इस कलि को मुस्कुराने दो कोख से धरती की गोद में आने दो बिखेर देगी चारोंतरफ खुशियाँ खुल के तो इसे मुस्कुराने दो। बेटी को घरस में आने दो।>2 रोपित करो इसे अपने आँगन में […]
इस कलि को मुस्कुराने दो कोख से धरती की गोद में आने दो बिखेर देगी चारोंतरफ खुशियाँ खुल के तो इसे मुस्कुराने दो। बेटी को घरस में आने दो।>2 रोपित करो इसे अपने आँगन में […]
मंदिर में पानी भरती वह बच्ची चूल्हे चौके में छुकती छुटकी भट्टी में रोटी सा तपता रामू ढावे पर चाय-चाय की आवाज लगाता गुमशुदा श्यामू रिक्से पर बेबसी का बोझ ढोता चवन्नी फैक्ट्रीयों की खड़खड़ […]
।। माँ ।। वो दूर गया है परसों से माँ सोई नहीं है बरसों से माँ की आँखों से ही तो घर-घर में उजाला है। ए वक्त,ए हवा,ए फिज़ा जरा संभल मुझे कम न समझ […]
बहुत बहुत प्यारे मित्रो सुहानी शाम का आत्मीय अभिवादन। “घनश्याम का दीदार” सुहानी शाम को घनश्याम का, दीदार हो जाये, ये प्यासा मन, कन्हैया के, गले का हार हो जाये । मधुर मुरली की रसबँती […]
इतना तो बोझिल कभी हुआ नहीं मै. मुकाम तो बहुत आए, बहुतो ने रोका भी, पर इतना तो कभी रुका नहीं मै . कुदरत तो हमेशा रुलाती आ रही है मुझको, पर इतना तो कभी […]
जला दो इतने दीपक ज़माने में, के किसी कोने में अब रात की कोई स्याही ना दिखे, दिखा दो सच के आईने ज़माने को ऐसे, के किसी को झूठे चेहरों की कोई परछाई ना दिखे, […]
तू कुछ बोले तो मैं सुन लू ख्वाब दिलों के सारे मैं खुद ही बुन लू
हर सुबह उठकर भागता हूं, मैं सब के लिए सुख कमाने, हर शाम घर लौट आता हूं, मैं सबका हिसाब चुकाने, बिता दिये हैं अनगिनत दिन मैंने और बे-हिसाब ये रातें मगर मुक्त नहीं हुआ […]
माँ की गोद छोड़, माँ के लिए ही वो लड़ते हैं, वो हर पल हर लम्हां चिरागों से कहीं जलते हैं, भेज कर पैगाम वो हवाओं के ज़रिये, धड़कनें वो अपनी माँ की सुनते हैं, […]
(पहचान) मैं कभी तेरे होटों की मुस्कान हूँ तो कभी तेरी साँसों की पहचान हूँ तेरे दिल में गूँजती घंटियों का शोर तो कभी शाम को मस्जिद की आज़ान हूँ मेरी खुशबू है तेरे हर […]
Hisse ka ye ek kissa hai Hisse ka kissa kehti hun Kyu aadmi ne har jaree jaree ke hisse kar diye Kyu shehar bate kyu gao bate kyu dhara ke hisse kar diye Us maula […]
कविता सुन्दर सुन्दर सपने अपने, सुन्दर अपना हिन्दुस्तान है। जहां बहती नदिया झरने, करती दुनिया गुणगान है। सुन्दर सुन्दर – – – – कर्म धर्म की ये है भूमि, यहां जन्में सीता राम हैं दुनिया […]
जाति धर्म देखे बिना, देशद्रोहियों को अपने हाथों से मिटाना होगा नई पीढ़ी को अभिमन्यु सा, गर्भ में देशभक्ति का पाठ पढ़ाना होगा तुम्हें व्यक्तिवाद छोड़कर राष्ट्रवाद अपनाना होगा हर व्यक्ति में भारतीय होने का […]
Jab aakh khuli duniya mein to bahut sa pyar panne ki khwahishein thi Aas pass dekha to jamane bhar ki aazmayishein thi Aurat ban ke mai is duniya mein kya aa gayi Jamane ne har […]
कदम हैं अब भी हरकत में कहीं ठहरा नहीं हूं मैं, यक़ीनन टूट चुका हूं मगर बिखरा नहीं हूं मैं l अभी भी आईने में खुद को अक्सर ढूढ लेता हूं, सुनो ऐ गर्दिश-ए-हालात बस […]
*एक विदाई गीत* हरे हरे कांच की चूड़ी पहन के, दुल्हन पी के संग चली है । पलकों में भर कर के आंसू, बेटी पिता से गले मिली है । फूट – फूट के बिलख […]
सच के समन्दर में झूठ की कश्तियाँ डूबती नज़र आती हैं, जहाँ तलक नज़र जाती है बस सच की कश्तियाँ नज़र आती हैं, बढ़ते झूठ के सुनामी हैं कई सच की बस्तियाँ गिराने को, मगर […]
बीत गया सुकूँ का बादल अब शिकन का मौसम आया है, जो लगता था आशियाना अपना सा कभी, आज उड़ कर आये गैर परिंदों का घर लगता है, बनाये थे शिद्दत से अपने जो घोंसले […]
तेरा ख्वाब पलकों में पुराना नहीं होता! तेरे बगैर मेरा मुस्कुराना नहीं होता! मिल जाती मंजूरे-नजर मुझको जो तेरी, दर्द का यूँ जिन्दगी में आना न होता! Composed by महादेव
पुरानी डायरियों से- **मैं तुमको भूल जाऊंगा** मेरी आंखों को ढलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा, मेरी सांसें निकलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l जमीं है एक मुद्दत से ज़ेहन में बर्फ यादों की, […]
आज दिल में छुपे हर राज़ लिखने बैठा हूँ, तुझको अपने ख़्वाबों किस्सों का सरताज लिखने बैठा हूँ, एतराज़ हो कोई तो मुझसे खुल कर कह देना, आज खामोशी को भी तेरी आवाज लिखने बैठा […]
जब भी मै अकेलेपन का बोझ, महसूस करता हूँ दिल पर अपने तो कलम खुद ब खुद बन कर साथी हाथ में मेरे आ जाती है, और वो बोझ उतर कर दिल पर से , […]
जब श्रीमतीजी अफसर बनी तो , हमारी ख़ुशी हो गई दो गुनी , हमने सोचा इसके दो दो लाभ होंगे, एक तो बढेगा रुवाब हमारा, दूसरा तंगी में चल रहे हाथ भी ढीले होंगे. लेकिन […]
Kinaro Par Sagar Ke Khazane Nahi Aate Phir Jivan Me Dost Purane Nahi Aate Jee Lo In Palon Ko Has Ke Janaab Fir Laut Ke Dosti Ke Zamane Nahi Aate – Poorvi
आओ, मुझमें नहाओ, डूबकी लगाओ प्यार का सौंधा पानी हाथों में भर कर ले जाओ। आओ, जी भर कर गोता लगाओ, मौज-मस्ती की शंख-सीपियाँ जेबों में भर कर ले जाओ। दोस्ती का दरिया गहरा है, […]
लाखों की भीड़ में भी तेरे कदमों की आवाज़ पहचान लेता हूँ, मैं तेरी खामोश आँखों में छुपा हर दर्द पहचान लेता हूँ, यूँ तो भटक भी जाऊ किसी मोड़ मगर, मैं बन्द आखो में […]
पर्यावरण को बचाना हमारा ध्येय हो सबके पास इसके लिए समय हो पर्यावरण अगर नहीं रहेगा सुरक्षित हो जायेगा सबकुछ दूषित भले ही आप पेड़ लगाये एक पूरी तरह करे उसकी देखरेख सौर उर्जा का […]
पुरानी डायरियों से- **अब बात मेरी जान पे है::गज़ल** जेहन में दर्द जो उठता है आसमान पे है, बात ये है कि अब बात मेरी जान पे है l खौफ़ लगता है कि सांसें ना […]
चढ़ना सीख लो “राही” ऊँची चोटी पर, मगर उतरने का हुनर भी याद रखना, बनते हैं तो बन जाए दुश्मन दोस्त पुराने, मगर दोस्ती की तुम हर मोड़ पर मिसाल बनाये रखना, करेंगे तोड़ने की […]
तन्हाई के आलम में जब भीड़ से हट कर देखा, सोंच का समन्दर कितना गहरा है ये अनुभव कर देखा, चलते ही जाओ राहों पर ये जरूरी नहीं, दो पल रुका और ठहरकर एहसास कर […]
अक्सर अँधेरे में फंस कर ही रौशनी का एह्साह होता है, एक छोटा सा दीपक ही अँधेरे को मिटाने को पर्याप्त होता है, यूँ तो नज़र नहीं आती अँधेरे में खामियां किसी की, मगर ज़रा […]
मेरा देश महान घनघोर घटा में अलख जगा कर देख रहा मतिहीन, जाग सका ना घन गर्जन पर जग सोने में लीन, इस निस्तब्ध रजनी में मै और मेरा स्वप्न महान, खोज रहा अधिगम जिससे […]
दुनिया का भी दस्तूर है जुदा, तू ही बता ये क्या है खुदा? लक्ष्मी-सरस्वती, हैं चाह सभी की, क्यों दुआ कहीं ना इक बेटी की ? सब चाहे सुन्दर जीवन संगिनी, फिर क्यों बेटी से […]
बेटी का हर रुप सुहाना, प्यार भरे हृदय का, ना कोई ठिकाना, ना कोई ठिकाना।। ममता का आँचल ओढे, हर रुप में पाया, नया तराना, नया तराना।। जीवन की हर कठिनाई को, हसते-हसते सह जाना, […]
कलम से लिख दूँ नाम जो सरेआम हो जाए, ऐसा कोई नहीं है जो फिर अब्दुल कलाम हो जाए, गीता और कुरान को जो रखते थे मन में, ऐसा कोई नहीं जो अब मिसाइल मैन […]
Marke kaise jeete hain iss duniya ko batlane Tere laal chale hai maaye ab teri laaj bachane
कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई 2016 की वर्षगाँठ पर मन के कुछ भाव,….. हुआ देश आजाद तभी से , कश्मीर हमारे संग आया। विभाजन से उपजे पाक को, उसका कृत्य नहीं भाया। रंग बिरंगी घाटी […]
जब स्वतंत्र भारत राज तो और स्वतंत्र हैं विचार तो, फिर घिरे हुए है क्यों सुनो तुम आतंक में भारतवासियों, वीर तुम बढ़े चलो अब आतंकी सारे मार दो, सरहद पर तुम डटे रहो, गद्दार […]
तुम्हारी कंधे पर, झुकती है हिमालय तुम्हारी छाती से फूटती है गंगा तुम्हारी आचल के कोने से निकलती है हिंद महासागर मुझे गर्व है कि जन्म इस भूमी के जिसके लिए विश्व तरसे मा तुम्हे […]
बा मुश्किल छोड़ जाती थी वो माँ मुझे जिस मकान में, आज सूना है घर का हर एक कोना उस मकान में, सुनाती थी दिन रात माँ जहाँ साफ़ सफाई के पीछे, आज लगे हैं […]
आँखों को इंतज़ार की आदत नहीं रही अच्छा हुआ के प्यार की आदत नहीं रही मिलती नहीं किसी से तबियत हमारी अब हमको किसी भी यार की आदत नहीं रही बुज़दिल नहीं रहा मैं कभी […]
धुएं से भरे चूल्हे में माँ का वो रोटी बनाना, यूँही नहीं है माता का मेरी ममता लुटाना, आँखों से बहाती है आंसू फिर हांथो से अपने खिलाती है, आसान नहीं है मेरी माता का […]
खयाले यार से दिल खुशगवार कर लेंगे मिला न तू तिरे ख्वाबों से प्यार कर लेंगे नसीब सबको नहीं हैं गुलाब की राहें नहीं हैं फूल तो काँटो से प्यार कर लेंगे किसी के वादे […]
अब किताबें सीने पर लेटकर सोती नहीं हैं, उंगलियां मोबाइल से एक पल को जुदा अब होती नही हैं, लगाते थे लोग महफिलें कभी खामोशियां मिटाने को, आज महफ़िलें भी सूनी सूनी होने लगी हैं॥ […]
Shakun Saxena उछाल उछाल कर पापा मुझे दिल्ली दिखाते थे, हंस हंस कर पापा को मैं खूब रिझाती थी, भरोसे का अटूट रिश्ता था हमारा, छूट कर हाथो से मैं फिर हाथो में आ जाती […]
अपनी सोंच के समन्दर से ज़रा, बाहर निकल कर तो देख, उसको पाना है तो ज़रा प्रह्लाद बन कर तू देख। अपनी किस्मत के भरोसे न बैठ, कदम बढ़ा कर तो देख। मन्ज़िल है पानी […]
कदम कदम बढ़ा रहे हैं, अपनी छाती अड़ा रहे हैं, कश्मीर की धरती पर वो सैनिक अपनी, माँ का गौरव बढ़ा रहे हैं, तोड़ रहे है दुश्मन पल पल, सरहद की दीवारे हैं, वीर हमारे […]
चलो मिलकर एक नया मुल्क बनाते हैं, जहाँ सरहद की हर दिवार मिटाते हैं, छोड़ कर मन्दिर मस्ज़िद के झगड़े, हरा और भगवा रंग मिलाते हैं, चलो मिलकर एक….. जिस तरह मिल जाते हैं परिंदे […]
धरती माँ फिर त्रस्त हुई हैं आतंकी गद्दारों से, खेल लाल रंग की होली अब, धरती माँ को मुक्त करो, बढ़ो वीर तुम खूब लड़ो अब, इन दुश्मन मक्कारों से, धरती माँ फिर त्रस्त हुई […]
डूबते है लोग तो तिनके का सहारा मांगते हैं, कितनी अजीब है ये दुनिया जहाँ लोग, टूटते हुए तारों से भी दुआ मांगते हैं, जहां चुप रहना हो वहां खूब बोलना, जहाँ बोलना हो वहॉ […]
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