मेरी कल्पना में कहीं जो बसी है वो मदमस्त थिरकती जो अपनी ही धुन में , फूलों सी महकती हर अदा में अभिव्यक्ति मोहपाश में बांधे वो कजरारी निगाहें , हाँ तुम वही मेरी प्रियवंदिनी […]

किस्मत ने पलटकर कहा आगे भी बढ़ ज़रा मैं बहुत बुलंद हूँ मैंने कहा तू बुलंद है फिर भी पलट सकती है ज़रा सामने देख मेरा लक्ष्य है खड़ा अब तेरे लिए नहीं उसके लिए […]

मौसम ए साजिश का है, ये मौसम बारिश का है, किसी को इंतज़ार रहता है, बारिश में भीगने का, एहसास,अच्छा होता है। हवाओं में वो सुकून होता है, ये मुहब्बत का सुरूर होता है। दिल […]

ओ माँ कितनो को तुझ पर कविताएं पढ़ते देखा है तेरी तारीफों में कितने कसीदे गढ़ते देखा है, कितनो को शब्दोँ से सिर्फ तुझपर प्यार लुटाते देखा है, कितना इस दुनिया को तेरी ममता का […]

बादशाहत दिखाते रहे आग पर आग लगाते रहे इक्कों के मायाजाल में फँसे बाजियों में गड्डियॉं फटकाते न जाने कितनी कीमत चुकाते गए ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

फिर हुआ नई सुबह का आगाज़ है नया दिन नयी उम्मीदों का राज है चहचहाते पंछियों की गूंजती आवाज़ है सरसराती सुबह की ठंडी बयार है उस पर पड़ती सावन की फुहार है हर तरफ […]

इस भरी बरसात में सब धुल गई बाहरी पर्तें मेरे व्यवहार की, अब छुपाऊँ किस तरह से झुर्रियां जो मेरी असली उमर दर्शा रही। खोट है मेरी नियत में आज भी आप करते हो भरोसा […]

ए आलस तू भाग जा यूँ जिन्न की तरह मुझपर ना कब्ज़ा जमा बहुत कुछ ज़िन्दगी में है करने को अभी बाकी तू मेरी कल्पनाओं पर ना यूँ लगाम लगा मंसूबे तेरे मैं पहचान गयी […]

कितनी दूर चलना है इसकी फ़िक्र कौन करता है बस मंज़िलें सही मिल जाएँ ज़माना भी ज़िक्र उसकी करता है जो लक्ष्य भेदकर अपना सफलता के परचम लहराता है वो कहाँ खटकता है फिर किसी […]

घनी काली चाँदनी रात जैसे हो रही तारों की बरसात महकाती गुज़रती ये ठंडी हवा, नींद के आगोश में है सारा जहाँ, ये रात क्या कह रही है, क्या किसी ने उस नज़्म को सुना, […]

सफर बहुत लम्बा तूफानों से घिरा था इरादा मेरा लेकिन पक्का बड़ा था बड़ी मज़बूती से पकड़ी थी जो पतवार अपनी मेरा ज़ज़्बा मेरी मुश्किलों के आगे जो खड़ा था लौटना न मुसाफिर बस कदम […]

खुशियों को आने का मौका दो कभी तो बेवजह मुस्कुराओ यक़ीनन बहारें लौट आएँगी तुम ज़रा धीमे से खिलखिलाओ ढलती उम्र सी हर पल ये ज़िन्दगी ज़र्रा ज़र्रा हाथ से फिसलती है ज़िन्दगी सोचते क्यों […]

वो सब्र का पाठ तो पढ़ाते थे बेसब्र ना हो,सब ठीक होगा ! फिर इम्तिहानों के दलदल में खुद बेसब्र हो,अकेला छोड़ जाते थे! हालातों से लड़ते हम वहीँ के वहीँ रह जाते थे! वो […]

खौफ खातीं है सर्द मौसम की हवाएं भी मुझसे सीने में दहकते सूरज सी जिंदादिली रखती हूँ हौसला परवान पर है उम्र हारी है ढलती उम्र है तो क्या जज़्बा ज़िन्दगी जीने का, खुद के […]

गहनता से लिख रही हूँ मैं लफ्ज़ कम लगते हैं गर लिखने बैठो ज़िन्दगी की किताब चंद लम्हे फुर्सत मिली बाकी रहा ज़िम्मेदारियों का दबाव यादों को तक सँजो ना सके रखते रहे पल पल […]

कितनी रातें गुज़र जाती हैं नींद आये तो भी आंखें सोती नहीं ज़हन में ख्याल तेरा नज़र में इंतज़ार पलकें भीगती हैं पर आँख रोती नहीं ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

शुक्रगुज़ार तेरे नहीं तेरी तस्वीर के हैं तन्हाइयों में भी हमारे साथ होती है छोड़ती नहीं एक पल हमारा साथ साथ जगती भी है और साथ सोती है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

दिलकश महबूब से इश्क़ बेहद खूबसूरत एहसास देता है कहीं नाकाम आशिक़ बना देता है कहीं सरताज बना लेता है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

हर रोज़ पहुँच जाती हूँ उस श्वेत निर्मल घरोंदे में न जाने किस जन्म की कहानी शायद कैद है उन दीवारों में जहाँ पहुँच कर अतीत के पन्ने करवटों की तरह बदलते है शीतल पवन […]

ना…री तू बिलखना नहीं किसी सहारे को अब तरसना नहीं तू स्वयंसिद्ध और बलवान है नहीं महत्वहीन तू खुद सबकी पहचान है सशक्त है तू नाहक ही छवि तेरी कमज़ोर है पर तेरे जोश का […]

मुश्किलें किसके जीवन में नहीं आतीं ये दृढ़ता से समझना होगा खुद की कोशिश नाकाम नहीं होतीं विजय पथ पर खुद अग्रसर होना होगा जब कोई अपने हिसाब से लड़ता जाता है कुछ बेख़ौफ़ बढ़ते […]

वो प्रीत के मनोरम स्वर्णिम पल दफ़न क्यों हुए चारदीवारी में, वो जुड़ रही थी या टूट रही थी जलते से या बुझते अरमानों में, वो प्रेम या वेदना के पल कहूं या तार तार […]

जीवन की है कठोर डगर,बढने से पहले तू संवर लक्ष्य हासिल करना है अगर,खोल ले तीसरी नजर। मासूम तुम्हारा चित जितना ये दुनिया उतनी मासूम नहीं प्रश्न खङा होगा तुझ पे सरे शाम सुबह चारों […]

साँझ हो रही है, ऊंचे पहाड़ों के शिखर बादलों से आलिंगन कर रहे हैं। साफ साफ कुछ नहीं दिख रहा है, परस्पर प्रेम है या बस दिखावा है। जो भी है कुछ तो घटित हो […]

इतना चाहती हूँ इतना ना इतराया करो,बेरूखी में, ना दिन जाया करो यूँ दूर ना मुझसे रहो,बुलाने से पहले आ जाया करो क्यू खामोश हो या खुद में ही मदहोश हो चुप हो ऐसे तुम […]

आवरण मेरा बहुत ही भव्य है, आचरण में दाग धब्बे पड़ गए, जम गई अंतः पटल में कालिमा भाहरी दिखने की है यह लालिमा। – डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत उत्तराखंड।

खूब पढ़े खूब बढ़े शिक्षा ही जीवन का आधार है, इसके बिना जीवन निराधार है। शिक्षा ही जिन्दगी का सच्चा अर्थ बताती हैं, सत्य और अनंत उन्नति का मार्ग बताती है। शिक्षक नित नवीन सबक […]

झम झमा बरखा लागी ऐ गौ छ चुंमास डाना काना छाई रौ छ हरिया प्रकाश। त्वै बिना यो मेरो मन नै लिनो सुपास, घर ऐ जा मेरा सुवा लागिगौ उदास। पाणि का एक्केक ट्वॉप्पा

सीतापुरिया अवधी रचना = “हमरी तऊ पुलिस दरोगा भऊजी” अउरेन की भऊजी जेलि करउती, हमरी तऊ पुलिस, दरोगा भऊजी। दिनु भरि स्वावईं अईसी-वईसी, पहरा राति लगावई भऊजी। भईया बाहेर तानाशाह बनति हँई, उँगरिन नाचु नचावई […]

जब तुम यूँ समर्पण भाव से मुझे देखते हो.. अनगिनत आकांक्षाएं उमड़ उठती हैं ह्रदय में… मेरी थर्राई देह तप्त लौह -सी दहक उठती है जब तेरी सांसों का घूंट पीती हूं मैं… जाग उठते […]

फ्रिज में रखी शब्जी की तरह धीरे धीरे खराब हो रही है मेरी लय, कल कहीं बेसुरा न हो जाऊं पढ़ ले जल्दी से उन पंक्तियों को जो मैंने तेरे लिए लिखी हैं। —- डॉ0 […]

सांप! मारना नहीं चाहिए था ये वाला वो बता रहे हैं ये पानी वाला सांप था जानता था कितने सांप, मगरमच्छ और है उस तालाब में उसे रखना चाहिए था एक वीआईपी वाले बिल में […]

मुकम्मल कभी वो प्यार नहीं जो तवज्जो रंगे नूर से मिले जो सीरत से दिल लगाए वो मुहब्बत कमाल होती है @अनीता

माथे पर शिकन से उभरती लकीरों को देखकर एक फ़कीर ने कहा तूने बुलंद किस्मत है पायी उसे क्या पता था कि एक जान के बदले में गिरवी रख आया हूँ अपनी सारी कमाई ©अनीता […]

शतरंज में अक्सर बाज़ियाँ पलट जाती हैं अक्लमंदी से मोहरे चलना ए बाज़ीगर किस्मत बुलंद हैं गर अदने से मोहरे की तो राजा के हिस्से में शह और मात आती है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस […]

दूरियां ज़बरदस्त कायम है दरमियाँ दो दिलों के कौन जाकर समझाए उन्हें किस्मत से मोहब्बत मिलती है दिलों में रंजिशें हो तो इश्क़ मुकम्मल हुआ नहीं करते ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

डर का वजूद कुछ नहीं ये स्वयं जनित मनोभाव है आसन्न खतरे की चिंता से उत्पन्न भय निराशावाद है एक अंतहीन भ्रम की स्थिति हक़ीक़त के धरातल पर भय का ना कोई ओर छोर है […]

दो दिल जुड़ते हैं जब सच्चाई से चंचलता निरंतर जवान होती हैं किसी से प्यार हो जाना बेहद सुखद अनुभूति हैं खुशनुमा अहसासों में डूबकर कल्पनाएँ सोती हैं आलिंगन किये रहते हैं उमड़ते जज़्बात हर […]

देह में अभिमान की गर्मी पड़ी आसुंओं के स्रोत सूखे पड़ गये नैन की झिलमिल सुहानी पुतलियां आग के ओले गिराती रह गई। बाजुओं की शक्ति से कमजोर की कुछ मदद करने की चाहत खो […]

कानून के दहलीज़ पर पहुँचने से पहिले मारा गया कानून के रक्षक का हत्यारा। कोई तो बतलाओआखिर कब तक जिन्दा रहेगा बाँकी कानून का हत्यारा।।

तुम्हारे प्यार में मैं क्या से क्या हो गया, कभी मिट्टी का दीया कभी मटका बन गया, जब देखा तुम्हारो हाथों में गैर का हाथ। मैं फौलादी मिट्टी का इंसान टूट कर बिखर गया।। महेश […]