मैं वो दरिया नहीं जो वह जाऊं किसी नाले में, वो दरिया हूं जो नापती हूं समंदर की गहराई, वो राही नहीं जो भटक जाऊ अपनी मंजिल से, वो शम्मा हूं जो बुझती नहीं इन […]

इतनी भीड़ में भी न जाने कैसे यहाँ सुकूँ मिलता है, एक दूजे को देख ही लोगों का जहाँ पे खूं जलता है, डरते हैं पास से गुजर जाने भर के ख्यालात से राही, वहीं […]

किसी के पीछे नहीं घर से अकेला निकल आया हूँ मैं, लोग कहने लगे के डर के अकेला निकल आया हूँ मैं, वो कैसे देखेंगें दिन और रात के उजाले में मुझको यूँ, ख़्वाब जिनके […]

जो नज़र आया मुझे तो उस आरिश में खो जाऊंगा, होजाये गर जो बारिश तो उस बारिश में सो जाऊंगा, लगे हैं लोग रास्ता भटकाने की फ़िराक में यारों मेरा, लगाता है मैं खुद शामिल […]

अपनी ही बनाई कैद से रिहाई हो न पाई, दिल की धड़कन से ही जुदाई हो न पाई, तरसती रहीं मेरी आँखें देखने को उसको, ता उम्र यूँही कटी मगर मिलाई हो न पाई, रिश्तों […]

मन के दरवाजे में हजार चहरे छुपाये बैठ गया, ढूढ़ न ले कोई मुझे बहार पहरे लगाये बैठ गया, नज़रें मिलाईं कभी नज़रें बचाई उस ज़ालिम से, फिर एक दिन भरे बाज़ार सहरे लगाये बैठ […]

तेरे चाहने से पाकिस्तान मेरी सांसे कम ना होंगी, हिम्मत से दम भरूंगा इतना, मेरी सांसे सरहद तक तुझे सुनाई देंगी. सुनकर जय जय कार मेरी, कान तूने बंद कर लिए, सिर्फ 370 लगाकर ही […]

जेब मे भरकर नोट, और मन मे भर कर खोट, दुसरो के लिए गढ्डा खोद, पाप की गठड़ी कंधो पर उठा , चला ढूंढने बरगद की ओट. पैसा खूब कमा लिया, और सोचे पैसा ही […]

मेरे जीवन के अहम इंसान तुम्ही से स्पन्दित यह विश्व महान सरस्वती माँ के तुम सारथी हो तुम्ही से ज्ञान की गंगा का उत्थान मेरा नमन स्वीकार करें पथ मेरा आप सदा प्रदर्शित करें अपने […]

कलम की ताकत का एहसास करता है शिक्षक, कमजोर बच्चों में भी उत्साह जगाता है शिक्षक, जो भटक जाये कोई तो राह दिखाता है शिक्षक, छुटपन से ही संस्कारों का पाठ पढ़ाता है शिक्षक, रोशनी […]

अज्ञानता का मिटा अंधेरा ज्ञान की ज्योत जलाते हैं अथाह शब्दों का भंडार लिए जीवन पथ सुगम बनाते हैं बाधाओं से पार कराते ज्ञान का चक्षु खुलवाते हैं प्रतिदिन विद्यालय में आकर नित नवीनता से […]

सर्वप्रथम गुरु का स्थान। तत्पश्चात पूज्य हैं भगवान। प्राचीन काल से ही, गुरुओं ने दिए संस्कार। किताबी ज्ञान के साथ, सांसारिक नीति व्यवहार। धर्म-अधर्म का ज्ञान दिया, बना जीवन का आधार। असंभव गुरुओं के बिना, […]

आज भी वो दिन याद आते है उसे भुलाऊ कैसे ये कामयाबी की ईमारत छोड जाऊ कैसे… बचपन में कलम थमाई थी आपने, आज वो कलम झुमती है एसे ये कामयाबी की ईमारत छोड जाऊ […]

टीचर हमको रोज पढ़ते। नित नया ज्ञान दे जाते। हमारे उज्जवल भविष्य की नीव वो रखते। अध्यन की सारी समस्याओ की गुत्थी सुलझाते। टीचर हमको रोज पढ़ते। बड़ो का सम्मान है करना । छोटो से […]

बादलों से इक किसान पुछता रहा, महीना तो आया सावन, भीगी नहीं जमीं की लाज। बोलो भला कैसी रही यह गर्मी की मार, खेतों को बंजर देख उद्वर लगी आग। ऐठी माटि हाथ दिये पसार, […]

शीर्षक – भारत माँ का बेटा माँ मुझे भी मँगा दे बन्दूक मैं भी सीमा पर लडने जाऊँगा मैं बच्चा अब नहीं रहा मैं भारत का लाज बचाऊँगा चीन पाकिस्तान को खदेड़ दुश्मन का चीता […]

शीर्षक – बदलाव झूठ के आगे सच दबता जा रहा हैं साहेब अमीर के आगे गरिब रौदा जा रहा साहेब झूठ फलता फुलता आगे बढता जा रहा साहेब सच को झोड झूठ का साथ दे […]

( पैसा बोलता हैं.. ) जेब ढीली बाजार में ऑख टके सामान को जी मचले बीच बाजार में बेवस लाचार सम्भाले पैसे हाथ पाव किये भागे पैसा मुहँ बन्द कर दे बाजार में पैसा बोलता […]

घनघोर अन्धेरा छा रहा हैं इंसान का ईमान डगमगा रहा हैं किसका अब कौन सुन रहा हैं भगवान भी जाग कर सो रहा हैं सच्चाई पर कोहरा छा रहा हैं झुठ पर बादल मड़रा रहा […]

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 ( कंजुस ) भगवान की कृपा हैं सब कुछ हैं धन हैं दौलत हैं घर हैं परिवार एक रुपया जेब से नहीं निकलती कंजुसी से हैं बहुत बेचारे लाचार खाने को हैं बहुत कुछ […]

जातिवाद लड़ते रहो तुम जातिवाद में कलम सर हो जायेगा ऑख उठाकर देख ना पाओगे काम कोई और कर जायेगा जातिवाद हैं दुश्मन हिन्दू का जातिवाद ही हिन्दू को निगल जायेगा जाति धर्म का लड़ायी […]

( तिरंगा ) मैं हूँ भारत माँ का लाल तिरंगा अंबर में फहराऊँगा सिने में भर कर देश भक्ति राष्ट्रगीत मैं गाऊँगा लाल किले के शीर्ष पर झण्डा मैं लगाऊँगा भारत माँ की जयकारा लगाकर […]

बेटी खौल उठा खुन मेरा देख कर इस मंजर को थैले में कही कचरे में कही मरी पड़ी हैं नन्ही बेटी वो खुदगर्ज को मैं कैसे समझाऊ जो ढुढ़ते हैं यौवन में बेटी लगता हैं […]

आईना सच को देखो झुठ परेशान बहुत हैं ऑखो को देखो ऑसू में दर्द बहुत हैं प्यार में देखो लोग छल कपटी बहुत हैं चेहरा जितना मासुम रंग उसके बहुत हैं जिन्दगी भले ही छोटी […]

( माँ ) सुबह उठते ही जब सूरज की किरणें दिखाई देती हैं चिड़िया चहचहा कर गीत सुनाने लगती हैं माँ का मेरे प्रेम समर्पण होता हैं ऊठ जा लल्ला सुबह हुयी माथे को जब […]

( पिता ) हे पितृ बन्धु सखा हमारे जीवन काया के आधार हमारे सर पर छाया के दाता हमारे बारम्बार नमन करता हूँ प्यार अनोखा देकर हमको लाड़ प्यार दिया जीवन में हमको सखा हमारे […]

जल जल की महिमा बड़ी निराली खेतो में करती हरियाली जीवो को जीवन दान देती जग को जल से संवार देती आने वाला हैं भयंकर आकाल जल का मिट रहा हैं संसार जल के सारे […]

हमारे नेता…. हम भी बहुत मजबूर हैं साहब लात मार घुसा सह रहे हैं साहब गाली सुबह शाम खा रहे हैं साहब क्योंकि हमारे नेता चोर हैं साहब शौक नहीं हैं गॉव को छोड़ना रोजगार […]

अब कि बार दिवाली में…. देश का पैसा देश में रखना खर्चा मत करना चाइना की लाईट पर तन मन को प्रशन्नचित रखना कदम से कदम मिलाकर चलना मिट्टी के दीपक जलाना अब कि बार […]

…..माँ…. रिश्ता बड़ा अनोखा हैं माँ का त्याग हैं बलिदान हैं खुशियों की छलक हैं माँ प्रेम हैं तपस्या हैं बच्चे की भाग्य विधाता माँ जगत में महान हैं माँ नाम बड़ा अनमोल हैं आंचल […]

( मेरे प्यारे दोस्तो ) दोस्तो मेरे दिल को आबाद मत करना जीने को मिली सॉसे बर्बाद मत करना ना खेलना तुम मेरे भावनाओ से मित्रो हर मोड पर साथ देना हंस हस कर मित्रों […]

( महंगाई का प्रकोप ) दाल का दाना सोना होगा , चावल हिरा जैसा महंगा । आटा होगा कोकिन हिरोइन , मसाला रोब दिखायेगा । फल को चखेंगे सपनो में लोग , जब वृक्ष सुखा […]

( पगली लडकी ) नयनो को अपने चुरा रही थी जब वह मेरे सामने आयी भोली प्यारी चेहरे पर घबडाहट कि थी परछाई हा हेलो जब बोला मैंने नयनो से नयन मिला ना पायी हाल […]

( पगली लड़की / 2 ) नटखट चंचल नजरो से बाते वह मुझसे करती हैं बात बात में वह मुझसे मेरे सपनो को चुराती हैं ऑखे बन्द करता हूँ तो पगली लड़की सामने आ जाती […]

( पगली लड़की /03 ) ना जाने क्यों इतनी अधुरी सी लगती हैं जीवन गुनगुनाता मचलते मस्ती में चले जा रहा था आगे से मेरे आ रही थी एक पगली सयानी लड़की नयनो से मेरे […]

( पगली लड़की /04 ) मेरी जान तुम यू ही रूठा ना करो मुझसे बादल बनकर मुझ पर यू बरसा ना करो तुम्हारी लबो की हँसी मे बसी जिन्दगी तुम यू ही मुझे तडपाया ना […]

( पगली लड़की / 05 ) समझ ना पाया मैं उसके जज्बातो कि हवाओ को तकरार भी मैंने खूब किया उस पगली को रुलाने के लिए दर्द भर कर सिने में अपने जहाँ को लुटाता […]

( पगली लड़की /06 ) कण कण में मुस्कान बिखेरती जीवन को न्योछावर करती जिद पर अपने करे सवारी घर में सबका मन बहलाती बातो से अपने रस को घोलती घर आँगन को महकाती हैं […]

( पगली लड़की / 07 ) मृदुल चंचल उमंग लिए मन को सुशोभित करती हैं त्याग तपस्या आत्मबल से मुस्कान की किरण बिखेरती हैं थोडी सी पगली बनकर दिल को मेरे खुश रखती हैं समझ […]

( पगली लड़की / 08 ) ना जाने आज क्यो मेरी याद नही आ रही उसको शायद पगली लड़की किसी की यादो की माला गुथ रही हैं बैठ के दिल मेरा भी ना जाने क्यो […]

( पगली लड़की / 09 ) गीत गुनगुनाकर मेरे सपनो में मुझसे मिलने आती हो हँसकर प्यारी नयनो से वार मुझ पर करती हो मेरे दिल के दर्द को कैसे तुम पढ लेती हो मेरे […]

( पगली लड़की / 10 ) दिल में मेरे ना जाने क्यो कुछ सवाल गोते लगाते हैं पगली लड़की को जब देखु दिल मेरा धडकने लगता हैं उसकी मासुमियत निगाहो को मैं पढने की कोशिश […]

तुम पढ़ी लिखी इंग्लिश मिडियम मैं पढ़ा लिखा शुध्द हिन्दी में मैं खाता हूँ गेहूँ चावल प्रिये तुम खाती पिज्जा बर्गर हो मेरा तुम्हारा मेल हैं क्या छुप छुप कर मिलना खेल हैं क्या तुम […]

कुल्हड़ कि चुस्की कुछ याद दिलाती हैं, दोस्तों कि दोस्ती साथ निभाती हैं, महक मिट्टी कि वतन पर प्यार लुटाती हैं, चाय कि चुस्की बचपन जवानी कि कहानी सुनाती हैं,

महेश गुप्ता जौनपुरी: बूंद बूंद का प्यार बरसों जुदाई के बाद ये घड़ी आयी हैं पिया मिलन की रूत आयी हैं मोहब्बत कि फिजा संग बरखा लायी हैं चल भीग जाते हैं इस सुहाने मौसम […]