‘तुझे तो रोक न पाया, किसी तरह लेकिन शायद मैं तेरी याद को नाकाम कर सकूँ.. तू खुद नही मौजूद तो तेरा खयाल है, इतना तो दे दे वक्त के कुछ काम कर सकूँ..’ – […]

‘तेरे खयाल से बस ये सवाल पूछा है, किसी तरह से यूँ खुद को संभाल, पूछा है नही मिला है जब, कोई हमें अयादत को, तेरी ही बेरुखी से अपना हाल पूछा है..’ – प्रयाग […]

‘कुछ दुआ का असर है, कुछ दवा का असर है या फिर ये तेरे शहर की हवा का असर है.. दस्तकें देने लगी मोहब्बत ज़िन्दगी में अब, ये तेरे और मेरे दरमियां का असर है..’ […]

rajendrameshram619@gmail.com ************************ जलने दो हृदय की वेदना, विचलित मन से कैसे डरना | हो जीवन संताप दुखों का, फिर क्या जीना फिर क्या मरना || ~~~~~00000~~~~~ युद्ध अनघ है मन के भीतर, परितापों से प्राण […]

समस्त देशवासियों को #स्वतंत्रता दिवस की 74 वी वर्षगांठ पर हार्दिक मंगलकामनाएँ राजेन्द्र मेश्राम-नील ******************* अपने लहू से तर, धरा का शृंगार कर, सोई हुई चेतना को, इतना तो भान दे | भावी वर्तमान भूत […]

गांव की ज़िन्दगी ,अब पहले जैसी नहीं जहाँ रिश्ते तो हैं ,वह मिठास नहीं जहाँ मिट्टी तो है ,पर खुशबू नहीं जहाँ तालाब तो है ,पर पानी नहीं जहाँ आम बौराते तो हैं ,पर सुगन्ध […]

चलो होड़ लगाते हैं, ओ री! बारिश तेरी, मेरे नयन झरने से। ओह! मगर तुम हार जाओगी, ये झरना तो पूरी रात बहता है, और तुम बरसती हो कुछ क्षण के लिए।

न उसे छोड़कर गया, न कभी जाऊँँगा इसी उम्मीद पर शायद वो ऐतबार करे.. मैं किये जा रहा हूँ अब भी मोहब्बत उससे, होके मजबूर वो कभी तो मुझसे प्यार करे.. – प्रयाग

कोई वजूद नहीं था तुम्हारा मेरे बिना.. यूंँ ही गुमसुम बैठे रहते थे.. मैंने ही आकर तुम्हारी जिंदगी में रंग भरे होठों को मुस्कुराना सिखाया, हँसना सिखाया, रोना सिखाया। मेरी ही मोहब्बत ने तुम्हें इंसान […]

‘गुज़री कुछ यूँ कि अब तन्हाई से डर लगता है, हमें तो अपनी ही परछाई से डर लगता है.. गहराई अब तो समंदर की बेअसर हैं यहाँ, हमें तो इश्क की गहराई से डर लगता […]

अचानक से कर्ण में एक ध्वनि गूंजी , देखा तो भीड़ में कोई दम तोड़ रही थी, पालन हार अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही थी, कटती अंग – प्रत्यंग के साथ काली घटा छा […]

‘आज कहता है दिल कि एक फैसला कर दूँ तुझे दुनियाँँ के सारे सुख कहीं से लाकर दूँ.. तूने उस उम्र में सीने से लगाया हर पल, तुझे इस उम्र में कैसे मैं अकेला कर […]

अभी ना मेरा दीदार कर, थोड़ा ख़ुद को मैं संवार लूं। तेरा हर लफ्ज़ हो शहद सा, तुझे दिल में मैं उतार लूं। जब मिले तेरी नज़र से, नज़र मेरी, तेरी छवि जिगर में उतार […]

एक पपीहा बैठा खेत में , देख आसमान को चिल्लाएं! बहुत हुआ सब्र , अब तो बरस जाओ प्रभु! मेरी इच्छाओं पर , मेरी अभिलाषाओं पर, थोड़ा तो बरस जाओ प्रभु! मेरी मेहनत पर , […]

उठा अपनी आँधियों को, बढ़ा हवाओं का असर, साथ मेरे चल पड़ा है कितनी दुआओं का असर.. अब कभी गिरते नही टूटकर पत्ते शाखों से, मेरे गुलशन पे छाया हुआ है उसकी फ़िज़ाओं का असर.. […]

मैं हंसी तो हंस दिया, संग मेरे ये जहां। वरना ,किसी को, किसी के, अश्क देखने की फुर्सत कहां। इसलिए .गम अपने छिपाकर, मैं भी, हंस लेती हूं यहां। कलम चलाकर कर लेती हूं, दिल […]

यह इतना धैर्य तुम कहाँ से लाएं तभी तो तुम शहीद् कहलाए शस्त्र तुम्हारे हाथ में था देश के मान के लिए अडे रहे अपने बाहुबल से ही शत्रु मार गिराए तभी तो तुम शहीद् […]

बड़ी मुश्किल से बना हूँ टूट जाने के बाद, मैं आज भी रो देता हूँ मुस्कुराने के बाद.. तुझसे मोहब्बत थी मुझे बेइंतहां लेकिन, अक्सर ये महसूस हुआ, तेरे जाने के बाद.. ढूंढ रहा हूँ […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- याद कर लो सभी आज उनको जिनके यत्नों से आजादी पाई, यह जन्मभूमि भारत हमारी उस गुलामी से मुक्ति ले पाई। हर तरफ था अंधेरा घना कोई आशा न थी […]

हालत कुछ आज ऐसी बनी चलती जिंदगी से मौत उलझ गई, अकड़ कर वो कुछ यूं खड़ी मानो जिंदगी से बड़ी हो गई।। ऐ मौत, यूं ना तू मुझपे अकड़ बाकी है मेरी अभी सांसो […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- हर देश – वासी की ज़ुबान पर, आज जय – हिन्द का नारा है। ना .डाले कोई बुरी नज़र, ये वीरों ने ललकारा है । कारगिल का युद्ध हो, या […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- रवि के उजाले में हम तिरंगा लहरायेगें वीर जवानों की गाथा फिर से हम दोहरायेंगे दो मिनट का मौन रखकर हम सब एक साथ इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगायेंगे वतन […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- बहुत सारी वनस्पतियों में, बस एक ही है वो जादुई पेड़! हरा -भरा ,घना -निराला, अलग-अलग सी कलियां उसकी, खुबसूरत तने का ताना-बाना, रंग बिरंगी पत्तियां! देखो, अनोखा दृश्य बिम्ब […]

मेरी वफाओं का खुलकर सिला दिया उसने, न रखा एक भी, हर खत जला दिया उसने.. ‘दूर होने का फैसला क्या खुद तुम्हारा है ?’ मैंने पूछा तो कैसे सर हिला दिया उसने.. हमें भी […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- खुशी खूबसूरती और खैर- ख़ैरियत के साथ चलो मनाते हैं देश की स्वतंत्रता की वर्षगांठ । आजादी सौगात नहीं,अमर शहीदों की विरासत है रक्त बून्द से सिंचित,करना हमें जिसकी हिफाज़त […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कल ही लिपटे थे दामन से क्यूँ आज तिरंगा ओढ़ चले? दो कदम चले थे साथ अभी क्यों आज मुझे तुम छोड़ चले? अब प्रेम गगरिया को अपनी मैं आँखों […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कभी लहू तो कभी उनका कफ़न बन जाऊ स्वतंत्र दीप से जगमगाता हुआ चमन बन जाऊ ए आजादी तू घटा बनके बरसना और में तेरा भीगता हुआ गगन बन जाऊ […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- दृढ़ निश्चय लेके निकले मुसीबत को निकाला जड़ से उखाड़ ये देश भक्त हुए दुनिया में विख्यात जब लहू से लिखा इन वीरो ने भारत माँ का नाम करने आये […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कृतज्ञ देश है उन वीरों का जिसने लहू बहाया अपना देश की खातिर तन मन धन सब कुछ है लुटाया अपना बलिदान दिया है कितनी मां ने कितनी बहनों ने […]

न खोजो मेरा इतिहास तुम, तुम्हारे लिए तो आज हूँ मैं। न खंगालो मेरे बीते हुए पल बस तुम्हारा, तुम्हारे प्यार का मोहताज हूँ मैं। बीती हुई खोजोगे तो कमियां मिलेंगी, आज पर ही जियो […]

सुबह का पहला ख़्वाब हो तुम जैसे कोई मेहकता गुलाब हो तुम भरी दोपहरी का यौवन, और शाम का ढलता शबाब हो तुम कभी मेहक तो कभी मेहखाना हो जैसे रात में घूंट घूंट चढ़ता […]

अध ढकें तन को छिपाए दुनिया के बाजार में गुमसुम सी बैठी एक नारी लोग आते हैं और रुक कर आगे बढ़ जाते हैं हो रहा हो यहां कोई तमाशा जैसे किसी मनचले की नजरें […]