एक प्यारा सा सपना! है जिंदगी, तेरी जुल्फों का लटकना !है जिंदगी, तेरी आंखो का काजल! है जिंदगी, मैने कहा तू मेरी! है जिंदगी। तेरे पैरो कि पायल, हैं जिंदगी! तेरे हांथो का कंगन, है […]
एक प्यारा सा सपना! है जिंदगी, तेरी जुल्फों का लटकना !है जिंदगी, तेरी आंखो का काजल! है जिंदगी, मैने कहा तू मेरी! है जिंदगी। तेरे पैरो कि पायल, हैं जिंदगी! तेरे हांथो का कंगन, है […]
मध्य प्रदेश की राजनीति का खेल बड़ा निराला था, पांच साल की सत्ता को दो वर्षो में ही मारा था। महाराज के सारे सपने एक वर्ष में टूट गए, महाराज कांग्रेस से बिल्कुल देखो रूठ […]
पहले जब होती थी मुलाकात तो अधरों पर उभरी मुसकान देती थी दिखाई आज जब मास्क लगाऐ मिले तो वही खिलखिलाहट नज़रों ने सुनाई।
‘तेरी खुशी है किसमे, तय कर ये रज़ा अपनी परेशान हो गया हूँ, दुआ बदल-बदल के.. शायद के कोशिशों से, घुट जाए दम भी मेरा, जलती है आग भी अब, धुँआ बदल-बदल के.. होगी तेरी […]
“गौर से देख तू इस दिल के उजड़े मंज़र को, है जो खंडहर कभी आबाद हुआ करता था.. वो जिसे ‘अदना सा शागिर्द’ लोग कहते हैं, वो कभी इश्क में उस्ताद हुआ करता था..” – […]
कविता -विद्या ——————– प्रेम करो तुम विद्या से, जीवन कांटों में खिल जाएगा| जो विद्या को ना चाहे ओ पाछे पछताय| चढ़त जवानी गदहा बने, ढोय ढोय मर जाय| बालू कंकड़ मोरम ढोए, लादे सर […]
अपने पन की बगिया है ,खुशहाली का द्वार जीवन भर की पूंजी है ,एक सुखी परिवार खुशहाली वह दीप है यारों ,हर कोई जलाना चाहता है खुशहाली वह रंग है यार्रों ,हर कोई रमना चाहता […]
जिन्दा रहे मेरा हिंदुस्तान अद्भुत है जिसका गुणगान सशक्त युवा का प्रबल ईमान खुली हवा में भिखरा सम्मान हिमालय जैसा पर्वत तुझको शीश झुका करता प्रणाम.. सबसे प्यारा सबसे न्यारा समुद्र का ये अद्भुत किनारा […]
दो बूँद गिरा गया बादल महका है धरती का आँचल बन सर्द पवन लहराई मिट्टी की महक-महकाई सब काम काज रुक गए हैं बादल के आगे झुक गए हैं ममता ने ली है अंगड़ाई लो […]
‘यूँ बना खुद को के खुदा से भी ये कह सके, अब देखता हूँ तेरी आँधियों का करना क्या है..’ – प्रयाग
कोई मुझे समझाओं, मैं समझना चाह रहा हूं, ये ग़म की आंधी है, वो उड़ जाएंगी, ज़रा सा दिल्लासा दो, मैं तड़पे जा रहा हूं। अरे! कोई थोड़ा सा तो प्यार जताओ मुझे मैं तरसे […]
‘दिखा दिया ये तज़ुर्बा भी ज़िन्दगी ने हमें, हैं कितने शख्स ज़हर, और दवा है कितने.. न रोशनी को इल्म, न ही चिरागों को पता, है कितने बुझने और मंज़ूर-ए-हवा हैं कितने..’ – प्रयाग मायने […]
‘यही चलन सा हो गया है अब ज़माने का, हो जो खुदगर्ज़ी तो एहसान घट ही जाता है.. रास्ता कौन बदलता है किसी की खातिर, जो पेड़ बीच में आता है कट ही जाता है..’ […]
‘देखें ठोकर या फिर हम देखें सहारा उनका, कभी-कभी यूँ भी गिराते हैं संभालने वाले..’ – प्रयाग
कविता- ज्योति पासवान ——————————– आज लूटी है उस की ज्योति ,कल तेरी ज्योति लूट जाएगी| आंख की ज्योति , घर की ज्योति! ज्योति चाहे जिसकी हो| भारत मां को कहने वाले, भारत माँ अब पुकार […]
‘बे-लौस किस ज़ुबाँ से कहें आज बशर को, साये में बैठकर भी काट डाला शजर को..’ – प्रयाग मायने : बे-लौस – नि:स्वार्थ बशर – इंसान शजर – पेड़
जल तु इतना कोमल फिर कठोर क्यों तुम जीवन-रक्षक फिर प्राण-हरता क्यों तुम बहते सरल फिर तीव्र रूप क्यों तुम मीठी-प्यास फिर नमकीन क्यों यह गुस्से में नीला आसमान क्यों जलमग्न धरती थर-थर कांपे क्यों […]
‘है ऐसा कुछ भी नही जिसको तू उजाड़ सके, मेरी नज़र में तूफाँ अब तेरी औकात नही..’ – प्रयाग
‘उथल-पुथल सी मुसलसल है ज़ेहन में मेरे, सुकून-ए-इश्क मगर बेशुमार है मुझमे..’ – प्रयाग मायने : मुसलसल – सिलसिलेवार/लगातार ज़ेहन – दिमाग सुकून ए इश्क – इश्क का सुकून
‘वो शख्स, खुद ही जो खाली हो अपने अंदर से, वो दूसरों को खालीपन के सिवा क्या देगा.. झूठ की परतों को परतों पे चढ़ाने वाले, तेरे किए का सिला अब वो आसमाँ देगा..: – […]
सहनशीलता की तू देवी , हर किरदारों में ढल लेती, ‘मानुष’ तेरी महिमा का , करता गुणगान है , हे! सबला, तू महान है। अर्धांगिनी बनकर, तुने हर धर्म निभाया , बंद मकान को , […]
‘वो एक पल भी किसी तौर ना हुआ मेरा, जो मैंने बाँधा था मन्नत का धागा, लौटा दे.. के तुझसे एक कदम साथ भी चला न गया, मैं तुझे पाने को हूँ कितना भागा, लौटा […]
आज किसी ने सोये हुये ख्वाबों को जगा दिया भूली हुई थी राहें भटके हुये मुसाफिर को मिला दिया जिंदगी का फलसफा जो कहीं रह गया था अधूरा मुरझाई हुई तकदीर को जीने के काबिल […]
‘किनारे रखके ज़माने की नेमतें ए खुदा, मैं तुझसे माँगता फिरता था बस उसे लेकिन.. मेरी मासूम हसरतों को अधूरा करके, दर्द के काम आ गए वो हादसे लेकिन..’ – प्रयाग मायने : नेमतें – […]
गमों की बात ही न कर तू मेरे आगे, मुझे गम की नहीं उत्साह की जरूरत है। तेरी गलियों में आया चाह लेकर, मुझे बस प्यार की जरूरत है।
आपकी इस कदर है चाह हमें हर समय चाहते हैं पास रहें, खुशी हो, गम हो, या कयामत हो हर घड़ी आप दिल के पास रहें।
जाग जा नई रोशनी का आभास कर, प्रातः हो गई है, पौधों में चमकती ओस की बूंदें, बता रही हैं, किस तरह नींद में रोया होगा रात भर तू। जमाना तेरे आंसू पोछे न पोछे […]
एक ही प्रतिस्पर्धा में अलग अलग स्वाद मिलते हैं इसी से पर मुश्किल से मंजिलों के ख्वाब पलते हैं लक्ष्य है निर्माण कि स्वतंत्रता सब अनुभव कर सके बीमारी गरीबी और अज्ञानता भूत की बात […]
जब समझ न आता ऊंच नींच , अहंकारी हो जाता तन मन अग्रज हो की अनुज या पूज्य , व्यवहार सभी से होता सम निर्जीव सजीव सभी को दुखी , करता रहता ये मानव जीवन […]
हॉस्पिटलों का शहर है दिल्ली फिर इतने बीमार क्यों जनसँख्या बिखरी हमारी इमारतों का वहीँ भंडार क्यों यात्रायें चलती रहती आवागमन कभी थमता नहीं आमदनी का श्रोत बनी जनता ही हर जगह तो नहीं साजिशों […]
आ ! मेरे पास आ , ओ री ! नींद, तुम्हें मैं लोरी सुनाता हूं , मुझे तो तुम सुलाती नहीं, चल मैं तुझे सुलाता हूं। .
निकला था मैं ढुंढने , कोई ऐसा इंसान , जो बिल्कुल खुश , बिल्कुल सुखी, बिल्कुल स्वस्थ, चिन्तामुक्त, तेज़युक्त, मुझे मिला ! पर वो इंसान नहीं अपना दुःख , दूसरों के मुकाबले सुक्ष्म -सा।
There is no bread without hard work, there is no happiness in the poor’s house… No matter how much you fly with a feather of courage, the stomach does not lose its appetite… Due to […]
Tell the lamps, be in a little leisure, now some darkness is also good… People have faces here and there is a lot of mystery in them…
Why do you feel bad so soon! So angry Not a good thing I explained to you earlier Don’t be so impatient about small things Don’t put it to heart Everyone has their maneuver Have […]
Seeing this season of weather today, something like a stir in the heart started happening now… Seeing you, Noor sa tera mukhda darling, she is desperate in mind… This wind has done some mischief, you […]
Would know if persuading How are you Few days of life More in your wish Sacrificed And cry a few nights Yearning for your memories Would you know anything else And would be infamous In […]
‘कुछ इस तरह ज़िन्दगी का फसाना बदल गया, वो क्या बदला कि सारा ज़माना बदल गया.. रिश्तों पर बेरूखी का असर कुछ यूँ हुआ, उसका रूठना बदला तो मेरा मनाना बदल गया..’ – प्रयाग
❤ you were the only one❤ ——————————————– Whom to tell your story No one is your friend You were the only one.. Who used to listen Every bit of my heart My sweet and sweet […]
🌹🌹 Rimjhim-rimjhim clouds rained all day.. I love your lover Neither day nor night Comfort me Cloudy rain All day my tears Oh dear! Now come Rainy clouds also rained Now you come End my […]
A black cloud! just listen After visiting the streets, they should also know that the spring has arrived … Restless heart With your drops So that they have something of my love Realize .. A […]
पतन हाँ पतन पतन की शुरुआत कब होती है , जब घमंड की पराकाष्ठा होती है, जब अपने से काबिल कोई नहीं दिखता है आँख में पट्टी बंधी होती है। जब व्यक्ति दूसरे की गुणवत्ता […]
‘शायद कि उन ने जीस्त को बाजार था माना, वो हो अग्यार जिन्हें यार था माना..’ – प्रयाग मायने : जीस्त – ज़िन्दगी अग्यार – पराए लोग
शिक्षक सम संसार में हितकारी ना कोइ। सकल सृष्टि के भाग्य का एक विधाता सोइ।। कहिए द्विज, शिक्षक, गुरु या कहिए उस्ताद। परमेश्वर को पूजिए गुरु पूजन के बाद।। लेकर गुरु की चरण- रज मस्तक […]
श्याम का समय, बहुत जल्दी में थे वे लोग, तेज तेज कदमों में, अजीब सी हलचल, चेहरे पर रोनक, कुछ पाने की लालसा, एक के बाद एक, गुजर रहा था हर शख्स, मन में मेरे […]
‘न दुआ लगती है, न मुझको दवा मिलती है ज़ख्म दुखता है अगर उसको हवा मिलती है.. किसी तरह से उसे दिल से निकाला था मगर, वो अगले पल ही मुझे मुझमे रवाँ मिलती है.’ […]
‘गाँव में हाथ, कई हाथ थामे रखते हैं, शहर में खींचने को सिर्फ पांँव होता है.. तरक्की कहने को कितनी ही की हो शहरों ने, यूँ कुछ भी कह लो मगर गाँव, गाँव होता है..’ […]
जब जब गरजा धोनी का बल्ला विश्व पताका लहराई 1983 के बाद ,2011 में ट्रॉफी आई स्टम्पिंग और बैटिंग देखकर जिसकी दुनिया स्तब्ध हो जाती थी शान्त रहकर कैसे देते हैं मात धोनी ने ही […]
‘ऐसे किरदार का यूँ भी है महकना वाजिब, कि नाम जिसका महज़ खुशबुओं से लिखा हो.. आखरी खत ये जो खाली सा नज़र आता है, यूँ भी हो सकता है कि आँसुओं से लिखा हो..’ […]
‘तुझे तो रोक न पाया, किसी तरह लेकिन शायद मैं तेरी याद को नाकाम कर सकूँ.. तू खुद नही मौजूद तो तेरा खयाल है, इतना तो दे दे वक्त के कुछ काम कर सकूँ..’ – […]
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