इक्कीसवीं सदी का हमारा हिंदुस्तान है घूर नहीं सकता कोई अब इतना बलवान है आतंकवाद अब नहीं बर्दास्त करेंगे अंतरिक्ष हो या धरती अपनी अलग पहचान है
इक्कीसवीं सदी का हमारा हिंदुस्तान है घूर नहीं सकता कोई अब इतना बलवान है आतंकवाद अब नहीं बर्दास्त करेंगे अंतरिक्ष हो या धरती अपनी अलग पहचान है
वस्त्रों के बिना नारी शोभा नहीं पाती है धरती को किया नंगी और शरम नहीं आती है कैसे सपूत हो तुम जब मां तड़प रही पीने को शुद्ध पानी ऑक्सिजन नहीं पाती है प्रथ्वी दिवस […]
यह सच है कि मुझे काले काले बादलों ने घेरा है इतना आसान नहीं है मुझे डराना क्यूंकि भारत में मेरा बसेरा है
जब सांसे हो रही है कम ,आओ फिर से वृक्ष लगाएं हम, आओ नमन करे हम वसुधा, को जो मिटाती है हम सबकी क्षुधा को, जो बिना भेदभाव हम सबको पाले,वह भी चाहे पेड़ों की […]
कहा बकरी ने मेमने से मैं तुझे जहां भेजती हूँ हंसते हुए जाना ले जाने वाला भगवान् के सामने तेरी काटेगा गर्दन और तेरे जिसम का प्रसाद बांटेगा मगर तुम रोना मत क्यूँकि ये संसार […]
गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है जीवो को अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है यह […]
तोहमत लगाने की आदत कब की छूट चुकी है मैं गुलाम ही सही मुझे सबकी आजादी की पड़ी है मुक्त होती है रुह मरकर ही मुझे मुक्त होना है जीते जी ही इक बीज किसी […]
गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है सभी जीवो अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है बीमार […]
कूड़े के ढेर में खोजने में लगे थे नन्हें नन्हें हाथ, तन्मयता के साथ, जरूरत की चीजें, दे रहे थे सामाजिक जीवन को, सच्ची सीखें। पूछा तो बोले उनके घरों से निकला हुआ यह कूड़ा […]
गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है सभी जीवो अपने अंचल में बसाती है इसीलिए ये हमारी धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है यह […]
तेरे घर की रोशनी क्यूँ देखूँ जब मेरे घर में अंधेरा हो आखिरी रात न हो जाए कही जब तक हर ओर सबेरा हो उसकी ख़ुशी हमारे किस काम की जिसे अहंकार के भूत ने […]
आकाश की सुंदरता बढ़ाता कपासी बादल नहीं धरती का प्रियतम है वह काला बादल जो अपने प्रेम से करता है धरा का शृंगार.. कानों में रस घोलती सुरीली तान फूटती है काली कुरूप कोयल के […]
दसो दिशाओ मे बड़े बड़े मोटे मोटे अजगर पड़े हैं तैयार उत्सुक हैं निगल जाने को संसार वो हमारे पास भी आते हैं और कभी हम अपने काम से उनके पास चले जाते हैं इस […]
एक हाथ से ही अब बजने लगी ताली है खुशी ग़म की टोकरी कई दिनो से खाली है
आ गया साल है पांचवा जानिए छा रहा है सहज मेघ ये मानिए बूंद दो भी बरस के न जाएगा ये मोर के जैसे शोर को छानिए घर बनेगा उन्ही का हकीकत यही पैर के […]
मिली नहीं है आंख हरपल आंशु बहाने के लिए क्या कुछ नहीं जहां में देखने दिखाने के लिए अभी भी समय है हो जाओ सचेत बहुत कुछ बचा है बचाने के लिए
निभा तो सही सबसे इंसानियत का नाता है कड़ी धूप और बरसात से बचाने वाला छाता है परहित से बड़ा कोई धर्म नहीं होता तेरा ही करम तेरे भाग्य का निर्माता है
क्यों मांगते हो वरदान परिस्थितिया सदा अनुकूल हो चलना हमारा काम है गली में कांटे हो या फूल हों
बुरा वक्त है एक दिन यह भी बीत जाएगा विश्वास बनाए रखना एक दिन जीत जाएगा परीक्षा है परमात्मा की धैर्य से दे उम्मीद रख खुशी के गीत गाएगा
अपने देश में खुशियों बरसात कराएंगे अनेक प्रकार के ये लोग जिस दिन एक हो जाएंगे
चुनौतीया है देश मे कई हम भी स्वीकार करते हैं देखकर दंग होता है जहां जब हम नई उड़ान भरते हैं
धरती से आकाश जितना दूर होगा उतना ही दीर्घायु तुम्हारी मांग का सिंदूर होगा
नैतिक जिम्मेदारी है सबकी सुंदर परिवेश बनाना फैलती है गंदगी से बीमारियां इनको दूर भगाना
डरो मत तूफानों से आते जाते रहेंगे कवि हैं कविताओं से हिम्मत बढ़ाते रहेंगे
आज 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाते हैं, इसी मलेरिया के कारण हजारों लोग अपनी जान गंवाते हैं, इलाज से बेहतर होता स्वयं का बचाव करना, कोशिश करें फुल कपड़े पहनने की, घर में […]
मेरे वतन के सैनिकों अब देश ही परिवार है कबूल करो देशवासियों की दुआ और प्यार है
माता कहते हो जिस देश को वहां नारी का सम्मान है अनेकता में एकता ही भारत की पहचान है
बह रही पवन ,खिल रहे सुमन, कितना अदभुद यह नजारा है, छंट गया तिमिर, बीती यामिनी, रवि की किरणों ने पैर पसारा है। नभ में चिड़ियाँ,कलरव करतीं, गुंजन यह मधुरिम छाया है, आलस्य त्याग हे […]
हौसला आप यूँ ही बनाए रहे देश की इस धरा को बचाए रहे भेड़ियों की सभी चाल नाकाम हो देश सीमा कि शोभा बढ़ाए रहे
आज भी नहाते हैं लोग सुबह उठकर फिर दर्पण के सम्मुख जाते हैं दर्पण मे देखकर चेहरा अपना मुह बनाते हैं, रोते हैं, चिल्लाते हैं फिर उस दर्पण को छोड़ कर या तोड़कर बड़े आकार […]
पर्यावरण बचाइए, हे मानव समुदाय सुख समृद्धि शांति, का है जो पर्याय नदिया पर्वत वन और, वन्य जीव समुदाय मानव दानव से हमे, कोई लेव बचाय धरा वायु जल सब हुए, दूषित सुनो पुकार प्रकृति […]
नीचता ऊ़चता देखते हम चले आइए भूल जाए न सिक्वे गिले एक जैसा सदा भाव लेकर चले फूल जैसा बगीचा वतन. मे खिले
इन्सान की रफ्तार थम गई, और मोबाइल चलने लगा। मोबाइल के सहारे ही, कुछ वक्त कटने लगा। बात करनी हो किसी से, तो मोबाइल काम आया। आजकल इसके बिना, ना किसी ने चैन पाया। जा […]
राहुल बोला.. यह कोरोना कहाँ की बीमारी आई है, इसने कैसी आफत मचाई है। इन्सान, इन्सान से डरने लगा, अदृश्य जीवों से मरने लगा। बस घर में ही पड़े रहो, चलाते रहो मोबाइल। ना कहीं […]
घर की दहलीज जब लागी तो ऐसा मंजर देखा जिन्होंने अपनों को खोया उनके लिए कोरोना महामारी जो इससे बचकर घर वापस आए उनके लिए ये बीमारी अभी भी सड़कों पर खुला तुम क्यूं घूम […]
घर की दहलीज जब लाघीं तो ऐसा मंजर देखा जो भाई आपस में प्यार से रहते थे , परिवार में खुशियां लुटाते थे आज भाइयों के बीच बंटवारे हुऐ ,जो कभी एक थाली में साथ […]
घर की दहलीज जब लाघीं तो ऐसा मंजर देखा कहीं हो रही पार्टियां, कहीं हो रही शादियां कुछ लोग ठाठ से जीते ,कुछ बच्चे होते दिखे गाड़ियां भूखे प्यासे बच्चों को रोटी के लिए तरसते […]
घर की दहलीज जब लाघीं तो ऐसा मंजर देखा पानी जब बिकना शुरू हुआ तब हमे ये मजाक लगा बीस रूपये लीटर पानी की बोतल पानी का भी अकाल पड़ा ऑक्सीजन की जब कमी हुई […]
इतना करना आज तू, उम्मीदें मत छोड़, टूटन में भी टूट मत, ले आ नूतन मोड़, ले आ नूतन मोड़, स्वयं के जीवन मे तू, नहीं हताशा रखूं, ठान ले अब मन में तू, कहे […]
घर की दहलीज जब लाघीं तो ऐसा मंजर देखा यह आंखों देखी सच्चाई ,नहीं कोई रूपरेखा मैं पहले बताती हूं परिवहन का किस्सा क्योंकि मैं भी शामिल थी इसमें बन हिस्सा खुद को महामारी से […]
शाहीदो की शहादत कभी हम भुला सकते नहीं रोना जिन्हे आता नहीं और रुला सकते नहीं
स्थिति कैसी भी आये मगर तू रखना मन में हिम्मत। हिम्मत से ही जीत मिलेगी, हारेगी कठिनाई। कभी घड़ी कठिन आ जाये, समझ परीक्षा आई। भय मत करना आये चाहे कैसी भी कठिनाई। तुझे लगेगा […]
आपकी मुस्कान से, नयनों के दीप रौशन हुए। महक उठा ऑंखों का काजल, मुस्कुरा उठे लब मेरे। मुझसे जुदा होने की बातें, न करना कभी हमदम। जुदा होकर आपसे , जी कर क्या करेंगे हम। […]
श्रीराम हरो पीड़ा मनुज अब सुमिरन करता है। जहां तहाँ फैली महामारी, दुखी हुई प्रजा यह सारी, दूर करो रजनी अंधियारी, सुमिरन करता है, मनुज अब सुमिरन करता है। संकट से घिर गए हैं सारे […]
अपने लोक की ये कथा है, अपनी मां धरनी बसुन्धरा है निज सुत की करनी से दुःखी हो व्याकुल हो त्राहि-त्राहि करने लगी वो तब उसने तप का लिया सहारा त्रिलोक के स्वामी को जाके […]
अपराध नहीं है शेर का हिरण को खाना चिड़ियों का चुगना दाना पेड़ का कड़ी धूप में मुस्कुराना अपराध नहीं है शेर चिड़िया, पेड़ का पाठ शाला न जाना क्यूँकि पाठशाला में जाता है केवल […]
कोशिश जारी है एक दिन मंजिल हम भी पाएंगे जिस रास्ते पर चले हैं चलते रहेंगे कही और नहीं जाएंगे
जहर मत फैलाओ यहां, नेवले और बाज हैं गुस्ताखी माफ नहीं होती वहां, जहां लोकतन्त्र का राज है
भारत माता कह रही, एक जुट हो सब लाल शत्रु की ईंट जवाव दो, पत्थर से तत्काल भारत माता कह रही, संकट में इंसान मत भूलो इंसानियत, सब मारो शैतान भारत माता कह रही, ईश्वर […]
बेटी और बेटे में इक फर्क समझ में आया ससुराल में रहकर भी मैके का साथ निभाया। दूर रहकर भी मनसे ममत्व नहीं मिट पाया पास रहकर भी यह पुत्र समझ नहीं पाया। पुत्र को […]
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