खुशियाँ अपार है प्यार का त्योहार है। वेहरे बीच आग जली लोहड़ी की बहार है।। गैया का गोबर पाथ-पाथ पाथी लिया बनाय। सुक्खा लक्कड़ काट-काट लोहड़ी लिया सजाय ।। घच्चक मूंगफली रेवड़ी संग खिल्लां का […]
खुशियाँ अपार है प्यार का त्योहार है। वेहरे बीच आग जली लोहड़ी की बहार है।। गैया का गोबर पाथ-पाथ पाथी लिया बनाय। सुक्खा लक्कड़ काट-काट लोहड़ी लिया सजाय ।। घच्चक मूंगफली रेवड़ी संग खिल्लां का […]
क्या हुआ.. आज मौसम को, बादल ही बादल हैं गगन में, सूरज भी नहीं दिखा, सर्दी बढ़ती ही जा रही जाने क्या है इसके मन में, धूप का ना नामो-निशां कहां छिपी हैं सूर्य-रश्मियां, थोड़ी […]
थक चुका हू माँ मुझे सोने दे इस झूठे दुनिया से पक चुका हू मुझे अपने साथ ले ले स्वार्थ से चलते लोग मुखौटे पहने लोग सरल पेड़ कटते जाते है सरलता और मूर्खता मे […]
जिंदगी क्या है बचपन के उस रफ काॅपी पे लिखी किसी चीथडी सुलेख सी है जिसे हम फेयर काॅपी पे उतारने का ख्वाव सजाऐ दिन रात लगे रहतें है । अनजाने शहर में अनजाने लोगों […]
बेरोज़गारी बढ़ती ही जा रही है, सुरसा के मुख सम खुलती ही जा रही है। चयन हुआ पर नियुक्ति नहीं है, युवाओं की प्रतीक्षा बढ़ती ही जा रही है। दो-दो वर्ष से प्रतीक्षा कर रहे […]
ढोल बजाकर आग जला कर, आओ लोहड़ी मनाएं तिल गुड़ की बर्फी बना कर, सब मिलजुल कर खाएं सरसों का साग और मक्का की रोटी मक्खन संग खाओ, स्वादिष्ट बड़ी होती रंग बिरंगी पतंग उड़ाएं […]
वो पुरानी गिटार पुरानी बाइक वो गली वो नुक्कर वो चौबारे वो बेहतर ज़िन्दगी बनाने के सपने कोई छीन नहीं सकता वोह जज़्बा आगे आने का वो खुली आँखों के सपने वो रात के तारे […]
आजो सारे, आजो सारे ,रल मिल लोहड़ी पाइऐ, दुल्ला भट्टी दा गीत गा,विहड़े विच अलाव जलाइऐ, मूँगफली,गच्चक,रेवड़ी खाइऐ ते सबनू खवाइऐ, मक्की दी रोटी, सरसों दा साग,खीर बनाइऐ, पतंग उड़ाइऐ,नवी फसल दी खुशी मनाइऐ, शगुनां […]
I still go to the place where we met Blocked in facebook whatsup but Still hopes for the best You have moved on But still i wait for you Those beaches are having chaos of […]
जीवन का दर्द लिखो कहती है कलम आज बोलो कहती है उपेक्षित-शोषित-उत्पीड़ित की आवाज बनो कहती है। प्यार-मुहब्बत पर लिखता हूँ रोमांचित होने लगता हूँ, जैसे ही रमने लगता हूँ कलम मुझे कहने लगती है, […]
वक्त मत हाथ से जाने देना वक्त को खूब भुना लेना तुम कभी आलस अगर आना चाहे उसको तुम पास मत आने देना। वक्त जब हाथ से निकल लेगा तब नहीं लौट कर वो आयेगा […]
कविता- क्या खोज रहे हो ——————————– क्या खोज रहे हो, कहाँ भटक रहे हो, अंदर सुख हैं- बाहर सुख नहीं हैं खुद को मजबूत बना हरदम लड़ अपने से, जिस दिन विजय तू पायेगा, ज्ञानेंद्रिय […]
कभी कोई कांटे बिछा दे राहों में, कांटे चुन-चुन के दूर कर दो। इस तरह बढ़ाओ आत्म-बल, कि अरि के स्वप्न चूर कर दो। अन्धकार कर दे कोई राहों में गर, तो जला मशाल तिमिर […]
मुक्त रुला देने वाली शायरी शब्द देख सब भुला देने वाली या तो हंसा देने वाली शायरी रास्ता भटकाने वाली या तो भटके को रास्ते पर लाने वाली शायरी और तो और फीकी जिंदगी में […]
ये सर्दी का मौसम, ये कोहरे का नज़ारा आज है ये आग्रह हमारा कोहरे में डूबी, यह सुन्दर-सुन्दर सुबह जी भर के जी लें, आओ ना एक कप चाय, क्यूं ना साथ-साथ पी लें.. _____✍️गीता
अच्छे लोगों का, अपनी ज़िन्दगी में आना, सौभाग्य कहलाए उन्हें संभाल कर रखना, कहीं जाने ना देना हमारी योग्यता कहलाए। अनेक कलाएं हैं इस जहां में, सबसे सुंदर कला क्या है किसी के हृदय को […]
ठंढी का मौसम आया है। संग मेरा मान बढ़ाया है ।। पुलकित होकर कहता चाय। बार – बार सब मांगते चाय।। कभी खुशी कम हो जाती है। जब बीच पकौड़ी आ जाती है।। झुंझला के […]
ख़यालातों के बदलने से भी, नया दिन निकलता है। सुनो, सिर्फ सूरज चमकने से, ही सवेरा नहीं होता। हां ठंड में थोड़ी धूप भी जरूरी है, बादलों के आने से अंधेरा नहीं होता।। ____✍️गीता
बड़े आदमी कब कहलाओगे तुम जमीं पर नजर जब रख पाओगे तुम। इंसानियत को बचाकर के मन में रख पाओगे जब बड़े आदमी तब कहलाओगे तुम। जब तक न दोगे दूजे को इज्जत जब तक […]
दगा करना सरल है वफ़ा करना कठिन है गिराना सरल है किसी को उठाना कठिन है। दिल जोड़ लेना और अपना बोल लेना सरल है, निभाना कठिन है। कुछ भी कह देना सरल है कर […]
पूँजी तेरे खेल निराले जिसकी जेब में भर जाती है उसका संसार बदल जाती है, धीरे-धीरे आकर तू मानव व्यवहार बदल जाती है। दम्भ, दर्प, मद, गर्व आदि संगी साथी ले आती है। तेरे आने […]
अमृत बेला है अतिपावन। उठो रे तू छोड़ विभावन।। हरि का सुमिरन कर लो रे। सैर करो तू सुबह -सबेरे।। शीतल मंद हवा सुखदाई। योग प्रणायाम करो रे भाई।। तन -मन को निर्मल कर लो। […]
अगर आपको है फिक्र, अपने आर्थिक और दैहिक उत्थान की, तो फ़िर बात सुनो एक काम की आप अपने भोर वाले मित्र बनाएं, जो आपके संग , नियमित रूप से सैर को जाएं प्रभु का […]
एक निर्जीव -सी मोटर गाड़ी । शानो शौकत की बनी सवारी।। ये भी मांगे तेल और पानी। घिस गए पुर्जे हुई पुरानी।। अपने जैसा वंदा अखीर। खीचे रिक्शा लगा शरीर ।। एक अकेला खींच रहा […]
बातें बताओ खुल कर क्यों इस तरह हो रूठे कहते थे प्यार दूँगा अब बन गए हो झूठे। बिन बात मुँह फुलाकर चुपचाप क्यों हो बैठे, क्या कह दिया है हमने जो इस तरह हो […]
अब मैं बड़ा हो गया हूं, पापा हो गए हैं बूढ़े निज परिवार में रमता जा रहा हूं, पापा को विस्मृत करता जा रहा हूं कुछ कम ही सुनता है उनको आजकल, कुछ कम ही […]
घमंड तेरा शत्रु है उसे कभी न पास रख तेरा करेगा अवनयन उसे कभी न पास रख। घमंड से कटेंगे तेरे मित्र और दोस्त सब, घमंड लील जायेगा ये आत्मीय भाव सब। तू शिखर को […]
कविता-विश्व पटल पर हिंदी चमके —————————————— विश्व पटल पर हिंदी चमके ऐसा राग सुनाता हूं, दुनिया भर के लोग सुनो क्यों हिंदी में कविता लिखता हूं, जब दुनिया में कोई भगवान नहीं हरि ने दुख […]
आखिर हिन्दी का विकास कैसे हो, एक विचारणीय विषय है। हिन्दी दिवस पर अपने मित्रों एवं सहकर्मियों को बधाई देकर एक औपचारिकता पूर्ण करने मात्र से क्या हिन्दी का विकास हो जाएगा। पूरे सप्ताह भर […]
साहित्य के वो योद्धा तलवार नहीं उठाते । लड़ते जरूर हैं पर लड़ाकू नहीं कहाते।।
तुम्हारी नादानी थी बोलो उसकी क्या गलती थी वो पेट में खेला करती थी, बाहर आकर दुनिया देखूंगी मन में सोचा करती थी। वो कलिका अपने जीने के सपने देखा करती थी, तुम से मम्मा […]
हिन्दी केवल भाषा ही नहीं, मेरे वतन की पहचान है हिन्दी का है हृदय में स्थान, हिन्दी ही मेरा सम्मान है हिन्दी की गूंज हो देश विदेश, ऐसा मेरा अरमान है हिन्दी मेरे भावों की […]
अपने वतन की मिट्टी को, क्या कभी तू भुला पाएगा जिस आंगन में खेला-कूदा, क्या वो याद ना आएगा जिस विद्यालय कॉलेज से ली शिक्षा तुमने युवक क्या उसके प्रति भी, नतमस्तक ना हो पाएगा […]
आ बैठ जा मैं गीत लिख दूँ आज तुझ पर है उपेक्षित तू सदा से ठण्ड की रातों में सोता है खुली ठंडी सड़क पर। ठेके का रिक्शा खींच दिन भर जो कमाता है उसे […]
मन !!जरा सी बात पर तू मत दुखित हो इस तरह जिन्दगी है हार भी है जीत भी, संघर्ष भी। गर कभी है अवनयन तो है यहां उत्कर्ष भी। डूबने का भय कभी है तो […]
जाड़ा का मौसम बड़ा सुहाना। भाँति -भाँति के बनते खाना।। गाजर का हलुआ सबको प्यारा। खाओ मूंगफली भगाओ जाड़ा।। गाजर शलग़म मूली का अचार। बड़े स्वाद लेकर खाए सब यार।। आंवले को खा पानी पीना। […]
भ्रष्टाचार खत्म करो ऊपर की कमाई पर रोक लगाओ सत्यता के भाव जगाओ रातों-रात करोड़पति बनने की प्रवृत्ति पर विराम लगाओ नियम कानून जो बने हैं उन्हें काम पर लगाओ, गरीबों की योजनाओं को उन […]
यह संसार है यहां के कुछ नियम होते हैं यहाँ दिखावे की बजाय लोग दिल से अपने बनाने होते हैं। यहां इज्जत पाने से पहले दूसरे को सम्मान देना पड़ता है। शिखर में चढ़ने के […]
ऐ ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया ज़िन्दगी तूने जो दिया, उसके लिए तेरा शुक्रिया कल कहने का वक्त मिले ना मिले, जो भी तूने मेरे लिए किया उसके लिए तेरा शुक्रिया बचपन में ऐ ज़िन्दगी तूने ख़ूब […]
विचार कर सको तो जरूर कर लेना, असुर हो या मनुज हिसाब रख लेना। अपने कृत्यों की सजाकर डायरी जा रहे वक्त के पन्नों में आप लिख लेना। जिन माता-पिता ने जन्म दिया, पालन किया […]
राशन भाषण का आश्वासन देकर कर बेगार खा गई। रोजी रोटी लक्कड़ झक्कड़ खप्पड़ सब सरकार खा गई। देश हमारा है खतरे में, कह जंजीर लगाती है। बचे हुए थे अब तक […]
हमारी मुफलिसी को क्या समझो तुम तुम्हारे महल, हमारी झोपड़ी है, हमारी राह में संघर्ष खड़ा तुम्हारी भाग वाली खोपड़ी है। हमें नसीब बड़ी मुश्किल से रोटियां पेट भर को खाने को, तुम्हारे पास फेंकने […]
आ मेरे मीत!! कर बहाने मत दे मुझे अश्रु से नहाने मत, बह रहे भाव खूब आंखों से अब इन्हें रोक ले, दे आने मत। जब से फेरी है तूने पीठ मुझे तब से मन […]
मुक्तक-कवि का धर्म ————————- कवि का कोई धर्म नहीं हो सकता है, मंदिर मस्जिद चर्चो में भगवान नहीं हो सकता है, दुख को दुख कहता है जो सुख को सुख कहता है जो खुद के […]
अरी वो धूप तुम क्यों डर गई ठंडक से चीर कर आ जाओ हमें तपा जाओ, जीने की राह दिखा जाओ कुहरे को दूर कर आ जाओ।
सुबह सुबह की गरम चाय हो तुम आलस्य छोड़ने में सहाय हो तुम, खुद ही बुनता रहा उधेड़ रहा, उलझी बातों में मेरी राय हो तुम। जिन्दगी को जरूरी मुहब्बत हो तुम दिल में राज […]
गांव वीरान हो गए छोड़कर वे मनोरम वादियां शहर की ओर चल दिये, फिर नहीं लौट पाये वापस शहर में भीड़ थी वे भीड़ में समा गये। उधर वे खो गए इधर गांव के आंगन […]
कुछ जहाँ थे वहीं हैं कुछ पहुँचे आकाश कुछ की हालत दीन है कुछ हैं मालामाल। बेकारी ने छीन लिया युवा दिलों का जोश, मेहनत की मजदूर ने फिर भी खाली कोष। फिर भी खाली […]
जिंदगी इक तमाशा है तमाशा वेखण आया ऐ बंदिया तु वेख जी भरके ज़माने दे रंगां नु पर किसे दा तमाशा बनावी ना ते आपनां भी विखावी ना।
पूस की ठंड में, वह सिकुड़ता सिमटता सा जा रहा था कोहरा भी उसकी ओर आ रहा था सूर्य भी धरा से विदा लेकर, अपने भवन जा रहा था दिन ढलने लगा था, तिमिर छलने […]
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