कविता- मेरा मित्र ———————– मेरा मित्र- कमी बताया करता है, जब भी मिला हूं उससे, पढ़ कर मेरे चेहरे को, हकीकत बताया करता है| मेरी गलती – खुद न समझ सका, दे न सका धोखा […]
कविता- मेरा मित्र ———————– मेरा मित्र- कमी बताया करता है, जब भी मिला हूं उससे, पढ़ कर मेरे चेहरे को, हकीकत बताया करता है| मेरी गलती – खुद न समझ सका, दे न सका धोखा […]
आज है मन खिन्न कवि का देख चारों ओर अपने घिर गई बेरोजगारी धूल में यौवन के सपने। देखकर उस दुर्दशा को क्या लिखें, कैसे लिखें, पढ़ रहे हैं, डिग्रियां हैं, बस पुलिंदे ही दिखें। […]
आलू, मटर,टमाटर की, सब्जी बनी स्वाद नमक डालना भूल गई, जब आई आपकी याद मैसेज टोन सुनाई दी, तो भागी-भागी आई इस चक्कर में देखो मैंने, रोटी एक जलाई फ़िर टोन सुनी, पर मैसेज ना […]
आँखों में जब उमड़ है उठता बीता हुआ अतीत फिजाओं में तब गूंज हैं उठते भूले-बिसरे गीत एक-एक कर स्मृति में वो पल घुमड़-घुमड़ आ आते हैं ना जाने अब कहाँ खो गये वो पल […]
सजदा करते हैं हम इश्क का इबादत यार की अपने खुदा मान कर किया करते हैं वो तो नसीब में नहीं अपने उसकी यादों में जिया करते हैं
दिल में हैं मेघ उमड़ते जब-जब तेरी यादों के बरस पड़ें तब-तब पानी ओ साजन ! मेरी आँखों से रिमझिम-रिमझिम रुनझुन-रुनझुन झननन- झननन-झनन-झनन! अब तो मोरे साजन आजा कब से रस्ता देख रही तेरी तस्वीरों […]
सुन्दर सा वो हिंडोला था, जिसमें बैठ के , मन मेरा डोला था सुन्दर सी वादियां हैं सुहाना सा समां है, बढ़ती ही जा रही हूं डरती भी जा रही हूं, ना नभ है, ना […]
ये कैसी राइड है, ना कर रहा कोई गाइड है लंबी – लंबी सी राहें हैं, मानो प्रियतम की बाहें हैं नदिया भी बह रही है, हमसे ये कह रही है आना फिर दोबारा यहां, […]
आंखों में चाहत, सजी हुई है, दिलों की धड़कन, बढ़ी हुई है। न कह सके हैं वो, कुछ भी हमसे, हमें भी हिम्मत, नहीं हुई है। मगर आहटें ये, बता रही हैं, दस्तक तो है […]
कभी झाँककर देखो मेरे दिल की गहराई तुम भी रो पड़ोगे देख ! मेरे यार की रुसवाई पीर मेरी मोहब्बत की बस जानता है वो ! जिसने उम्र भर मोहब्बत में फकत दिल पे चोट […]
हजारी खिल, उड़ा खुशबू बुला भंवरा, सुना संगीत। भेज संदेश, प्यारा सा, बुला तू अब, मेरा मनमीत। रही है जो, भी चाहत सी उसे मकरंद में रखकर सुगंधित कर फिजायें सब, बढ़ा दे ना, परस्पर […]
अश्क मेरे, नैन तेरे बूंद निकली, कब गिरी यह, तू बता दे, बात क्या है, मैं समझता, हूँ नहीं यह। चूक मत यूँ, बोल दे अब। जो हो कहना, आज ही कह। कल कहेंगे, कल […]
Ek-tarfa mohabbat ka rukh kuch Iss kadar hua ki, Wo humein paakr aabaad ho gaye… Aur hum unhe paakr barbaad ho gaye… #Sheetal
मधुमालती छंदाधारित कविता – शीर्षक – मन (कुल 14 मात्रा, विन्यास 2212, 2212) ******************* मन फूल सा, कोमल न हो, पर ठोस हो, तो बात है। मन ही न हो, तब आदमी, क्या आदमी, है […]
रात और दिन का मिलन साँझ है सखी, कब मिलोगे टकटकी में आंख है सखी। आ रही है रात दूर जा रहा दिन खोल कर कपाट दिल के झाँक ले सखी।
ये कश्मीर है, कहते हैं, धरती का स्वर्ग इसे पर कहां रहा ये स्वर्ग अभी, बदल गई इसकी तस्वीर है चप्पे-चप्पे पर सैनिक खड़े हैं, फ़िर भी आतंकवादी यहां आकर लड़े हैं शॉल, फिरन मिलें […]
रखना लगाव खोलकर के द्वार दिल के तुम। जितना वो दे उससे भी अधिक प्यार देना तुम। कभी किसी दुखी का दर्द मत बढ़ाना तुम, जरा सा नेह देना और गम मिटाना तुम। चूमो शिखर […]
करें कितनी भी कोशिश तेरे दिल में समाने की, सोंचना ही गलत है जगह तेरे दिल में बनाने की| मार खाओगे मुझसे बात ये सोंची जो तुमने, मुझकों छोड़कर किसी और की बाहों में जाने […]
आपकी निगाहों में इस कदर नशा देखा, भरी हो जैसे कोई तेज, तीखी हाला। हम तो हाला कभी सूँघते तक नहीं थे, और खूबसूरती पर लिखते नहीं थे, मगर क्यों हुआ देखने में नशा सा, […]
दीदार बिन यार के महफिल अधूरी है हर किसी की प्यार बिन जिन्दगी अधूरी है मिल जाए चाहे मुझको जन्नत की हुकूमत भी ! मेरे यार के बिन प्यार के ये प्रज्ञा* अधूरी है||
मेरी सोंच में आत्मविश्वास की महक है इरादों में हौसलों की चहक है और नीयत में है सच्चाई की मिठास इसीलिए मेरी जिन्दगी है एक महकता गुलाब..
हम फिसले थे इस उम्मीद से कि वो हमें उठा लेंगे.. हम डूबे थे दरिया में इसलिए कि वो हमें बचा लेंगे.. नहीं पता था कि वो तमाशबीन निकलेंगे हमें मुसीबत में देखकर बस मजा […]
शिकवा करते-करते हम तुझको हार बैठे हैं पहले दिल हार बैठे थे अब जान हार बैठे हैं तुम्हारी बेवफाई से हम अपनी बस्ती उजाड़ बैठे हैं
आजकल जिन्दगी देती कहाँ है फुर्सत बस जिम्मेदारियों के बोझ तले दबी रहती हूँ मिलता कहाँ है वक्त खुद के लिए बस कभी कभार खुद को निहार लेती हूँ जब याद आती है तेरी तो […]
कविता -हराम है ——————- हराम है, आराम मेरा, आ आराम करले, जाॅन हैरान मेरा| ख्याल रखले, एक पल मेरी, तुझसे भिन्न न पहचान मेरी| तेरे ख्याल में, खुद ख्याल खो बैठा हूं, हे आत्मा- खुद […]
कविता- बड़ी फ़िक्र थी —————————— बड़ी फ़िक्र थी उसे मेरी, सौ बार समझाती थी, कालेज समय से आया करो, कमियाँ रोज बताया करती थी| नाखून बड़े हैं बाल बड़े, कालर इतना गंदा है, जगह देख […]
**सुप्रभात** ** ये एक आम शब्द नहीं, **है बहुत ही खास **सु—- सुबह से सांझ तक आप **प्र—- प्रसन्नता पूर्ण रहें **भा—- भाग्यशाली एवम् **त—-तनाव रहित हों *****✍️गीता
कविता-गटर —————– प्यास थी सरिता की, पोखर भी, नसीब ना| सोचा था, अपना भी, विशाल सा, घर होगा| रंग बिरंगी, दुनिया में प्यारा सा कुनबा होगा| चढ़ गिरि से झाँक रहा, निर्झर दिख जाए| रुक […]
हम बेकार ही तुम्हें अपना समझा करते थे यादों में तेरी अक्सर तड़पा करते थे तुम तो हो दूजे की बाहों का हार प्रिये! हम तुमको अपना दिलबर समझा करते थे बुनते थे तुझको पाने […]
बहुत सोंचने समझने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुँची कि तू मेरा नहीं हो सकता और चाहे जिसका हो जाए मैं तेरे सिवा किसी और की नहीं हो सकती चाहे दुनिया इधर की उधर […]
जब मुझे कयी सवालों के घेरे में रखा जा रहा था, जिनका क़ोई वजूद नहीं आते जाते अंगुली उठा रहे थें बताओ तब तुम कहाँ थे।। जब मुझे सबसे ज्यादा जरूरत थी तेरी छाँव में […]
जो दिखता नहीं पर हर घङी अपने होने का आभास हमें कराता है । जैसे ही गर्वित हो बहकने को होते हैं एक हल्की सी चोट दे रास्ता बताता है । इसी तरह करूणा की […]
तुम्हारे नाम से दिल में एक हलचल-सी मचती है तुम होते हो जब पास शराऱत हो ही जाती है लगा ले लाख कोई अपने दिल पर पहरे हो जब महबूब इतना खूबसूरत तो मोहब्बत हो […]
नहीं सोंचा था हमनें इतना बैर मानते हो तुम हम छिड़कते हैं जान तुम पर और मुझे गैर मानते हो तुम दूरियों से प्यार बढ़ता है ये जमाने को कहते सुना करते थे अब आया […]
वो कॉलेज वाला लड़का परीक्षा में मेरे पीछे बैठा करता था बोलता कुछ भी नहीं था पर छुप-छुप के देखा करता था सारी परीक्षाओं में मेरी कॉपी से लिखता रहता था पढ़ता कुछ भी नहीं […]
कामयाबी का जुनून है मुझे फिर मुश्किलों की मजाल है जो मुझे रोंक पाएं मंजिल तक पहुँचने से…
बचपन से संवेदनशील बच्चों में होशियार सब करते हुए भी लक्ष्य पर रहता ध्यान हरदम ही समझदार फिर भी क्यूं शिकार शायद घर में ही रहकर सबकी सेवा ही कर-कर खुद को समझती कमजोर मन […]
चाँद भी फीका पड़ गया तेरे छत पे आने के बाद। सूरज भी नभ में ढक गया जुल्फ घटा लहराने के बाद।। कोयल भी सुनकर मौन है तेरे सरगम गाने के बाद। ‘विनयचंद ‘ सब […]
सपनों में आ जाओ फिर मुझे याद दिलाओ मेरा वो स्वार्थी मन तेरा वो भोला बचपन अनजान मेरी हर शैतानी कितनी थी तुझे परेशानी तेरा बर्दाश्त करते रहना हैरानी में आज भी डालती है वो […]
मेरी अभिलाषा को थोड़ा-सा उङान दे दो हे तात! मुझे मेरी पहचान दे दो कबतक भटकती रहेगी मेरी आत्मा यूँ करते रहोगे, कहाँ तक मेरा खात्मा मुझको मेरा, खोया मुकाम दे दो मेरे हौसलों को […]
आपकी नेह भरी सोच की खुशबू यहाँ तक आ रही है, यह पवन दे मंद झोंका, मन ही मन मुस्का रही है। बात पूछो तो न बोली बस इशारा कर रही है। लग रहा है […]
हो गई है भोर, गुनगुनी सी धूप है, ना व्यर्थ का कोई शोर बदल रहा है मौसम, तुम ना बदल जाना अच्छा लग रहा है, सर्दी का यूं धीरे-धीरे आना *****✍️गीता
अब बड़ा तू बन चुका है छोटी बातों में न लग ईर्ष्या, विद्वेष, नफरत ऐसी बातों में न खप। अन्यथा था तू अर्श से फिर फर्श में आ जायेगा, फर्श पर हम जैसे छोटे लोग […]
सुबह हो रही है, घौंसले से बाहर आने को आतुर चिड़िया ने पंखों को भुरभुराया, सहलाया, मानो योग कर रही हो, गर्दन इधर की, उधर की फुर्र उड़ी अपने दैनिक कार्य निपटाने चली। समय की […]
कविता- कालेज का पहला दिन —————————————– कालेज का, पहला दिन, एक अनजाने से , पहचान हुई, पता नहीं था , उसके बारे में- फिर भी दिल के, पास हुई, दिल का धड़कना, बढ़ गया मेरे, […]
अलफाजो का अहम् किरदार रहा हमारी नजदीकियाँ मिटाने में कभी हम कभी अतःम नासमझ बन बैठे दूरियाँ बढाने में । ना मेरी कोशिश रही तुझे मनाने की ना तुम मुझे विश्वास दिला पाये एक मद् […]
रह जाते हैं ख्वाब अधूरे झूठे-मूठे वादों से जब से तूने ये दिल तोड़ दिया डर लगता है सबकी बातों से चाँद ताक कर कटती हैं जब से मेरी रातें *राम कसम’* तबसे मुझको डर […]
कुछ रातें ऐसी होती हैं जो कयी नये स्वप्न दिखाती हैं जिन्हें पाने की मन में जीजिविषा जगाती हैं । कुछ रातें ऐसी भी होती हैं एक अपूरणीय क्षति कर जाती हैं जिसकी वेदना से […]
शत-शत नमन उस जन-नायक को लोकनायक से जाने जाते थे भारत-रत्न से सम्मानित, इंदिरा विरोधी कहलाते थे । आज जन्म दिवस है उनका हम नतमस्तक हो जाते हैं विमल प्रसाद जिन्हें “मानव पिता” कह जाते […]
तुम्हें खोने का डर एक अनजाने,अनचाहे मुकाम तक पहुंचाएगा खुद को वही रोक लेती अगर मालूम होता हस्र न होता यह अपना । नीचे गिर कर संभलना सीखा था हमने खुद की नजरों से गिरकर […]
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