मानवता व्याधियों से जूझती रही, पूरे साल, ओ दो हजार बीस !! अब विदा ले। दो हजार इक्कीस !! तू खुशियों की झोली भर के ला शुभ बन के आ, मानवता को जिससे मिले पीड़ा […]

नववर्ष की पूर्व संध्या ******************* नववर्ष की पूर्व संध्या पर मैं अर्पण करती हूँ अश्रु के बीज बोती हूँ लम्बी मुस्कानें चुनती हूँ मैं सफल नव जीवन पर ले जाने वाली राह अब नहीं करूंगी […]

खूब मनाओ तुम खुशी, इतना रख लो ध्यान, चमड़ी जिनकी खा रहे, उनमें भी है जान। उनमें भी है जान, मगर तुम खून पी रहे, पीकर खून निरीह का, खुशियां क्यों ढूंढ रहे। कहे ‘कलम’ […]

जाने क्यूं खुशियां मना रहे हैं लोग !!! मेरी जिंदगी का एक और साल कम पड़ गया एक और साल जुड़ गया जीवन के अध्याय में, इस खुदगर्ज दुनिया ने इस वर्ष में अपने-अपने रंग […]

कूड़ाघर: रसोईंघर ******************* मैं अक्सर सोंचा करती थी आजकल कोई गरीब नहीं… सब अपने आप में सक्षम हैं इस दुनिया में अब कोई असहाय नहीं… परंतु एक दृष्य देखकर भर आईं मेरी आँखें मुझको विश्वास […]

गरीब की पुकार’ सुन लो, लाख दुआएं मिलेगी किसी मजबूर को सहारा दो तुम्हारी शक्ति और बढ़ेगी… घटेगा नहीं धन बल्कि और भी बढ़ेगा किसी गरीब की झोली में जो तुम्हारी एक चवन्नी भी गिरेगी… […]

बेटी और पिता सैर पर जा रहे थे मधुर संगीत था कोई गीत गा रहे थे.. होंठों पर दोनों के तसल्ली भरी मुस्कान थी, बेटी अपने पापा की जान थी.. सैर करते समय एक रास्ते […]

मुबारक आपको नव बरस में खूब खुशियों से भरी हों वादियां, जो जुटे मेहनत में हैं हो जाएं उनकी चांदियाँ। जल्दी से हों जिनकी रुकी हैं शादियां। झगड़ें नहीं जिनकी हुई हैं शादियां खूब खुशियों […]

नए वर्ष के स्वागत का जोश पुराने के जाने की खुशी ऐसे मनाई जा रही है बोतलों बोतलें गटकाई जा रही हैं। बहाना अच्छा है पीने का युवाओं में क्या किशोरों में भी पीने का […]

वर्ष की आखिरी रात है थर्टी फर्स्ट मना रहे हैं लोग, मुर्गियां, बकरियां काट कर खुशियां मना रहे हैं लोग। किसी का नया वर्ष आ रहा है किसी प्राणी का सब कुछ जा रहा है, […]

मन में हिम्मत रख सदा, हिम्मत है हथियार, हिम्मत वाला आदमी, हो जाता है पार। हो जाता है पार, सफलता पा जाता है, साहस से वह कठिन, विजय पाता जाता है। कहे ‘कलम’ हमेशा, हौसला […]

आ रहा है दौ हजार इक्कीस का नव वर्ष करते हैं हम दिल से अभिनंदन बार-बार इक्कीस अंक होता है प्यारा सा शगुन आना तुम हर जीवन में शुभ शगुन रूप धार पग पैंजनीया बांध […]

कविता-स्वागत नए साल का | बीत गया वर्ष दो हजार बीस स्वागत नए साल का | गुजरा वो सब पर रहा भारी पुछो न अब हाल का | जारी रहा कहर कोरोना फैलाता रहा खूब […]

एक अंधी लड़की देख के मन में वेदना का ज्वालामुखी फूटा सोई थी चिर निद्रा में करुणा से अवधान टूटा… मन में आया मेर जो वह सबको आज बताती हूँ मेरे नेत्र हैं कितने सुंदर […]

रक्तदान है महादान यह ‘प्रज्ञा शुक्ला’ कहती है, रक्ताल्पता को अक्सर जीवन में अपने सहती है… रक्तदान करने से कोई कमजोरी नहीं आती है, इतनी दुआएं मिलती हैं कि झोली भर जाती है… किसी की […]

थमी हुई जिंदगी थमे हुए पल रुकती, चुकती सांसें उंगलियों की पोरों से छूटते रिश्तों के रेशमी धागे ठंडी, बेजान दीवारों से टकराते जीने, मरने, हंसने और रोने के पल कितना कुछ लिख गया गुज़रता […]

सुखद हो जीवन हम सबका क्लेश पीड़ा दूर हो जाए स्वप्न हों साकार सभी के हर्ष से भरपूर हो जाएं मिलन के सुरों से बजे बांसुरी ये धरती हरी भरी हो जाए हों प्रेम से […]

सागर की लहरों में जैसे खो जाएगा, 2020 भी अलविदा हो जाएगा फ़िर नूतन-वर्ष मनाएंगे (2021) नूतन-वर्ष मनाने से पहले (2020) बीते वर्ष पर ग़ौर फरमाना है फ़िर नूतन-वर्ष मनाना है पिछला वर्ष कोरोना लाया […]

ज़रा सा मुस्कुरा देना नव वर्ष से पहले हर पीर भुला देना नव वर्ष से पहले ज़रा सा प्यार दे देना नव वर्ष से पहले टूटे तार जोड़ लेना नव वर्ष से पहले ना सोचो […]

पिता के चरण छुए जो, कभी गरीब नहीं होता माता के चरण छुए जो वो बदनसीब नहीं होता अग्रज के चरण छुए तो कभी गमगीन नहीं होता गुरु के पैरों को छूकर विद्या का वरदान […]

उदित सविता की, किरण सुनहरी उषा की आभा है कितनी प्यारी देती संदेश संसार को, करती तिमिर को दूर है धूप देती तपन लुटाती सर्द मौसम में सूर्य आभा सभी को सुहाती _____✍️गीता

हमें देखकर वो मुस्कुराने लगे, उन्हें देखकर हम शरमाने लगे जब मिली उनसे नज़र से नज़र हम हो गए बेखबर तो यह आलम हुआ…. वो धीरे-धीरे पास आने लगे हम घबरा कर दूर जाने लगे […]

न जाइये इस तरह छोड़कर राह में, हम तो मर जायेंगे आपकी चाह में। बात मत कीजिये और से इस तरह हम तो हो जायेंगे खाक फिर डाह में। आइये बैठिए नेह से देखिए, अन्यथा […]

बिना तुम्हारे इस ठंडक में बिस्तर से उठने का मन नहीं है, आ जाओ ना, चली आओ, उनके हाथ उनके साथ, ताजगी बनकर नाराजगी तजकर, अन्यथा उठने में हैं असहाय, आ जाओ ना चाय।

शुभकामनायें, मित्रवर नववर्ष की हैं आपको, आपके होंठों में खिलती नित नयी लाली मिले, गीत में संगीत में अंतस व बाहर भीत में, धर्म में भी कर्म में भी नीति में और रीति में नित […]

कविता -शिक्षा प्रेमी ———————– हे शिक्षा प्रेमी क्या बात कही तुमने सच्चाई संग प्रहार किया उतर गए कई नकाब, बेच रहे शिक्षा को, शहरों में खोलकर दुकान, फीस पर फीस, निकली जनता की खीस, बस्ते […]

गरीब को भी इंसान समझना है तुम्हें क्या पता कब कहाँ मिल जायें भगवान तुम्हें। भूख क्या होती है यह भी समझना है तुम्हें, इंसान हो इंसानियत को भी समझना है तुम्हें। मिली है बुद्धि […]

नुपुर तुम्हारी शोभा नहीं ज्ञान को अंगीकार करो शक्ति रूप तुम धर कर के पाश्विक प्रवृत्ति का संघार करो। सिर्फ सदन तक तेरी शोभा नहीं विशाल गगन तुम्हारा आँगन है अपने आकांक्षाओं को पंख लगा […]

एक बार यमराज आया धरती पर। सोच में पड़ गया मानव को देखकर।। क्या खुशनसीब हैं ये इन्सां। मरणशील को कारें कारें मैं अमर यमराज को केवल भैंसा।। देखा सोचा झल्लाना बैठ गया सिर ठोंककर। […]

क्यूँ इन्सान के चेहरे पर नकाब चढ़ा ऐसा की कोई अपना ही दगाबाज बन कर निकला । सूरत देखकर गैरो पे भरोसा करना अपने पैरों को जले तवे पर रखना अपनेपन से चढ़ा खुमार, कहाँ […]

कुछ दिनों से ज़िन्दगी “जादू” सी हो गई कुछ भी काम करने से पहले धूप चाहिए रात को तो धूप मिलती नहीं है तो एक कप टमाटर का सूप चाहिए काश किसी डब्बे में रख […]

जब तुम दूर होते हो तो ये एहसास होता है कर लूं आंख बंद अपनी, तू मेरे पास होता है आंख से अश्क आते हैं, मगर लब मुस्कुराते हैं अकेली जब मैं होती हूं, नभ […]

आंख से बह चली, अश्रु की बूंद कुछ कह चली तुम तो क्रोध कर गए, मैं सब कुछ सह चली नयनों से बह चली अश्रु बूंद कुछ कह चली तुम तो स्नेह में भीग उठे […]

चला ही जाएगा अब 2020, दिए बहुत ही जिसने टीस कई अपने बिछड़ गए किसी के सपने बिखर गए कोरोना का रोना ही रहा, किस-किस ने क्या-क्या न सहा किसी ने अपना जीवन खोया, कोई […]

नया वर्ष खुशियां लाए हम सब की हैं यही दुआएं लोग मांगे नए साल में कुछ नया मगर मुझे ए खुदा, मेरे पुराने दोस्त ही भाएं बस बना रहे उनका साथ, यही दुआ मांगू दिन […]

“रिश्तों में वफादारी और विश्वास” ************************************ गमों की बरसात होती रही अश्क रुखसार पर लुढ़कते रहे, हमने सोंचा ये फिक्र है तुम्हारी यही सोंचकर हम हर सितम सहते रहे…. एक सिसकती हुई रात ने समझा […]

खामोंश रहना जज्बात बयां करने से अच्छा है दिल की बातें दिल में छुपाना अच्छा है काश ! ये पहले ही समझ जाते हम, चलो वक्त ने समझा दिया ये भी अच्छा है….

छ: महीने बीत गये अब तक कुछ ना पता चला सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की या उन्हें मार डाला गया.. कैसा शासन है ? और कैसे यहाँ के लोग हैं मंगल ग्रह पर तो […]