मन मेरा कह रहा यह बार – बार है हाथ तेरे समाज की पतवार आबरू बहन – बेटियों की हो रही है तार – तार हो रहा है सीता हरण बार – बार तू राम […]
मन मेरा कह रहा यह बार – बार है हाथ तेरे समाज की पतवार आबरू बहन – बेटियों की हो रही है तार – तार हो रहा है सीता हरण बार – बार तू राम […]
लेखनी को पुष्प चढ़ाकर भाव ह्रदय से सजाकर ज्ञान का भंडार भरकर प्रेम – अश्रु के साज से आज कुछ ऐसा लिखूॅ गीता लिखूॅ कुरान लिखूॅ वेद लिखूॅ ग्रन्ध लिखूॅ राम लिखूॅ – कृष्ण लिखूॅ […]
भारत माता सिसक रही है भारत माता, आॅचल भी कुछ फटा फटा है चेहरे का नूर कहीं नहीं है,घूंघट भी कुछ हटा हटा है।। क्या कारण है, सोचा है कभी? क्यों माॅ इतनी उदास है […]
एक शहीद का खत….. ‘माॅ मेरे खत को तू पहले आॅखों से लगा लेना चूमना होठों से इसे फिर आॅचल में छिपा लेना।’ कि….. बेटा तेरा आज अपने कर्तवय से हट गया युद्ध बाकि था अभी […]
अ से अ: और क से ज्ञ जब लिखने लगा था मैं, माँ को मेरी पढ़ने वाला बच्चा दिखने लगा था मैं, फिर शब्दों को मिलाकर जब पढ़ने लगा था मैं, माँ को मेरी अफसर […]
रूठ जाता हु कभी अगर कोई नहीं आता माँ, तेरे सिवा मनाने के लिए; घाव गहरे है मेरे; कोई नहीं आता माँ; तेरे सिवा सहलाने के लिए;.. अक्सर भटक जाता हु मैं; कोई नहीं आता […]
मैं नेत्रहीन नहीं आंखे मूंदे बैठा हूं मैं भी अवगत था सत्य से पर विवश रहा सदा अन्तर्मन मेरा क्या मिलेगा व्यर्थ में लड़ने से समस्त भारत के लिए कुछ करने से विदित था सब […]
वो समय की भी क्या बात थी, जब मुश्किलों की न कोई रात थी हम उछलते थे कूदते थे और खुशियों की धुन में हमेशा खो से जाते थे जब बड़ी बड़ी गलतियां भी […]
काँटों से घिरे चमन में खुश्बू की तमन्ना न कर रात के घने अंधेरों में रौशनी की तमन्ना ना कर – कमलेश कौशिक
नहीं मिलती वो लड़की जिसे मैं ब्याह कर लाया था वो कमसिन सी शरमीली सी जब मैंने उसे पहली बार देखा था आजकल वो जूडो क्लासों में जाती है प्रेक्टिस हम पर आजमाती है गाड़ी […]
देखो फिर से सावन आया। सरोवर में कमल मुस्कराया।। भॅवरों ने गीत गुरगुनाया । कोयल ने की कुहू – कुहू ।। सारा घर आंगन खुशियों से भर आया । दूर बैठे सेना के जवानों ने […]
सम्पूर्ण ब्रहमण्ड भीतर विराजत ! अनेक खंड , चंद्रमा तरेगन !! सूर्य व अनेक उपागम् , ! किंतु मुख्य नॅव खण्डो !! मे पृथ्वी भूखंड ! अति मुख्य रही सदा !! यहा पर , […]
तेरे लिए मैं तो भूला हूँ जमाने को! यादें ले आती हैं गुजरे अफसाने को! तेरा जिक्र आता है जब किसी महफिल में, दर्द खोज लेता है मेरे ठिकाने को! रचनाकार- मिथिलेश राय #महादेव’
बेखौफ है हम, देखो इस जहाँ से जो संग मेरे तू है इतमिनान से बीते साये में तेरे ये दिन तुम्हें कह रहा हूँ यारा ईमान से कहीं मुस्कुराहट है बिखेरती ,ये बिमारी मेरी मुश्किलों […]
मैं उनसे चन्द पल की ही तो मोहलत माँगता था, ना जानें क्यों उन्होंनें जिन्दगी ही नाम कर दी हैं, मैं सोया हूँ नहीं दिन रात जबसे देखा हैं उनको, निगाह-ए-इल्तिफातों में सुबह से शाम […]
जश्ने आजादी का पल है,आओ खुशी मनाएँ। आसमान फहरे तिरंगा, जन गण मन हम गाएँ। कालिमा की बीती रातें ,आया नया सवेरा। प्रगति -पथ परआगे ,बढ रहा देश अब मेरा। अरूणदेव की नूतन किरणें ,नया […]
कायर ——- दरवाजे पर आहट हुई अधखुला दरवाजा खुला परिचित सामने खड़ा आस्तिने चढाए पैर पटकता लौट गया बोलकर कुछ अनसुने,अनकहे शब्द एक चुप्पी और गहरा अटहास स्मरण था मुझे सब कि सत्य अकस्मात् ही […]
Mohobat ki gali mai ghr tumhara tha Isqk k Sher mai ghr humara tha Is masum dil ko q toda jab y dil Tumhara tha By RLv gahlot
Nigahe jab milti hai Piyar hota hai do dilo ko Ek dusre per aitbar hota hai Sayad nijre Milne se hii piyar hota hai bina kuch bole hi ikrar hota hai By RLv gahlot
Piyar ek eshas hai Jo do dilo k pas hai Her kisi ko kbhi na Kbhi hota ye eshas hai Bs yhi piyar ko lekar Mere jasbat hai By RLv gahlot
राही अंजाना है कहीं अंजाना ही रह ना जाए, ज़िन्दगी के इस जटिल सफर में कहीं बेमाना ही रह ना जाए, उठाते हैं कुछ अपने ही उंगलियां अपनी, कहकर के राही क्या किया तुमने, कहीं […]
कभी समय की ठोकर से, यदि हिल जाएँ विश्वास मेरे कभी जो तुमसे कहने को यदि, शब्द नहीं हों पास मेरे कभी तुम्हारी अभिलाषाएं,.. यदि मैं पूर्ण न कर पाऊँ प्रिय तुम भूल नहीं जाना, […]
निवेदन ——– ऐ पथिक राह दिखा मुझे मुख न मोड़ चल साथ मेरे भारत आजाद कराना है धर्म मेरा ही नहीं तेरा भी है भयभीत न हो विचार तो कर ध्वज हाथों में है अब […]
तुम खिलखिलाते खिल उठे गुलशन लजा गया । पहले कभी खिलाफ नहीं, ऐसा गुलाब था ।…..खुशियों की गंध मुबारक हो। आपका….. जानकी प्रसाद विवश…..।
****ख्वाहिश रखता हूं**** ना साथ की ख्वाहिश रखता हूं, ना प्यार की ख्वाहिश रखता हूं, मैं सिर्फ तुम्हारे चेहरे के दीदार की ख्वाहिश रखता हूं l हां मुझको तुम्हारी आंखों के ये खार कंटीले लगते […]
माँ भारती तेरी आरती । तेरी आरती माँ भारती ।। माँ भारती तेरे निगहबान सीमा प्रहरी हम पाकर अजेय वरदान डटे हैं सीमाओं पर इस कर्म-भूमि की माटी है मस्तक का टीका है कसम मिटा […]
???????? ग़ज़ल ——— डगमगाती सी नाव है भाई । भाइयों में तनाव है भाई ।। याद कैसे रहे लगी दिल की । आज झूठा लगाव है भाई ।। दिल बड़ा पाक-साफ होता था । अब […]
मातृभूमी पर दिल करता है हो जाऊं कुर्बान बना रहे ये प्यारा झंडा भारतवर्ष की शान देश के कितने ही भक्तों ने तुमको रक्त चढ़ाया है तब जाकर ये प्यारा झंडा लालकिला लहराया है आज […]
???????? ————————- भीगी रातें ————— सावन को जरा खुल के इस बार बरसने दो । राजी ही नही यारा दिल और तरसने को ।। दो तीन बरस बीते कुछ प्यार भरी बातें, अक्सर ही सताती […]
कितना बदल गया हूँ मै . लग चुके है दाम बाज़ार में मेरे ईमान के, बिक गया हूँ मै . तुम्हारे लिए क्या जिऊंगा मै- ए दुनिया वालो, जब खुद की ही जिंदगी से थक […]
Dil mai the vo or hum unhe zamane mai talash rahe the Mile bhi tou aise haseen modh per jab hum zindgi ko alvida bol kr khuda k ghr ja rahe the By RLv gahlot
Mohobat mai akser dil tut jate hai Or Riste bhi kache dhago ki trah tut jate hai Kuch gustakiyo or nadaniyo ka silsila tha Mage ab kya Kare jab apne hi apno se chut jate […]
Mohobat k Sher mai Katle aam hogye Jab se in labo pe unke nam hogye By RLv gahlot
उथल-पुथल जमीं कहीं पे, हो रहा शिथिल अभिमान I प्रतीत तो ये हो रहा, आज अकेला हिन्दुस्तान II यहाँ लुट रही है अस्मिता, पर उनको ये परवाह क्या ? टूट जाए आशियाँ पर, उनके लिए […]
कभी श्रापित अहिल्या सी पत्थर बन जाती है कभी हरण होकर सीता सी बियोग पाती है कभी भरी सभा में अपमानित की जाती है कभी बेआबरू कर अस्मत लूटी जाती है कभी बाबुल की पगड़ी […]
हम स्वतंत्र होगे एक दिन ये आस लिए कुछ प्रण किया था आह! क्या थे वो क्षण जब मैं नहीं हम थे सब ध्येय एक लिए हृदय में बढ़ चले थे ओज लिए सोज़ लिए […]
???????? ————————- प्रतिभाओं का धनी ————————— सत्य-बोध के मूल-बीज को प्रकृति ने स्वयं निखारा है प्रतिभाओं का धनी आदि से भारत-वर्ष हमारा है श्वर-व्यञ्जन को गढ़कर हमने शब्द, वाक्य मे ढ़ाल दिया मन की अभिव्यक्ति […]
आज जज्बे का इम्तेहा होगा कल कदमों में ये जहाँ होगा | आज काश्मीर जीत लेना है कल कब्जे में पाकिस्तां होगा || न धौंस दे मुझे ऐ दहशतगर्दी कल न तेरा नमो निशां होगा […]
मोहब्बत नहीं है क़ैद मिलने या बिछड़ने की, ये इन खुदगर्ज़ लफ़्ज़ों से बहुत आगे की बात है #पार्थ
वो अक्स अपना देखकर…. भीगी आँखों से मुस्कराई तो होगी मैंने कहा था उससे कभी…. उसकी आँखें मेरे दिल का आईना हैं. ** ” पारुल शर्मा ” **
इश्क के बाजार में दिल की तिजारत यूँ हुई सपनों के बदले नींद गयी बङी हिफाजत से रखा था प्यार दिल में रूह,दिल,नजर दिमाक आ गये हिरासत में खामोशी की लब्जों से बागाबत यूँ हुई […]
**समझदार लोग धूल फांकते हैं::आनन्द सागर** जो अपने आगे दूसरों को कम में आंकते हैं, ऐसे ही समझदार लोग धूल फांकते हैं l जिनसे अपने घर का हाल सम्भाला नहीं जाता, ऐसे […]
जिन्दगी का फलसफा कौन समझ पाता है हालात बदलते है नहीं वक्त गुजर जाता है कल ये हुआ,कल क्या होगा इस कशमकश में, पल पल पिस जाता है कल बदलता है नहीं आज बिगड़ जाता […]
आपने पत्थर को हीरा बना दिया, दीवानगी ने जाने कब, मीरा बना दिया। निरंतर पढ़ते रहें … जानकी प्रसाद विवश का रचना संसार……।।
मानव ^^^^^^ अहंकार का पुतला बन जा तज दे भली-भला, अरे क्या करता है मानव होकर सत्य की राह चला | तू मानव रहकर क्या पाएगा दानव बन जा, दुष्कर है नम रहना सहज है […]
” माँ ” ——- शब्दों के सद्भाव ^^^^^^^^^^^^^^^^^^ मानवता भी धर्म है जैसे इन्सानियत मज़हबी नाम, शब्दों के सद्भाव भुलाकर जीवन बना लिया संग्राम | सच्चाई के पाठ को पढ़ कर एक किनारे दबा दिया […]
तीन पहर बीत चले चांद कुछ दूर हुआ कुछ मिल गया तम में कुछ छूटा रह गया आकृति बिखर गयी धुंधली सी विक्षिप्त सी फैल गयी कहीं रेंगती परछाई सी समय बढ चला चौथे पहर […]
देश की आश ^^^^^^^^^^^^^^^^ आशा है अब आज़ादी के मैं सपने देख सकूंगा, आशा है मै फिर से प्यारा भारत देश बनूंगा| आशा मेरे आँगन मे राहत के […]
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