आग क्यूं उठती नहीं है…….. वो तो बैठे हैं किलों में, घुट रहे हो तुम बिलों में आग क्यूं उठती नहीं है, आपके मुर्दा दिलों में! जो थे रक्षक, वे ही भक्षक आप केवल मात्र […]
आग क्यूं उठती नहीं है…….. वो तो बैठे हैं किलों में, घुट रहे हो तुम बिलों में आग क्यूं उठती नहीं है, आपके मुर्दा दिलों में! जो थे रक्षक, वे ही भक्षक आप केवल मात्र […]
हाथ खाली रह गया है। पास था जो बह गया है।। नाज़ है उनको, महल पर औ शहर ही बह गया है॥ कुछ यहाँ मिलता नहीं है कोइ हमसे कह गया है।। लूटते हैं कैसे […]
हम बेताब बैठे है इश्क़ करने को कोई बेइश्क हो, तो बता देना हम भी तो देखें इश्क़ क्या है और इसका अपना क्या मजा है मैंने सुना है कि इश्क़ दीवाना होता है उम्र […]
माँ तुम राह देखती होगी कि मेरा लाल आयेगा पर सरहद पर जंग इतनी छिड़ी थी कि तेरा लाल नआ पाया वो इतने सारे थे कि माँ तेरा लाल अकेला पड़ गया मैंने एक – […]
मांगे जब भी तब उस बेटी की हर हरमाइश् पूरी हो, ऐ खुदा काबिल बना दे, हर बाप को इतना के उसकी कभी जेब ना ढीली हो, उठा दे उन्गली बेटी जिस तरफ ज़माने में, […]
अ से अ: और क से ज्ञ जब लिखने लगा था मैं, माँ को मेरी पढ़ने वाला बच्चा दिखने लगा था मैं, फिर शब्दों को मिलाकर जब पढ़ने लगा था मैं, माँ को मेरी अफसर […]
रात के अँधेरे में जो ख़्वाबों को हकीकत बनाते हैं, वो सुबह के उजालों में अकेले ही खड़े नज़र आते हैं, और जो जागती हुई आँखों में अपने ख्वाब सजाते हैं, वो दुनियाँ की भीड़ […]
ताज़ा गज़ल- मेरा ये हुक्म है सांसों::Er Anand Sagar Pandey मेरा ये हुक्म है सांसों कि एहतियात रहे, वो रहे ना रहे ता-उम्र उसकी बात रहे l वो क़मर हो के […]
ज़िन्दगी मोम सी जलती रही पिघलती रही हर पल इक नया रूप लिए बनती रही बिखरती रही नयी अनुभूति सी हर एक क्षण हर दिशा में एक जिजिविषा संग जिन्दगी बदलती रही निखरती रही एक […]
Dhal rahi he zindagi, Shaam ki tarah. Dhoob gaya he sooraj ab, Andhere ab has chaaro taraf. Ek ummeed ki kiran tha tu bas, There bin nahi zindagi me kuch bhi ab.
स्वर्णिम ओज सिर मुकुट धारणी,विभूषित चन्द्र ललाट पर गुंजन करे ये मधुर कल-कल, केशिक हिमाद्रि सवारकर आभामय है मुखमडंल तेरा, स्नेहपू्र्णिता अतंरमन। अभिवादन माँ भारती, मातृभूमि त्वमेव् नमन।। बेल-लताँए विराजित ऐसे, कल्पित है जैसे कुण्डल […]
हरिरूपम उठ जाग अलौकिक ये प्रभात, अम्बर में किरणों का प्रकाश, जो भेद सके कोई इनकी जात, तोह करे समुच्चय मानव की बात । विष-व्यंग टीस के सहा चला, मलमार्ग में देह को […]
रुको ए मुसाफ़िर अभी ना जाओ . डस लेगी ये काली अँधेरी रात तुम्हे, सहर तलक ठहर जाओ . दूर है मंजिल तुमसे- राहे अनजान है, डर है कहीं भटक ना जाओ . कहीं एसा […]
घिर-घिर आये मेघा लरज-लरज, घरङ-घरङ खूब गरज-गरज, प्रेम की मानो करते अरज, धरती से मिलने की है अद्भुत गरज। रेशम सी धार चमकीली, नाचती थिरकती अलबेली सी,करती धरती से अठखेली, मानो बचपन की हमजोली । […]
क्या है भारत । एक कल्पना है ये भारत, हरिअर वन-खलिहानो की रहे सूखी जहाँ ये धरती तो उसे भारत नही समझना एक उम्मीद है ये भारत, जो नित् पथ दिखाए जग को बिखरे जो […]
एक पुरानी गज़ल- **ख्वाबों की फसलें आज भी मैं बोया करता हूं::गज़ल** हक़ीक़त जान ले कि रात भर मैं रोया करता हूं, बहुत हैं दाग दामन में जिन्हें मैं धोया करता हूं […]
यह हिन्दुस्तान है ……………………………………….. कहना आसान — समझना मुश्किल — सहेजना असंभव फिर भी हमें ये गुमान है गांधी का अरमान है — सपनों का जहान है ————-मेरा देश महान है————– ……………….. क्या, यही ‘वो’ […]
चांद और सूरज हमारा है धरती और आसमान हमारा है कश्मीर और अवध हमारा है हिंदुस्तान हमारा है न कुछ रहा जो तुम्हारा है तोप तलवार गोला बारूद मिसाइल जंखिरा की मात्रा हमपर भारी है […]
अनजानी राहों पर बिन मकसद के मैं चलती हूँ जबसे तुम से जुदा हुई हूँ तनहाईयों में पलती हूँ कब आओगे तुम प्रियवर अब और सहा नहीं जाता है बिन तुम्हारे जीवन मुझसे अब न […]
लेखनी को पुष्प चढ़ाकर भाव ह्रदय से सजाकर ज्ञान का भंडार भरकर प्रेम – अश्रु के साज से आज कुछ ऐसा लिखूॅ गीता लिखूॅ कुरान लिखूॅ वेद लिखूॅ ग्रन्ध लिखूॅ राम लिखूॅ – कृष्ण लिखूॅ […]
एक बार मैं एक फेमस मिठाई की शाॅप में गई चांदीवर्क में लिपटी रंग – बिरंगी चमचमाती मिठाईयां देखकर मेरे मुँह में पानी भर आया जैसे ही मैंने पर्स की तरफ हाथ बढ़ाया मुझे अपनी […]
अनजानी राहों पर बिन मकसद के मैं चलती हूँ जबसे तुम से जुदा हुई हूँ तनहाईयों में पलती हूँ कब आओगे तुम प्रियवर अब और सहा नहीं जाता है बिन तुम्हारे जीवन मुझसे अब न […]
वे प्रेम विवाह रचा रहे थे सपने नये सजा रहे थे लड़की थी पढ़ी – लिखी बढ़िया वेतन पाती थी महीने में 60 – 70 हजार कमाकर लाती थी पर दहेज की बातें उसे तनिक […]
शहीदों को नमन ****** नमन करो उन वीरों को जिनसे से यह देश हमारा है उनके साहस के दम पर महफूज घरों में रहते हैं । उन वीरों के दम से अपनी होली और दिवाली […]
माँ शारदे की इतनी रहमत बरसती है लेखनी भी आपके पास रहने को तरसती है मन के भाव इतने गहरे होते हैं शब्द जैसे माला के मोती पिरोये होते हैं संचालन इतना बखूब होता है […]
यूँ अरमानों की डोली उठ गई प्यासे नैनों की प्यास बढ़ गई जब देखा तुम्हें दूसरे की बांहों में मेरी तो मय्यत उठ गई । क्या जालिम अदा है तेरी कि सब कुछ लुटा दिया […]
पन्द्रह अगस्त की बेला पर रवि का दरवाजा खुलता है, सब ऊपर से मुस्काते हैं पर अंदर से दिल जलता है जब सूखे नयन-समन्दर में सागर की लहरें उठती हैं, जब वीरों की बलिदान कथाएं […]
उन्हें जिताना मुझे अच्छा लगता है प्रथम स्थान वही पाये इसलिए उनसे हार जाना मुझे अच्छा लगता है वे तो मेरे बड़े भय्या हैं उनका सर ऊपर उठाना मुझे अच्छा लगता है उनके नाज़ उठाना […]
चांद और सूरज हमारा है धरती और आसमान हमारा है कश्मीर और अवध हमारा है हिंदुस्तान हमारा है न कुछ रहा जो तुम्हारा है तोप तलवार गोला बारूद मिसाइल जंखिरा की मात्रा हमपर भारी है […]
***†**†*ज्ञान दीप प्रज्ज्वलित करके उजियारा कर दें हर और रोशन हो जाएं सब राहें ऐसा फैला दें आलोक। आतंकवाद बढ़ गया धरा पर । आतंकित है हर प्राणी धरती से अम्बर तक अब तो आतंकवाद […]
आओ मानव धर्म निभाया जाये अंधकार को दूर भगाया क्षजाये तमसो मा ज्योतिर्मय का दीप जलाय जाये साक्षरता अभियान चलाया जाये आओ दिलों से नफरतों का बीज। मिटाया जाये पापी को सत्कर्म सिखाया जाये हर […]
मन मेरा कह रहा यह बार – बार है हाथ तेरे समाज की पतवार आबरू बहन – बेटियों की हो रही है तार – तार हो रहा है सीता हरण बार – बार तू राम […]
लेखनी को पुष्प चढ़ाकर भाव ह्रदय से सजाकर ज्ञान का भंडार भरकर प्रेम – अश्रु के साज से आज कुछ ऐसा लिखूॅ गीता लिखूॅ कुरान लिखूॅ वेद लिखूॅ ग्रन्ध लिखूॅ राम लिखूॅ – कृष्ण लिखूॅ […]
भारत माता सिसक रही है भारत माता, आॅचल भी कुछ फटा फटा है चेहरे का नूर कहीं नहीं है,घूंघट भी कुछ हटा हटा है।। क्या कारण है, सोचा है कभी? क्यों माॅ इतनी उदास है […]
एक शहीद का खत….. ‘माॅ मेरे खत को तू पहले आॅखों से लगा लेना चूमना होठों से इसे फिर आॅचल में छिपा लेना।’ कि….. बेटा तेरा आज अपने कर्तवय से हट गया युद्ध बाकि था अभी […]
अ से अ: और क से ज्ञ जब लिखने लगा था मैं, माँ को मेरी पढ़ने वाला बच्चा दिखने लगा था मैं, फिर शब्दों को मिलाकर जब पढ़ने लगा था मैं, माँ को मेरी अफसर […]
रूठ जाता हु कभी अगर कोई नहीं आता माँ, तेरे सिवा मनाने के लिए; घाव गहरे है मेरे; कोई नहीं आता माँ; तेरे सिवा सहलाने के लिए;.. अक्सर भटक जाता हु मैं; कोई नहीं आता […]
मैं नेत्रहीन नहीं आंखे मूंदे बैठा हूं मैं भी अवगत था सत्य से पर विवश रहा सदा अन्तर्मन मेरा क्या मिलेगा व्यर्थ में लड़ने से समस्त भारत के लिए कुछ करने से विदित था सब […]
वो समय की भी क्या बात थी, जब मुश्किलों की न कोई रात थी हम उछलते थे कूदते थे और खुशियों की धुन में हमेशा खो से जाते थे जब बड़ी बड़ी गलतियां भी […]
काँटों से घिरे चमन में खुश्बू की तमन्ना न कर रात के घने अंधेरों में रौशनी की तमन्ना ना कर – कमलेश कौशिक
नहीं मिलती वो लड़की जिसे मैं ब्याह कर लाया था वो कमसिन सी शरमीली सी जब मैंने उसे पहली बार देखा था आजकल वो जूडो क्लासों में जाती है प्रेक्टिस हम पर आजमाती है गाड़ी […]
देखो फिर से सावन आया। सरोवर में कमल मुस्कराया।। भॅवरों ने गीत गुरगुनाया । कोयल ने की कुहू – कुहू ।। सारा घर आंगन खुशियों से भर आया । दूर बैठे सेना के जवानों ने […]
सम्पूर्ण ब्रहमण्ड भीतर विराजत ! अनेक खंड , चंद्रमा तरेगन !! सूर्य व अनेक उपागम् , ! किंतु मुख्य नॅव खण्डो !! मे पृथ्वी भूखंड ! अति मुख्य रही सदा !! यहा पर , […]
तेरे लिए मैं तो भूला हूँ जमाने को! यादें ले आती हैं गुजरे अफसाने को! तेरा जिक्र आता है जब किसी महफिल में, दर्द खोज लेता है मेरे ठिकाने को! रचनाकार- मिथिलेश राय #महादेव’
बेखौफ है हम, देखो इस जहाँ से जो संग मेरे तू है इतमिनान से बीते साये में तेरे ये दिन तुम्हें कह रहा हूँ यारा ईमान से कहीं मुस्कुराहट है बिखेरती ,ये बिमारी मेरी मुश्किलों […]
मैं उनसे चन्द पल की ही तो मोहलत माँगता था, ना जानें क्यों उन्होंनें जिन्दगी ही नाम कर दी हैं, मैं सोया हूँ नहीं दिन रात जबसे देखा हैं उनको, निगाह-ए-इल्तिफातों में सुबह से शाम […]
जश्ने आजादी का पल है,आओ खुशी मनाएँ। आसमान फहरे तिरंगा, जन गण मन हम गाएँ। कालिमा की बीती रातें ,आया नया सवेरा। प्रगति -पथ परआगे ,बढ रहा देश अब मेरा। अरूणदेव की नूतन किरणें ,नया […]
कायर ——- दरवाजे पर आहट हुई अधखुला दरवाजा खुला परिचित सामने खड़ा आस्तिने चढाए पैर पटकता लौट गया बोलकर कुछ अनसुने,अनकहे शब्द एक चुप्पी और गहरा अटहास स्मरण था मुझे सब कि सत्य अकस्मात् ही […]
Mohobat ki gali mai ghr tumhara tha Isqk k Sher mai ghr humara tha Is masum dil ko q toda jab y dil Tumhara tha By RLv gahlot
Nigahe jab milti hai Piyar hota hai do dilo ko Ek dusre per aitbar hota hai Sayad nijre Milne se hii piyar hota hai bina kuch bole hi ikrar hota hai By RLv gahlot
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