‪#‎_मेरा_वाड्रफनगर_शहर_अब_बदल_चला_है‬ _______**********************__________ कुछ अजीब सा माहौल हो चला है, मेरा “वाड्रफनगर” अब बदल चला है…. ढूंढता हूँ उन परिंदों को,जो बैठते थे कभी घरों के छज्ज़ो पर शोर शराबे से आशियानाअब उनका उजड़ चला है, […]

छीनकर खिलौनो को बाँट दिये गम। बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम।। अच्छी तरह से अभी पढ़ना न आया कपड़ों को अपने बदलना न आया लाद दिए बस्ते हैं भारी-भरकम। बचपन से दूर बहुत […]

***कल *** एक कल बीत गया,और बीतता ही है कोई नहीं रोक सकता उसे एक कल जो आने वाला हे आएगा ही वो भी आज बातें कर लें हम कल ना फिर से आयेगा कल […]

जंगल नाचत मोर है, अंगना नाचत भोर ! मैं नाचत-नाचत थका, तब तनि हुआ अंजोर !!   मनुआ माया में फंसा, भूला अपनी राह ! गहरी खाई में गिरा, राम मिले न राह !!   […]

  साथ चलते हैं। चल साथ चलते हैं। मंज़िल की छोड़ ना!! इस बार हम राह चुनते हैं। गुज़रते जायेंगे लम्हें हर लम्हों को कहीं किसी भी तरह क़ैद करते है चल! साथ चलते हैं। […]

पृथ्वी और आकाश में एक पुरुष का वास ! कण-कण जिससे व्याप्त है, जीवन, मृत्यु, प्रकाश !!   पूरब कोई पश्चिम कहे, पृथ्वी और आकाश ! कण-कण में मुझको दिखे, आगे पीछे  पास !!   […]

तेरे लिए खुद़ को हम खोते चले गये! जिन्दगी को अश्क से भिगोते चले गये! धड़कनों में घुल गयी हैं यादें इसतरह, मयकशी में दर्द़ को डूबोते चले गये! Composed By मिथिलेश राय ( महादेव […]

अंधियारे को उघाङती हुई, रोशनी सी बिखेरती हुई, वो छुपी सी इक काया, मुस्कुराती हुई ,तुम ही हो ना? शांत सी हवा में मानों,पायल की छमछम,   हल्के से कानों में बजती,साँसों की सरगम, वो […]

हुयी है अभी शाम मगर रात हो जाने दो! तपते हुए इरादों को दर्द में खो जाने दो! जब जागते हैं ख्वाब भी तड़पाते हुए मुझे, दो घड़ी के लिए मुझे चैन से सो जाने […]

“कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं” मैं चाँद नहीं वो प्रचलित तारा ध्रुव भी नहीं मेरे दिखने का कोई दिन नहीं पूर्णिमा नहीं अमावस्या भी नहीं मैं कई प्रकाश वर्ष दूर आकाश का तारा हूँ […]

  सो जाते हैं हम अधूरेपन की थपकी उधेड़बुन वाली लोरी कल परसों की सिसकी और किसी दी हुई हिचकी लिए सो जाते हैं हम सपनों की तकिया सुकून की रजाइयाँ अनजान से सन्नाटे और […]

कुछ बच्चे औपचारिक शिक्षा के लिये अपने को अयोग्य पाते हैं किन्तु उनके अभिभावक इस सत्य को अस्वीकार करते हैं और अनावश्यक दबाव में बच्चे असहज रहते हैं – ऐसे माता पिता के लिये एक […]

आज फिर तुम्हारे झगड़े ने देखो, कितने अरमान बहा दिए अभी उन होथो पर हर्ष था, इस धरा पर उनका निर्मल स्पर्श था| तेरी लड़ाई ने उन्हे दफ़ना दिया जिसे बचना था उस लोह को […]

चाहतों की ख्वाहिश फिर से बहक रही है! तेरी बेरुखी से मगर उम्र थक रही है! मेरा सब्र बिखर रहा है बेकरारी से, तेरे लिए जिन्दगी फिर से चहक रही है! Composed By #महादेव

गजल पत्थर था मै , मोम बनाकर छोड़ दिया , बदन को मेरे यूँ फूलों सा मरोड़ दिया ! उठता , चलता और फिर गिरता था मै , हिम्मत कमबख्तों ने , मेरा तोडा दिया […]

Dhoka krne vale mat kr dhokha Nhi tou tujhe bhi kisi moke per dhokha milega Us din ek dhoke baj dusre dhokhe baj SE dhoka milega Ye is duniya ka hai dastor jaisa krogye vaisa bHarogye Aj tum krogye tou kal tum bharogye Dhoka de kr kya jeet loge Kuch ache insano ka usne jayda SE jayda haq chin logye Upar vale ki nigao  SE kaise bacho oo khud ko Kya Issi dhokha dhadhi k bazar pe baich paogye khud KO ByRLvgahlot  

Dhoka krne vale mat kr dhokha Nhi tou tujhe bhi kisi moke per dhokha milega Us din ek dhoke baj dusre dhokhe baj SE milegamilega Ye is duniya ka hai dastor jaisa krogye vaisa bHarogye Aj tum krogye tou kal tum bharogye Dhoka de kr kya jeet loge Kuch ache insano ka usne jayda SE jayda haq chin logye Upar vale ki nigao  SE kaise bacho oo khud ko Kya Issi dhokha dhadhi k bazar pe baich paogye khud KO ByRLvgahlot

Mohobat mai unki aisa alam tha Na din ka pta na rat ka dhikana tha×2 Chur the hum unki yado mai Or lafjo per unka hiii afsana tha Ger bna kr ek pal mai chodh gyi Is masom dil KO tode gyi Ye kissa hiii bewafao ka Purana that By RLvgahlot  

खुद को,झूठ के एक लौह जाल में घेर लिया तुमने झूठ का ये लिहाफ़,क्यों ओढ़ लिया तुमने, ये भी झूठ और वो भी झूठ, हर वचन पर,सच जाये टूट, हर मोङ पर तुम्हारे बोल, सिखा […]

savan kahi na khi kuch to kami hai Savan ka mosam mai bhi halki halki nami haiii Khi na khi is savan mai kuch tou kamii haii Hum ek dusre k bhi hoke bhi ek dusre mai nhi haiii Sayad yhi vo kamiii haii Dil mai bate Teri akho mai yade Teri phir bhi q na Jane nizdikiyo k beech y doriya c baniii  haiii Savan mai deewana pan or us yr ka ye begana pan Savan mai khi na khi kuch tou kamiii hai Unki aahat humari rooh mai basi hai Meri saso KO unki saso SE iskadar mohobat hogyi Dil KO bhi pta na cha usse dhadak ne k liye kab unki jarurat siii hogyi Mere is savan mai kuch tou kami haii Humara yar bhi humari zindgi SE haseen hiiiiii By RLvgahlot  

??????(मुक्तक)???????? ????????? माँ चरण आपके स्वर्ग का रूप है। माँ सभी शक्तियो का मिला रूप है। जिंदगी श्याम मेरी न होगी कभी। माँ नजर आपकी प्रेम का धूप है। ????????? रचनाकार अविनाश सिंह अमेठिया (देवरिया) […]

************माँ का दूध या सतनो का जोड़ा ,किस नजर से देखे दुनिया सारी ********************** हमेशा देखा है राह चलते लोग रिश्तेदार यहां तक की अपने दोस्त यार तक ,महिलओं को घूर घूर के देखते हें […]

मज़हब न जात पात का अब फ़ासला रहे। मैं रहूँ न रहूँ मगर ये काफ़िला रहे।। हिन्दू हो मुस्लिम हो सिख हो ईसाई। सबके बीच प्यार का ये सिलसिला रहे।। करे न गुमान कोई अपनी […]

  पलाश की खुशबू लिए होली के रंग, भिगो जाते हैं खुशियों की मस्ती में । गुलाल का गुबार भर देता है ऑंखों में अल्हड सपने। छटा ऐसे लुभाती है…. कि सूने मन में , […]

  पूर्व की हवाएँ जब भी बदलता है मौसम वसंत के बादऔर ग्रीष्म के पहले का लंबा अंतराल तो सूर्य के विरुद्ध जा कर पुरबवैयाँ चलती हैं। गाँव में कहावत है ऐसे मौसम में मत […]

ज़िन्दगी गरम तवे सी हो रखी है। ऐसा-वैसा तवा नहीं। महीने भर खर्चों की आग में  सुलगता तवा!! गरम तवे को राहत देने महीने भर कोई न आता है। महीने के अंत में दफ्तर से […]

गर्मी के हालात में लाइट (बिजली) करे बहाने   लाइट भी अब बहाने मारकर जाने लगी है गर्लफ़्रेंड की तरह तड़पाने लगी है करती है हर रोज मिलने का वादा हर रात बस सपनों में आने […]

⚛⚛एक नाकाम कोशिश ⚛⚛   सही    राह    सबको    बताकर   तो    देखो यतीमों    को   अपना   बनाकर   तो    देखो   बहू   को   जलाया  है  दौलत […]

ये पानी नहर का गहरा कहाँ है समंदर की तरह ठहरा कहाँ है छिपा सकते नहीँ हरगिज़ खुदा से हमारा दूसरा चेहरा कहाँ है हमारी दोसती बे शक़ है उनसे ताअल्लुक़ इस क़दर गहरा कहाँ […]

ये माटी के खातिर होगे, वीर नारायण बलिदानी जी। ये माटी के खातिर मिट गे , गुर बालक दास ज्ञानी जी॥ आज उही माटी ह बलाहे, देख रे बाबु तोला। मोर रंग दे बसंती चोला, […]

तेरी लहर मिल गयी है यादों की फिर से! तस्वीर मिल गयी है इरादों की फिर से! डूबी है फिर जिन्दगी तेरे अफसानों में, जागीर मिल गयी है मुरादों की फिर से! Composed By #महादेव

बढती हुई कट्टर हिंदुओं की अराजकता पर कुछ लाइनें   अब बाहर निकलने से भी मैं डरता हूं अपनी गोल टोपी पहनने से डरता हूं कभी कहीं कोई गाय दिखाई दे तो झुका लेता हूं […]

मुझे तुम किसलिए जगाते हो यूँ रातों में? नींद आती नहीं ख्वाहिश-ए-मुलाकातों में! लिपट गयी हैं हसरतें यादों से इसतरह, जिन्दगी मदहोश है तेरे ख्यालातों में! Composed By #महादेव