कविता- अपना इलाहाबाद ———————————– दिन भर टहल रहे थे, पार्क सहित संगम में, देख दशा हम शोक में डूबे, अपना इलाहाबाद है ऐसा| एक तरफ तो न्यायालय है, एक तरफ संगम है, एक तरफ तो […]
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कविता- अपना इलाहाबाद ———————————– दिन भर टहल रहे थे, पार्क सहित संगम में, देख दशा हम शोक में डूबे, अपना इलाहाबाद है ऐसा| एक तरफ तो न्यायालय है, एक तरफ संगम है, एक तरफ तो […]
कागज़ की कश्ती चलती थी कागज़ का जहाज़ भी उड़ता था, थे अमीर बहुत तब हम, वो बचपन कितना, अच्छा था सखियों संग ,उपवन में जाकर आंख-मिचौली खेली थी, स्वादिष्ट बहुत लगता था वो आम […]
करेला हूँ मगर इतना भी कड़वा मत समझना तुम, जरा सा भून लेना फिर नमक के साथ लेना तुम। हवा की कुछ नहीं गलती उसे क्यों दोष देते हो, जरा मेहनत करो बहती हवा को […]
जिन्दगी में भले ही हमें आलसी लोग काफी दिखें, पर कई इस तरह के हैं कर्मठ अंत तक काम करते दिखे। एक काकी है दुर्बल मगर ऊंचे-नीचे पहाड़ी शहर में, सिर से ढोती है भारी […]
धर्म ईमान -इन्साफ को मानकर आदमी बनकर तुम जगमगाते रहो त्याग से ही मनुज बन सका देवता देवता बन सबों में समाते रहो || न घबराओ तुम संघर्षों से कभी तूफानों में भी उगता तारा […]
उज्ज्वला का सिलिंडर सबको मिला, सब खुश थे, मगर वो रात भर सो न पाई। यह सोचकर कि – कोई मेरा नाम भी लिस्ट में जोड़ देता एक वोट तो मैं भी थी उसकी आंखें […]
उस गरीब माँ का अब अंत्योदय राशनकार्ड से नाम कट गया है, क्योंकि उसका बेटा पिछले महीने अठारह बरस का हो गया है, औऱ उसने आठ सौ का मोबाइल भी खरीद लिया है। डेरी से […]
वह पत्थर तोड़ती थी पर दिल की कोमल थी अपने सीने से लगाकर बच्चों को रखती थी भूँख जब लगती थी उसको तो बासी रोटियाँ पोटली से निकाल कर खा लेती थी पर अपने बच्चों […]
तुम्हारे लिए ही तो गजल, नज्में लिखती हूँ मैं मैं तो कुरान में भी पढ़ती हूँ तुम्हें | तुम्हें खो देने का खयाल इतना तड़पा देता है मुझे रात को जब भी आँख खुलती है […]
भोजपुरी कविता- बचावल ना गइल | होत रहे ज़ोर सरेआम अबला केहु मान बचावल ना गइल | ले लिहस कातिल जान केहु पानी आँख बहावल ना गइल | जात धरम देख करे राजनित, ई केवन […]
नजारा गजब दिखा किसी ऊँचे रसूख की पार्टी में, बचा हुआ खाना सामने के कूड़ादान में फैंका गया, कुछ उसके अंदर पड़ा कुछ सड़क गिरा, फिर जानवरों द्वारा इधर उधर फेंटा गया, सुबह वहां पर […]
करीब पांच बरस के राज के आंखों में उस वक्त खुशी का ठिकाना नहीं दिख रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे उस कूड़े के ढेर में कोई खजाना हाथ लग गया था। थैली लेकर […]
स्वयं टूटकर स्वयं जुडूँगा सब कुछ अपने आप करूँगा। विगत दिनों जो भूलें की हैं उनका पश्चाताप करूँगा।। मेरी त्रुटि थी किया भरोसा मैंने अपने यारों पर। समझ न पाया पग रख बैठा मैं जलते […]
जब याद तुम्हारी आती है दिल यादों में खो जाता है आँखों में उमड़ते हैं बादल जी मेरा घुट घुट जाता है || प्यार की सूनी गलियों में हर वक्त भटकता रहता हूँ जिन राहों […]
आज मन में विचित्र-सा खयाल आया मेरा मन दुःखा और भर आया क्यों सदियों से प्रेंम की परीक्षा होती है क्यों पुरुष के पीछे स्त्री रोती है होती क्यों है हमेशा एकतरफा मोहब्बत क्यों कृष्ण […]
पापा! दिवाली आने वाली है इस बार धनतेरस में क्या लोगे? हवेली वाले दोस्त के पापा उसके लिए गियर वाली साईकल ले रहे हैं। पड़ौस के दोस्त के पप्पा, उसके लिए बिग कार ले रहे […]
भावना सद्भावना ( 12-मात्रा ) स्वच्छंद वितान में मानवीय विधान में शब्द की झंकार में गीत मधुर सुहावना भावना सद्भावना ..। तन में दिव्य शक्ति हो दिल में प्रेम भक्ति हो सदा मित्र के भाव […]
गलती उसकी कुछ नहीं थी कुदरत की करामात थी, बाजार में कालिया के इस बार बारह बच्चे हो गए। अब उनकी परवरिश में लग गई, सभी को दूध पिलाना, उतनों के लायक दूध बने ऐसा […]
ले लो ना खीरा ले लो, चटपटा नमक लगा खीरा, मसालेदार चना ले लो, ले लो जी, गुब्बारे ले लो, रंग बिरंगे गुब्बारे। आप लोगे हमारी मजबूरी का समाधान होगा, आप खीरा, चना लेंगे, हमारी […]
लड़के!! 20 नम्बर की चाबी ले आ, जा उस गाड़ी के नट खोल, टायर में हवा भर, जा मोबिल ऑयल ले आ, उस गाड़ी में ग्रीस कर ले। औजार निकाल, औजार संभाल, जा ग्राहकों को […]
इस गली में नजारा रोज दिखता है, प्लास्टिक की थैलियों में भर कर फैंका हुआ दाल-चावल हर रोज दिखता है। खुशबू आती है, सोचता है गरीब मन, खुदा भी किस तरह की किस्मत लिखता है, […]
आहटें आती रहें, सदा उनके आने की सदाएं भी सुनती रहें, सदा उनके गाने की मैं नज़्म लिखती जा रही थी, फ़कत पन्नों पर, यही तो बात है लफ़्ज़ों के मुस्कुराने की.. *****✍️गीता
दुनियां में किसकी मौत और किसकी जिन्दगी है जिन्दगी ही मौत और मौत जिन्दगी जीवन मिला तो तय है ,मरना भी पड़ेगा हम सबको एक राह ,गुजरना ही पड़ेगा || जीवन तो खाना -वदोश है […]
हार हुई आज नारी की, चढ़ी भेंट दुराचारी की सारे-आम कत्ल कर गया, ना आई उसे कुछ दया बेहया घूम वो रहा है, समाज क्यूं सो रहा है मानवता मर रही है, दानवता फली फूलती, […]
18-हँसना मेरी मजबूरी ( मुक्त छंद 16 मात्रा ) फूलों में आज सुगंध नहीं खुशियों का कोई भाव नहीं न चेहरे पर मुस्कान कहीं पर हँसना मेरी मजबूरी..। विनय रूप कायरता बनती आंखों से जलधारा […]
प्रदूषण की मार, सह रहा संसार रोको इस प्रदूषण को मनुज, वरना फिर पछताओगे दूषित होती रही धरा यूं ही तो कैसे रह पाओगे वायु प्रदूषण यूं ही होता रहा तो, शुद्ध पवन की सांस […]
तेरा मेरे लिए होना, उतना जरूरी, जितना जरूरी , ज़हान को हवा पानी है, तू अंजाम है, मेरे इश्क का , तू सुकून है , मेरी बैचेनी का, कम शब्द में कहुं तो दिल की […]
देवी देवता करते हैं गंगा का गुणगान इसके घाटों पर बसे हैं ,सारे पावन धाम गंगा गरिमा देश की ,शिव जी का वरदान गोमुख से रत्नाकर तक ,है गंगा का विस्तार भागीरथी भी इन्हे ,कहता […]
कविता- सभी सो रहे —————————- सभी सो रहे हैं, घरों में पड़े हैं| हम ही हैं दीवाने, अभी जग रहे हैं| बड़ा दुख है हमको जो जग रहे हैं। दिखे ना किनारा, चले जा रहे […]
आज कथनी का कर्म से कोई मेल नहीं है कहने को बातें ऊँची करने को कुछ नहीं है गीता रामायण की धरती पर हिंसा का संगीत चढ़ा है कैसे बचेगी मानवता दानवता का दल बहुत […]
जल रहा है आज रावण राम जी के वाण से, उड़ रही हैं खूब लपटें देखता जग शान से। गा रहे हैं जोश से सब राम राघव की बड़ाई अबकी ऐसा वाण मारो दूर भागे […]
– ** कलयुग का रावण -** ********************* हे राम रमापति अजर अमर रावण से ठाना महासमर ले आए जग की जननी को अपनी प्रिय अर्धांगिनी को ..। वह रावण की मर्यादा थी नहीं नजर लगा […]
लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां हाई रे मेरी फ्वां फ्वां नोना बेरोजगार छन अभी नि आई कालो धन लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां मंत्री जी की गाडी […]
विजयादशमी का यह पावन पर्व वर्षों से समाज को सच्चाई का सबक सिखाऐ पर आज यह एक प्रश्न उठाये आज प्रतयंजा कौन चढ़ाऐ कौन बाण आज छुड़ाए इस युग में कोई काबिल नहीं जो रावण […]
दशहरा का पर्व है आया अच्छाई ने बुराई को हराया विजय गीत सब मिल गाओ कुछ ऐसा पर्व मनाओ || सोंचो तरक्की के जुनून में हम खुद से हो गए पराए हमको लगे जकड़ने ,ख्वाहिशों […]
61-नहीं मरेगा-रावण अहम भाव में बसता हूं मैं कभी न मरता रावण हूं मैं स्वर्ण मृग मारीच बनाकर सीता को भी छलता हूं मैं..। किसे नहीं है खतरा सोचो केवल अपनी सोच रहे हो रावण […]
कविता- रावण हूं ———————- रावण हूं, राम नही , राक्षस हूं, भगवान नही, अब की बार दशहरे में, पहले खुद राम बनो फिर आग लगाना मुझे| रघुकुल की पता होगी वे सत्य वचन पर, अटल […]
61-नहीं मरेगा-रावण अहम भाव में बसता हूं मैं कभी न मरता रावण हूं मैं स्वर्ण मृग मारीच बनाकर सीता को भी छलता हूं मैं..। किसे नहीं है खतरा सोचो केवल अपनी सोच रहे हो रावण […]
दशहरे का रावण सबसे पूछ रहा है हर वर्ष देखा है मैंने स्वयं को दशहरे पर श्रीराम के हाथों से जलते हुये, सभी को बुराई पर अच्छाई की जीत बताते हुये। उस लंकेश को तो […]
धनुष उठा श्री राम का, रावण की अब खैर नहीं चलो आज विजय की बात करें, हो कहीं किसी से,बैर नहीं त्रेता युग में रावण ने, श्री राम को ललकारा था सीता माता का हरण […]
बाल श्रम पर कविता **************** यही तो बात हुई, कलम,-दवात नहीं, न उजाला है कहीं, जूठे बर्तन हैं पड़े, नन्हें हाथों में मेरे, यहीं से सच कहूं तो जिंदगी की मेरी, सच्ची शुरुआत हुई। इनमें […]
निरंतर चलते रहता है दौड़ते रहता है समय, वो देखो भाग रहा है समय दौड़ रहा है समय। हम कितना ही चाहें नहीं रोक सकते उसकी गति को, वक्त की पटरी पर हमें दौड़ना पड़ता […]
बे-कार हूं बे-रोजगार नहीं आदतों का शिकार नहीं शौक से नहीं परहेज मुझे तेरी तरह शौक का गुलाम नहीं इक सुई का किया आविष्कार नहीं उसे हर नई खोज की दरकार है मेरी जरूरतों का […]
भोजपुरी देवी पचरा गीत- खपरवा के धार | काली मईया करबे ना हो पूजनवा तोहार | तोहके देइब हम खपरवा के धार | काली बा सुरतीया बाकी बाडु तू दयालु | रुपवा भयावह माई कमवा […]
*****हास्य – रचना***** कछुए और खरगोश की, पांच मील की लग गई रेस तीन मील पर खरगोश ने देखा, कछुआ तो अभी दूर बहुत है थोड़ा सा आराम करूं ना…ना वो सोया नहीं ये पुरानी […]
रोज है सुनने में यह आता गर हेल्मेट होता बच जाता, फिर भी बाइक पर चलने पर हेल्मेट को टांगे रहते हैं। दुर्घटना हो जाने पर फिर सारे लोग यही कहते हैं गर हेल्मेट होता […]
अजीब आदत है अपने आप से, मिल लेता हूँ कभी कभी सच है ! अब वो दौर नही रहा जहाँ फुरसत हुआ करती थी अब तो खुद ही में उलझ गए है फिर भी फुरसत […]
अधर्म का हो खत्म राज धर्म को विजय मिले, धनुष उठाएं रामचंद्र विश्व को निर्भय मिले। दैत्य दम्भ खत्म हो अहं की बात दूर हो, घमण्ड भूमि पर गिरे, बचे जो बेकसूर हो। अशिष्टता समाप्त […]
श्रीराम को आदर्श मानते हो ना, तो चलो उनके आदर्शों पर, गुरु का सम्मान, माता की इच्छा और पिता के वचन की रक्षा को राजगद्दी का त्याग, चौदह बरस तक वनवास ग्रहण करना। राक्षसों का […]
ओ युवा!! भारत के मेरे, राम बन जा आज तू, खुद हरा भीतर का रावण, धर्म धनु ले हाथ तू। बढ़ रहे हैं नित दशानन हम जला पुतला रहे हैं, जल गया रावण समझ कर […]
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