कभी-कभी हमारी बात पर भी गौर कीजिए, मीठे के साथ- साथ में कड़वा भी पीजिये। अंगूर, सेब, आम सब आम बात है, पंचरत्न नीम का भी स्वाद लीजिये। सूखा पड़े न वक्ष पर अश्कों से […]

एक बूढ़ी अम्मा का घर आना हुआ, बातों का सिलसिला जब शुरू हुआ, अम्मा कहती जब से ई मोबाइल आया, वयस्कों संग बच्चा भी हमसे बात करने से कतराया, जैसे ही सुबह हुई बच्चों ने […]

आज कल परसों कभी तो पायेंगे कुछ नई आशा की किरणें दोस्तों। कब तलक भय का रहेगा राज यह कब तलक फैली रहेगी वेदना। कब तलक होगा रुदन चारों तरफ कब तलक साँसों के संकट […]

नींद पलकों में भरी स्वप्न आंखों में सजे आज आलस्य त्याग और कल मिलेंगे मजे। आज है काली निशा तारे तक खो गए हैं ठोस चट्टान भी देख यह रो गए हैं। ये हवा चल […]

अर्थ का महत्व है शब्द तो शब्द है, बिना अर्थ के शब्द निरर्थक है। अर्थ कुछ भी लगाया जा सकता है, निश्चित अर्थ या निर्मित अर्थ। चेहरे के भाव का अर्थ मूँछों में ताव का […]

मतदान से बड़ा कोई दान नहीं होता है एक बार दे दिया तो उसे पांच साल ढोता है यदि चाहते हो सचमुच निज देश का विकास दिन में जागेगा नेता तब देश सुख से सोता […]

आतंकवाद की जड़ को काटने की जरूरत है जेल मे डालो या फांसी दो देखना नहीं मुहूर्त है इसने इंसानियत को शर्मसार किया है इंसान के अंदर छिपे ये शैतान की सूरत है

वस्त्रों के बिना नारी शोभा नहीं पाती है धरती को किया नंगी और शरम नहीं आती है कैसे सपूत हो तुम जब मां तड़प रही पीने को शुद्ध पानी ऑक्सिजन नहीं पाती है प्रथ्वी दिवस […]

जब सांसे हो रही है कम ,आओ फिर से वृक्ष लगाएं हम, आओ नमन करे हम वसुधा, को जो मिटाती है हम सबकी क्षुधा को, जो बिना भेदभाव हम सबको पाले,वह भी चाहे पेड़ों की […]

कहा बकरी ने मेमने से मैं तुझे जहां भेजती हूँ हंसते हुए जाना ले जाने वाला भगवान् के सामने तेरी काटेगा गर्दन और तेरे जिसम का प्रसाद बांटेगा मगर तुम रोना मत क्यूँकि ये संसार […]

गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है जीवो को अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है यह […]

तोहमत लगाने की आदत कब की छूट चुकी है मैं गुलाम ही सही मुझे सबकी आजादी की पड़ी है मुक्त होती है रुह मरकर ही मुझे मुक्त होना है जीते जी ही इक बीज किसी […]

गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है सभी जीवो अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है बीमार […]

कूड़े के ढेर में खोजने में लगे थे नन्हें नन्हें हाथ, तन्मयता के साथ, जरूरत की चीजें, दे रहे थे सामाजिक जीवन को, सच्ची सीखें। पूछा तो बोले उनके घरों से निकला हुआ यह कूड़ा […]

गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है सभी जीवो अपने अंचल में बसाती है इसीलिए ये हमारी धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है यह […]

तेरे घर की रोशनी क्यूँ देखूँ जब मेरे घर में अंधेरा हो आखिरी रात न हो जाए कही जब तक हर ओर सबेरा हो उसकी ख़ुशी हमारे किस काम की जिसे अहंकार के भूत ने […]

आकाश की सुंदरता बढ़ाता कपासी बादल नहीं धरती का प्रियतम है वह काला बादल जो अपने प्रेम से करता है धरा का शृंगार.. कानों में रस घोलती सुरीली तान फूटती है काली कुरूप कोयल के […]

दसो दिशाओ मे बड़े बड़े मोटे मोटे अजगर पड़े हैं तैयार उत्सुक हैं निगल जाने को संसार वो हमारे पास भी आते हैं और कभी हम अपने काम से उनके पास चले जाते हैं इस […]

निभा तो सही सबसे इंसानियत का नाता है कड़ी धूप और बरसात से बचाने वाला छाता है परहित से बड़ा कोई धर्म नहीं होता तेरा ही करम तेरे भाग्य का निर्माता है

आज 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाते हैं, इसी मलेरिया के कारण हजारों लोग अपनी जान गंवाते हैं, इलाज से बेहतर होता स्वयं का बचाव करना, कोशिश करें फुल कपड़े पहनने की, घर में […]

बह रही पवन ,खिल रहे सुमन, कितना अदभुद यह नजारा है, छंट गया तिमिर, बीती यामिनी, रवि की किरणों ने पैर पसारा है। नभ में चिड़ियाँ,कलरव करतीं, गुंजन यह मधुरिम छाया है, आलस्य त्याग हे […]

आज भी नहाते हैं लोग सुबह उठकर फिर दर्पण के सम्मुख जाते हैं दर्पण मे देखकर चेहरा अपना मुह बनाते हैं, रोते हैं, चिल्लाते हैं फिर उस दर्पण को छोड़ कर या तोड़कर बड़े आकार […]

पर्यावरण बचाइए, हे मानव समुदाय सुख समृद्धि शांति, का है जो पर्याय नदिया पर्वत वन और, वन्य जीव समुदाय मानव दानव से हमे, कोई लेव बचाय धरा वायु जल सब हुए, दूषित सुनो पुकार प्रकृति […]

इन्सान की रफ्तार थम गई, और मोबाइल चलने लगा। मोबाइल के सहारे ही, कुछ वक्त कटने लगा। बात करनी हो किसी से, तो मोबाइल काम आया। आजकल इसके बिना, ना किसी ने चैन पाया। जा […]

राहुल बोला.. यह कोरोना कहाँ की बीमारी आई है, इसने कैसी आफत मचाई है। इन्सान, इन्सान से डरने लगा, अदृश्य जीवों से मरने लगा। बस घर में ही पड़े रहो, चलाते रहो मोबाइल। ना कहीं […]

घर की दहलीज जब लागी तो ऐसा मंजर देखा जिन्होंने अपनों को खोया उनके लिए कोरोना महामारी जो इससे बचकर घर वापस आए उनके लिए ये बीमारी अभी भी सड़कों पर खुला तुम क्यूं घूम […]

घर की दहलीज जब लाघीं तो ऐसा मंजर देखा जो भाई आपस में प्यार से रहते थे , परिवार में खुशियां लुटाते थे आज भाइयों के बीच बंटवारे हुऐ ,जो कभी एक थाली में साथ […]

घर की दहलीज जब लाघीं तो ऐसा मंजर देखा कहीं हो रही पार्टियां, कहीं हो रही शादियां कुछ लोग ठाठ से जीते ,कुछ बच्चे होते दिखे गाड़ियां भूखे प्यासे बच्चों को रोटी के लिए तरसते […]

इतना करना आज तू, उम्मीदें मत छोड़, टूटन में भी टूट मत, ले आ नूतन मोड़, ले आ नूतन मोड़, स्वयं के जीवन मे तू, नहीं हताशा रखूं, ठान ले अब मन में तू, कहे […]

घर की दहलीज जब लाघीं ‌तो ऐसा मंजर देखा‌ यह आंखों देखी सच्चाई ,नहीं कोई रूपरेखा मैं पहले बताती हूं परिवहन का किस्सा क्योंकि मैं भी शामिल थी इसमें बन हिस्सा खुद को महामारी से […]

स्थिति कैसी भी आये मगर तू रखना मन में हिम्मत। हिम्मत से ही जीत मिलेगी, हारेगी कठिनाई। कभी घड़ी कठिन आ जाये, समझ परीक्षा आई। भय मत करना आये चाहे कैसी भी कठिनाई। तुझे लगेगा […]

आपकी मुस्कान से, नयनों के दीप रौशन हुए। महक उठा ऑंखों का काजल, मुस्कुरा उठे लब मेरे। मुझसे जुदा होने की बातें, न करना कभी हमदम। जुदा होकर आपसे , जी कर क्या करेंगे हम। […]