ओस की बूंद बनकर सूरज के आने पर छुप न जाया करो वरन हिम्मत रखो। रात ही है नहीं तुम्हारे लिए दिवस भी है तुम्हारे लिए मुकाबला कर लो मुकाबला करो हरेक स्थिति से सच्चा […]

लब कहे या न कहे     दिल यही कहता है मेरे दिल मे बस तू ही रहता है दर्द बढे या दर्द घटे      बस दिल यही कहता है इस दर्द में भी तू ही […]

आसाँ   नहीं   समझना  हर  बात आदमी के, कि  हँसने  पे  हो  जाते वारदात आदमी  के। सीने   में  जल रहे है  अगन  दफ़न  दफ़न से , बुझे   हैं  ना   कफ़न  से अलात आदमी   के? ईमां   नहीं   […]

शब्द चाहे सरल हों, या फिर हों जटिल हृदय को करें प्रसन्न तो अर्थ है, वरना सब व्यर्थ है। यदि आपके शब्द, किसी के ह्रदय को करें स्पर्श तो समझो वाणी और कलम में, सरस्वती […]

मुस्कुराहट प्रकृति की सुबह सुबह दिखती है उठो जागो जाग भी जाओ कहती है। साथ में चिड़ियों की चहचहाहट भी संगीत की लय में रहती है।

ईश्वर केवल पूजा से प्रसन्न नहीं होते हैं, वे प्राणिमात्र की सेवा से प्रसन्न हुआ करते हैं। किसी तड़पते राही को गर बिना मदद के छोड़ दिया फिर चाहे कितनी पूजा हो मुँह मोड़ लिया […]

रास्ता हूँ मैं युगों युगों से लोग चलते आये हैं मुझ पर न जाने कितने पदचापों की ध्वनि को मैंने सुना है। न जाने कितनों ने चल कर मुझ पर सपनों को बुना है, लोग […]

निर्भय आगे बढ़ता चल, कोई रोके कोई टोके, किसी की बात से ना जल। किसी को देख कर बढ़ते, अक्सर लोग करते छल। कंटक बिछाने राहों में, कुछ हाथ आएंगे तो कंटक हटाने राहों से, […]

अब सूर्य उत्तरायण में चले गए हैं, अहो! ठंडक अब तो कम हो जा, ठिठुरते हुए बडी मुश्किल से खुद की, जिन्दगी को अब तक रख पाया हूँ बचा। गलतियां जितनी भी हैं पूर्वजन्म की, […]

खिलौना मत समझना किसी धनहीन को तुम मन चले तोड़ दिया मन चले जोड़ लिया। भूख पर वार करके दबाना मत उसे तुम, दिखाकर लोभ-लिप्सा दबाना मत उसे तुम। सरल, कोमल व भोला मुफलिसी का […]

बुलंद वाणी रखो बुलंद सोच रखो न रह किस्मत भरोसे कर्म की ओर बढो। ध्येय ऊँचा ही रखो औऱ दिल साफ रखो त्याग सब हीनता को तेज नजरों में रखो। भले तूफान आयें या पड़े […]

मुक्तक-खाएंगे —————— अब बनाने वाले ही खाएंगे , कोई खाने वाला रहा नही, लगता है, सब दावत मे गए, या घर सब, रुठ के छोड़ गए पर गए कहां यह पता नही, पता होता तो […]

जो मन में है तुम उसे कहो ना न बोलो चुपड़ी सी बात ऐसे दिखावा करके दिलों का नाता बताओ कैसे निभा सकोगे। भरा है नफरत का भाव भीतर अधर हैं बाहर खिले हुए से […]

कविता- कब्र पर आकर ———————- दौड़ रही हूं, इधर उधर, ढूंढ रही हूं, डगर डगर, पूछ रही हूं, नगर नगर, कोई मुझको, पता बता दो, मेरे साजन का, घर बता दो| कहाँ बसे हो मुझे […]

यह दर्द मेरा लिखा है जिसपर नाम तेरा ढूँढे जो कोई हमदर्द बेदर्द में शामिल नाम तेरा। सही अगर तुम हो नाम, गलत होगा किसका धर्म के पथ पर चलने वाले कर्महीन सही होगा नाम […]

धैर्य का दामन टूट रहा प्रभु फिर देखो न किस्मत रूठ रहा। अपना यहाँ है कौन यहाँ तू चुप क्यों बैठे देख रहा। सब्र नहीं अब मुझमें है सोच के मन में हैरत है कैसे […]

कार्य हमारे मन के अनुरूप हो थोङी सी छाया ना सिर्फ धूप हो। हम सही मायने में कार्य उसे ही कहेंगे जिससे कोई सकारात्मक परिणाम का आभास मिलें । हमारे कार्य का एक मकसद हो […]

जब बच्चों में हैं भगवान, फिर क्यों मम्मी पापा खींचे कान क्योंकि कभी-कभी भगवान, शैतानी करने लगते हैं, बन करके नादान शोर मचाते हैं दिनभर, चुप हो जाएं तो है इनका एहसान अपनी मन मर्जी […]

देश में कोरोना से निपटने के टीके आ गए, बेफिक्र हो इनको लगवाया जाए। यह है इतिहास का सबसे वृहद अभियान, इसने भारत के सामर्थ्य को दिलवाया सम्मान। दिलवाया सम्मान, सभी देश तारीफ़ कर रहे, […]

नजरों में मुहब्बत और वाणी में मधुरिमा चाहिए इंसान ने इंसानियत को साथ रखना चाहिए। साँस ईश्वर की अमानत है समझना चाहिए, साँस रहने तक उसे नेकी निभानी चाहिए। दूसरे की साँस में अवरोध बिल्कुल […]

अगर निराशा है कहीं, दूर करो तत्काल, मन में अपने जोश को, सदा रखो संभाल। सदा रखो संभाल, जोश में जोश न खोना, आप हमेशा आग नहीं शीतलता बोना। कहे लेखनी नहीं, निराशा में रहना […]

निन्दारत रहना नहीं, निंदा जहर समान, निन्दारत इंसान का, कौन करे सम्मान। कौन करे सम्मान, सभी दूरी रखते हैं, निन्दारत को देख, सब मन में हंसते हैं। कहे लेखनी छोड़, मनुज निंदा की बातें, अपने […]

बेकारी पर आप कुछ, नया करो सरकार, युवाजनों को आज है, राहत की दरकार। राहत की दरकार, उन्हें, वे चिंता में हैं, पायेंगे या नहीं नौकरी शंका में हैं। कहे ‘लेखनी’ दूर, करो उनकी आशंका, […]

ठिठोली करो तुम खूब लेकिन दिल दुखाओ मत किसी का, जोर से गाओ मगर मत चैन लूटो तुम किसी का। किसी बीमार की जब रात को आँखें लगी हों मुश्किलों से जोर से डीजे बजाकर […]

सदा को कौन रहता है यहां इस जमीं में समय करके पूरा चले जाते सब हैं। तेरा व मेरा सभी कुछ यहीं पर रह जाता है कुछ नहीं साथ जाता। न आने का मालूम न […]

15 जनवरी की पावन तिथि, सेना दिवस है आज चलो शपथ ले, कल पर छोङे न कोई काज। आत्मनिर्भर बनें, परनिर्भरता का करें त्याग नयी नीति से करें आने वाले पलों का आकाज । अपने […]

खुशियां सदा अमावस की रात की आतिशबाजी की तरह आईं मेरे जीवन में… जो बस खत्म हो जाती है क्षण भर की जगमगाहट और उल्लास देकर… और बाद में बचता है तो एक लंबा सन्नाटा […]

मेरे घर के सामने वाले पड़ोसी ने, अपने घर की इमारत ऊंची उठाई। घर उनका है मैं कुछ कह भी ना पाई, पर मेरे आंगन की धूप हवा और चांदनी ने मुझसे शिकायत लगाई, फ़िर […]

15 जनवरी को हम थल सेना दिवस मनाएं, 73वें थल सेना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं तिरंगे की शान हैं सैनिक, भारत का मान हैं सैनिक, पूरी रात जो जागे सीमा पर, उसी का नाम है […]

हमर देशक सिपाही हमर शान छै। देशक रक्षा में जिनकर प्राण छै।। नञ भोजन केॅ कोनो फिकीर छै। नञ छाजन केॅ कोनो फिकीर छै।। जाड़ गरमी तऽ एकहि समान छै। हमर देशक सिपाही हमर शान […]

फेंक रहे थे जब तुम खाना, मैं भोजन की आस में थी। रोटी संग सब्जी जी भी है क्या, मैं वहीं पास में थी। तुमने शायद देखा ना होगा, मैं काले मैले लिबास में थी। […]

समस्याएं बहुत हैं आपको मुँह खोलना होगा जरा बिंदास होकर आज तो कुछ बोलना होगा। गरीबी मिटाने के लगे जितने भी नारे हैं, उनको हकीकत में हमें अब तोलना होगा। बेरोजगारी से युवा हैं दर्द […]

मकरसंक्रांति अलग अंदाज लिए, हर प्रान्त में, अपनी छटा बिखेर रहा । सूर्य चले उत्तरायन हो छटा नव आशा की किरण बिखेर रहा । सकारात्मकता का संदेश लिए अपनी संस्कृति, अपनी परिवेश की झलक बिखर […]

आज कुछ गा लूँ मैं तुम्हें सुना लूँ मैं, गीत ही गीत में भुला कर के दिल में अपने बसा लूँ मैं। मिटा दूँ सब की सब गलतफहमी, सच्चा गायक हूँ यह बता दूँ मैं, […]

धीमी-धीमी धूप संग में, मीठी-मीठी खुशियां लाई। तिल, गज्जक की खुशबू लेकर, सर्दी में संक्रान्ति आई। मकर संक्रान्ति मनाना है, गंगा जी में नहाना है गंगा जी ना जा पाओ तो, घर में जरूर नहाना […]

चलो पतंग उड़ाएं लूट लें, काट लें पतंग उनकी सभी रंगीनियां अपनी बनायें चलो पतंग उड़ाएं चलो पतंग उड़ाएं। उनके चेहरे की खुशियों को चुराकर चलो आनंद मनायें चलो पतंग उड़ाएं। कटी पतंग दूसरे की […]

कविता -मकर संक्रांति चलो मनाए | मकर संक्रांति आई पतंग चलो उड़ाए | उड़े ऊंचाई जैसे सोच पेंच चलो लड़ाये | डोर पतंग की थाम खूब तुम रखना | कट न जाये उम्मीदे डोर चलो […]

आपको नींद आ गई आधी और हम गीत लिख रहे हैं अब क्या करें यह कलम भी चंचल है जागती तब है, सो गए जब सब। स्वप्न में भी मनुष्य की पीड़ा भाव को शिल्प […]

राग कहाँ रागिनी कहाँ मेरी इस सड़क पर लिखी कहानी है, दो घड़ी आप भी खड़े होकर देख लो क्या है मेरी कहानी है। लोहड़ी क्या, कई त्यौहार आये आपने खीर पुए खूब खाये मगर […]

ठोस के साथ हमें कुछ उदार रहना है अपनी आदत में हमें अब सुधार करना है। स्वहित के साथ हमें दूसरों के हित में भी थोड़ा रुझान रखना है मदद की तरफ बढ़ना है। जिन्हें […]

साँस है जब तलक तब तलक संघर्ष से जीतिये जहान पूरा जीत तक न बैठिए छोड़िए मत कुछ अधूरा। निकलिए राह में उठाइये कदम अपने, आज नहीं तो कल आपको मिलेगी मंजिल। थकिये मत, घबराइए […]

खुशियाँ अपार है प्यार का त्योहार है। वेहरे बीच आग जली लोहड़ी की बहार है।। गैया का गोबर पाथ-पाथ पाथी लिया बनाय। सुक्खा लक्कड़ काट-काट लोहड़ी लिया सजाय ।। घच्चक मूंगफली रेवड़ी संग खिल्लां का […]

क्या हुआ.. आज मौसम को, बादल ही बादल हैं गगन में, सूरज भी नहीं दिखा, सर्दी बढ़ती ही जा रही जाने क्या है इसके मन में, धूप का ना नामो-निशां कहां छिपी हैं सूर्य-रश्मियां, थोड़ी […]

थक चुका हू माँ मुझे सोने दे इस झूठे दुनिया से पक चुका हू मुझे अपने साथ ले ले स्वार्थ से चलते लोग मुखौटे पहने लोग सरल पेड़ कटते जाते है सरलता और मूर्खता मे […]

जिंदगी क्या है बचपन के उस रफ काॅपी पे लिखी किसी चीथडी सुलेख सी है जिसे हम फेयर काॅपी पे उतारने का ख्वाव सजाऐ दिन रात लगे रहतें है । अनजाने शहर में अनजाने लोगों […]

बेरोज़गारी बढ़ती ही जा रही है, सुरसा के मुख सम खुलती ही जा रही है। चयन हुआ पर नियुक्ति नहीं है, युवाओं की प्रतीक्षा बढ़ती ही जा रही है। दो-दो वर्ष से प्रतीक्षा कर रहे […]

ढोल बजाकर आग जला कर, आओ लोहड़ी मनाएं तिल गुड़ की बर्फी बना कर, सब मिलजुल कर खाएं सरसों का साग और मक्का की रोटी मक्खन संग खाओ, स्वादिष्ट बड़ी होती रंग बिरंगी पतंग उड़ाएं […]

वो पुरानी गिटार पुरानी बाइक वो गली वो नुक्कर वो चौबारे वो बेहतर ज़िन्दगी बनाने के सपने कोई छीन नहीं सकता वोह जज़्बा आगे आने का वो खुली आँखों के सपने वो रात के तारे […]