समाज की बेहतरी की दिशा में आप कोई कार्य करें ना करे परन्तु कार्य करने के प्रयासों का प्रचार जरुर करें। आपके झूठे वादों , भ्रमात्मक वायदों , आपके प्रयासों की रिपोर्टिंग अखबार में होनी […]

प्रीत रोग के मारे दिल को हम को ये तो बताना था हम को .गम तो और भी हैं लेकिन इसी का .जमाना धा हम को ही पछताना धा इस के संग तो .फसाना धा […]

पैर थक गए हैं तेरी ठोकरों से, ए जिंदगी! मगर कहता! हौसला इन पैरों का, ज़फ़र तो हम भी नहीं छोड़ेंगे। और तेरे सितमों का कहर, पहाड़ ही क्यों ना बन जाए, मुस्कुराना तो हम […]

किसी व्यक्ति के जीवन का लक्ष्य जब मृत्यु के निकट पहुँच कर भी पूर्ण हो जाता है तब उसकी मृत्यु उसे ज्यादा परेशान नहीं कर पाती। अश्वत्थामा भी दुर्योधनको एक शांति पूर्ण मृत्यु प्रदान करने […]

खूबसूरत सांझ शांत होता हुआ शहर का कोलाहल कम होता हुआ वायु में घुल रहा हलाहल, चलो थोड़ी देर, छत पर घूम लें। आप वहां हम यहाँ, रूहों की टेलीफोनिक तरंगों से थोड़ा मिल लें, […]

किलै खिलना हौला साल भरि में एक्कै बैर गुलाब वन भरि कुइयाँ फुलि रौ घर-घर गुलाब। दिखै बेर चार दिनैकि रंग-बिरंगी चमक, फिर पैंली को झौ कांडा वालो है जाँ गुलाब। नै खिलनो त कि […]

ईश्वर किसी एक धर्म , किसी एक पंथ या किसी एक मार्ग का गुलाम नहीं। अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ मानने से ज्यादा अप्रासंगिक मान्यता कोई और हो हीं नहीं सकती । परम तत्व को किसी […]

सर्वदा होश की अवस्था हैं ब्रह्मचर्य विषयों से अनासक्त का नाम हैं ब्रह्मचर्य पूर्व संस्कार का पूर्ण रुपेण त्याग हैं ब्रह्मचर्य ब्रह्मचर्य कुछ भी नहीं :_ निज मूल स्थिति का नाम हैं ब्रह्मचर्य ।।१।। +++++++++++++++++++++++++++++ […]

सर्वदा होश की अवस्था हैं ब्रह्मचर्य विषयों से अनासक्त का नाम हैं ब्रह्मचर्य पूर्व संस्कार का पूर्ण रुपेण त्याग हैं ब्रह्मचर्य ब्रह्मचर्य कुछ भी नहीं :_ निज मूल स्थिति का नाम हैं ब्रह्मचर्य ।।१।। +++++++++++++++++++++++++++++ […]

ख़ामोश है कलम, कर रही इन्तज़ार है। कब कोई लेख लिखूँ मैं, वो देख रही बारम्बार है। पी कर अश्क अपने एक दिन, सचमुच कलम उठाऊॅंगी। प्रतीक्षारत कलम को, न और अधिक प्रतीक्षा करवाऊँगी॥ _____✍️गीता

सृष्टि के कण कण में व्याप्त होने के बावजूद परम तत्व, ईश्वर  या सत , आप उसे जिस भी नाम से पुकार लें, एक मानव की अंतर दृष्टि में क्यों नहीं आता? सुख की अनुभूति […]

जब देश के किसी हिस्से में हिंसा की आग भड़की हो , अपने हीं देश के वासी अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हो  और जब अपने हीं देश मे पराये बन गए इन […]

स्वर्ण कांति आभा धारी, करे सिंह की सवारी, घंटाकार अर्धचंद्र,मां का ध्यान कीजिए। सुख शांति दिव्य शक्ति, चंद्रघंटा मां की भक्ति, मणिचूर चक्र मन, मां आन विराजिए। तीन नेत्र दस हाथ, गदा बाण चक्र साथ, […]

मर्यादा पालन करने की शिक्षा लेनी हो तो प्रभु श्रीराम से बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता। कौन सी ऐसी मर्यादा थी जिसका पालन उन्होंने नहीं किया ? जनहित को उन्होंने हमेशा निज हित सर्वदा […]

अपना सनातन नूतन वर्ष है आया लेकर अनंत खुशियां अपार करिए अभिनन्दन नववर्ष का चहुंओर ले आएं प्रेम की बहार दो पल का जीवन है मिला यूं हीं मत करिए बेकार वसुधैव कुटुंबकम् की महत्ता […]

चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राज गुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त, खुदी राम बोस, मंगल पांडे इत्यादि अनगिनत वीरों ने स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में हंसते हंसते अपनी जान को कुर्बान कर दिया। परंतु ये देश ऐसे […]

हाँथों में लेकर थाल मेरी इस थाल में भरे गुलाल लगाने आई हूँ, नजरों से नजर मिलाकर तुझे छू कर तुझमे समा कर कुछ इस तरह से होली आज मनाने आई हूँ। मेरे प्रियतम मेरे […]

तुम्हारे बिन मेरा जीवन बड़ा बेरंग है, तुम्हारे संग ही जीवन के सारे रंग है, ना इक भी कॉल, मैसेज और ना बातें, बताओ इस तरह से कौन करता तंग है, हमारी पहली होली और […]

मैं ख़ुद को बेकार समझता हूँ, हूँ नहीं, मगर यार समझता हूँ, आपकी भी कहानी से वाक़िफ हूँ, आपका भी किरदार समझता हूँ, आप मुझे बेवकूफ़ समझते हैं, आपको मैं समझदार समझता हूँ, आपको मैं […]

मुश्किल है आसान नहीं है, जीना आसाँ काम नहीं है, जिसको अच्छा समझ रहे थे, वो अच्छा इंसान नहीं है, जो वाकई ज्ञानी होता है, सबको देता ज्ञान नहीं है, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे है, सबका […]

वासना छोड़े घर मिटे मन कि विकार पूर्व-संस्कार न सताए ऐसा हो होली का त्यौहार ।।1।। जले अगर अग्नि में तो क्रोध व काम पियो वैसी शराब जिसकी नशा न उतरे जिंदगी भर रंगों मन […]

रंगीली होली का आया त्योहार, आओ सब मिलकर मनाएं। सतरंगी रंगों से सराबोर, अबीर-गुलाल लगाएं।। फाल्गुन पूर्णिमा बसंती रंग बरसे, प्रीत के रंग में हिय मन हरसे, भर पिचकारी रंगों की बौछार, होली सब मिलजुल […]

बुरा ना मानो होली है! जोगीरा सा रा रा, होली आई, होली आई. बीत गयी बसंत, लौटी है फिर से फागुन के होली की उमंग. भांग पीकर सब ऐसे मस्त पडे़ है, जैसे दुनिया के […]

आओ कुछ ऐसी होली मनाएं हर चेहरे पर मुस्कान ,हर घर खुशहाली आए छल कपट का इस होली में दहन हो जाए प्रेम रूपी गुलाल हर जन उड़ाएं हर रंग में ऐसा रंग मिले, हर […]

इस बार की होली पर अवगुण जलाये जाएंगे, हर जन मन के हृदय में सद्गुण सजाये जाएंगे। जो रूठ के बैठ गए थे कभी संग साथी अपने, लगाकर गले सब दुःख सन्ताप भुलाए जाएंगे। आएंगे […]

मृग तृष्णा मृग तृष्णा समदर्शी सपना , भव ऐसा बुद्धों का कहना। था उनका अनुभव खोल गए, अंतर अनुभूति बोल गए। ………. पर बोध मेरा कुछ और सही, निज प्रज्ञा कहती और रही। जब प्रेमलिप्त […]

सैंया तेरे साथ खेल को लाई चुनरिया कोरी मैं कौन रंग के साथ रंगोगे, मोहे अबकी होरी में जीवन मिला तोहे पाने को,कितने मौसम बीत गए इंतजार में तेरे प्रीतम नैना मेरे भीग गए अबकी […]

अबला बनकर रह लिया बहुत अब स्वयं सबला तुम्हें बनना होगा कभी पुत्री बहन मॉं पत्नी बन सखा निभाती फर्ज सभी हर फर्ज निभाया तुमने बखूबी से निज पहचान बनाने को बढ़ना होगा। कहीं अशिक्षा, […]

कोई हो जो बिन कहे हर भाव समझ ले, कोई हो जो चेहरे की हर शिकन को पढ़ ले। कोई हो जो मुस्कुराने का बहाना दे दे, कोई हो जो बिन मांगे प्यार का खज़ाना.. […]

जब दिल से दिल के तार जुड़े हों, किसी पहचान की जरूरत कहाँ। नाम भले ही गुम जाए, चाहे चेहरा भी बदल जाए.. आपकी आवाज़ से,आपके अंदाज़ से, आपकी रूह को पहचान लेंगे हम। ये […]

कलम गढ़ो अविराम सत्यता, ना डिगो निडर निर्भीक चलो। यह कलम धार निरंतर बनी रहे, उर प्रबल वेग नित जोश भरो।। ********************* लिखो पुण्य गाथा वीरों की, कुछ जीवन अपना धन्य करो। यशगान करो मां […]

वो मेरी आहट से ही मुझको पहचान लेता था, नींदों में भी बस मेरा ही नाम लेता था। याद करती थी मैं उससे रात-दिन और वह हिचकियां लेता था। ना मिलने की कभी जिद्द की […]

एक वक्त था… जब तुम मेरे लिए रातों को जगा करते थे मैं कुछ भी कहती, तुम हंसकर सब सुन लेते थे। मुझसे ज्यादा तड़प होती थी तुमको मिलने की, व्हाट्सएप’ पर भी तुम अवलेबल’ […]

कहानी-ना समझ संतान पैतृक संपत्ति से कुशल किसान रहता था, अनेक पशुओं तथा कृषि यंत्रों के साथ एक सुनहरे भवन का मालिक था, किसान के दो पुत्र प्रवेश तथा आवेश, दोनों पुत्रों की शादी हो […]

कहानी-बाढ़ ————– सूरज निकलने वाला ही था कि बारिश रिमझिम शुरू हो गई| दोपहर होते-होते बारिश विकराल रूप धारण कर ली चारों तरफ बादल में गड़गड़ाहट बिजलीओं की लपटें, ऐसा प्रतीत होने लगा आज बादल […]

शिक्षा ग्रहण करो,संत ज्ञानेश्वर भीमराव बनों —————————————————- यदि मन में अभिलाषा है किसी विशेष कार्य, वस्तु ,लक्ष्य, पद प्रतिष्ठा के लिए और धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं, तब स्वाभाविक है कि आने वाले समय […]