दुनिया से कटा कश्मीर, बर्फ़ से अटा कश्मीर मौसम का हुआ पहाड़ों पर कहर कांपा श्रीनगर और कांपा, जम्मू-कश्मीर का हर शहर डल झील जम गई, उसकी रफ्तार थम गई। बद्रीनाथ के पथ पर , […]
दुनिया से कटा कश्मीर, बर्फ़ से अटा कश्मीर मौसम का हुआ पहाड़ों पर कहर कांपा श्रीनगर और कांपा, जम्मू-कश्मीर का हर शहर डल झील जम गई, उसकी रफ्तार थम गई। बद्रीनाथ के पथ पर , […]
सौ वर्ष पुराना मन्दिर टूटा चांदनी चौक में देखो लोगों का दिल टूटा चांदनी चौक में हनुमान जी की पूजा करने आते थे जो भक्तगण देखो उनका मन्दिर जाना छूटा चांदनी चौक में यदि सरकार […]
ठंडी-ठंडी पवन चल रही भीगा-भीगा सा मौसम है, सूर्य-देव ही कृपा करें अब निकला जाता दम है सर्दी है बर्फ़ सी ठंडी मौसम भी कितना नम है, सूर्य-देव से कहूं धूप भेज दें, यहां धूप […]
जय-जय शिव शंकर सर्दी हुई भयंकर जय-जय बम भोले, गिरने लगे हैं ओले आई तेजी से बरखा रानी, झमाझम बरसा पानी सर्दी से कांपे है तन, निकला सा जाता है दम ऐसे मौसम में हाए […]
बिरह भक्ति गीत- मेरे श्याम सावरिया | चुराकर दिल मेरा मुझे दीवाना बना दिया | सुनो मेरे श्याम सावरिया | सुनाकर मीठी बाते मुझे अपना बना दिया | सुनो मेरे श्याम सावरिया | नैनो मे […]
वो जगह छूटी वो लोग छूटे, वो मन की लगी कब के बुझ चुकी, वो चाहत बहुत दूर जा चुकी, वो गलियां अब बेगानी हो चुकी फिर भी नजरें उस ओर पडते ही, आँसू टपक […]
दूजे की भी मदद कर, अपना ही मत देख। ठिठुर रहे जो सड़क पर, उनको भी तो देख। उनको भी तो देख, खिला दे रोटी उनको, पहना दे रे वस्त्र, इतना सक्षम है तू तो। […]
मैं सड़क बेचारी ज्यों अबला नारी। पग पग दलित परम दुखियारी।। हाय मैं सड़क बेचारी काट दिया कोई कहीं पर और बहा दिया पानी घर का। भोजन के दोनें और छिलके सब फेंक रहे मेरे […]
बारिश में भीगते-भागते खिलखिलाते वो दो बच्चे ना सिर पर छतरी, ना तन पर कोई रेनकोट तेज़ हुई बारिश तो, बैठ गए लेकर एक दीवार की ओट चेहरे पर हंसी की फुलझड़ी बालों से टपक […]
एक व्यक्ति का करने गए थे अंतिम संस्कार कच्ची-पक्की बना रखी थी, ढह गई वह दीवार, ढह गई वह दीवार.. बेमौत पच्चीस मरे, यह क्या हो गया अरे ! लालच का ऐसा भी, क्या आलम […]
बारिश की बूंदें पड़ने लगी हैं, ठंडी हवाएं चलने लगी हैं। सड़कों में बैठे हुए बेघरों की जीवन की साँसें थमने लगी हैं। समाचार पत्रों में छपने लगा है ठंडक से मौतें होने लगी हैं। […]
यदि कोई युवक-युवती चाहें प्रेम विवाह करना तो उनके और परिवार के सुख की खातिर, कभी मना नहीं करना प्रेम-विवाह नहीं होगा तो माता-पिता की मर्जी वाले विवाह में, वह सुख महसूस नहीं होगा स्मृति […]
ये सतरंगी इन्द्रधनुष सात रंग से सज-संवर कर आया अति सुन्दर सतरंगी इन्द्रधनुष बरखा बरसे तब दिखता है, अम्बर में यह इन्द्रधनुष सप्तवर्ण यह इन्द्रधनुष मोहित सी हो गई मैं, उसकी छटा में खो गई […]
योजनाओ!! तुम धरातल तक पहुंच जाओ ना, गांव की सड़कों में खूब गड्ढे हो गए हैं। ऐसे झटके हैं कि बीमार या गर्भावस्था में ये गड्ढे समस्याओं के अड्डे हो गए हैं।
आँखों में खटकती, फ़िर दिल में कैसे रहती जद्दोजहद में गिर गिरकर मैं पग रखती खुद ही खुद से हारी कैसे कहूँ मैं हूँ सहधर्मिणी तुम्हारी । फ़िजाओ के रूख़ -सा मिज़ाज तेरा बदला फिर […]
बेरंग हुआ उसका जीवन, रूप बदलकर स्याह हुआ । लाल रंग से टुटा नाता, दूर सोलहो श्रृंगार हुआ ।। बिछोह हुआ उस प्रीतम से जिससे उसका ब्याह हुआ । जिसने पहनाया था चूङा जिससे शुरू […]
लेख:- ‘ब्राण्डेड बुखार’ आजकल हर व्यक्ति अपने निजी काम को बहुत ही अच्छे ढंग से करने मे विश्वास रखता है। सबसे ज्यादा ध्यान तो इस बात पर रहता है कि हम अच्छा खाये,पिये और पहने। […]
सुखी है आदमी कब जब उसे संतोष है, अन्यथा उलझन है मन में रोष है। जो मिला उस पर नहीं कुछ चैन है, इसलिए यह मन मेरा बेचैन है। गर मेरे मन में भरा संतोष […]
वो मुफ्त में पालक काट दिया करता है सब्जी के साथ मुफ्त में, धनिया मिर्ची भी बांट दिया करता है जेब से, मानो या न मानो वो सब्जी वाला दिल से, बहुत अमीर हुआ करता […]
कुछ दिन बचे हैं पूस के ये भी निकल हीं जाऐंगे। सर्दी है चारों ओर व्यापित कब तक हमें सताऐंगे।। क्या कंबल रजाई कफी है सर्दी भगाने के खातिर। तन मन की गर्मी काफी है […]
हुई है बारिश खूब झमाझम ठंडा-ठंडा हो गया है मौसम मेरे आंगन का एक पौधा है अभी जो थोड़ा सा छोटा पानी ना मिल पाया था उस पौधे को कुछ दिनों से आज बारिश की […]
मुकद्दर में ज़्यादा हम मानते नहीं हैं हाथों की लकीरों को पहचानते नहीं हैं भरोसा है हमें अपनी ही लगन पर बस उसे ही अपना ख़ुदा मानते हैं कभी कहीं हो जाए हमसे चूक कोई […]
इश्क़ और मुश्क में इश्क़ तो सभी जानें और मुश्क ?? इसका क्या अर्थ है मुश्क मतलब है कस्तूरी कस्तूरी हिरण की नाभि में है फिर भी इधर उधर भागे वो कहां से आई है […]
आज एक टूटी हुई चप्पल मिली उसे कूड़े के ढेर में, साथ ही एक पुरानी बनियान मिली। दो रुपये का सिक्का रख गई हाथ में, सड़क पर चलते एक धनवान मिली। खुशी का ठिकाना नहीं […]
न बोलिये बात ऐसी कि डर जायें हम, आपको देखकर चूक कर जायें हम। देखिए लाल आंखों से यूँ मत हमें, जिससे कि सचमुच सिहर जायें हम।
ठंडक की रात है, आसमान साफ है, तारे ठिठुर रहे हैं, लेकिन चाँद छिप गया है या ओढ़ कर सो गया है एक पक्ष के लिए। तारे अकेले रात काट रहे हैं, सुबह का इंतजार […]
यूँ अपने जज़्बात नुमाया क्यों करते हो ! मेरी ख़ातिर अश्क बहाया क्यों करते हो !! क़िस्मत के लिक्खे से मैं भी वाकिफ़ हूँ ! बातों से मुझको बहलाया क्यों करते हो !! जब साथ […]
आपकी बात ऐसे हम समझ न पायेंगे जरा सा खुल के कहो खुल के बता जायेंगे। दिल में तूफान है पर आग अब बुझी सी है, आप चाहो तो उसे और जला लायेंगे। ठंड है […]
रिमझिम-रिमझिम जल बरसा, आ गए काले बादल दिन में छाया घोर अंधेरा नभ में जैसे फैला काजल बादल की आंख से जल बरसा धूप को ये सारा जग तरसा सर्दी के मौसम में और भी […]
आज धूप नहीं है बादल छितरे हैं नील गगन में ठिठुर रहा है जीवन बर्फ भरी है आज पवन में। कैसे उठूँ रजाई से, यह ठंडक मुझे रुलाई दे कुछ गर्मी लाने की बातें अब […]
‘रेत पर लिख दो और लहरों के हवाले कर दो, आज इस साल की सब बन्द रिसालें कर दो.. इस नए साल में बाहर न कोई ढूंढे तुम्हे, मेरे रब तुम अगर दिलों को शिवाले […]
भूल जाओ बीता साल जो हुआ सो हुआ कुछ नई उम्मीद ले नया साल आ गया| नए रंग भरेंगे जीवन में कुछ नया करेंगे जीवन में खुशियों के थाल सजाएंगे बीती बातें बिसराऐगे हम नई […]
वही सागर का तट बालुकामय सतह। जहाँ आनन्द मनाया कुछ इस तरह।। खाया -खेला नाचा-गया। गीले बालुका पर अंगूठा घुमाया। कुछ इस तरह।। अंकित हुआ बीस सौ बीस। कितने दुखो के भरे हैं टीश।। सागर […]
खुशहाल रहे हर कोई कर सकें तुम्हारा बन्दन। महक उठे घर आँगन, हे नववर्ष! तुम्हारा अभिनन्दन।। दमक उठे जीवन जिससे वो मैं मलयज, गंधसार बनूँ ! उपवास करे जो रब का उस व्रती की मैं […]
1. हम जमाने से बेहद सताए हुए हैं मगर अपनी इज्जत बचाए हुए हैं मार डालेगा दुश्मन जमाना तेरा इसलिए तुझको दिल में छुपाए हुए हैं भले जुल्म कर ले ये सारा जमाना मगर फिर […]
1. जो कल था वही आज हूं थोड़ा खफा हूं थोड़ा नाराज हूं 2. जिस दिन किस्मत के सितारे बदल जायेंगे देखते ही देखते नजारे बदल जाएंगे नाव क्या चीज है खरीद लेंगे समुंदर बस […]
नववर्ष 2021 की जय श्री राम जय श्री कृष्ण 🙏🙏🚩🕉 और सप्रेम शुभकामनाओं के साथ आपके लिए – अब बीत गया दुख भरा समय फिर नया सवेरा आया है. कोरोना का गम भूल जाओ संदेश […]
हे नव वर्ष ! तुम्हारा स्वागत ना कर पाई मैं ! तुम्हारे आगमन के उपलक्ष्य में हजारों तैयारियां करना चाहती थी पर कर ना सकी ! तुम्हें समेटना चाहती थी प्रेम से, दुलार देना चाहती […]
समय की धीर लहरें बढ़े ही जा रही हैं, खुद में बीते दिनों को समाते जा रही हैं। जा रहा यह बरस अब वक्त के इस जलधि में, आ रहा नव-बरस है आज बिंदास गति […]
सन् 2020 को विदा करते हैं, दुःखो को खुद से जुदा करते हैं। खुशियाँ का खुल के आगमन, हर इक से चलो वफ़ा करते हैं। सन् 2020…… वक्त कट गया मुश्किल था जो, इसे भूल […]
सूर्य उदित हुए सुबह हुई बड़ी ठंडी सी सुबह थी सूरज ने भी कोहरे की चादर ओढ़ रखी थी वक्त का पता ही ना चला कब सुबह हुई कब दिन ढ़ला सुबह, दोपहर सांझ सब […]
अपनी त्रुटियों में करके सुधार उज्जवल बनाओ नया साल। आलस्य व नकारात्मकता को हे मानव जीवन से निकाल।। समय का न दुरपयोग कर यह पर्याप्त है रख ख्याल। स्वयं को नियंत्रित करके सहजता से जीवन […]
नए साल ने दस्तक दी है आओ इसको हग कर लें । मन तन वचन ध्यान से अपना सारा जग कर ले। बीत गया सो बीत गया कुछ सीख गए कुछ सिखा गया । कल […]
कालचक्र ने लिखा था एक रोज़ रेत पर उंगलियों के पोरों से, वह हस्तलेख मिट गया सागर की लहरों के थपेड़ों से… स्वागत है कर जोड़कर २०२१, खूँटी पर अब टाँग दी वैमनस्यता भरी कमीज… […]
नववर्ष आया है, झूमो, नामों सब खुशियाँ मनाओ, दहशत भरी 2020 की यादें को अब अलविदा कह जाओ | नई उमंगे, नई उम्मीदों के साथ अपना पग खुशहाली की ओर बढ़ाओ | बुरे वक्त में […]
उठती रहेगी इक लहर सागर से निरंतर जो समाहित कर लेगी हर पीड़ा जो दी बीते वर्ष ने हर बार होगी इक नईं हिलोर जो देगी हौंसला सतत् नवीन जीवन जीने की नववर्ष में।
हर वक्त बदलती जिन्दगी, हर वक़्त बदलती ग्रहों की चाल है, अंकों के बदलने से कुछ नहीं होगा, बदलेगें जिस दिन हम उस दिन नया साल है
कविता -चैत्र मास ——————– शिक्षा समाज देश के सजग प्रहरी, मौन धारण कर के बैठे हो, बिगड़ रही नव पीढ़ी अपनी चुप्पी तोड़ो आवाज उठाओ, बच्चों को इतिहास बताओ, पता आपको यह त्यौहार नहीं अपना […]
नववर्ष आया है झूमो नाचो सब खुशियाँ मनाओ, दहशत भरी 2020 की यादों को अब अलविदा कह जाओ | नई उमंगे, नई उम्मीदों के साथ अपना पग खुशहाली की ओर बढ़ाओ, बुरे वक्त में भी […]
अंधकार का जो साया था, तिमिर घनेरा जो छाया था, निज निलयों में बंद पड़े थे, रोशन दीपक मंद पड़े थे। निज श्वांस पे पहरा जारी, अंदर हीं रहना लाचारी , साल […]
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