उठा अपनी आँधियों को, बढ़ा हवाओं का असर, साथ मेरे चल पड़ा है कितनी दुआओं का असर.. अब कभी गिरते नही टूटकर पत्ते शाखों से, मेरे गुलशन पे छाया हुआ है उसकी फ़िज़ाओं का असर.. […]

मैं हंसी तो हंस दिया, संग मेरे ये जहां। वरना ,किसी को, किसी के, अश्क देखने की फुर्सत कहां। इसलिए .गम अपने छिपाकर, मैं भी, हंस लेती हूं यहां। कलम चलाकर कर लेती हूं, दिल […]

यह इतना धैर्य तुम कहाँ से लाएं तभी तो तुम शहीद् कहलाए शस्त्र तुम्हारे हाथ में था देश के मान के लिए अडे रहे अपने बाहुबल से ही शत्रु मार गिराए तभी तो तुम शहीद् […]

बड़ी मुश्किल से बना हूँ टूट जाने के बाद, मैं आज भी रो देता हूँ मुस्कुराने के बाद.. तुझसे मोहब्बत थी मुझे बेइंतहां लेकिन, अक्सर ये महसूस हुआ, तेरे जाने के बाद.. ढूंढ रहा हूँ […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- याद कर लो सभी आज उनको जिनके यत्नों से आजादी पाई, यह जन्मभूमि भारत हमारी उस गुलामी से मुक्ति ले पाई। हर तरफ था अंधेरा घना कोई आशा न थी […]

हालत कुछ आज ऐसी बनी चलती जिंदगी से मौत उलझ गई, अकड़ कर वो कुछ यूं खड़ी मानो जिंदगी से बड़ी हो गई।। ऐ मौत, यूं ना तू मुझपे अकड़ बाकी है मेरी अभी सांसो […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- हर देश – वासी की ज़ुबान पर, आज जय – हिन्द का नारा है। ना .डाले कोई बुरी नज़र, ये वीरों ने ललकारा है । कारगिल का युद्ध हो, या […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- रवि के उजाले में हम तिरंगा लहरायेगें वीर जवानों की गाथा फिर से हम दोहरायेंगे दो मिनट का मौन रखकर हम सब एक साथ इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगायेंगे वतन […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- बहुत सारी वनस्पतियों में, बस एक ही है वो जादुई पेड़! हरा -भरा ,घना -निराला, अलग-अलग सी कलियां उसकी, खुबसूरत तने का ताना-बाना, रंग बिरंगी पत्तियां! देखो, अनोखा दृश्य बिम्ब […]

मेरी वफाओं का खुलकर सिला दिया उसने, न रखा एक भी, हर खत जला दिया उसने.. ‘दूर होने का फैसला क्या खुद तुम्हारा है ?’ मैंने पूछा तो कैसे सर हिला दिया उसने.. हमें भी […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- खुशी खूबसूरती और खैर- ख़ैरियत के साथ चलो मनाते हैं देश की स्वतंत्रता की वर्षगांठ । आजादी सौगात नहीं,अमर शहीदों की विरासत है रक्त बून्द से सिंचित,करना हमें जिसकी हिफाज़त […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कल ही लिपटे थे दामन से क्यूँ आज तिरंगा ओढ़ चले? दो कदम चले थे साथ अभी क्यों आज मुझे तुम छोड़ चले? अब प्रेम गगरिया को अपनी मैं आँखों […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कभी लहू तो कभी उनका कफ़न बन जाऊ स्वतंत्र दीप से जगमगाता हुआ चमन बन जाऊ ए आजादी तू घटा बनके बरसना और में तेरा भीगता हुआ गगन बन जाऊ […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- दृढ़ निश्चय लेके निकले मुसीबत को निकाला जड़ से उखाड़ ये देश भक्त हुए दुनिया में विख्यात जब लहू से लिखा इन वीरो ने भारत माँ का नाम करने आये […]

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कृतज्ञ देश है उन वीरों का जिसने लहू बहाया अपना देश की खातिर तन मन धन सब कुछ है लुटाया अपना बलिदान दिया है कितनी मां ने कितनी बहनों ने […]

न खोजो मेरा इतिहास तुम, तुम्हारे लिए तो आज हूँ मैं। न खंगालो मेरे बीते हुए पल बस तुम्हारा, तुम्हारे प्यार का मोहताज हूँ मैं। बीती हुई खोजोगे तो कमियां मिलेंगी, आज पर ही जियो […]

सुबह का पहला ख़्वाब हो तुम जैसे कोई मेहकता गुलाब हो तुम भरी दोपहरी का यौवन, और शाम का ढलता शबाब हो तुम कभी मेहक तो कभी मेहखाना हो जैसे रात में घूंट घूंट चढ़ता […]

अध ढकें तन को छिपाए दुनिया के बाजार में गुमसुम सी बैठी एक नारी लोग आते हैं और रुक कर आगे बढ़ जाते हैं हो रहा हो यहां कोई तमाशा जैसे किसी मनचले की नजरें […]

मैं बीता कल हूँ भले ही तुम्हारे लिए , पर किस के लिए तो आज हूँ मैं। तुम्हारी नजर में बेवफा हूँ। पर किसी वफ़ा का नाज हूँ मैं। स्वयं ठुकरा के मेरी बाहों को, […]

वक्त ने किससे क्या क्या न करवाया है कभी रोते को हंसाया है तो कभी हँसते को रुलाया है कभी ख़ुशी से दामन भर देता है तो कभी ग़मों को तकदीर में शामिल कर देता […]

आजकल बड़े पैतरे आजमाने लगे हो तुम! मुझसे दूर जाने के… इतनी समझ आई कहाँ से तुम में? पहले तो तुम बहुत नादान हुआ करते थे… अच्छा तो अब ये भी मेरी संगत का असर […]

आज बहुत दिनों बाद आई हूँ तुम्हारे दिल की गलियों में.. सफर करने को जरा संभाल कर रखना अपनी धड़कनों को मुझे देखकर कहीं मचल ना पड़ें… यूं नजरों से देखने की कोशिश ना करो […]

कविता- वजह ——————- तन मे तुम हो, मन मे तुम हो दिल में तुमको रखता हूं| चाहे जितना मुझे भुलाओ, निस दिन तुम पर मरता हूं| जीने की वजह मेरी हो मरने की वजह मेरी […]

जन मन ने उत्साह सजाकर भारतमाता के चरणों में आज पुष्प अर्पित करके गुंजायमान नारों से कर राष्ट्रप्रेम की लहर जगाई, जन-मन मे उमंग भर आई। राष्ट्रपर्व पर सारा भारत दिखा एकजुट रहा एकजुट जिसे […]

दिल और कलम, कलम कह रही है आज ,कि मोहब्बत पे किताब लिखूं। दिल चाहता है मगर कि,मै गम बेशुमार लिखूं।। कुछ यूं है दलील- ए- कलम ,मोहबब्त लिखे बीते हैं बरस। दिल कहे कर […]

हर देश – वासी की ज़ुबान पर, आज जय – हिन्द का नारा है। ना .डाले कोई बुरी नज़र, ये वीरों ने ललकारा है । कारगिल का युद्ध हो, या हो घाटी गलवान खड़े मिलेंगे […]

कविता- डर था ——————— पागल था पागल हूँ पागल ही रहुंगा, यह तुम्हारी सोच है| तेरी नजरो मे , सब कुछ था| बस इंसान नहीं जानवर था| इंसान बनने कि कोशिश में, तेरे मुख से […]

ये मेरे देश के वीरों का लहु जो बहाया है ये दर्द अब और ना सह पायेंगे बात जिस भाषा में समझते हो तुम बात उस भाषा में तुमको समझायेंगे तुमने सोचा भी कैसे, हम […]

रवि के उजाले में हम तिरंगा लहरायेंगे। वीर जवानो के गाथा फिर से हम दोहरायेंगे।। दो मिनट के मौन रख कर हम एक साथ। इंकलाब जिंदाबाद के नारा लगायेंगे।। वतन के लिए हमने क्या किया […]

“जंग ये खत्म हो लाखों की दुआ कहती है.. ज़िन्दगी खुद इसे साँसों की जुआ कहती है । सब तो देखा है सिसकती हुई इन आहों ने.. फिर भी ये बेबसी ‘सब कैसे हुआ’ कहती […]

आज आजादी की शुभ अवसर है , हे भारती नमन मेरा आपको है , आशीष दें आज आप मुझको , घर  के दुश्मनों को मिटा सकूँ , बाहरी दुश्मनों का संहार कर सकूँ , भले […]

आज की दिवा बड़ी गर्व की है, इस दिवा में भीष्म प्रण लेते हैं हम, आजादी के लिए जो शहीद हुए, उनका बलिदान ब्यर्थ न जाने देगें हम , सीमा पार  तो सेना निपट लेगा, […]

*15 अगस्त का महापर्व* कभी सोने की चिड़िया सा, ये हिंदुस्तान हमारा था ! जमी पर जैसे जन्नत था, जगत जग-मग सितारा था ! लुटेरों ने इसे न जाने, कितनी बार है लूटा ! जुड़ा […]

*15 अगस्त का महापर्व* कभी सोने की चिड़िया सा, ये हिंदुस्तान हमारा था ! जमी पर जैसे जन्नत था, जगत जग-मग सितारा था ! लुटेरों ने इसे न जाने, कितनी बार है लूटा ! जुड़ा […]

आजादी के जश्न में तो मनाता हर कोई है आजादी का मायना समझ सके तो कोई बात बने समाज जब संवेदनहीन हो जाये तब कोई संवेदना से बाते करे तो कोई बात बने तिरंगे के […]

जब भी कोई उम्मीद कभी, मेरे सर पर हाथ फिराती है .. माँ तेरी बहुत याद आती है.. माँ तेरी बहुत याद आती है.. कोई सतरंगी चादर गर, तेरी चूनर सी लहराती है.. माँ तेरी […]

हिंदुस्तान की रक्षा करना कर्तव्य है हिंदुस्तानी का हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई है एक ही दरिया पानी का । जब-जब है हिंसा की कटार से किसी धर्म का रक्त बहेगा रक्त बहा है किस धर्म […]

जय हिन्द साथियो पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में हर रूप में हैं […]