पाँच साल में अब नहीं, हो हर साल चुनाव बहती गंगा प्रेम की, होते दूर तनाव पढ लिख कर नौकर बने, या होते बेकार एक बार नेता बनो, दो कई पीढ़ी तार कानो को प्यारे […]
पाँच साल में अब नहीं, हो हर साल चुनाव बहती गंगा प्रेम की, होते दूर तनाव पढ लिख कर नौकर बने, या होते बेकार एक बार नेता बनो, दो कई पीढ़ी तार कानो को प्यारे […]
घर बनाने गए दो हाथ घर बनाने के लिए हाथ जोड़ते रह गए आखिर जबाब मिल ही गया काम नहीं तब से बनी हुई इमारत और पलंग तोड़ते रह गए
एक थी नारी सबको थी प्यारी सब चाहते थे हो जाए हमारी ममता की मूर्ति और दुनिया पुजारी तभी एक दिन दवे पांव आया नरवाद ममता के मंदिर में मचाया हाहाकार स्वार्थ और अहं से […]
कई दिनो से सोच रहा था पंत की तरह प्रकृति चित्रण करूं पद्मकार की तरह ऋतु वर्णन करूँ परंतु एक दिन सुबह का अखबार पढ़कर मेरा विचार बदल गया अखबार का शीर्षक था मनुष्य ने […]
शक्कर पानी ज्यों घुले, ऐसे घुलमिल देश शर्बत पी लें शांति का, यह भारत संदेश भारत है एक बाग सा, कई प्रजाति के फूल औ माली भगवान् हैं, सींच रखे अनुकूल भाषाए होंगी अलग, होंगे […]
देश में मचा हाहाकार है, बीमारों की भरमार है। ऑक्सीजन और दवा की कमी हुई, चिकित्सक भी लाचार हैं। रैड लिस्ट में आया हिंदुस्तान, बचा लो बीमारों की जान। कोरोना से पीड़ित है देश, कोरोना […]
भीड़ के बीच में ख्याल खुद का रखो, हर सको दर्द दूजे का नुस्खा रखो। वेदना हो भले दिल के भीतर भरी मगर होंठ में आप मुस्कां रखो। यह न अहसास हो दूसरे को कभी […]
आज कयी बच्चों के एक पिता को दवा के अभाव में तङपते देखा है ना उसके भूख की चिन्ता न परवाह उसकी बीमारी की गज़ब दास्तां है, बुढ़ापे की लाचारी की। बिस्तर पर पङे, पर […]
कैसा मंजर यह आया है, चहुंओर अंधेरा छाया है! कितने कुलदीपक बुझ ही गए, कितने परिवार यू उजड़ गए, गर नहीं सचेते अब भी तो, उठ सकता सिर से साया है, चहुंओर अंधेरा छाया है! […]
कोई मेरी व्यथा क्यों समझता नहीं, मैं भी प्यासा हूं,मेरे लिए कोई पानी रखता नहीं। बढ़ रही उमस इतनी,और धूप कितनी तेज है, पानी के लिए मैं तरसता,इसका मुझको खेद है, सब जानते हैं बिन […]
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं जिला कांगड़ा से हूं। मैंने बी.ए.(BA) किया है मेरे परिवार […]
दूसरी ओर आरती और गीता दोनो को एक-दूसरे के साथ वक़्त बिताना बहुत ही ज्यादा अच्छा लगने लगा था। जिस दिन गीता आपने ऑफिस जाती थी उस दिन आरती का पूरे दिन बैचैन रहता और […]
ये धुंआ धुंआ सा जल रहा है क्या? कहीं कोई हो रहा बेखबर सा क्या? सब में प्रभु पहचान कितना भ्रम है लोगों को सब उसे देख जलते है उसे आगे बढ़ते हुए देख उसकी […]
ऊँची तेरी शान रे बन्दे सब में प्रभु पहचान रे बन्दे कोई बड़ा न कोई छोटा हर चेहरे पे झूठा मुखौटा कहने को ही मन आँखे अपनी कान भी पर दोषों का श्रोता कहने को […]
ऊँची तेरी शान रे बन्दे सब में प्रभु पहचान रे बन्दे कोई बड़ा न कोई छोटा हर चेहरे पे झूठा मुखौटा कहने को ही मन आँखे अपनी कान भी पर दोषों का श्रोता कहने को […]
बचपन से ही न जाने कितने दोस्त बनाये हंसी ख़ुशी उनके संग ज़िंदगी के पल ये विताये जगह बदल जाने पर वे कितने याद आते हैं मायुशियों के पल उनकी यादों से खाश होते हैं […]
यह जीवन जीना जग में साथी, नहीं है सहज सरल। ज़ालिम यह दुनियाँ है, पीना पड़ता है गरल। कोई-कोई ही इस दुनियाँ में, हॅंसकर साथ निभाता है। आगे को जाते देख अक्सर, यह जमाना जल […]
थोड़ा निहारने दो कुदरत की छवि मुझे तुम तुम भी निहार लो ना इस वक्त भूलो सब गम। सूरज निकल रहा है सब ओर लालिमा है, कलरव में उडगनों के प्यारी सी मधुरिमा है। चारों […]
कविता ऐसी कहो कलम, प्रफुल्लित हो उठे मन। दुखी ह्रदय में खुशियों के फूल खिलें, बिछुड़ों के हृदय मिलें। कभी प्रकृति का हो वर्णन, कविता ऐसी कहो कलम। देखें उषा की लाली को, सुबह की […]
अंधेरी राह जीवन की हमारी रोशन करते हैं, हमें जो ज्ञान देते हैं उन्हें हम शिक्षक कहते हैं। दिशा देते हैं जीवन को करा कर बोध अक्षर का नयन में ज्योति देते हैं उन्हें हम […]
स्वच्छता कि हम एक नई मुहिम चलाएंगे, गांधी जी के सपनों को साकार कर दिखाएंगे। धरती हरी भरी होगी,अब स्वच्छ अपनी मति होगी, गंदगी के ढेरों की,अब ना कोई अति होगी, पर्यावरण में चहुंओर सुगंध […]
हर बार चिपकाता है वह पोस्टर। बैनर टाँगता है हर चुनाव में। इस आशा में कि कभी तो बैठूँगा अपने विकास की नाव में। कुछ खिला पिला दिया जाता है तात्कालिक संतुष्टि को, ठेके-पल्ले का […]
हे धारित्री, पञ्च महाभूतों में से एक तुम, तुमसे ही उत्पन्न होकर भी मानव अछूता रहा तुम्हारी सहनशीलता के गुण से..!! काश! तुम्हारे धैर्य का अंशमात्र भी वह आत्मसात कर पाता अपने भीतर तो आज […]
हर दिन हम अच्छे होते जायेंगे बहुत लगाए बाड़ काटों के अब फूल से कोमल होते जायेंगे गलत स्पर्धा में हमें नहीं पड़ना मुरझाये चेहरे अब नहीं गढ़ना हर चेहरे को सच्ची हंसी से सजायेंगे […]
जिसने हमें सम्हाला कितने प्यार से पाला आज उसे सम्हालने की पड़ी है सच कैसी मुश्किल की घडी है माँ जो हमपे गर्व थी सदा ही करती संकट में आज है हमारे कारण वो धरती […]
ऑक्सीजन की कमी हुई है देश में, मार रही है बीमारी, कोरोना के भेष में। प्रदूषित होती जा रही है धरा, वृक्ष लगाकर आओ बनाऍं इसको हरा। ऑक्सीजन के सिलेंडर लेते हो, तुम कुछ दाम […]
आओ कथा सुनाएं तुम्हें पारिस्थितिकी पारितंत्र की, खतरे में आज है स्थिति अपने मानव तंत्र की। दिन-रात खनन हो रहा है चहुंओर हरियाली का, आधुनिक मशीनें बन गई कारण जीवन की खुशहाली का, है आवश्यकता […]
जब बदलियाॅं भरी जल से, वह बारिश बन बरसने लगी। जब पुष्प में आया सुवास, पवन में सुगन्धि बिखरने लगी। जब दीपक को जलने का बल मिला, वह प्रकाशित हो उजाला देने लगा। बिन कोई […]
मुस्कुरा उठे लब मेरे, देख कर नभ में तारे। मुस्कुरा उठे लब मेरे, देख उषा की लालिमा। भोर की ठॅंडी बहती पवन, प्रफुल्लित कर गई है मन। ये परिन्दों का चहचहाना, कह रहा कविता कोई। […]
सौंप रही है देखो पृथ्वी अपना संरक्षण किन के हाथों में जिनको आता नहीं सहेजना प्राकृतिक संसाधनों को जो ना कर सकते हैं अपनी सुरक्षा वह पृथ्वी की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे ! यही सोचकर […]
तू ममतामयी तू जगजननी रहे आँचल तेरा हरा-भरा l तू पालक है प्राणी मात्र की, हे जीवनदायनी वसुंधरा l यह रज जो तेरे दामन की, लगती है शीतल चंदन सी, तू उपासना की पाक ज्योति, […]
पृथ्वी कितनी सुन्दर है हमें यह सब कुछ देती है पुरानी पीढ़ी के अनुभवी हाथ पृथ्वी की रक्षा सुरक्षा के लिए नई पीढ़ी के नन्हें हाथों में पृथ्वी को इस आशा के साथ सौंप रहे […]
पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) स्पेशल ——————————– इन दो हाथों के बीच में पृथ्वी निश्चित ही मुसकाती है पर यथार्थ में वसुंधरा यह सिसक-सिसक रह जाती है जा रही है पृथ्वी अब प्रदूषण के हाथों में […]
हैं वह मर्यादा का नाम जिन्हें सब कहते हैं श्रीराम, पुरुषोत्तम, आदर्श संस्थापक, न्यायप्रिय श्रीराम। जन्म हुआ दशरथ जी के घर अयोध्या जैसा धाम, अपमानित थी मात अहिल्या उन्हें दिया सम्मान। लांछन से पत्थर बन […]
अवध में बज रही आज बधाई, हरष रहा मन आज सभी का,हुई धन्य कौशल्या माई, अवध में बज रही आज बधाई। विजय पताका नभ में लहर रही, असत्य की राहें यहीं ठहर गई, दमन हुआ […]
आज है राम जन्म करो सब मिल जय- जय कार, फैली विश्व में महामारी को मिटाने के लिए,फिर ले लो प्रभु अवतार। त्राहि त्राहि कर रहा है जग यह, चहुंओर मची चीत्कार, आकर संभालो प्रभु […]
मर्यादा की पराकाष्ठा सद्गुणों के धाम हे पुरुषोत्तम तुम्हें बारम्बार प्रणाम अवतार पूर्व मनुष्यता थी विकल ज्ञानी ध्यानी सारे संत थे विफल अत्याचार मुक्ति की न थी युक्ति विलुप्ति की ओर अग्रसर थी भक्ति अवतरण […]
राम जी के जन्म दिवस की,, आज सबको है बधाई। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को, अयोध्या में खुशी थी आई। प्रथम बार पिता बने राजा दशरथ, प्रथम बार माता बनीं कौशल्या माई। […]
पूरब हो या हो पश्चिम, उत्तर हो या हो दक्षिण। घर हमारा हमें देता हर्ष है, घर के बाहर तो संघर्ष ही संघर्ष है। हम जीवन के सुख-दुख, घर में ही बाॅंटते हैं। बाहर मिलते […]
आत्मसम्मान जीवित रखो वक्त काफी कठिन क्यों न हो, बस रहो कर्मपथ पर अडिग वक्त काफी कठिन क्यों न हो। मन में घबराहटों के लिए कोई स्थान ही मत रखो, खोज कर खूब सारी उमंगें […]
आज यह धरती माता,कर रही हम सब से यह पुकार है। मुझसे जन्मा अस्तित्व तेरा,और मुझसे ही यह संसार है।। मत करो क्षरण प्राकृतिक संसाधनों का, रोपो सब मिलकर वृक्ष कई रोशन होगा सबका कुनबा, […]
भोजपुरी देवी पचरा गीत – काली माई हो | काली माई हो भगाई देतु कोरोनवा | भस्म करा खोली आपन तीसरा नयनवा | काली माई हो भगाई देतु कोरोनवा | जब से ये आइल मुहाल […]
I’m bold, my friends are shy… I’m wanderer, my friends love being in their hideouts… I’m a huge foodie, my friends drool over healthier foods… I’m adventurous, my friends do not like taking up risks… […]
धरा माँ है हमारी पालती है पोसती है, इसी में जिंदगी सारे सुखों को भोगती है। अन्न रस पहली जरूरत है हमारी जिंदगी की, वायु-जल के बिन कहाँ है कल्पना इस जिन्दगी की। और सबसे […]
कैसे हो बेकारी दूर मेहनतकश को काम नहीं है, बैठा है मजबूर। कब तक ऐसा रोग रहेगा, सोच रहा मजदूर। रोजी-रोजी की चिंता है, घर से आया दूर। मन में चिंता है जीवन की, कठिनाई […]
सुनने को कर्ण यह तरस गये कहां अब कोई अच्छी ख़बर है वेवसी का आलम है यह कैसा पल यह कैसा,हर एक की सूनी नज़र है।। सुनने को अंन्तर्मन यह तरस रहा है कहीं से […]
सुन लेंगे भगवान मगर तू सच का रखना ध्यान, कि सच का मत करना अपमान। झूठी झूठी माया जोड़ी, हुआ बहुत धनवान। अंत समय में सब मिट्टी है, यह होता है भान। निंदा, द्वेष बुराई […]
अन्न एवम् जल प्रदान करने वाली, वसुन्धरा को नमन्। पृथ्वी के संरक्षण हेतु, आओ उठाऍं कुछ कदम। पृथ्वी पर पवन हो रही अशुद्ध, आओ वृक्ष लगाऍं हम। इस धरा को और भी, हरा बनाऍं हम। […]
जीवन संघर्षों का नाम बिना किए कुछ भी न मिला है, करना होगा काम। कर्मों का फल देता ही है, देने वाला राम। जिसको पाने में कठिनाई, उसका ऊँचा दाम। पूरब हो पश्चिम हो या […]
अपनी कश्ती खुद ही चला कर दिखदो मंजिल को पास ले आकर नहीं कुछ भी ऐसा जो तेरे बस में नहीं हैं कर सकते हो, बढ़ो बस ये अहसास जगाकर। आसान से गर मिल ही […]
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