संसार कौन सुना किसने सुना पपीहा करे पुकार सुन के गर्जना मेघों की नृत्य लुभाता मोरनी को सावन ये मनभावन हैं प्रेम लताएं प्रफुल्लित है सावन के […]
वृद्धा आश्रम बुढ़ि आंखें ना जाने कब से देख रही हैं मुझको एक टक लगाये निहार रही बरसों से मुझको कैसे कर लु मैं किनारा इनका कौन है सहारा यह छोटा सा वृद्धाश्रम है सभी […]
युग धारा एक युग बीत चला है देखो एक ऊर्जा शक्ति निकल रही चीर भानू के किरणों को चांदनी रोशनी फैला रही है बरखा भी इठला रहा है नभ अम्बर की छाया में मुदित हुआ […]
मेरे बापू चरखा के बल पर जिसने देश भक्ति को जगाया था गजब का हुंकार था बापू के जज़्बातों में सत्य अहिंसा की लाठी से जिसने धुल चटाया था खदेड़ गोरों के सैनिक को देश […]
हर रोज़ उम्मीदों का बोझ लेकर बाबा खेतों तक जाते हैं। चिंता की लकीरें, सूखी कुछ- कुछ गीली आंखे लेकर लौट आते हैं। पता है छिपाते हैं कुछ, चाह कर भी ना बता पाते हैं […]
“कवि हूँ मैं सरयू तट का ” कवि हूँ मैं सरयू तट का समय चक्र के उलट पलट का मानव मर्यादा की खातिर सिर्फ अयोध्या खड़ी हुई क्यों कि युगों से मेरी अयोध्या जाने हाल […]
बरगद —— बरगद का एक पेड़ पुराना। जैसे हो कोई बूढ़ा नाना। लम्बी – लम्बी दाड़ी वाला, बड़े तने के कुर्ते वाला। दैर सारी भुजाओं वाला। बंदर कूदे सब डाल- डाल, खीचे डाली और पात-पात। […]
बरगद —— बरगद का एक पेड़ पुराना। जैसे हो कोई बूढ़ा नाना। लम्बी – लम्बी दाड़ी वाला, बड़े तने के कुर्ते वाला। दैर सारी भुजाओं वाला। बंदर कुदे सब डाल- डाल, खीचे डाली और पात-पात। […]
आप महान हैं, हमें देते जो ज्ञान हैं | आप का सम्मान करना, मेरी ही शान है | मैं फूल हूँ चमन का, आप बागवान हैं | आप ही से महकता ये सारा संसार है […]
कभी न भाये गुरु जी तुम, वो मैथ की मिस्ट्री,वो बोरिंग केमिस्ट्री वो छडी की मार वो डांट वो पुकार खड़े कर देना बेंच पर नज़रे रखने को कहना अपने लेंस पर कितने ही बार […]
आज 5 सितंबर है और हम सभी को पता है की आज शिक्षक दिवस है। हम सब हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस का जश्न मनाते है। आज डॉ सर्वेपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन है। […]
मन की बात सुने फिर कौन! ———————————- काले धंधे राह अंधेरी मन दोहराए माने कौन!!!! बात पते की स्वदेशी चीजें , देश का मान बढ़ाएं कौन!! नारी सम्मान हमारा अभिमान, अत्याचार मिटाए कौन!! देश गर्त […]
मन की बात सुने फिर कौन! ———————————- काले धंधे राह अंधेरी मन दोहराए माने कौन!!!! बात पते की स्वदेशी चीजें , देश का मान बढ़ाएं कौन!! नारी सम्मान हमारा अभिमान, अत्याचार मिटाए कौन!! देश गर्त […]
ऐसा मेरा देश हो जाए —————————- आओ भारत नया बनाए, सपनों का संसार बसाये। नए महल सा देश सजाएं, उन्नति का परचम फहराए। चारों तरफ हरी हो धरती, स्वस्थ सड़क हर जगह हो दिखती । […]
ऐसा मेरा देश हो जाए —————————- आओ भारत नया बनाए, सपनों का संसार बसाये। नए महल सा देश सजाएं, उन्नति का परचम फ। चारों तरफ हरी हो धरती, स्वस्थ सड़क हर जगह हो दिखती । […]
ऐ गम मुझसे दूर जा तू, इतनी दूर कि दिखे भी न साया तेरा, क्यों आ आकर सताती है मुझे, नहीं चाहिए मुझे तेरा साथ, ऐ खुशी आ पास मेरे तू, मेरी सच्ची सहेली है […]
TERI ES MITTI ME MILNE KO HUN MAIN TAYAAR AGER ES BAAR BHI MUJHE MILA NA SAWAN TERA PYAAR HAI SAUGANDH TUJHE MERE BALIDAANO KI MERI NAHI KAM SE KAM KADER TO KAR MERE SAPNO […]
मुठि भर सूखी मिट्ठि को जब सजा सवारकर गूँथ गूँथ कर आकर दिया शिक्षक की कड़ी मेहमान के कारण एक दिप्त छात्र का निर्माण हुआ.
मै पढ़ते वकत अटकती हू कमजोर हू थोड़ी पढ़ाई मे पर साथ आपका चाहती हू मेरे जीवन की इस लड़ाई मे . हमेशा ही पैर रखती हू आपके पेरो की ही परछाई मे जब लिखती, […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.