मैं हूँ बेटियाँ, मुझे सभी अपनों का, थोङा नहीं पूरा दुलार चाहिए, अपनी चाहतो को रंग देन, उमंगो के संग, उङने को पूरा आसमान चाहिए । किसी की बुरी नियत का फल, मुझे न मिले, […]

मुक्तक- कालेज का नियम ——————————— अनजाने से पथ पर, एक अनजाने से पहचान हुई, दो दुनिया के थे दोनों, मानों अंबर का मिलन धरती से हुई| देखा उसको पहली बार, भूल गया खुद होशो हवास, […]

यूँ खफा मत रहो भुला दो बात बीती, कब तलक गांठ मन में आप बांधे रहोगे। आप थोड़ा अधिक अच्छे हम जरा सा बुरे हैं तो इंसान ही यूँ फर्क तुम कैसे करोगे। अगर इंसान […]

बहुत दिनों बाद देखा आज मैंने चाँद मुस्कुरा रहा था, लग रहा था खुश था ! आँखों में थी उसकी बदमाशियाँ होंठों पर सजी थी खामोशियाँ एक अर्से बाद उसका दीदार हुआ मुझे यूँ लगा […]

इंतज़ार ये नन्हा सा पौधा, जो फूट निकला है धरती की गोद से, कितना नाज़ुक है ये कितना सौम्य,कितना पवित्र, किसी नन्हे बच्चे की तरह आंखें खोलता,बंद करता अपने आस पड़ौस दूसरे पेड़ पौधों को […]

छोटी-सी है पर बड़ी शैतान है उसी में बसती हर पल मेरी जान है नादानियों पर उसकी बड़ा प्यार आता है मुझको मैं ही नहीं पूरा परिवार प्यार करता है उसको ना जाने कहाँ की […]

फूल से कोमल होते हैं रिश्ते हरी डाल की तरह लचीले होते हैं रिश्ते बहुत सम्भाल कर रखना पड़ता है इन्हें वर्ना शीशे की तरह टूट जाते हैं रिश्ते..

कितना बोलता है दिल पर तुम नहीं सुनते मेरी धड़कनों की सदा क्यों नहीं सुनते खामोंश हैं लब मेरे कुछ मजबूरियां हैं इसलिए वरना ऐसा नहीं है कि तुमसे प्यार हम नहीं करते…

कविता- सबका समय —————————– सब का समय आता , सबको समझ न आता है, आया जिसको समझ अगर, खुद को समझा पाया है, छोड़ दिया वह, सब से लड़ना, खुद के लिए या- भारत मां […]

कविता -वर्ष पुरानी ————————– आज अचानक, कुछ खोज रहा था, कई वर्ष पुरानी कॉपी मिलती है| मैं साफ किया उसे, फिर खोल उसे पढ़ने लगा, पढ़ते-पढ़ते, मै रोने लगा| उसमें पड़ा गुलाब संग एक खत […]

भानु की ये जवाँ किरणें हमें संदेश देती हैं, बीच से बादलों को भेदकर आगे निकलना है। चमकना है क्षितिज में नफ़रतों का तम मिटाना है, दिलों में गर्मजोशी हो जरा सा ताप रखना है

जन्नत क्या है तोज़क क्या है क्या पता रब्बा तेरे साथ ने दोनों से ही वाकिफ किया किस्मत का क्या खेल है मिलना था हमने कभी देखो आज भी हम जुदा है साथ होते हुए […]

जरा सी भी तुम्हें असली खुशी गर आज मिल जाये। पकड़ कर कैद कर लेना मगर अभिमान मत करना, उग रहा हो अगर सूरज तो उगने दो, उगेगा ही, उसे तुम देख गुस्से से नयन […]

रोता रह गया वो दूसरों से गलत कह कह कर स्वयं पूरा गलत है दूसरों को अपशब्द लिखता है। नहीं कुछ शब्द उसके पास केवल गालियां ही हैं, ईर्ष्या से भरा है, जल के भुन […]

दर्द का जो स्वाद है, उससे दिल आबाद है, मुफ्त है जग में, खुदगर्जीया ! मक्कारियां सरेआम है, दर्द का जो स्वाद है, उससे दिल आबाद है। मदहोशियों का माहौल हैं बहरूपियों की यहां फौज […]

अंधेरे में घिरा आकाश ठीक वैसा जैसा खुद पर न हो विश्वास। तारामंडल का टिमटिमाना ठोस निर्णय ले न पाना, ठीक एक जैसा है, अपनी बात पर स्थिर न रह पाने जैसा है। कदम उठाना […]

नित नए विवादों से तंग आकर क्या निकल पङू परसकून की तलाश में । काश कोई करी मिल जाए करार की दस्तखत कर सकें, हर उस मसौदे पर जिसपर सुकून का,आखिरी इकरारनामा अंकित हो अदला-बदली […]

बनी बनायी राहों पर चलते-चलते भूल गयी खुद को, औरों की सुनते-सुनते । ज़मीर जिसकी गवाही न दे, क्यूँ बढे अबूझ चिन्हों पर अच्छी बनकर, खुद से लङकर, सह गयी डरते-डरते । अपमान का विष, […]

खूबसूरत काव्य सरिता बह रही है आजकल, इस भरी महफ़िल में रौनक सज रही है आजकल। प्रेम है, उत्साह है एक दूसरे की चाह है, है मिलन मधुरिम बहारें औ विरह की आह है। प्रकृति […]

न करना मन दुःखी किसी की बातों से ये तो दुनिया है रुला देगी, तुम्हें बातों से। भरोसा हो उसी पर जो समझता हो तुम्हें न जुडना भूल कर भी खुदगरज के नातों से

तुम्हारा खत ********************* तुम्हारा खत पढ़ ही रही थी कि भाभी आ गईं खत तो छुपा लिया पर खत में रखे तुम्हारे दिए गुलाब गिर पड़े पलंग पर इससे पहले भाभी देखें उन्हें बातों में […]

खत्म हुई अाज जिन्दगी की एक और परीक्षा फिर जीत गई मैं हमेशा की तरह अब परिणाम की प्रतीक्षा भी नहीं क्योंकि स्वयं की मेहनत पर अटूट विश्वास है परीक्षा का अनुभव कैसा भी रहा […]

सीता सम हो स्वयंवर हर नारी को मिले अपना वर चुनने का अधिकार तभी तो बनेगी राम-सीता की जोड़ी.. परिवार ढूंढ लाते हैं रावण-सा दामाद और भेज देते हैं संग में अपनी दुलारी कैसे रहेगी […]

अनगिनत सपनें लेकर बैठी थी डोली में कैसे होंगे ससुराल वाले यह प्रश्न उठा करता था मन में विदा होकर परिजनों से पिया संग चल दी मेरे अरमानों की डोली भी मेरे साथ चल दी […]

है सपना कुछ कर जाने का दुनिया में छा जाने का बेमोल जिन्दगी को अनमोल बना दिखलाने का हैं मुट्ठी भर अरमान मेरे जग में छा जाने का कौशल है यदि ठान लिया कुछ करना […]

धीरे-धीरे चुपके चुपके पड़ रही है साँझ हम भीतर ही थे पता ही नहीं चला कि कब आई दबे पांव साँझ। अभी तो उजाला था, चहक रही थी चिड़ियाएं, दिख रही थी चारों ओर के […]

आज तुम्हारी मुस्कुराहट में वो बात दिख रही है, जिस पर लिखने को कलम – कागज लिए हजारों हाथ भी काँपते हुए, घबराते हुए असहाय होकर, नहीं लिख पाते हैं, सीधी कविता। असहाय हाथ, उलझी […]

अहो, कविता!! तुम तो बहुत ही खूबसूरत हो, सजाकर भाव रसना से मधुर अभिव्यक्ति करती हो। जीवन का सुख व दुख सब कुछ समेटे हो स्वयं में तुम, समझ संवेदनाओं को विलक्षण रूप देती हो। […]

कविता- विरह वियोग —————————— अब हम किससे अपना दर्द कहे, कहां हम जाएं की- अपने दर्द की दवा मिले| जब भी चेहरा याद आता है, शृंगार रस के सपनों में डूब जाता हूं, जैसे ही […]

मन में मेरे आज एक, सरगम सी बज रही है पुष्पित हुआ है हृदय, सुगंधि सी आ रही है कोई, कहीं दूर से मुझको, याद कर रहा है उसको कोई बतादे, वो भी याद आ […]

उसकी आवाज सुनकर आँख खुल जाती हैं उनींदी आँखों में ही उठ पड़ती हूँ बिस्तर से धड़कनें तेज और तेज हो जाती हैं रात होती है ब्रह्म मुहूर्त में मेरी उठने में दोपहर हो जाती […]

जब कविता लिखने का कोई मूड नहीं बन पाता है मार सुड़ुप्पा चाय का प्यारे ! ये दिल आशु कवि बन जाता है दो-तीन कपों में मैं तो पूरी कविता लिख लेती हूँ पाँच कपों […]

मुझको निगोड़े ने न सोने दिया। डी जे बजाया और भँगरा किया।। रात भर मुझको न सोने दिया। बड़ी मुश्किल से थोड़ी- सी आँखें लगी। ख्वाब में भी आए और एक सूई लगी।। ख्वाब को […]

दस अक्टूबर है आज जीवन के लिए है खास विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस है आज थोड़ा जगाना होगा समाज। जिस तरह जरूरी है तन का स्वस्थ और सुडौल रहना, ठीक उसी तरह तरह जरूरी है […]

मेरे सुंदर चेहरे और मीठी आवाज पर टिका थे वो रिश्ते जब आवाज घरघराने लगी चेहरे पर झुर्रियां पड़ गईं ढल गई जवानी शाम-सी जब दर्पण भी नजर चुराने लगा तब टूट गये सारे रिश्ते […]

तेरी तस्वीर को व्हाट्सएप पर देखा आज मैंने कई सालों बाद वो दौर याद आ गया जब हम रात-रात भर बातें किया करते थे उन होंठों से काफी पुराना रिश्ता रहा है मेरा जो तस्वीर […]

जिन्हें हम प्यार करते हैं नहीं इजहार करते हैं देखते हैं उन्हें छुपकर पर सामने जाने से डरते हैं एक दिन पूँछ बैठे हम किसी से प्यार है तुमको वो बोले हाँ हम किसी से […]

तिल-तिल के जलना, मिलना -बिछङना कुछ नया तो नहीं रोज की बात है । जैसे दिनकर का जाना, संध्या का मुस्काना, गगन धरा के मिलन का भरम कुछ नया तो नहीं रोज़ की बात है […]

तीस किमी दूरी तय करने में पांच बार बाइक रोकता हूँ, मोबाइल खोलकर व्हाट्सएप पर उसका मैसेज खोजता हूँ। फिर आगे बढ़ता हूँ, फिर टुन की आवाज होती है बेचैनी बढ़ती है, मेरी बाइक रुकती […]

मर के भी ना खत्म हो वो जुनून है इश्क जी कर जो अधूरी रह जाए वो कहानी है इश्क तेरे-मेरे दर्मियां जो रिश्ता है उसका नामोनिशान है इश्क बीच की खिड़की खोलकर जो बातें […]